| शहर | तारीख | प्रदोष काल पूजा | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 13 नवंबर 2027 | 4:54 PM – 7:45 PM EST | 12 नवंबर, 11:26 PM → 13 नवंबर, 10:26 PM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 13 नवंबर 2027 | 4:56 PM – 7:47 PM EST | 12 नवंबर, 11:26 PM → 13 नवंबर, 10:26 PM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | शनिवार, 13 नवंबर 2027 | 5:33 PM – 8:31 PM MST | 12 नवंबर, 9:26 PM → 13 नवंबर, 8:26 PM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 13 नवंबर 2027 | 4:51 PM – 7:51 PM MST | 12 नवंबर, 9:26 PM → 13 नवंबर, 8:26 PM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | शनिवार, 13 नवंबर 2027 | 4:40 PM – 7:44 PM MST | 12 नवंबर, 9:26 PM → 13 नवंबर, 8:26 PM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | शनिवार, 13 नवंबर 2027 | 4:26 PM – 7:19 PM EST | 12 नवंबर, 11:26 PM → 13 नवंबर, 10:26 PM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।
गुरु नानक देव जी ने «इक ओंकार» — एक ईश्वर, सबकी समानता, और «नाम जपो, किरत करो, वंड छको» (नाम-स्मरण, ईमानदारी की कमाई, बाँटकर खाना) का संदेश दिया। प्रकाश पर्व इसी संदेश को दोहराने का दिन है।
गुरुपुरब पर गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ दो दिन पहले आरंभ होकर पर्व की सुबह पूर्ण होता है; भोग के बाद कीर्तन, कथा और अरदास होती है। यह घर का व्रत नहीं, संगत (समुदाय) का पर्व है।
लंगर — बिना भेद सबके साथ एक पंक्ति में बैठकर भोजन — इस दिन का केंद्र है; विदेश के बड़े गुरुद्वारे इस दिन हज़ारों लोगों को लंगर कराते हैं और कई शहरों में नगर कीर्तन में स्थानीय प्रशासन भी शामिल होता है।
नहीं। भारत: रविवार, 14 नवंबर 2027; टोरंटो (कनाडा): शनिवार, 13 नवंबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
प्रदोष काल पूजा: 4:54 PM से 7:45 PM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
प्रचलित नानकशाही परंपरा में हाँ — इसलिए यह हर साल अक्टूबर-नवंबर में बदलती तारीख़ पर आती है। कुछ विद्वान जन्म वैशाख में मानते हैं, पर सार्वजनिक पर्व कार्तिक पूर्णिमा को ही मनाया जाता है।
कोई नहीं — गुरुपुरब (गुरु का पर्व) और प्रकाश पर्व (प्रकाश = जन्म) एक ही दिन के दो नाम हैं। कार्तिक पूर्णिमा को हिन्दू परंपरा में देव दीपावली भी होती है — इसलिए उस दिन उत्तर भारत में दोनों की रौनक साथ दिखती है।
हाँ, सबका स्वागत है — सिर ढकें, जूते बाहर उतारें, लंगर में सबके साथ पंक्ति में बैठें। यही इस पर्व का संदेश है।
🙏 गुरुजी (आचार्य आदित्य धर द्विवेदी) से सीधी बात