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पुखराज रत्न — लाभ, किसे पहनना चाहिए, धारण-विधि व दाम

पुखराज बृहस्पति (गुरु) ग्रह का रत्न है। इसे ग्रह की शक्ति बढ़ाने के लिए पहना जाता है — इसलिए जब बृहस्पति (गुरु) आपकी कुंडली में शुभ हो तभी लाभ, अन्यथा हानि भी हो सकती है। नीचे: किसे पहनना चाहिए, कैसे, मंत्र, उपरत्न व सावधानी — और हमारे प्रमाणित रत्न दाम-सहित।

प्रमाणित पुखराज (Yellow Sapphire) — दाम (10)

पुखराज के लाभ

  • विवाह व वैवाहिक सुख, संतान-सुख
  • शिक्षा, ज्ञान, न्याय व धर्म-कार्यों में उन्नति
  • धन-संचय, आर्थिक स्थिरता
  • मानसिक शांति व आत्मविश्वास
  • पीलिया, मोटापा, यकृत-संबंधी समस्याओं में सहायक (शास्त्र-मत)

पुखराज किसे पहनना चाहिए

धनु व मीन लग्न के लिए प्रथम रत्न; कर्क, मेष, वृश्चिक व सिंह लग्न में गुरु योगकारक/शुभ हो तो; गुरु की महादशा-अंतर्दशा में, विवाह-विलंब व संतान-प्रश्न में ज्योतिषी की सलाह से।

धारण-विधि (दिन, उँगली, धातु, मंत्र)

सोने (या पंचधातु) में, दाएँ हाथ की तर्जनी में, गुरुवार सुबह शुक्ल पक्ष में, कच्चे दूध-गंगाजल से शुद्ध कर «ॐ बृं बृहस्पतये नमः» 108 बार जपकर धारण करें; वज़न 3–6 रत्ती (शरीर-भार के अनुसार)।

उपरत्न

उपरत्न: सुनहला (Citrine), पीला टोपाज़।

⚠️ सावधानी

जन्म-कुंडली में गुरु मारकेश/षष्ठेश-अष्टमेश हो तो पुखराज हानि कर सकता है; नीलम-गोमेद के साथ आमतौर पर नहीं पहना जाता। कुंडली दिखाकर ही लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पुखराज कोई भी पहन सकता है?

नहीं। यह बृहस्पति (गुरु) की शक्ति बढ़ाता है; तभी पहनें जब बृहस्पति (गुरु) आपकी कुंडली में शुभ हो — निःशुल्क कुंडली व ज्योतिषी से जाँच लें।

पुखराज किस उँगली में, किस दिन?

सोने (या पंचधातु) में, दाएँ हाथ की तर्जनी में, गुरुवार सुबह शुक्ल पक्ष में, कच्चे दूध-गंगाजल से शुद्ध कर «ॐ बृं बृहस्पतये नमः» 108 बार जपकर धारण करें; वज़न 3–6 रत्ती (शरीर-भार के अनुसार)।

रत्न कितने रत्ती का हो?

आम नियम: शरीर-भार के हर 10–12 किलो पर 1 रत्ती, ऊपर दी सीमा में; ठीक वज़न ज्योतिषी तय करते हैं।

क्या रत्न प्रमाणित है?

हाँ — हर रत्न के साथ lab-प्रमाणपत्र; वज़न, मूल व उपचार उसके product-पन्ने पर लिखे हैं।

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रत्न व रुद्राक्ष के प्रभाव शास्त्र व परंपरा के अनुसार हैं; ये चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।