🐘 संकष्टी चतुर्थी (और विनायक चतुर्थी) 2026
अगली संकष्टी कब है — हर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश-व्रत, चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर पारण; मंगलवार को अंगारकी (सबसे बड़ी); शुक्ल चतुर्थी = विनायक चतुर्थी (दोपहर पूजा); ऊपर चंद्रोदय-समय व आने वाली तिथियाँ।
- विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी) — मंगलवार, 29 सितंबर 2026
- आश्विन विनायक चतुर्थी — बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
- वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
- कार्तिक विनायक चतुर्थी — शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी — शुक्रवार, 27 नवंबर 2026
- मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी — रविवार, 13 दिसंबर 2026
- आखुरथ संकष्टी चतुर्थी — शनिवार, 26 दिसंबर 2026
- पौष विनायक चतुर्थी — सोमवार, 11 जनवरी 2027
- लंबोदर (सकट) संकष्टी चतुर्थी — सोमवार, 25 जनवरी 2027
- माघ विनायक चतुर्थी — बुधवार, 10 फ़रवरी 2027
- फाल्गुन विनायक चतुर्थी — शुक्रवार, 12 मार्च 2027
- भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 25 मार्च 2027
संकष्टी चतुर्थी («संकट हरने वाली चौथ») हर चंद्र-मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को होती है — पूर्णिमा के चार दिन बाद; यह गणेश का मासिक व्रत है जो सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है और रात चाँद को अर्घ्य देकर खोला जाता है (दिल्ली का चंद्रोदय-समय ऊपर)। मंगलवार को पड़े तो «अंगारकी संकष्टी» — साल-भर की संकष्टी का फल एक में (महाराष्ट्र में सबसे बड़ी)।
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी «विनायक चतुर्थी» है — दोपहर (मध्याह्न) में गणेश-पूजा, चाँद नहीं देखते (कलंक-कथा); भाद्रपद की विनायक चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी, माघ की संकष्टी ही सकट चौथ। हर संकष्टी का अपना नाम — विकट, एकदंत, कृष्णपिंगल, गजानन, हेरम्ब, विघ्नराज, वक्रतुंड, गणाधिप, आखुरथ, लंबोदर, द्विजप्रिय, भालचंद्र (ऊपर सूची में)। स्त्रियाँ संतान-सुख व घर के संकट-निवारण हेतु, महाराष्ट्र में परिवार-भर। नीचे विधि, सामग्री, कथा, मोदक-भोजन और इलाक़ों की रीत।
महत्व — यह व्रत क्यों
गणेश-पुराण/नारद-पुराण: कृष्ण चतुर्थी को गणेश-व्रत व चंद्र-अर्घ्य से संकट-नाश, ऋण-मुक्ति, विघ्न-निवारण, संतान-सुख; चंद्रमा को गणेश ने कलंक का शाप देकर संकष्टी पर उसी को अर्घ्य का विधान दिया — चंद्र-दर्शन के बिना संकष्टी पूरी नहीं (विनायक चतुर्थी पर उल्टा — चंद्र-दर्शन वर्जित)।
अंगारकी संकष्टी: मंगल (अंगारक) ने गणेश की तपस्या कर वरदान पाया कि मंगलवार की संकष्टी उनके नाम से हो और उसका फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर — इसलिए महाराष्ट्र-कर्नाटक में अंगारकी पर मंदिरों में लाखों (सिद्धिविनायक, अष्टविनायक, दगडूशेठ)। संकष्टी की तिथि चंद्रोदय-व्यापिनी — जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी हो; विनायक की मध्याह्न-व्यापिनी।
