ओपल शुक्र का रत्न है — प्रेम, विवाह, कला, सौंदर्य और भोग-वैभव का कारक; इसे हीरे का श्रेष्ठ उपरत्न माना जाता है। कुंडली में शुक्र निर्बल या नीच (कन्या) हो — दांपत्य-सुख, कला-यश या वैभव में बाधा — तो ओपल शुक्र-बल बढ़ाने का किफ़ायती और प्रचलित मार्ग है।
शुक्रवार को शुक्ल-पक्ष में, चाँदी/श्वेत-सोने में, दाएँ हाथ की अनामिका या मध्यमा में धारण की परंपरा है। अभिमंत्रण «ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः» से। भार प्रायः सवा 5 से सवा 7 रत्ती (कुंडली-अनुसार)।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
विस्तार से पढ़ें: शुक्र ग्रह — कारकत्व, दशा-फल व उपाय
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