पुखराज देव-गुरु बृहस्पति का रत्न है — ज्ञान, धन, विवाह, संतान और भाग्य का कारक। कुंडली में गुरु शुभ होकर निर्बल हो, या धनु/मीन लग्न-राशि हो, तो पुखराज गुरु का बल बढ़ाकर इन क्षेत्रों में स्थिरता लाता है। विवाह-विलंब और शिक्षा-बाधा में परंपरा से इसका विशेष विचार होता है।
गुरुवार को शुक्ल-पक्ष में, सोने (या पंचधातु) में, दाएँ हाथ की तर्जनी में धारण की परंपरा है। धारण से पूर्व «ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः» के जप से अभिमंत्रण किया जाता है। भार प्रायः सवा 5 से सवा 7 रत्ती (कुंडली-अनुसार)।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
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