🐘 गणेश चतुर्थी (व ऋषि पंचमी) 2027
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी — गणपति का जन्म व घर में स्थापना (मध्याह्न), मोदक, 21 दूर्वा, इस रात चंद्र-दर्शन वर्जित; अगले दिन ऋषि पंचमी, दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन।
- गणेश चतुर्थी — स्थापना (मध्याह्न) — शनिवार, 4 सितंबर 2027
- डेढ़ दिन का विसर्जन — रविवार, 5 सितंबर 2027
- ऋषि पंचमी (स्त्रियों का व्रत) — रविवार, 5 सितंबर 2027
- पाँच दिन का विसर्जन — बुधवार, 8 सितंबर 2027
- सात दिन का विसर्जन — शुक्रवार, 10 सितंबर 2027
- अनंत चतुर्दशी — दस दिन का विसर्जन — मंगलवार, 14 सितंबर 2027
गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को — हरतालिका तीज के अगले दिन — मनाई जाती है। इसी दिन मध्याह्न में गणेश जी का जन्म हुआ, इसलिए स्थापना का मुहूर्त दोपहर (अभिजित के आस-पास)। घर में मिट्टी के गणपति डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन विराजते हैं और अनंत चतुर्दशी को विसर्जन — «गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या»।
अगले दिन भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी — स्त्रियों का सप्तऋषि-व्रत (रजस्वला-दोष-शुद्धि व सात ऋषियों को धन्यवाद), बिना हल की उपज का भोजन; नेपाल-महाराष्ट्र-राजस्थान में विशेष। नीचे इस साल की तिथियाँ (स्थापना से विसर्जन तक), मध्याह्न-मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, मोदक-भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
गणेश विघ्नहर्ता व मंगल-कर्ता — हर कार्य का आरंभ; भाद्रपद चतुर्थी उनकी जन्म-तिथि — स्थापना मध्याह्न (सूर्योदय से दिन का दूसरा भाग, दोपहर 11-1:30 लगभग) में; लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव बनाया (महाराष्ट्र)।
इस रात चंद्र-दर्शन वर्जित — गणेश के शाप से «मिथ्या-दोष» (झूठा कलंक); देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» (स्यमंतक-कथा) का पाठ; कृष्ण पर भी यही कलंक लगा था। संकष्टी चतुर्थी (हर माह कृष्ण-चतुर्थी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है, इस चतुर्थी पर नहीं।
ऋषि पंचमी — कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ (सप्तऋषि) + अरुंधती की पूजा; मासिक-धर्म में अनजाने हुए दोष की शुद्धि का स्त्री-व्रत; «बिना जोते» उपज (साँवा-मोरधन-फल) का एक समय भोजन; नेपाल में तीज के तीसरे दिन दतिवन-स्नान।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — चतुर्थी को मध्याह्न में स्थापना-प्राणप्रतिष्ठा, रोज़ सुबह-शाम पूजा-आरती-मोदक, पंचमी को ऋषि-पूजा, अंत में विसर्जन।
- तैयारी (एक दिन पहले/हरतालिका के साथ): मिट्टी (शाडू) की गणेश-मूर्ति (पर्यावरण-अनुकूल, बिना रासायनिक रंग, घर के लिए 1-2 फ़ुट), मंडप/चौकी-सजावट (फूल, केले के खंभे, बिजली-लड़ी, मखर), लाल/पीला कपड़ा, कलश; घर की सफ़ाई।
