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OPAL

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ओपल (Opal) — शुक्र का रत्न

ओपल शुक्र का रत्न है — प्रेम, विवाह, कला, सौंदर्य और भोग-वैभव का कारक; इसे हीरे का श्रेष्ठ उपरत्न माना जाता है। कुंडली में शुक्र निर्बल या नीच (कन्या) हो — दांपत्य-सुख, कला-यश या वैभव में बाधा — तो ओपल शुक्र-बल बढ़ाने का किफ़ायती और प्रचलित मार्ग है।

किनके लिए शुभ

  • वृषभ व तुला लग्न/राशि के जातक — शुक्र इनका स्वामी है
  • मकर-कुंभ लग्न — शुक्र यहाँ योगकारक माना जाता है
  • शुक्र महादशा-अंतर्दशा वाले; विवाह-दांपत्य के विषयों वाले जातक
  • कला, फ़ैशन, सौंदर्य, मनोरंजन व विलास-उद्योगों से जुड़े (कुंडली-परामर्श से)

लाभ

  • दांपत्य-माधुर्य व सम्बन्धों में आकर्षण का परंपरा-विचार
  • कला-सृजन, सौंदर्य-बोध और सामाजिक आकर्षण में निखार
  • वैभव-सुख-सुविधाओं के योगों को बल
  • वीर्य-ओज व प्रजनन-विषयों में परंपरागत विचार

धारण-विधि

शुक्रवार को शुक्ल-पक्ष में, चाँदी/श्वेत-सोने में, दाएँ हाथ की अनामिका या मध्यमा में धारण की परंपरा है। अभिमंत्रण «ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः» से। भार प्रायः सवा 5 से सवा 7 रत्ती (कुंडली-अनुसार)।

🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।

विस्तार से पढ़ें: शुक्र ग्रह — कारकत्व, दशा-फल व उपाय

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