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सऊदी अरब में शारदीय नवरात्रि 2027: गुरुवार, 30 सितंबर — शहर-वार पूजा-समय

सऊदी अरब में शारदीय नवरात्रि 2027: गुरुवार, 30 सितंबर 2027 (रियाद)
घटस्थापना मुहूर्त (प्रातःकाल): 5:45 AM – 8:08 AM AST
भारत के दिन ही। 2027 में शारदीय नवरात्रि भारत और सऊदी अरब के सब शहरों में गुरुवार, 30 सितंबर 2027 को है।

शारदीय नवरात्रि 2027 — सऊदी अरब के सब शहर

शहरतारीखघटस्थापना मुहूर्त (प्रातःकाल)तिथि (स्थानीय)
रियाद
Arabia Standard Time (AST)
गुरुवार, 30 सितंबर 20275:45 AM – 8:08 AM AST30 सितंबर, 5:45 AM → 1 अक्टूबर, 3:06 AM AST
जेद्दा
Arabia Standard Time (AST)
गुरुवार, 30 सितंबर 20276:14 AM – 8:38 AM AST30 सितंबर, 5:44 AM → 1 अक्टूबर, 3:06 AM AST

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

जुड़े दिन (रियाद)

दुर्गा अष्टमीगुरुवार, 7 अक्टूबर 2027
महानवमीशुक्रवार, 8 अक्टूबर 2027
विजयादशमी (दशहरा)शनिवार, 9 अक्टूबर 2027

अन्य शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है; शहर-वार तारीखें उस पर्व के पन्ने पर।

शारदीय नवरात्रि की तारीख कैसे तय होती है

स्थानीय सूर्योदय पर प्रतिपदा (उदया तिथि); घटस्थापना दिन के पहले भाग में।

महत्व

पुराणों के अनुसार माँ दुर्गा ने नौ दिन के युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया था — इसीलिए दशमी «विजया» है। रामायण में भगवान राम ने रावण-वध से पहले इन्हीं नौ दिनों में शक्ति की आराधना की थी। यह ऋतु-परिवर्तन का भी समय है, इसलिए व्रत-संयम शरीर के लिए भी हितकर माना गया है।

नौ दिन नौ देवियाँ: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। हर दिन का अपना रंग, भोग और मंत्र होता है; पर घर में सरल पूजा — दीप, फूल, चुनरी, भोग और दुर्गा-सप्तशती या दुर्गा-चालीसा का पाठ — पर्याप्त है।

ऊपर दी तिथियाँ इंजन-गणना से हैं। ध्यान रखें: तिथि-क्षय या वृद्धि होने पर नवरात्रि कभी 8 और कभी 10 दिन की भी हो जाती है — तब बीच के दिन (द्वितीया-सप्तमी) एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं; अष्टमी, नवमी और दशमी की तिथियाँ ऊपर सीधे पंचांग से हैं, वे पक्की हैं।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. घटस्थापना (प्रतिपदा): सुबह स्नान कर पूजा-स्थान साफ़ करें। मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर जौ (जवारे) बोएँ; उसके ऊपर या बगल में जल-भरा कलश रखें — कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत, दूर्वा डालें; मुख पर आम के 5 पत्ते और नारियल (लाल कपड़े/चुनरी में लपेटा, मौली बँधा) रखें।
  2. कलश के पास माँ दुर्गा की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें; लाल कपड़ा बिछाएँ, चुनरी चढ़ाएँ। घटस्थापना का शुभ समय प्रतिपदा के सुबह (सूर्योदय के बाद) या अभिजित मुहूर्त में — ऊपर देखें। चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग में स्थापना वर्जित मानी गई है; ऐसी स्थिति हो तो अभिजित में करें।
  3. अखंड ज्योति: घी या तेल का दीपक जलाएँ जो नौ दिन बुझे नहीं — जो घर अखंड ज्योति न रख सकें, वे सुबह-शाम दीपक जलाएँ, यह भी पूर्ण मान्य है।
  4. संकल्प लें — «मैं नौ दिन (या जितने दिन) माँ दुर्गा का व्रत श्रद्धा से करूँगी।» फिर गणेश-पूजन, कलश-पूजन और माँ का षोडशोपचार पूजन — रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य।
  5. रोज़ सुबह-शाम: दीप-धूप, फूल, भोग (उस दिन की देवी का), दुर्गा-सप्तशती (या कम-से-कम कवच-अर्गला-कीलक व सिद्ध-कुंजिका स्तोत्र) या दुर्गा-चालीसा का पाठ, आरती «जय अम्बे गौरी»। जवारों में रोज़ थोड़ा जल दें।
  6. अष्टमी या नवमी को कन्या-पूजन: 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याएँ और 1 बालक (लांगुर/भैरव) बुलाएँ; पैर धोकर आसन पर बिठाएँ, तिलक-कलावा करें, पूड़ी-चना-हलवा खिलाएँ, दक्षिणा और उपहार (चुनरी, चूड़ी, रुमाल) दें, पैर छूकर विदा करें।
  7. नवमी को हवन: नवमी पर हवन-कुंड में आम की लकड़ी/उपले पर घी-हवन सामग्री से «ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा» या सप्तशती के मंत्रों से आहुति दें; अंत में पूर्णाहुति (नारियल)।
  8. पारण: नवमी की पूजा/हवन के बाद या दशमी को सुबह पूजा करके व्रत खोलें — अपने कुल की परंपरा के अनुसार। कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही स्वयं खाएँ।
  9. दशमी (विजयादशमी): कलश का जल घर में छिड़कें, जवारे काटकर परिवार के पुरुषों की टोपी/कान में लगाएँ व बहन-बेटियों को दें, नारियल फोड़ें/प्रसाद बाँटें और कलश-जवारे-प्रतिमा का विसर्जन नदी/तालाब या घर के पौधे में करें।

प्रश्नोत्तर

क्या शारदीय नवरात्रि 2027 सऊदी अरब और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — गुरुवार, 30 सितंबर 2027।

रियाद में शारदीय नवरात्रि 2027 का पूजा-समय?

घटस्थापना मुहूर्त (प्रातःकाल): 5:45 AM से 8:08 AM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (रियाद के लिए Arabia Standard Time (AST))।

कन्या-पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?

दोनों मान्य हैं — पंजाब-दिल्ली में अष्टमी (कंजक) और पूर्वी उत्तर प्रदेश-बिहार में नवमी ज़्यादा प्रचलित। अपने घर की रीत अपनाएँ; कन्याएँ 2 से 10 वर्ष की और साथ में एक बालक हो।

नवरात्रि का व्रत कैसे खोलें (पारण)?

नवमी को हवन-कन्या-पूजन के बाद या दशमी को सुबह पूजा करके — अपनी परंपरा के अनुसार। पहले माँ को भोग, फिर कन्याओं को, फिर स्वयं।

नौ दिन व्रत न रख सकें तो?

पहला और आख़िरी दिन (जोड़े का व्रत), या सिर्फ़ अष्टमी का व्रत भी शास्त्र-सम्मत है। श्रद्धा और नियम मुख्य हैं, दिनों की गिनती नहीं।

इस साल नवरात्रि 8 दिन की क्यों है (या 10 दिन की)?

जब एक तिथि सूर्योदय-से-सूर्योदय के बीच पूरी घट जाती है (तिथि-क्षय) तो एक दिन कम, और जब एक ही तिथि दो सूर्योदय छू ले (तिथि-वृद्धि) तो एक दिन ज़्यादा हो जाता है। ऊपर अष्टमी-नवमी-दशमी की तिथियाँ सीधे पंचांग से हैं, इसलिए सही हैं।

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