🚩 मंगलवार व्रत (हनुमान) व मंगळागौर 2026
अगला मंगलवार — हनुमानजी का वार, मंगल-ग्रह की शांति, 21 मंगलवार का व्रत (साहस-रोग-ऋण-मंगल-दोष); श्रावण के मंगलवार को महाराष्ट्र की नवविवाहिताओं की मंगळागौर (गौरी-पूजा, रात-भर खेल); ऊपर आने वाले मंगलवार (श्रावण वाले अलग)।
- मंगलवार व्रत — हनुमान (भाद्रपद) — मंगलवार, 22 सितंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (आश्विन) — मंगलवार, 29 सितंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (आश्विन) — मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (आश्विन) — मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (आश्विन) — मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (कार्तिक) — मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (कार्तिक) — मंगलवार, 3 नवंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (कार्तिक) — मंगलवार, 10 नवंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (कार्तिक) — मंगलवार, 17 नवंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (कार्तिक) — मंगलवार, 24 नवंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (मार्गशीर्ष) — मंगलवार, 1 दिसंबर 2026
- मंगलवार व्रत — हनुमान (मार्गशीर्ष) — मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
मंगलवार हनुमानजी और मंगल-ग्रह का वार है। **मंगलवार व्रत** प्रायः 21 (या 45) मंगलवार लगातार रखा जाता है — साहस-बल, रोग-ऋण-मुक्ति, शत्रु-भय-निवारण, कुंडली के मंगल-दोष (मांगलिक) व विवाह-विलंब की शांति के लिए; लाल वस्त्र, सिंदूर-चोला, बूँदी-लड्डू, हनुमान-चालीसा, सुंदरकांड, एक समय मीठा भोजन (नमक-रहित — कई घर)।
श्रावण (सावन) के मंगलवारों को महाराष्ट्र में **मंगळागौर** — विवाह के पहले पाँच वर्ष नवविवाहिता श्रावण के हर मंगलवार गौरी (अन्नपूर्णा-पार्वती) की पूजा करती है, सहेलियों-सुहागिनों को बुलाकर रात-भर झिम्मा-फुगड़ी-उखाणे के खेल, «मंगळागौरीची आरती»; उत्तर में सावन के मंगलवार पर मंगला गौरी व्रत (पार्वती — सुहाग-हेतु)। ऊपर अगला मंगलवार व आने वाले 12 मंगलवार (श्रावण के «मंगळागौर» लिखे); नीचे हनुमान-व्रत की विधि, मंगल-शांति, मंगळागौर की रीत, सामग्री, कथा, प्रसाद।
महत्व — यह व्रत क्यों
हनुमान: मंगलवार को जन्म (लोक-मान्यता — चैत्र पूर्णिमा मंगलवार), रुद्रावतार, अष्ट-सिद्धि-नव-निधि के दाता; मंगलवार-व्रत से भय-रोग-भूत-प्रेत-शनि-पीड़ा दूर («भूत पिशाच निकट नहिं आवै»), साहस-आत्मविश्वास; ब्रह्मचर्य-नियम; स्त्रियाँ हनुमान-पूजा कर सकती हैं (मूर्ति-स्पर्श/चोला की रीत कुछ मंदिरों में पुरुष) — चालीसा-दीप-लड्डू सबके लिए।
मंगल-ग्रह: भूमि-पुत्र, रक्त-साहस-भाई-भूमि-वाहन का कारक; कुंडली में 1-4-7-8-12 भाव में मंगल = मांगलिक-दोष (विवाह-विलंब/कलह — लोक-ज्योतिष); मंगलवार-व्रत, हनुमान-पूजा, लाल मसूर-गुड़-लाल वस्त्र-तांबा दान, «ॐ अं अंगारकाय नमः»/मंगल-स्तोत्र, मूँगा (पंडित से) — शांति-उपाय; भौम-प्रदोष व अंगारकी संकष्टी भी मंगलवार के।