- चतुर्थी — मध्याह्न-मुहूर्त (ऊपर अभिजित/तिथि; मध्याह्न ≈ दिन का मध्य-भाग): मूर्ति लाते समय «गणपति बप्पा मोरया», मुख ढककर; स्थापना पूर्व/उत्तर-पूर्व मुख; गणपति के दाएँ रिद्धि-सिद्धि (या सुपारी); कलश-वरुण-पूजन; प्राण-प्रतिष्ठा — «ॐ गं गणपतये नमः» के साथ मूर्ति में प्राण-आवाहन (पंडित या घर का बड़ा — मंत्र पुस्तक से)।
- षोडशोपचार पूजा: स्नान (जल-पंचामृत), वस्त्र (जनेऊ, धोती-उपरना), सिंदूर/लाल चंदन, 21 दूर्वा-दल (तीन/पाँच पत्तियों वाली, जोड़े में), शमी-पत्र, लाल-पीले फूल (गुड़हल-गेंदा), 21 मोदक (या लड्डू), नारियल, पान-सुपारी, दीप-धूप; «वक्रतुंड महाकाय…», गणेश-अथर्वशीर्ष (हो सके तो), संकटनाशन गणेश-स्तोत्र; आरती «सुखकर्ता दुखहर्ता» / «जय गणेश देवा»।
- रोज़ (जितने दिन विराजें): सुबह-शाम आरती, दूर्वा, मोदक/लड्डू/फल का भोग, अथर्वशीर्ष या «ॐ गं गणपतये नमः» 108; परिवार-पड़ोस को प्रसाद; घर में गणपति रहते हुए तामसिक भोजन-कलह नहीं; मूर्ति को अकेला न छोड़ें (कोई घर में रहे)।
- चतुर्थी की रात चंद्रमा न देखें (पर्दा/नज़र नीचे); देख लें तो स्यमंतक-मंत्र «सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः, सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः» का पाठ।
- ऋषि पंचमी (अगला दिन, स्त्रियाँ): सुबह स्नान (नेपाल-राजस्थान में दतिवन/अपामार्ग की टहनी से दाँत-शुद्धि, मिट्टी-लेप), सप्तऋषि व अरुंधती की पूजा (चित्र/सात सुपारी), सात प्रकार का अन्न-दान, «बिना हल जोती» उपज (साँवा/मोरधन/भगर के चावल, फल, दूध) का एक समय भोजन; कथा (उत्तंक-विदुर्भ); व्रत रजस्वला-दोष-शुद्धि व परिवार-कल्याण हेतु।
- विसर्जन (डेढ़/3/5/7/10वें दिन — ऊपर तिथियाँ): उत्तर-पूजा — आरती, नारियल, दक्षिणा, «पुढच्या वर्षी लवकर या»; मूर्ति को अक्षत-फूल के साथ थोड़ा हिलाकर (विदाई-संकेत), दही-शक्कर/मोदक साथ; घर के बड़े-बच्चे साथ; नदी-तालाब/कृत्रिम कुंड/घर की बाल्टी-टब में (मिट्टी की मूर्ति) विसर्जन — जल फिर पौधों में; विसर्जन का जल-मिट्टी सम्मान से।
- अनंत चतुर्दशी (दसवाँ दिन): विसर्जन-जुलूस (ढोल-गुलाल); उसी दिन अनंत-व्रत (विष्णु का 14 गाँठ का अनंत-सूत्र — अलग पन्ना); अगले दिन से पितृ पक्ष।
पूजा-सामग्री की सूची
मिट्टी की मूर्ति, 21 दूर्वा, 21 मोदक, लाल फूल — गणपति की पूजा का सार; ऋषि पंचमी के लिए बिना-हल का अन्न।
- गणेश की मिट्टी (शाडू) की मूर्ति, चौकी/मंडप, लाल-पीला कपड़ा, मखर/सजावट, केले के खंभे, फूल-लड़ी
- कलश, नारियल, आम के पत्ते, सुपारी (रिद्धि-सिद्धि), सिक्का, मौली, अक्षत
- दूर्वा (21 जोड़े, 3/5 पत्तियों वाली), शमी-पत्र, लाल-पीले फूल (गुड़हल-गेंदा-कनेर), फूल-माला, पत्री (21 पत्तियाँ — महाराष्ट्र)
- सिंदूर, लाल चंदन, हल्दी, कुमकुम, जनेऊ, वस्त्र (धोती-उपरना/पीला-लाल), इत्र
- भोग: 21 मोदक (उकडीचे/तले), बेसन-बूंदी लड्डू, पंचामृत, फल (केला-सेब-अनार), नारियल, पान-सुपारी-लौंग-इलायची, पंचखाद्य
- दीपक (घी), धूप, कपूर, अगरबत्ती, आरती-थाली, घंटी, शंख
- गणेश-अथर्वशीर्ष/स्तोत्र/आरती पुस्तक, संकष्ट-नाशन स्तोत्र
- ऋषि पंचमी: सप्तऋषि-चित्र/7 सुपारी, अरुंधती-प्रतीक, दतिवन/अपामार्ग की टहनी, सात प्रकार का अन्न (दान), साँवा/मोरधन/भगर के चावल, दूध-फल
