🪔 व्रत-त्योहार

🪔 गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व / गुरुपुरब) 2026

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कार्तिक पूर्णिमा को सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व — अखंड पाठ, प्रभात फेरी, नगर कीर्तन और लंगर।

गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व / गुरुपुरब) 2026 की तिथि
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
कार्तिक · शुक्ल पक्ष · कार्तिक पूर्णिमा (विक्रम संवत 2083)
🌅 सूर्योदय6:51 AM
🌙 चंद्रोदय4:57 PM
🕉 ब्रह्म मुहूर्त05:15 AM – 06:03 AM
📿 तिथि-कालकार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर, 11:42 PM → 24 नवंबर, 8:23 PM
अगले वर्ष — 2027: रविवार, 14 नवंबर 2027
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

गुरु नानक जयंती — जिसे गुरुपुरब या प्रकाश पर्व कहते हैं — सिख धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। परंपरा के अनुसार गुरु नानक देव जी का प्रकाश (जन्म) 1469 में राय भोई की तलवंडी (आज ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ; नानकशाही परंपरा में यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है — इसी दिन हिन्दू परंपरा में कार्तिक पूर्णिमा/देव दीपावली भी होती है।

विदेश में बसे भारतीयों — ख़ासकर कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के सिख समुदाय — के लिए यह साल का सबसे बड़ा सामूहिक आयोजन है: गुरुद्वारों में 48 घंटे का अखंड पाठ, शहर में नगर कीर्तन, और सबके लिए लंगर। ऊपर दी तारीख़ आपके शहर के स्थानीय समय से निकली पूर्णिमा की है।

महत्व — यह व्रत क्यों

गुरु नानक देव जी ने «इक ओंकार» — एक ईश्वर, सबकी समानता, और «नाम जपो, किरत करो, वंड छको» (नाम-स्मरण, ईमानदारी की कमाई, बाँटकर खाना) का संदेश दिया। प्रकाश पर्व इसी संदेश को दोहराने का दिन है।

गुरुपुरब पर गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ दो दिन पहले आरंभ होकर पर्व की सुबह पूर्ण होता है; भोग के बाद कीर्तन, कथा और अरदास होती है। यह घर का व्रत नहीं, संगत (समुदाय) का पर्व है।

लंगर — बिना भेद सबके साथ एक पंक्ति में बैठकर भोजन — इस दिन का केंद्र है; विदेश के बड़े गुरुद्वारे इस दिन हज़ारों लोगों को लंगर कराते हैं और कई शहरों में नगर कीर्तन में स्थानीय प्रशासन भी शामिल होता है।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह पूजा-विधि नहीं, पर्व मनाने का क्रम है — गुरुद्वारे की संगत में शामिल होकर।

  1. पर्व से दो दिन पहले गुरुद्वारे में अखंड पाठ आरंभ होता है — संभव हो तो पाठ की किसी पारी में बैठें या सुनें।
  2. सुबह-सवेरे प्रभात फेरी — शबद गाते हुए मोहल्ले में फेरी; कई प्रवासी समुदाय इसे घरों के बीच सप्ताहांत पर करते हैं।
  3. गुरुद्वारे जाएँ — सिर ढककर, जूते बाहर, हाथ-पैर धोकर; गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेकें और कड़ाह प्रसाद लें।
  4. कीर्तन और कथा सुनें; अरदास में शामिल हों; नगर कीर्तन निकले तो पंज प्यारों के पीछे संगत के साथ चलें।
  5. सेवा करें — लंगर बनाने/परोसने/बर्तन धोने में हाथ बँटाएँ; यही इस दिन की असली भक्ति मानी जाती है।
  6. शाम को घर और गुरुद्वारे में दीप/रोशनी; परिवार के साथ गुरु नानक देव जी की साखियाँ (जीवन-प्रसंग) पढ़ें-सुनाएँ।

📿 गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व / गुरुपुरब) कैसे करें — विस्तृत विधि, सामग्री checklist व नियम →

पूजा-सामग्री की सूची

घर से ले जाने को कुछ ख़ास नहीं — श्रद्धा और सेवा-भाव; नीचे व्यावहारिक सूची।

  • सिर ढकने को रुमाल/चुन्नी (गुरुद्वारे में अनिवार्य)
  • लंगर/कड़ाह प्रसाद के लिए भेंट — आटा, घी, चीनी, दाल या धन (गुरुद्वारे की ज़रूरत पूछकर)
  • घर में दीप/मोमबत्तियाँ और रोशनी की लड़ियाँ
  • बच्चों के लिए गुरु नानक देव जी की साखियों की पुस्तक/चित्र
  • सेवा के लिए साधारण, आरामदायक कपड़े (लंगर-सेवा में)
  • विदेश में: शहर के नगर कीर्तन का समय/मार्ग — गुरुद्वारे की सूचना से

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📅 अपने शहर का पंचांग

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व्रत-कथा

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में तलवंडी में मेहता कालू और माता तृप्ता के घर हुआ। बचपन से ही वे साधु-संतों की संगत और ईश्वर-चिंतन में रमे रहे; «सच्चा सौदा» की साखी प्रसिद्ध है — पिता के दिए बीस रुपयों से उन्होंने भूखे साधुओं को भोजन कराया और कहा कि यही सच्चा सौदा है।