मंगळागौर (महाराष्ट्र): श्रावण-मंगलवार की गौरी-पूजा — नवविवाहिता पाँच वर्ष, फिर उद्यापन; सोलह प्रकार के पत्ते-फूल (पत्री), अन्नपूर्णा-मूर्ति, रात-भर जागरण-खेल (झिम्मा, फुगड़ी, पिंगा, उखाणे — पति का नाम काव्य में), मायके-ससुराल की स्त्रियाँ; उत्तर-भारत में मंगला गौरी व्रत (सावन-मंगलवार — पार्वती को 16 वस्तुएँ, 16 लड्डू) — सुहाग व संतान।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह मंगलवार व्रत (हनुमान) की घरेलू विधि है; मंगल-शांति व श्रावण की मंगळागौर/मंगला गौरी की रीत अंत में।
- सुबह: स्नान, लाल/केसरिया वस्त्र; संकल्प — «21 मंगलवार व्रत, (कामना) हेतु, एक समय भोजन»; हनुमान-मंदिर या घर में हनुमान-चित्र/मूर्ति — सिंदूर-चमेली-तेल का चोला (या तिलक), लाल फूल-माला (गुड़हल-गेंदा), लाल वस्त्र-लंगोट, जनेऊ, पान-सुपारी, बूँदी/बेसन-लड्डू व केला-गुड़-चना का भोग, तुलसी-दल; घी/चमेली-तेल का दीप; हनुमान-चालीसा (1/7/11 बार), बजरंग-बाण/सुंदरकांड (हो सके तो), «ॐ हं हनुमते नमः» 108; आरती «आरती कीजै हनुमान लला की»।
- दिन में: फलाहार या एक समय (शाम) मीठा भोजन — कई घर बिना नमक (गुड़-मीठा: लड्डू-हलवा-मीठी रोटी-गुड़-चावल); ब्रह्मचर्य, क्रोध-झूठ नहीं, बाल-नाख़ून नहीं (कुछ रीत); राम-नाम जप।
- शाम: हनुमान-मंदिर में दीप (चमेली-तेल), सुंदरकांड-पाठ/रामचरितमानस, आरती; व्रत-कथा (नीचे — ब्राह्मण-दंपति/मंगल) सुनना; प्रसाद बाँटना — बूँदी-लड्डू, गुड़-चना; फिर भोजन।
- मंगल-शांति (मांगलिक/मंगल-पीड़ा): मंगलवार को लाल मसूर, गुड़, लाल वस्त्र, तांबे का बर्तन, लाल फूल, बताशे — ग़रीब/हनुमान-मंदिर में दान; «ॐ अं अंगारकाय नमः» 108 या मंगल-स्तोत्र (ऋण-मोचन मंगल-स्तोत्र — ऋण-मुक्ति हेतु); भात-गुड़ गाय को; भूमि-पुत्र होने से पौधा लगाना; मूँगा पंडित-सलाह से; पंचमुखी हनुमान-कवच; भौम-प्रदोष/अंगारकी पर विशेष।
- 21 मंगलवार का उद्यापन: 21वें (या 22वें) मंगलवार को हनुमान-मंदिर में 21 बूँदी-लड्डू/चूरमा, लाल ध्वजा-चोला-लंगोट अर्पण, सुंदरकांड-पाठ, ब्राह्मण/21 बच्चों को भोजन, दान (लाल वस्त्र-गुड़-चना); फिर व्रत स्वेच्छा से जारी; बीच में छूटे तो अगले मंगलवार से गिनती (कठोर रीत: पुनः आरंभ)।
- मंगळागौर (महाराष्ट्र — श्रावण के मंगलवार): नवविवाहिता सुबह स्नान, नई साड़ी-चूड़ा-हरी चूड़ियाँ; गौरी (अन्नपूर्णा) की मूर्ति/सुपारी की स्थापना, सोलह पत्री (बेल, दूर्वा, तुलसी, आघाड़ा, केवड़ा, चाफा, जास्वंद, शमी, धोत्रा…) व सोलह फूल, हल्दी-कुंकू, सोलह करंज्या/पुरण-पोळी का नैवेद्य; कथा (मंगळागौरीची कहाणी), आरती «जय देवी मंगळागौरी»; सुहागिनों (मायके-ससुराल) को हल्दी-कुंकू, वाण (उपहार); रात-भर जागरण — झिम्मा, फुगड़ी, पिंगा, बस-फुगड़ी, उखाणे, गाणी; अगली सुबह विसर्जन/उत्तर-पूजा; पाँचवें साल उद्यापन (माँ-सास को वाण)।
- मंगला गौरी व्रत (उत्तर-भारत — सावन-मंगलवार): पार्वती/गौरी-चित्र, 16 प्रकार की वस्तुएँ 16-16 (लड्डू, फल, फूल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चूड़ी, आटे के दीप 16, बाती 16-16), सुहाग-सामग्री; कथा (सेठ-पुत्र की आयु 16 वर्ष — मंगला गौरी व्रत से दीर्घायु); उद्यापन 5 वर्ष/जब सामर्थ्य; पति-संतान की दीर्घायु।
