सऊदी अरब में तुलसी विवाह 2026: शनिवार, 21 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय
सऊदी अरब में तुलसी विवाह 2026: शनिवार, 21 नवंबर 2026 (रियाद)
प्रदोष काल पूजा: 5:05 PM – 7:43 PM AST
भारत के दिन ही। 2026 में तुलसी विवाह भारत और सऊदी अरब के सब शहरों में शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है।
तुलसी विवाह 2026 — सऊदी अरब के सब शहर
| शहर | तारीख | प्रदोष काल पूजा | तिथि (स्थानीय) |
|---|
रियाद Arabia Standard Time (AST) | शनिवार, 21 नवंबर 2026 | 5:05 PM – 7:43 PM AST | 21 नवंबर, 4:02 AM → 22 नवंबर, 2:27 AM AST |
जेद्दा Arabia Standard Time (AST) | शनिवार, 21 नवंबर 2026 | 5:40 PM – 8:16 PM AST | 21 नवंबर, 4:02 AM → 22 नवंबर, 2:27 AM AST |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
तुलसी विवाह की तारीख कैसे तय होती है
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।
महत्व
वृंदा-तुलसी: असुर जालंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा — विष्णु ने जालंधर-वध हेतु उसका पातिव्रत्य भंग किया; वृंदा ने शाप दिया कि विष्णु पत्थर (शालिग्राम) हों, और स्वयं अग्नि में समाई — उसकी राख से तुलसी उगी; विष्णु ने वरदान दिया कि तुलसी सदा उनके साथ पूजी जाएगी और कार्तिक शुक्ल द्वादशी को शालिग्राम-रूप में वे तुलसी से विवाह करेंगे — बिना तुलसी विष्णु का भोग अधूरा।
कन्यादान का पुण्य: मान्यता है कि जिनके घर कन्या नहीं, वे तुलसी का कन्यादान कर कन्यादान का फल पाते हैं; जिनके विवाह में बाधा हो वे तुलसी-विवाह में सम्मिलित होकर वैवाहिक सुख की प्रार्थना करते हैं; दांपत्य-कलह की शांति।
विवाह-मुहूर्तों का द्वार: देवशयनी से देवउठनी तक चातुर्मास में विवाह नहीं होते; तुलसी-विवाह के साथ ही मांगलिक कार्य, विवाह, गृह-प्रवेश आरंभ — इसीलिए तुलसी-विवाह को «पहला विवाह» कहा जाता है; उसी सप्ताह से लग्न-तिथियाँ शुरू।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- तैयारी (दिन में): तुलसी के गमले/चौरा को धो-लीपकर रंगोली, गन्ने (4) का मंडप (गन्ने चारों कोनों पर बाँधकर ऊपर चुनरी), आम-पत्ते व फूलों का तोरण; गमले पर सुहाग-सामग्री; शालिग्राम (न हो तो विष्णु/कृष्ण की छोटी मूर्ति या चित्र) को स्नान कराकर पीले वस्त्र, चंदन-तिलक — दूल्हा।
- उपवास: घर की स्त्री (या विवाह कराने वाला) दिन में फलाहार/एक समय; शाम विवाह के बाद भोजन।
- तुलसी-श्रृंगार: तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाना, चूड़ी-बिंदी-सिंदूर-मेहँदी-आलता (गमले पर), हल्दी लगाना (हल्दी-रस्म), फूल-माला; गमले को साड़ी/लाल कपड़े से लपेटना — तुलसी दुल्हन।
- विवाह-आरंभ (गोधूलि): कलश-स्थापना, गणेश-पूजन; शालिग्राम को हाथ में लेकर/चौकी पर तुलसी के दाएँ रखें; दोनों को हल्दी-चंदन-अक्षत, वर को पीली, कन्या को लाल माला; «तुलसी विवाह» का संकल्प — «मैं (नाम) तुलसी माता का शालिग्राम भगवान से विवाह (कन्यादान) कराता/कराती हूँ»।
- कन्यादान व गठबंधन: तुलसी के गमले पर हाथ रखकर कन्यादान-मंत्र/भावना; शालिग्राम व तुलसी के बीच मौली/चुनरी से गठबंधन; मंगलाष्टक («मंगलम् भगवान विष्णुः…») पाठ, अक्षत-वर्षा; स्त्रियाँ विवाह-गीत/मंगल-गीत।
- फेरे: शालिग्राम को हाथ में लेकर तुलसी की 7 परिक्रमा (या तुलसी-गमले को वर के चारों ओर) — हर फेरे पर अक्षत-फूल; सप्तपदी-भावना; फिर तुलसी को सिंदूर (विष्णु की ओर से), वर-वधू की आरती (कपूर)।
- भोग व आरती: खीर-पूरी, लड्डू, फल, पंचामृत, तुलसी-दल, गन्ना, सिंघाड़ा, बेर, आँवला, मूली (कार्तिक की ऋतु-वस्तुएँ) — विष्णु-तुलसी को; तुलसी-आरती («जय जय तुलसी माता») व विष्णु-आरती; «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय» / «तुलसी श्रीर्महालक्ष्मी…» स्तोत्र।
- कथा-भोज: वृंदा-जालंधर की कथा (नीचे); प्रसाद व विवाह-भोज (पूरी-सब्ज़ी-खीर-लड्डू) परिवार-पड़ोस को; कन्या/ब्राह्मण को दक्षिणा; गन्ने का मंडप अगले दिन तक, गन्ना प्रसाद-रूप में खाना; तुलसी-चुनरी पूर्णिमा/साल-भर।
प्रश्नोत्तर
क्या तुलसी विवाह 2026 सऊदी अरब और भारत में एक ही दिन है?
हाँ — शनिवार, 21 नवंबर 2026।
रियाद में तुलसी विवाह 2026 का पूजा-समय?
प्रदोष काल पूजा: 5:05 PM से 7:43 PM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (रियाद के लिए Arabia Standard Time (AST))।
शालिग्राम न हो तो?
विष्णु/कृष्ण/लक्ष्मी-नारायण की छोटी मूर्ति या चित्र को वर बनाएँ — पीले वस्त्र, मुकुट; भाव मुख्य है; कई घर ठाकुरजी (बालकृष्ण) से विवाह कराते हैं।
तुलसी विवाह कौन कराए — घर की स्त्री या ब्राह्मण?
घर में स्त्रियाँ ही श्रृंगार-गीत-कन्यादान करती हैं, संकल्प-मंत्र घर का पुरुष/ब्राह्मण (हो तो); पंडित अनिवार्य नहीं — मंगलाष्टक व आरती से घर में पूरा हो जाता है।
कन्यादान का फल किसे?
मान्यता — जिनके घर कन्या नहीं, या जो तुलसी-कन्यादान कराते हैं, उन्हें कन्यादान-पुण्य; विवाह-बाधा वालों को दांपत्य-सुख की प्रार्थना का फल।
तुलसी विवाह के बाद क्या करें?
गन्ना प्रसाद-रूप में खाएँ-बाँटें, तुलसी की चुनरी बनी रहे, कार्तिक पूर्णिमा तक रोज़ तुलसी-दीप, भीष्म-पंचक (द्वादशी-पूर्णिमा) में सात्विक; उसी सप्ताह से घर के विवाह-मुहूर्त देखें।
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