12 संकष्टी के नाम (अमांत माह से): चैत्र-विकट, वैशाख-एकदंत, ज्येष्ठ-कृष्णपिंगल, आषाढ़-गजानन, श्रावण-हेरम्ब (बहुला), भाद्रपद-विघ्नराज, आश्विन-वक्रतुंड, कार्तिक-गणाधिप, मार्गशीर्ष-आखुरथ, पौष-लंबोदर (= सकट चौथ), माघ-द्विजप्रिय, फाल्गुन-भालचंद्र; अधिक मास में विभुवन संकष्टी।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह संकष्टी की घरेलू विधि है — दिन का व्रत, शाम गणेश-पूजा व कथा, चंद्रोदय पर अर्घ्य व पारण; विनायक चतुर्थी की दोपहर-पूजा अंत में।
- सुबह स्नान, लाल/पीले वस्त्र; संकल्प — «(नाम) संकष्टी चतुर्थी व्रत, संकट-निवारण/संतान-सुख हेतु, चंद्र-दर्शन-अर्घ्य के बाद पारण»; दिन-भर निर्जला (कठोर) या फलाहार (दूध-फल-साबूदाना); गणेश-स्मरण «ॐ गं गणपतये नमः»।
- शाम (सूर्यास्त के बाद, चंद्रोदय से पहले): गणेश-प्रतिमा/चित्र को स्नान (पंचामृत-जल), लाल वस्त्र, चंदन-सिंदूर, दूब (21 दूर्वा — 3 या 5 पत्ती वाली), लाल फूल (जासवंद/गुड़हल), शमी-पत्र, मोदक/लड्डू (21), फल, पान-सुपारी; धूप-दीप; गणेश-अथर्वशीर्ष/संकटनाशन गणेश-स्तोत्र («प्रणम्य शिरसा देवं…»), गणेश-चालीसा।
- कथा (नीचे — उस माह की संकष्टी कथा या सामान्य गणेश-चंद्र कथा) सुनना; आरती «सुखकर्ता दुःखहर्ता» / «जय गणेश देवा»; कपूर-आरती।
- चंद्रोदय (ऊपर समय — कृष्ण चतुर्थी का चाँद रात 8:30-10 के बीच निकलता है): चाँद को जल-दूध-अक्षत-फूल से अर्घ्य, «ॐ सोमाय नमः», चाँद के दर्शन; फिर गणेश को नैवेद्य; बादल हों तो चंद्रोदय-समय के बाद दिशा में अर्घ्य।
- पारण: अर्घ्य के बाद गणेश-प्रसाद (मोदक/लड्डू), फिर भोजन — सात्विक (महाराष्ट्र में उकडीचे मोदक, वरण-भात; उत्तर में तिल-गुड़/लड्डू-खीर); कई घर बिना नमक/एक बार।
- अंगारकी संकष्टी: वही विधि, गणेश-मंदिर दर्शन, लाल फूल-गुड़-चना, मंगल-शांति हेतु मसूर-गुड़ दान; 21 मोदक।
- विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष): व्रत सुबह से दोपहर तक; मध्याह्न (11-1:30, अभिजित ऊपर) में गणेश-पूजा, दूर्वा-मोदक, कथा; दोपहर बाद पारण; इस दिन चाँद न देखें (देख लें तो स्यमंतक-कथा पढ़ें); भाद्रपद की विनायक = गणेश चतुर्थी (अलग पन्ना)।
- स्त्री-रीत: संतान-कामना हेतु 12 संकष्टी (एक वर्ष) का संकल्प; बच्चों के कल्याण हेतु माताएँ; उद्यापन — 12 पूरी होने पर गणेश-हवन, 21 दूर्वा, ब्राह्मण-भोजन, दान (महाराष्ट्र में «संकष्टी उद्यापन»)।
पूजा-सामग्री की सूची
दूर्वा, मोदक, लाल फूल, सिंदूर, चंद्र-अर्घ्य का लोटा — संकष्टी की सूची।
- गणेश-प्रतिमा/चित्र, चौकी, लाल कपड़ा, कलश, नारियल, आम के पत्ते
- दूर्वा (21 — 3/5 पत्ती), लाल फूल (जासवंद-गुड़हल-गेंदा), शमी-पत्र, बेलपत्र (कुछ रीत)
- चंदन, सिंदूर, रोली, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, मौली, जनेऊ, इत्र, पान-सुपारी-लौंग-इलायची
- पंचामृत, गंगाजल; दीपक-घी, धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी
- नैवेद्य: मोदक (उकडीचे/तले) 21, बेसन/बूँदी/तिल के लड्डू, फल (केला-अमरूद-सेब), गुड़-चना, खीर, पंचमेवा