- स्त्रियाँ: हनुमान-पूजा में चालीसा-दीप-लड्डू; मासिक-धर्म में स्मरण; मंगळागौर सिर्फ़ नवविवाहिता (5 वर्ष), बाक़ी सुहागिनें सहभागी; मंगल-दोष वाली कन्याएँ मंगलवार-व्रत + मंगला गौरी।
पूजा-सामग्री की सूची
हनुमान-चोला, लड्डू, चालीसा, लाल-दान + मंगळागौर की सोलह पत्री-फूल-करंज्या — मंगलवार की सूची।
- हनुमान-चित्र/मूर्ति, लाल/केसरिया कपड़ा, चौकी; सिंदूर + चमेली-तेल (चोला), लाल वस्त्र-लंगोट, जनेऊ, लाल ध्वजा
- लाल फूल (गुड़हल-गेंदा-गुलाब), माला, तुलसी-दल, पान-सुपारी-लौंग, अक्षत, रोली, मौली
- भोग: बूँदी/बेसन के लड्डू, गुड़-चना, केला, इमरती/जलेबी (कुछ), पेड़ा, पंचमेवा; व्रत-भोजन — मीठा (गुड़-हलवा-मीठी रोटी-गुड़-चावल) नमक-रहित/सेंधा
- दीपक (घी/चमेली-तेल — हनुमान को चमेली प्रिय), धूप, कपूर, आरती-थाली
- पाठ: हनुमान-चालीसा, बजरंग-बाण, सुंदरकांड, हनुमानाष्टक, मंगल-स्तोत्र (ऋण-मोचन), रुद्राक्ष/लाल-चंदन माला
- मंगल-शांति दान: लाल मसूर, गुड़, लाल वस्त्र, तांबा, बताशे, लाल फूल; मूँगा (पंडित से), पौधा
- मंगळागौर: गौरी/अन्नपूर्णा मूर्ति या सुपारी, सोलह पत्री (बेल-दूर्वा-तुलसी-आघाड़ा-शमी-केवड़ा-चाफा-जास्वंद-धोत्रा-अर्जुन-रुई-मोगरा-जाई-बकुल-कदंब-अशोक), सोलह फूल, हल्दी-कुंकू, सोलह करंज्या/पुरण-पोळी, नारळ, वाण (सुहागिनों को उपहार), हरी चूड़ियाँ; खेल-सामग्री (फुगड़ी-झिम्मा — कुछ नहीं, बस सहेलियाँ)
- मंगला गौरी (उत्तर): 16 लड्डू-16 फल-16 पान-16 आटे के दीप-16 बाती, चूड़ी-सुहाग-सामग्री 16, कथा-पुस्तक
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मंगलवार व्रत-कथा: एक ब्राह्मण-दंपति निःसंतान थे; ब्राह्मण वन में हनुमान-पूजा करता, पत्नी घर पर मंगलवार व्रत रखकर हनुमान को भोग लगाकर ही भोजन करती। एक मंगलवार वह भोग न बना सकी और भूखी रही — छह दिन बाद अगले मंगलवार बेहोश हो गई; हनुमान प्रकट हुए — «तेरी श्रद्धा से प्रसन्न, यह पुत्र लो» — बालक «मंगल»। ब्राह्मण लौटा तो शंका हुई, बालक को कुएँ में गिरा दिया — पर मंगल मुस्कुराता लौट आया; रात हनुमान ने ब्राह्मण को सपने में सच बताया, वह पछताया; दंपति सुखी, मंगल-पुत्र सदा रक्षित। सीख — मंगलवार व्रत श्रद्धा से संतान-रक्षा व हनुमान-कृपा।
मंगळागौर की कहाणी (महाराष्ट्र): एक धनवान निःसंतान व्यापारी को साधु ने बताया कि उसके पुत्र की आयु 16 वर्ष होगी; पुत्र हुआ, 16वें वर्ष विवाह; वधू की माँ ने श्रावण के मंगलवार को मंगळागौरी-व्रत किया था और बेटी को भी कराया — जब यम आए तो वधू के व्रत-तेज/सर्प-रूप में गौरी की रक्षा से पति बच गया, आयु सौ वर्ष; तभी से नवविवाहिता पाँच वर्ष मंगळागौर — पति-दीर्घायु। उत्तर की मंगला गौरी कथा भी यही (सेठ-पुत्र 16 वर्ष, पत्नी के व्रत से दीर्घायु — साँप-रूप में यम को हार)।
