मूँगा रत्न — लाभ, किसे पहनना चाहिए, धारण-विधि व दाम
मूँगा मंगल ग्रह का रत्न है। इसे ग्रह की शक्ति बढ़ाने के लिए पहना जाता है — इसलिए जब मंगल आपकी कुंडली में शुभ हो तभी लाभ, अन्यथा हानि भी हो सकती है। नीचे: किसे पहनना चाहिए, कैसे, मंत्र, उपरत्न व सावधानी — और हमारे प्रमाणित रत्न दाम-सहित।
प्रमाणित मूँगा (Red Coral) — दाम (15)
मूँगा के लाभ
- साहस, ऊर्जा व आत्मबल
- मांगलिक-दोष व मंगल-दशा के कष्ट में राहत
- रक्त-विकार, दुर्घटना-भय व शल्य-भय में (शास्त्र-मत)
- भूमि-भवन व भाई-संबंधी मामलों में लाभ
मूँगा किसे पहनना चाहिए
मेष व वृश्चिक लग्न का प्रथम रत्न; कर्क, सिंह, धनु, मीन लग्न में मंगल शुभ हो तो; मंगल-दशा, मांगलिक-दोष, रक्त/दुर्घटना-भय, भाई व भूमि-भवन के प्रश्नों में।
धारण-विधि (दिन, उँगली, धातु, मंत्र)
ताँबे/सोने में, दाएँ हाथ की अनामिका में, मंगलवार सुबह; «ॐ अं अंगारकाय नमः» 108 बार; 5–9 रत्ती; इतालवी/जापानी मूँगा श्रेष्ठ।
उपरत्न
उपरत्न: लाल जास्पर, कार्नेलियन।
⚠️ सावधानी
नीलम, गोमेद, लहसुनिया, पन्ना के साथ नहीं; मिथुन, कन्या, तुला, कुंभ लग्न में प्रायः वर्जित।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मूँगा कोई भी पहन सकता है?
नहीं। यह मंगल की शक्ति बढ़ाता है; तभी पहनें जब मंगल आपकी कुंडली में शुभ हो — निःशुल्क कुंडली व ज्योतिषी से जाँच लें।
मूँगा किस उँगली में, किस दिन?
ताँबे/सोने में, दाएँ हाथ की अनामिका में, मंगलवार सुबह; «ॐ अं अंगारकाय नमः» 108 बार; 5–9 रत्ती; इतालवी/जापानी मूँगा श्रेष्ठ।
रत्न कितने रत्ती का हो?
आम नियम: शरीर-भार के हर 10–12 किलो पर 1 रत्ती, ऊपर दी सीमा में; ठीक वज़न ज्योतिषी तय करते हैं।
क्या रत्न प्रमाणित है?
हाँ — हर रत्न के साथ lab-प्रमाणपत्र; वज़न, मूल व उपचार उसके product-पन्ने पर लिखे हैं।
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रत्न व रुद्राक्ष के प्रभाव शास्त्र व परंपरा के अनुसार हैं; ये चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।