- चंद्र-अर्घ्य: तांबे का लोटा, जल-दूध-अक्षत-फूल
- गणेश-अथर्वशीर्ष/संकटनाशन-स्तोत्र/संकष्टी-कथा पुस्तक, रुद्राक्ष/चंदन माला
- अंगारकी/मंगल-शांति: लाल वस्त्र, गुड़-चना, मसूर (दान)
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गणेश-चंद्र कलंक: गणेश की रूप-रचना (लंबोदर, गज-मुख) पर चंद्रमा हँसा; गणेश ने शाप दिया — «जो तुझे देखेगा, कलंक पाएगा»; देवताओं की प्रार्थना पर शाप घटा — केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) का चंद्र-दर्शन कलंक देगा, और कृष्ण चतुर्थी (संकष्टी) को जो चंद्र-दर्शन कर गणेश को पूजेगा, उसके संकट कटेंगे। इसीलिए संकष्टी पर चाँद देखकर व्रत खुलता है, विनायक चतुर्थी पर चाँद नहीं देखते।
अंगारक-कथा: भारद्वाज ऋषि व पृथ्वी के पुत्र अंगारक (मंगल) ने गणेश की कठोर तपस्या की; माघ कृष्ण चतुर्थी, मंगलवार को गणेश प्रकट हुए — «वर माँगो»; अंगारक ने माँगा «मेरा नाम आपके साथ जुड़े और जो मंगलवार की संकष्टी करे उसे वर्ष-भर की संकष्टी का फल मिले» — तभी से अंगारकी संकष्टी; मंगल ग्रह-मंडल में स्थान पाया, मंगल-दोष की शांति गणेश से।
कृष्ण-स्यमंतक (विनायक चतुर्थी): कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चाँद देख लिया; स्यमंतक-मणि चोरी का झूठा कलंक लगा; नारद ने बताया यह चतुर्थी-चंद्र-दर्शन का फल; कृष्ण ने गणेश-व्रत किया, मणि मिली, कलंक मिटा — इसलिए विनायक चतुर्थी को चाँद न देखें; देख लें तो स्यमंतक-कथा का पाठ/श्रवण उपाय। हर माह की संकष्टी की अपनी कथा (गणेश-पुराण) — व्रत-दिन पढ़ें।
मोदक, दूर्वा, गुड़-चना, तिल-लड्डू — गणपति की थाली; चाँद के बाद भोजन
संकष्टी को दिन-भर व्रत, चंद्र-अर्घ्य के बाद मोदक-प्रसाद व भोजन; गणेश को मोदक (उकडीचे — भाप के — महाराष्ट्र की पहचान), लड्डू (बेसन-बूँदी-तिल), गुड़-चना, केला; सकट चौथ पर तिलकुट; उत्तर में लड्डू-खीर-पूड़ी; व्रत-दिन दूध-फल-साबूदाना।
- उकडीचे मोदक (चावल-आटे की भाप की परत, नारियल-गुड़ भरावन — 21), तले मोदक, बेसन/बूँदी/मोतीचूर लड्डू, तिल-गुड़ लड्डू (माघ-संकष्टी/सकट)
- गुड़-चना (भीगा/भुना), केला-अमरूद-सेब, पंचमेवा, खीर, पूड़ी-हलवा (उत्तर), दूर्वा-जल
- व्रत-फलाहार: दूध, फल, साबूदाना-खिचड़ी, मखाना, नारियल-पानी; निर्जला रखने वाले — कुछ नहीं
- पारण-भोजन: महाराष्ट्र — वरण-भात-मोदक, पुरण-पोली (अंगारकी); कर्नाटक — कडुबु-पायसम; तमिल (संकटहर चतुर्थी) — कोळुक्कट्टै (मोदक), सुंडल; गुजरात — लापसी-लड्डू; उत्तर — लड्डू-खीर-पूड़ी, तिलकुट (सकट)
- अंगारकी: 21 मोदक व लाल फूल, मंगल-शांति हेतु गुड़-चना दान; विनायक चतुर्थी (दोपहर): मोदक-केला-पंचमेवा, मध्याह्न-भोजन
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
महाराष्ट्र की अंगारकी, तमिल की संकटहर, उत्तर की सकट, कर्नाटक की गणेश-भक्ति — हर माह की चौथ।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- संकष्टी: चंद्रोदय (ऊपर समय) के बाद अर्घ्य देकर ही पारण; विनायक: दोपहर पूजा, चाँद नहीं