मंगल-ग्रह की उत्पत्ति: शिव के पसीने की बूँद पृथ्वी पर गिरी — भूमि-पुत्र मंगल (अंगारक/भौम) — रक्तवर्ण, उग्र; उज्जैन मंगल का जन्म-स्थान (मंगलनाथ मंदिर — भात-पूजा से मांगलिक-शांति); हनुमान मंगल को नियंत्रित करते — इसलिए मंगलवार को हनुमान-पूजा से मंगल-दोष शांत (लोक-ज्योतिष); अंगारक ने गणेश-तपस्या से अंगारकी संकष्टी पाई।
बूँदी-लड्डू, गुड़-चना, मीठा भोजन; मंगळागौर की करंज्या-पुरण-पोळी
मंगलवार व्रत में एक समय मीठा (नमक-रहित/सेंधा) भोजन — गुड़-हलवा-मीठी रोटी-गुड़-चावल-लड्डू; हनुमान को बूँदी-लड्डू, गुड़-चना, केला, इमरती; मंगल-शांति में लाल मसूर-गुड़ दान; मंगळागौर में सोलह करंज्या (नारियल-गुड़ भरे गुझिया-से), पुरण-पोळी, मोदक, वरण-भात; उत्तर की मंगला गौरी में 16 लड्डू।
- हनुमान-भोग: बूँदी के लड्डू (बेसन-बूँदी-घी-चीनी — केसरिया), बेसन-लड्डू, गुड़-भुना चना, केला, इमरती-जलेबी (मंगलवार-शनिवार की रीत), पान-बीड़ा, पंचमेवा; चमेली-तेल-सिंदूर (चोला — खाने का नहीं)
- व्रत-भोजन (एक समय, प्रायः शाम): मीठी रोटी/गुड़ की रोटी, हलवा (सूजी/आटे का), गुड़-चावल/मीठा भात, खीर, फल-दूध; नमक-रहित (कठोर) या सेंधा नमक; लाल वस्तु — अनार-सेब
- मंगल-शांति: लाल मसूर की दाल, गुड़, बताशे — दान व गाय को भात-गुड़; लाल फल
- मंगळागौर (महाराष्ट्र): सोलह करंज्या (नारियल-गुड़/खोया की गुझिया), पुरण-पोळी, उकडीचे मोदक, कोशिंबीर, वरण-भात, आळू-वड़ी, पंचामृत; रात-भर खेल के बीच चिवड़ा-लाडू-चाय (जागरण), सुहागिनों को हल्दी-कुंकू के साथ फल-वाण
- मंगला गौरी (उत्तर): 16 लड्डू (बेसन/बूँदी), 16 फल, मीठे चावल, पूड़ी-हलवा; पारण गौरी-प्रसाद से
- दक्षिण (मंगलवार/चेव्वाई): मुरुगन/मारियम्मन-मंदिर में पोंगल-वड़ा, आंजनेय को वड़ामाला (उड़द-वड़ों की माला — हनुमान-जयंती/मंगलवार)
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
उत्तर की हनुमान-मंगलवार, महाराष्ट्र की मंगळागौर, उज्जैन की मंगलनाथ-भात-पूजा, दक्षिण की वड़ामाला — मंगल के वार की रीतें।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- हनुमान को सिंदूर-चमेली-तेल, लाल फूल, बूँदी-लड्डू; चालीसा/सुंदरकांड; एक समय मीठा भोजन
- 21 मंगलवार का संकल्प → उद्यापन (21 लड्डू, ध्वजा, बच्चों को भोजन); लगातार, बिना छोड़े
- मंगल-दोष: लाल मसूर-गुड़-लाल वस्त्र दान, मंगल-स्तोत्र, पौधा; कुंडली-जाँच पहले
- श्रावण-मंगलवार: मंगळागौर (नवविवाहिता) / मंगला गौरी (सुहागिनें) — सोलह-सोलह, सहेलियाँ, कथा
- ब्रह्मचर्य, क्रोध-झूठ से दूरी — मंगल उग्र ग्रह, संयम ही शांति
❌ क्या न करें
- मंगलवार को माँस-मद्य-प्याज़-लहसुन, ऋण देना-लेना, नए वाहन/भूमि की जल्दबाज़ी (लोक-मान्यता), बाल-नाख़ून (कुछ रीत)
- हनुमान-पूजा में काला वस्त्र, चरणामृत-तुलसी-रहित भोग (तुलसी प्रिय), स्त्री-पुरुष-भेद की अंधश्रद्धा (चालीसा-दीप सबके लिए)
- व्रत बीच में छोड़ना; नमक-रहित के नाम पर बीमार-गर्भवती को कष्ट
- मूँगा बिना कुंडली-जाँच; «मांगलिक» के डर से विवाह-निर्णय — पंडित/ज्योतिष-रिपोर्ट से मिलान
- मंगळागौर-जागरण में शोर से पड़ोस को कष्ट; खेल में असुरक्षा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगला मंगलवार व्रत कब और सावन के मंगलवार 2026 में कब-कब?
