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सऊदी अरब में गुरु पूर्णिमा 2027: रविवार, 18 जुलाई — शहर-वार पूजा-समय

सऊदी अरब में गुरु पूर्णिमा 2027: रविवार, 18 जुलाई 2027 (रियाद)
पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:15 AM – 10:39 AM AST
भारत के दिन ही। 2027 में गुरु पूर्णिमा भारत और सऊदी अरब के सब शहरों में रविवार, 18 जुलाई 2027 को है।

गुरु पूर्णिमा 2027 — सऊदी अरब के सब शहर

शहरतारीखपूर्वाह्न पूजा-समयतिथि (स्थानीय)
रियाद
Arabia Standard Time (AST)
रविवार, 18 जुलाई 20275:15 AM – 10:39 AM AST17 जुलाई, 4:19 PM → 18 जुलाई, 6:45 PM AST
जेद्दा
Arabia Standard Time (AST)
रविवार, 18 जुलाई 20275:51 AM – 11:10 AM AST17 जुलाई, 4:19 PM → 18 जुलाई, 6:45 PM AST

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

गुरु पूर्णिमा की तारीख कैसे तय होती है

स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।

महत्व

«गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः» — गुरु अज्ञान-अंधकार हटाने वाला (गु = अंधकार, रु = हटाना); आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु-पूजन का फल गुरु-कृपा से ज्ञान, विद्या, आध्यात्मिक-प्रगति; व्यास-पूजन के साथ शुकदेव, शंकराचार्य, अपने गुरु-परंपरा (गुरु-मंडल) का पूजन।

शिव प्रथम गुरु (आदियोगी) — इसी पूर्णिमा को सप्तर्षियों को योग-विद्या दी (योग-परंपरा); गुरु-मंत्र की दीक्षा लेने, नया अध्ययन/साधना आरंभ करने, विद्यार्थियों के लिए गुरु-वंदन और शिक्षकों के सम्मान का दिन; बच्चे शिक्षकों को फूल-कार्ड, विद्यालयों में गुरु-वंदना।

पूर्णिमा-व्रत (दिन-भर फलाहार, शाम चंद्र-दर्शन के बाद पारण), सत्यनारायण-कथा; इसी पूर्णिमा से संतों का चातुर्मास (कार्तिक पूर्णिमा तक — प्रवचन-सत्संग एक स्थान पर); कोकिला-व्रत (आषाढ़ पूर्णिमा — सती की कथा; कुछ इलाक़े); बंगाल-ओडिशा में «गुरु पूर्णिमा/ऋषि-पूजा»; नेपाल में «गुरु पूर्णिमा/शिक्षक-दिवस» की छुट्टी।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. सुबह स्नान, स्वच्छ वस्त्र; पूजा-स्थान पर व्यासजी/अपने गुरु का चित्र (न हो तो शिव-दत्तात्रेय-शंकराचार्य), सफ़ेद कपड़ा, पुस्तक (गीता/भागवत) — व्यासपीठ का प्रतीक; कलश।
  2. संकल्प: «गुरु-कृपा व विद्या-ज्ञान हेतु गुरु-पूर्णिमा व्रत/पूजन»; पूर्णिमा-व्रत रखने वाली स्त्रियाँ फलाहार, शाम चंद्र-दर्शन के बाद पारण।
  3. व्यास/गुरु-पूजन: चित्र को रोली-चंदन-अक्षत, पीले/सफ़ेद फूल, माला, धूप-दीप, नैवेद्य (खीर/मिठाई/फल); «गुरुर्ब्रह्मा…» श्लोक, गुरु-मंत्र (दीक्षा हो तो) 108 जप, गुरु-स्तोत्र/गुरु-अष्टक; व्यासजी को — «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय», गीता का एक अध्याय पाठ।
  4. जीवित गुरु हों: आश्रम जाकर या घर बुलाकर पाद-प्रक्षालन (चरण धोना), पुष्प-माला, वस्त्र, फल, दक्षिणा (सामर्थ्य से), प्रणाम, आशीर्वाद; दीक्षा-गुरु दूर हों — चित्र को वही, फ़ोन/पत्र से प्रणाम, ऑनलाइन सत्संग।
  5. माता-पिता व बड़े: बच्चे माता-पिता (प्रथम गुरु), दादा-दादी, बड़े भाई-बहन के पैर छुएँ; माँ स्वयं अपनी सास/माँ को प्रणाम; शिक्षकों को फूल/उपहार/पत्र; जिन्होंने कुछ सिखाया (संगीत, हुनर, नौकरी) — उन्हें धन्यवाद।
  6. सत्यनारायण-कथा (पूर्णिमा): शाम को कलश-पूजा, पंचामृत, केले के पत्ते, पंजीरी-प्रसाद, कथा के पाँच अध्याय; या पूर्णिमा-व्रत की चंद्र-अर्घ्य (ऊपर चंद्रोदय)।
  7. दान: पुस्तक-कलम-कॉपी, वस्त्र, भोजन गुरुकुल/विद्यालय/ग़रीब छात्रों को; पीले वस्त्र-चने-केसर (बृहस्पति-गुरु के लिए — कुंडली में गुरु कमज़ोर हो तो); ब्राह्मण-भोजन।
  8. चातुर्मास-संकल्प: आज से कार्तिक पूर्णिमा तक कोई नियम — रोज़ गीता-पाठ, एक व्यसन-त्याग, सत्संग, मौन-अवधि — गुरु के सामने संकल्प।

प्रश्नोत्तर

क्या गुरु पूर्णिमा 2027 सऊदी अरब और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — रविवार, 18 जुलाई 2027।

रियाद में गुरु पूर्णिमा 2027 का पूजा-समय?

पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:15 AM से 10:39 AM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (रियाद के लिए Arabia Standard Time (AST))।

गुरु न हो तो किसे पूजें?

व्यासजी (सब गुरुओं के गुरु), शिव-दत्तात्रेय (आदि-गुरु), अपने इष्ट, माता-पिता (प्रथम गुरु), विद्या-गुरु/शिक्षक; या जिसकी शिक्षा से जीवन बदला — पुस्तक-लेखक तक; गुरु-तत्त्व को प्रणाम — «गुरुर्ब्रह्मा…» श्लोक पर्याप्त।

गुरु-दक्षिणा क्या दें?

सामर्थ्य से — फल-वस्त्र-पुष्प-दक्षिणा; पर असली दक्षिणा गुरु के बताए मार्ग पर चलना, एक नियम/त्याग का संकल्प, गुरु-कार्य में सेवा; गुरु न हों तो पुस्तक-दान, किसी ग़रीब छात्र की फ़ीस/कॉपी-कलम — विद्या-दान गुरु-दक्षिणा ही है।

क्या इस दिन दीक्षा लेना शुभ है?

हाँ — गुरु-पूर्णिमा दीक्षा (गुरु-मंत्र), नया अध्ययन, साधना-आरंभ, संगीत/कला का पहला पाठ, रुद्राक्ष-धारण के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन; आश्रमों में सामूहिक दीक्षा होती है; अभिजित मुहूर्त (ऊपर) उत्तम।

चातुर्मास क्या है?

देवशयनी एकादशी/गुरु पूर्णिमा से देवउठनी/कार्तिक पूर्णिमा तक के चार मास — विष्णु का शयन, विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं; साधु-संत एक स्थान पर रहकर प्रवचन; गृहस्थ कोई एक नियम (सात्विक भोजन, गीता-पाठ, ब्रह्मचर्य, दान) रखते हैं; जैन-बौद्ध में भी (वर्षावास)।

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