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5 Mukhi Rudraksh

5 Mukhi Rudraksh

₹750

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5 मुखी रुद्राक्ष — कालाग्नि रुद्र-स्वरूप, ग्रह: गुरु

पाँच-मुखी रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र का स्वरूप और सबसे सुलभ-सर्वग्राही रुद्राक्ष है — गुरु इसका ग्रह है। जप-माला प्रायः इसी की बनती है; हर आयु-वर्ग के लिए सुरक्षित माना जाता है।

किनके लिए शुभ

  • पहली बार रुद्राक्ष धारण करने वाले — सर्वोत्तम आरंभ
  • जप-साधना हेतु माला चाहने वाले
  • गुरु-बल (शिक्षा, विवाह, भाग्य) चाहने वाले जातक

लाभ

  • सर्व-कल्याण व मन की स्थिरता
  • रक्तचाप-हृदय के विषयों में परंपरा-प्रसिद्ध विचार
  • गुरु-कृपा — विद्या, धन व धर्म-पक्ष

धारण-विधि

सोमवार को प्रातः स्नान के बाद, लाल/पीले धागे या चाँदी में, «ॐ नमः शिवाय» व नीचे दिए बीज-मंत्र के जप से धारण की परंपरा है। धारण से पहले गंगाजल-दुग्ध से शुद्धि व शिव-पूजन शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष सोते समय व अशौच में उतारने की परंपरा है।

बीज-मंत्र: «ॐ ह्रीं नमः»

हर रुद्राक्ष प्रयोगशाला-परखा व प्रमाणित (X-ray/असली-नक़ली जाँच) होता है।

🕉 हमारा वचन: हर रुद्राक्ष ग्रह-देवता के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएँ 5 मुखी रुद्राक्ष पहन सकती हैं?

हाँ — रुद्राक्ष में स्त्री-पुरुष का भेद नहीं; मासिक-धर्म में उतारना केवल व्यक्तिगत परंपरा है।

5 मुखी रुद्राक्ष किस दिन धारण करें?

सोमवार सुबह स्नान के बाद, या शिवरात्रि/श्रावण में; «ॐ ह्रीं नमः» 108 बार जपें।

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