| शहर | तारीख | प्रदोष काल पूजा | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 4:45 PM – 7:41 PM EST | 23 नवंबर, 1:13 PM → 24 नवंबर, 9:54 AM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 4:46 PM – 7:42 PM EST | 23 नवंबर, 1:13 PM → 24 नवंबर, 9:54 AM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | सोमवार, 23 नवंबर 2026 | 5:22 PM – 8:25 PM MST | 23 नवंबर, 11:13 AM → 24 नवंबर, 7:54 AM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 23 नवंबर 2026 | 4:39 PM – 7:45 PM MST | 23 नवंबर, 11:13 AM → 24 नवंबर, 7:54 AM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | सोमवार, 23 नवंबर 2026 | 4:26 PM – 7:36 PM MST | 23 नवंबर, 11:13 AM → 24 नवंबर, 7:54 AM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 4:16 PM – 7:14 PM EST | 23 नवंबर, 1:13 PM → 24 नवंबर, 9:54 AM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।
पुराणों में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान-दान और दीपदान अश्वमेध यज्ञ के फल के समान कहा गया है; कार्तिक मास का स्नान-व्रत इसी दिन पूर्ण होता है।
दीपदान — नदी, सरोवर या जल-पात्र में दीप प्रवाहित करना — पितरों और देवताओं दोनों के लिए किया जाता है; इसीलिए यह शाम देवताओं की दीपावली है, मनुष्यों की नहीं।
इसी पूर्णिमा को सिखों का गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) और जैन परंपरा में महावीर स्वामी का निर्वाण-स्मरण (कुछ परंपराओं में) भी आता है — उत्तर भारत में शाम को दोनों की रौनक साथ दिखती है।
नहीं। भारत: मंगलवार, 24 नवंबर 2026; टोरंटो (कनाडा): मंगलवार, 24 नवंबर 2026। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
प्रदोष काल पूजा: 4:45 PM से 7:41 PM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनुष्यों का पर्व है — लक्ष्मी-पूजन; देव दीपावली उसके 15 दिन बाद पूर्णिमा को देवताओं की दीपावली — त्रिपुरासुर-वध की स्मृति, दीपदान और गंगा-स्नान।
सुबह स्नान-दान, शाम को तुलसी-चौरे और घर में दीप, जल-भरे थाल में 11/21 दीप प्रवाहित करें, चंद्रमा को अर्घ्य और खीर का भोग — काशी जाना ज़रूरी नहीं।
नहीं — पूर्णिमा-व्रत वैकल्पिक है; फलाहार या एक समय सात्विक भोजन रखें और शाम को चंद्र-अर्घ्य के बाद पारण करें।
🙏 गुरुजी (आचार्य आदित्य धर द्विवेदी) से सीधी बात