- गणेश को दूर्वा (21), मोदक, लाल फूल-सिंदूर; संकटनाशन-स्तोत्र/अथर्वशीर्ष
- अंगारकी पर मंदिर-दर्शन, 21 मोदक, मंगल-शांति दान (गुड़-चना-मसूर)
- 12 संकष्टी का संकल्प → उद्यापन; संतान/संकट-निवारण की कामना
- गर्भवती/रोगी फलाहार; बच्चों को मोदक-प्रसाद
❌ क्या न करें
- संकष्टी पर चाँद देखे बिना व्रत खोलना; विनायक चतुर्थी पर चाँद देखना (कलंक — देख लें तो स्यमंतक-कथा)
- गणेश को तुलसी (वर्जित — केवल गणेश चतुर्थी को छोड़कर कुछ रीत में), सूखी/कटी दूर्वा, केतकी
- व्रत-दिन तामसिक भोजन, क्रोध, झूठ; काले वस्त्र
- जबरन निर्जला; बच्चों-बुज़ुर्गों पर कठोर व्रत
- प्लास्टर की मूर्ति नदी में (विसर्जन नहीं — संकष्टी पर मूर्ति स्थायी घर की)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगली संकष्टी चतुर्थी कब है और चाँद कब निकलेगा? 2026
ऊपर अगली संकष्टी की तिथि, चंद्रोदय-समय (दिल्ली) व आने वाली 12 तिथियाँ नाम-सहित (अंगारकी हो तो लिखा है) दी हैं; कृष्ण चतुर्थी का चाँद रात 8:30-10 बजे के बीच; अपने शहर में ±10-20 मिनट — पंचांग से मिला लें।
संकष्टी और विनायक चतुर्थी में अंतर?
संकष्टी = कृष्ण पक्ष चतुर्थी (पूर्णिमा के बाद) — व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय, चाँद को अर्घ्य देकर पारण, संकट-निवारण; विनायक = शुक्ल पक्ष चतुर्थी (अमावस्या के बाद) — दोपहर में पूजा, चाँद न देखें (कलंक-कथा); भाद्रपद की विनायक ही गणेश चतुर्थी, माघ की संकष्टी ही सकट चौथ; ऊपर सूची में दोनों।
अंगारकी संकष्टी क्या है, इतनी बड़ी क्यों?
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी — अंगारक (मंगल) की तपस्या से गणेश का वर कि मंगलवार की संकष्टी का फल वर्ष-भर की संकष्टियों के बराबर; साल में 1-3 बार; महाराष्ट्र में लाखों उपवास व मंदिर-कतार; मंगल-दोष वालों के लिए विशेष; ऊपर सूची में «(अंगारकी)» लिखा मिलेगा।
बादल हों, चाँद न दिखे तो?
चंद्रोदय-समय (ऊपर) के बाद चाँद की दिशा (पूर्व) में अर्घ्य दें या थाली में दर्पण/जल में प्रतिबिंब मानकर — पारण मान्य; व्रत पूरा; रात बहुत देर न करें; चंद्रोदय बहुत देर (10 बजे बाद) हो तो रोगी-गर्भवती पहले फलाहार लें।
संकष्टी किस कामना से और कितनी बार?
संकट-निवारण, ऋण-रोग-मुक्ति, संतान-सुख, विघ्न-हरण, कार्य-सिद्धि; माताएँ बच्चों के लिए; संकल्प 12 (एक वर्ष) या 21 संकष्टी का, फिर उद्यापन (गणेश-हवन, 21 दूर्वा, ब्राह्मण-भोजन); बीच में छूटे तो अगली अंगारकी से फिर।
गणेश को दूर्वा और मोदक ही क्यों?
अनलासुर-कथा — अग्नि-दैत्य को निगलकर गणेश के पेट में जलन हुई, ऋषियों ने 21 दूर्वा खिलाकर शांत की — तभी से दूर्वा प्रिय (3 या 5 पत्ती की, 21 जुड़ी); मोदक (मोद = आनंद) पार्वती ने बनाया, गणेश का प्रिय — 21 मोदक; लाल फूल-सिंदूर गणेश के रजोगुण-तेज के प्रतीक; तुलसी गणेश को वर्जित (शाप-कथा)।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। चंद्रोदय-समय दिल्ली का है — अपने शहर का पंचांग देखें; स्वास्थ्य-स्थिति में निर्जला न रखें।
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