📖 गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व / गुरुपुरब) की पूरी व्रत-कथा पढ़ें →

कड़ाह प्रसाद और लंगर

गुरुद्वारे में कड़ाह प्रसाद (आटा-घी-चीनी का हलवा, बराबर मात्रा में) अरदास के बाद सबको मिलता है। लंगर में सादा, सात्विक भोजन — दाल, सब्ज़ी, रोटी, चावल, खीर — सब एक पंक्ति में बैठकर।

  • कड़ाह प्रसाद (आटा, देसी घी, चीनी — 1:1:1)
  • लंगर: दाल, सब्ज़ी, रोटी/चावल, खीर
  • घर में: खीर, पंजाबी मिठाइयाँ (पिन्नी, लड्डू)
  • प्रभात फेरी के बाद चाय-पकौड़े/हलवा — स्थानीय प्रथा

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

भारत और विदेश में मनाने के ढंग में थोड़ा अंतर है —

पंजाब · दिल्ली · ननकाना साहिब: तीन दिन का उत्सव — अखंड पाठ, नगर कीर्तन में गतका (शस्त्र-कला) प्रदर्शन, घर-घर दीपमाला; ननकाना साहिब और अमृतसर (स्वर्ण मंदिर की रोशनी) की यात्रा।
कनाडा · ब्रिटेन · अमेरिका: सप्ताहांत पर बड़े नगर कीर्तन (सरे, ब्रैम्पटन, साउथहॉल, न्यूयॉर्क), शहर की सड़कों पर मुफ़्त लंगर-स्टॉल; गुरुद्वारे में पर्व की तिथि पर अखंड पाठ का भोग और दीवान।
ऑस्ट्रेलिया · न्यूज़ीलैंड · सिंगापुर: गुरुद्वारे में दीवान और लंगर; कई शहरों में सामुदायिक मेलों/कीर्तन दरबार के साथ; बच्चों के लिए साखी-प्रतियोगिताएँ।
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दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • गुरुद्वारे में सिर ढकें, जूते बाहर उतारें, शांति रखें
  • सेवा में हाथ बँटाएँ — लंगर बनाना/परोसना/सफ़ाई
  • कड़ाह प्रसाद दोनों हाथ जोड़कर लें, बचा न छोड़ें
  • दान गुरुद्वारे की ज़रूरत के अनुसार — राशन, धन या समय
  • बच्चों को गुरु नानक देव जी की साखियाँ सुनाएँ — पर्व का अर्थ उन तक पहुँचे

❌ क्या न करें

  • गुरुद्वारे में तम्बाकू, शराब, नशा — पूरी तरह वर्जित
  • लंगर में जाति/धर्म/पद का भेद या अलग बैठने की माँग नहीं
  • गुरु ग्रंथ साहिब की ओर पीठ करके न बैठें, पैर न फैलाएँ
  • पर्व पर दिखावे की दावत/पटाखों की होड़ नहीं — सादगी ही भाव है
  • नगर कीर्तन में यातायात/स्वयंसेवकों के निर्देश न तोड़ें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में गुरु नानक जयंती कब है?

ऊपर दी तारीख़ इस वर्ष की कार्तिक पूर्णिमा है — आपके शहर के स्थानीय सूर्योदय-चंद्रोदय से गणना; विदेश में भारत से एक दिन का अंतर आ सकता है, इसलिए अपने गुरुद्वारे की घोषणा भी देखें।

क्या गुरु नानक जयंती हमेशा कार्तिक पूर्णिमा को होती है?

प्रचलित नानकशाही परंपरा में हाँ — इसलिए यह हर साल अक्टूबर-नवंबर में बदलती तारीख़ पर आती है। कुछ विद्वान जन्म वैशाख में मानते हैं, पर सार्वजनिक पर्व कार्तिक पूर्णिमा को ही मनाया जाता है।

गुरुपुरब और प्रकाश पर्व में क्या अंतर है?

कोई नहीं — गुरुपुरब (गुरु का पर्व) और प्रकाश पर्व (प्रकाश = जन्म) एक ही दिन के दो नाम हैं। कार्तिक पूर्णिमा को हिन्दू परंपरा में देव दीपावली भी होती है — इसलिए उस दिन उत्तर भारत में दोनों की रौनक साथ दिखती है।

मैं सिख नहीं हूँ — क्या गुरुद्वारे जा सकता हूँ, लंगर खा सकता हूँ?

हाँ, सबका स्वागत है — सिर ढकें, जूते बाहर उतारें, लंगर में सबके साथ पंक्ति में बैठें। यही इस पर्व का संदेश है।

विदेश में नगर कीर्तन कब होता है?

अक्सर पर्व के आस-पास के सप्ताहांत पर (रविवार) — स्थानीय गुरुद्वारा समिति की सूचना देखें; तिथि पर गुरुद्वारे में अखंड पाठ का भोग और दीवान होता है।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।

संदेश Nakshtra Tak की ओर से आएगा; नंबर किसी और को नहीं दिया जाता।

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⚠️ यह विवरण परंपरागत रीति व समुदाय की प्रथा के अनुसार है; आपके परिवार/गुरुद्वारे की रीति सर्वोपरि।

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