माणिक्य नवरत्नों का राजा और सूर्य का रत्न है — आत्मविश्वास, यश, नेतृत्व और पिता-पक्ष का कारक। कुंडली में सूर्य शुभ होकर निर्बल हो, तो माणिक्य उसका तेज जगाकर व्यक्तित्व और पद-प्रतिष्ठा को बल देता है। सरकारी क्षेत्र, प्रशासन और नेतृत्व-भूमिकाओं के आकांक्षियों में इसका विशेष विचार होता है।
रविवार को शुक्ल-पक्ष में, सोने/ताँबे में, दाएँ हाथ की अनामिका में धारण की परंपरा है। अभिमंत्रण «ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः» से। भार प्रायः सवा 3 से सवा 6 रत्ती (कुंडली-अनुसार)। ⚠️ सूर्य के शत्रु-ग्रहों (शनि, शुक्र, राहु) के रत्नों के साथ प्रायः नहीं पहना जाता।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
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