ऊपर सूची में आने वाले 12 मंगलवार हैं — «मंगळागौर (श्रावण मंगलवार)» लिखे हुए सावन के मंगलवार (पूर्णिमांत श्रावण — उत्तर भारत; महाराष्ट्र का अमांत श्रावण 15 दिन बाद शुरू — उसके मंगलवार सूची में अगले «भाद्रपद» वाले होंगे); 21-मंगलवार व्रत किसी भी मंगलवार (शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ) से आरंभ करें।
मंगलवार व्रत कितने रखें, नियम क्या, नमक?
संकल्प 21 (लगभग 5 महीने) या 45 मंगलवार; सुबह हनुमान-पूजा (चोला-लड्डू-चालीसा), एक समय भोजन — परंपरा में मीठा/नमक-रहित (गुड़-हलवा-मीठी रोटी), कई घर सेंधा नमक; ब्रह्मचर्य; उद्यापन पर 21 लड्डू-ध्वजा-बच्चों को भोजन; बीमार-गर्भवती सामान्य भोजन कर पूजा-चालीसा भर करें।
मंगल-दोष (मांगलिक) क्या है, मंगलवार-व्रत से शांति?
कुंडली में मंगल लग्न से 1-4-7-8-12 भाव में = मांगलिक (विवाह-विलंब/कलह की लोक-मान्यता; कई अपवाद — मंगल स्वराशि/उच्च, गुरु-दृष्टि, 28 वर्ष के बाद क्षीण); उपाय — मंगलवार-व्रत, हनुमान-पूजा, लाल मसूर-गुड़-लाल वस्त्र-तांबा दान, मंगल-स्तोत्र, उज्जैन मंगलनाथ भात-पूजा, कुंभ-विवाह (कुछ), मूँगा (पंडित से); पहले कुंडली (मांगलिक-रिपोर्ट) से पुष्टि — डर से नहीं।
मंगळागौर क्या है और कौन करे?
महाराष्ट्र की नवविवाहिता श्रावण (अमांत) के हर मंगलवार गौरी-अन्नपूर्णा की पूजा — सोलह पत्री-फूल, हल्दी-कुंकू, करंज्या; मायके-ससुराल की सुहागिनों-सहेलियों को बुलाकर रात-भर झिम्मा-फुगड़ी-पिंगा-उखाणे; विवाह के पहले पाँच वर्ष (पहला वर्ष मायके, बाक़ी ससुराल — रीत-भेद), पाँचवें साल उद्यापन; पति-दीर्घायु व सौभाग्य; अब शहरों में सामूहिक मंगळागौर-कार्यक्रम।
मंगला गौरी व्रत (उत्तर) कैसे करें?
सावन के हर मंगलवार सुहागिनें/कन्याएँ पार्वती (मंगला गौरी) की पूजा — 16-16 वस्तुएँ (लड्डू, फल, फूल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चूड़ी, आटे के 16 दीप — 16 बाती), सुहाग-सामग्री, कथा (सेठ-पुत्र की 16 वर्ष आयु व्रत से बढ़ी), आरती; एक समय भोजन; 5 वर्ष/सामर्थ्य पर उद्यापन; पति-संतान की दीर्घायु, मंगल-दोष-शांति।
क्या स्त्रियाँ हनुमान-पूजा कर सकती हैं?
हाँ — हनुमान-चालीसा, दीप, लड्डू, सुंदरकांड, मंगलवार-व्रत सबके लिए; कुछ मंदिर-परंपराओं में मूर्ति-स्पर्श/चोला-चढ़ाना पुरुष करते हैं (हनुमान ब्रह्मचारी — शास्त्र में स्त्री-पूजा वर्जित नहीं, सीता-माता स्वयं); स्त्रियाँ दूर से चोला/सिंदूर अर्पित कर सकती हैं; मासिक-धर्म में स्मरण-जप।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। मंगल-दोष/मांगलिक ज्योतिष-मान्यता है — कुंडली-जाँच व पंडित-सलाह के बिना उपाय/रत्न न पहनें; स्वास्थ्य-स्थिति में नमक-रहित/निर्जला न रखें।
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