| शहर | तारीख | प्रदोष काल पूजा | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| बर्लिन CET/CEST | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 4:02 PM – 7:11 PM CET | 23 नवंबर, 7:13 PM → 24 नवंबर, 3:54 PM CET |
| फ्रैंकफर्ट CET/CEST | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 4:31 PM – 7:36 PM CET | 23 नवंबर, 7:13 PM → 24 नवंबर, 3:54 PM CET |
| म्यूनिख CET/CEST | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 | 4:27 PM – 7:29 PM CET | 23 नवंबर, 7:13 PM → 24 नवंबर, 3:54 PM CET |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।
पुराणों में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान-दान और दीपदान अश्वमेध यज्ञ के फल के समान कहा गया है; कार्तिक मास का स्नान-व्रत इसी दिन पूर्ण होता है।
दीपदान — नदी, सरोवर या जल-पात्र में दीप प्रवाहित करना — पितरों और देवताओं दोनों के लिए किया जाता है; इसीलिए यह शाम देवताओं की दीपावली है, मनुष्यों की नहीं।
इसी पूर्णिमा को सिखों का गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) और जैन परंपरा में महावीर स्वामी का निर्वाण-स्मरण (कुछ परंपराओं में) भी आता है — उत्तर भारत में शाम को दोनों की रौनक साथ दिखती है।
हाँ — मंगलवार, 24 नवंबर 2026।
प्रदोष काल पूजा: 4:02 PM से 7:11 PM (CET)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (बर्लिन के लिए CET/CEST)।
दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनुष्यों का पर्व है — लक्ष्मी-पूजन; देव दीपावली उसके 15 दिन बाद पूर्णिमा को देवताओं की दीपावली — त्रिपुरासुर-वध की स्मृति, दीपदान और गंगा-स्नान।
सुबह स्नान-दान, शाम को तुलसी-चौरे और घर में दीप, जल-भरे थाल में 11/21 दीप प्रवाहित करें, चंद्रमा को अर्घ्य और खीर का भोग — काशी जाना ज़रूरी नहीं।
नहीं — पूर्णिमा-व्रत वैकल्पिक है; फलाहार या एक समय सात्विक भोजन रखें और शाम को चंद्र-अर्घ्य के बाद पारण करें।
🙏 गुरुजी (आचार्य आदित्य धर द्विवेदी) से सीधी बात