सिंगापुर में देव दीपावली 2027: रविवार, 14 नवंबर — शहर-वार पूजा-समय

सिंगापुर में देव दीपावली 2027: रविवार, 14 नवंबर 2027 (सिंगापुर)
प्रदोष काल पूजा: 6:51 PM – 9:14 PM SGT
भारत के दिन ही। 2027 में देव दीपावली भारत और सिंगापुर में रविवार, 14 नवंबर 2027 को है।

देव दीपावली 2027 — सिंगापुर

शहरतारीखप्रदोष काल पूजातिथि (स्थानीय)
सिंगापुर
Singapore Time (SGT)
रविवार, 14 नवंबर 20276:51 PM – 9:14 PM SGT13 नवंबर, 12:26 PM → 14 नवंबर, 11:26 AM SGT

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

देव दीपावली की तारीख कैसे तय होती है

जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।

महत्व

पुराणों में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान-दान और दीपदान अश्वमेध यज्ञ के फल के समान कहा गया है; कार्तिक मास का स्नान-व्रत इसी दिन पूर्ण होता है।

दीपदान — नदी, सरोवर या जल-पात्र में दीप प्रवाहित करना — पितरों और देवताओं दोनों के लिए किया जाता है; इसीलिए यह शाम देवताओं की दीपावली है, मनुष्यों की नहीं।

इसी पूर्णिमा को सिखों का गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) और जैन परंपरा में महावीर स्वामी का निर्वाण-स्मरण (कुछ परंपराओं में) भी आता है — उत्तर भारत में शाम को दोनों की रौनक साथ दिखती है।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान (गंगाजल मिलाकर), सूर्य को अर्घ्य; संभव हो तो दिन भर फलाहार।
  2. दिन में दान — ऊनी वस्त्र/कंबल, दीपक, अन्न; जाड़ा आरंभ हो रहा है, इसलिए वस्त्र-दान विशेष।
  3. सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल (ऊपर समय) में तुलसी-चौरे पर दीप और विष्णु-लक्ष्मी तथा शिव का स्मरण।
  4. दीपदान — नदी/सरोवर पर, न हो तो घर में जल-भरे पात्र (थाल/टब) में आटे या मिट्टी के दीप; 11, 21 या 51 — श्रद्धानुसार।
  5. घर की चौखट, बालकनी, छत पर दीप-पंक्ति; «ॐ नमो नारायणाय» या शिव-मंत्र का जप।
  6. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर खीर का भोग; व्रत हो तो उसी के बाद पारण।

प्रश्नोत्तर

क्या देव दीपावली 2027 सिंगापुर और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — रविवार, 14 नवंबर 2027।

सिंगापुर में देव दीपावली 2027 का पूजा-समय?

प्रदोष काल पूजा: 6:51 PM से 9:14 PM (SGT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (सिंगापुर के लिए Singapore Time (SGT))।

दीपावली और देव दीपावली में क्या अंतर है?

दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनुष्यों का पर्व है — लक्ष्मी-पूजन; देव दीपावली उसके 15 दिन बाद पूर्णिमा को देवताओं की दीपावली — त्रिपुरासुर-वध की स्मृति, दीपदान और गंगा-स्नान।

घर पर देव दीपावली कैसे मनाएँ?

सुबह स्नान-दान, शाम को तुलसी-चौरे और घर में दीप, जल-भरे थाल में 11/21 दीप प्रवाहित करें, चंद्रमा को अर्घ्य और खीर का भोग — काशी जाना ज़रूरी नहीं।

क्या इस दिन व्रत रखना ज़रूरी है?

नहीं — पूर्णिमा-व्रत वैकल्पिक है; फलाहार या एक समय सात्विक भोजन रखें और शाम को चंद्र-अर्घ्य के बाद पारण करें।

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