गोमेद राहु का रत्न है — विदेश, तकनीक, राजनीति और आकस्मिक उत्थान का कारक। कुंडली में राहु शुभ-स्थित होकर सहयोग माँगे, या राहु महादशा-अंतर्दशा में भ्रम-भय बढ़े, तो गोमेद राहु-ऊर्जा को दिशा देकर स्थिरता लाता है। कालसर्प व ग्रहण-दोष की शांति-विधियों में भी परंपरा से इसका विचार होता है।
शनिवार को, चाँदी/अष्टधातु में, दाएँ हाथ की मध्यमा में धारण की परंपरा है। अभिमंत्रण «ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः» से। भार प्रायः सवा 5 से सवा 7 रत्ती (कुंडली-अनुसार)। सूर्य-चंद्र के रत्नों के साथ प्रायः नहीं पहना जाता।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
विस्तार से पढ़ें: राहु ग्रह · कालसर्प दोष — भेद व परिहार
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नहीं। यह राहु की शक्ति बढ़ाता है; तभी पहनें जब राहु आपकी कुंडली में शुभ हो — निःशुल्क कुंडली व ज्योतिषी से जाँच लें।
चाँदी/पंचधातु में, दाएँ हाथ की मध्यमा में, शनिवार रात्रि; «ॐ रां राहवे नमः» 108 बार; 5–7 रत्ती।