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क़तर में मकर संक्रांति 2027: शुक्रवार, 15 जनवरी — शहर-वार पूजा-समय

क़तर में मकर संक्रांति 2027: शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 (दोहा)
पुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी): 6:21 AM – 5:05 PM AST
भारत के दिन ही। 2027 में मकर संक्रांति भारत और दोहा में शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को है।

मकर संक्रांति 2027 — दोहा

शहरतारीखपुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी)तिथि (स्थानीय)
दोहा
Arabia Standard Time (AST)
शुक्रवार, 15 जनवरी 20276:21 AM – 5:05 PM AST14 जनवरी, 11:29 AM → 15 जनवरी, 11:44 AM AST

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

मकर संक्रांति की तारीख कैसे तय होती है

सूर्य का मकर (निरयण) में प्रवेश — सौर घटना, इसलिए तारीख लगभग सब जगह एक; मध्यरात्रि के पास हो तो बदल सकती है।

महत्व

उत्तरायण देवताओं का दिन माना गया है — भीष्म पितामह ने शर-शय्या पर उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी और मकर संक्रांति के बाद देह छोड़ी। इस दिन का स्नान-दान (विशेषकर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल) अक्षय-फल देता है।

पुण्यकाल: संक्रांति के क्षण से उस दिन सूर्यास्त तक (या 16 घटी); संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो अगला दिन पर्व-दिन। इसीलिए कभी 14 और कभी 15 जनवरी — ऊपर दी तिथि इंजन से है। महापुण्यकाल संक्रांति के तुरंत बाद की लगभग 2 घटी (48 मिनट)।

स्त्रियों की रीत: तिल-गुड़ बाँटना («तिळगुळ घ्या, गोड बोला»), हल्दी-कुमकुम, सुहागिनों को बायना/वाण देना, नई बहू-बच्चे को «बोरन्हाण»; बिहार-पूर्वांचल में दही-चूड़ा-तिलकुट, घर की बड़ी स्त्री सबको तिल देकर आशीर्वाद।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय (ऊपर समय) पर नदी-तालाब में या घर पर पानी में तिल व गंगाजल डालकर स्नान — «तिल-स्नान»; नए/साफ़ कपड़े।
  2. उगते सूर्य को ताँबे के लोटे से जल-तिल-लाल फूल का अर्घ्य — «ॐ घृणि सूर्याय नमः» या आदित्य-हृदय; उत्तरायण-सूर्य को प्रणाम।
  3. घर के मंदिर में सूर्य-विष्णु की पूजा; तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी (चावल-उड़द/मूँग की) का भोग; तुलसी-दल।
  4. दान (पुण्यकाल में, सूर्यास्त से पहले): काले तिल, गुड़, खिचड़ी का कच्चा सामान (चावल-दाल-घी-नमक-हल्दी), कंबल/ऊनी वस्त्र, घी, तेल — ब्राह्मण, ज़रूरतमंद, गौशाला को; «तिल-दान» इस दिन का सबसे बड़ा दान।
  5. स्त्रियाँ: हल्दी-कुमकुम, सुहागिनों को तिल-गुड़ व बायना (वाण — 13 वस्तुएँ: बर्तन/कंघी/चूड़ी आदि); घर की बड़ी स्त्री सबको तिल देकर आशीर्वाद; नई बहू/शिशु का बोरन्हाण (बेर-तिल-मुरमुरे की वर्षा)।
  6. दिन में पतंग (गुजरात-राजस्थान-उत्तर प्रदेश), खेत में नई फ़सल की पूजा, गाय-बैलों को तिल-गुड़; शाम को खिचड़ी का भोजन परिवार के साथ।
  7. एक दिन पहले लोहड़ी (पंजाब-हरियाणा): रात में आग जलाकर तिल-रेवड़ी-मूँगफली-मक्का की आहुति, परिक्रमा, «सुंदर मुंदरिये» गीत, नई बहू/नवजात के घर विशेष।
  8. पोंगल (तमिलनाडु): भोगी (पहले दिन पुराना सामान जलाना) → थाई पोंगल (नए बर्तन में दूध-चावल उफानना — «पोंगलो पोंगल!») → माट्टु पोंगल (गाय-बैल) → कानुम पोंगल (परिवार-मिलन)।

प्रश्नोत्तर

क्या मकर संक्रांति 2027 क़तर और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — शुक्रवार, 15 जनवरी 2027।

दोहा में मकर संक्रांति 2027 का पूजा-समय?

पुण्य काल (सूर्योदय से — संक्रांति रात में थी): 6:21 AM से 5:05 PM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (दोहा के लिए Arabia Standard Time (AST))।

तिल-गुड़ ही क्यों?

तिल और गुड़ ठंड में गर्मी और शक्ति देते हैं (आयुर्वेद); कथा में शनि ने पिता सूर्य का स्वागत तिल-गुड़ से किया; तिल का दान पितरों-मोक्ष से जुड़ा है — इसलिए खाओ, बाँटो, दान करो।

लोहड़ी, पोंगल, बिहू और मकर संक्रांति एक ही हैं?

सब सूर्य के मकर-प्रवेश और नई फ़सल के उत्सव हैं — लोहड़ी एक रात पहले (पंजाब), पोंगल चार दिन (तमिलनाडु), माघ बिहू (असम), उत्तरायण (गुजरात), खिचड़ी (यूपी-बिहार) — नाम और पकवान अलग, सूर्य एक।

खरमास क्या है और संक्रांति से क्यों खुलता है?

सूर्य के धनु राशि में रहने का महीना (दिसंबर-मध्य से मकर संक्रांति तक) खरमास/मलमास — विवाह-गृहप्रवेश वर्जित; मकर-प्रवेश से उत्तरायण और शुभ कार्य फिर शुरू। विवाह-तिथियाँ मुहूर्त-पन्ने पर।

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