- विसर्जन: दही-शक्कर/मोदक (साथ), अक्षत-फूल, नारियल, कृत्रिम कुंड/टब (घर पर), गुलाल
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पंचांग देखें →व्रत-कथा
पार्वती ने स्नान से पहले अपने उबटन (मैल) से एक बालक बनाया, प्राण फूँके और द्वार पर पहरा बिठाया — «किसी को अंदर न आने देना»। शिव आए, बालक ने रोका; क्रोध में शिव ने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया। पार्वती के विलाप और रौद्र-रूप पर शिव ने गणों को भेजा — «जो पहला जीव उत्तर-दिशा में सिर करके सोता मिले, उसका सिर लाओ» — हाथी का सिर आया; शिव ने बालक को गज-मुख से जिलाया, गणों का अधिपति (गणपति) बनाया और वर दिया — «हर पूजा में पहले तुम्हारा नाम»। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, मध्याह्न।
चंद्र-कथा — एक चतुर्थी की रात गणेश मोदक खाकर मूषक पर लौट रहे थे, गिरे; चंद्रमा हँसा। गणेश ने शाप दिया — «जो तुम्हें इस रात देखेगा, मिथ्या-कलंक पाएगा»। चंद्रमा की क्षमा पर शाप को इसी एक रात (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) तक सीमित किया। द्वापर में कृष्ण ने इस रात दूध में चंद्र-छाया देखी और स्यमंतक-मणि चुराने का झूठा आरोप लगा — जांबवान से युद्ध कर मणि लौटाई, तब कलंक मिटा; इसीलिए दर्शन हो जाए तो स्यमंतक-कथा/मंत्र।
ऋषि पंचमी की कथा — विदर्भ में उत्तंक ब्राह्मण की पत्नी सुशीला; उनकी पुत्री विधवा होकर घर आई, एक दिन उसके शरीर में कीड़े पड़ गए। पिता ने ध्यान से देखा — पूर्वजन्म में रजस्वला-अवस्था में उसने रसोई-बर्तन छुए थे, उसी दोष से यह। उत्तंक ने पुत्री से ऋषि पंचमी का व्रत कराया — सप्तऋषि-पूजा, बिना हल का अन्न, दान — दोष मिटा। इसलिए स्त्रियाँ इस दिन अनजाने दोषों की शुद्धि व ऋषियों (ज्ञान-परंपरा) के प्रति कृतज्ञता का व्रत रखती हैं।
मोदक — बप्पा का प्रिय; ऋषि पंचमी का बिना-हल भोजन
उकडीचे मोदक (चावल के आटे की भाप-पकी थैली में नारियल-गुड़ का भरावन) महाराष्ट्र की पहचान; उत्तर में तले मोदक/बेसन-बूंदी लड्डू; 21 की संख्या। ऋषि पंचमी को साँवा/मोरधन (भगर) के चावल — बिना बैल-हल की उपज।
- उकडीचे मोदक (21): भरावन — 1 नारियल कद्दूकस + 1 कप गुड़ + इलायची-खसखस, धीमी आँच पर; आवरण — 1 कप चावल का आटा, 1¼ कप उबलते पानी-घी-नमक में गूँथकर; थैली बनाकर भाप में 10-12 मिनट; घी के साथ
- तले मोदक (मैदा-मावा), बेसन-बूंदी लड्डू, पंचखाद्य (नारियल-खसखस-मेवे-शक्कर-घी), पूरनपोली, श्रीखंड-पूरी, वरण-भात (महाराष्ट्र का नैवेद्य)
- रोज़ का भोग: मोदक/लड्डू, फल, दूर्वा; विसर्जन-दिन दही-शक्कर या मोदक साथ
- ऋषि पंचमी: साँवा/मोरधन/भगर के चावल (बिना हल की उपज), दूध-दही, फल, बिना-हल की सब्ज़ियाँ (कंद-मूल), सेंधा नमक — एक समय; बैल-हल से उगा अन्न नहीं
- गणपति-काल: सात्विक भोजन, प्याज़-लहसुन-मांस नहीं; प्रसाद रोज़ बाँटना
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
महाराष्ट्र का सार्वजनिक गणेशोत्सव, दक्षिण का विनायक चविति, उत्तर का घर-गणपति — बप्पा हर जगह।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- स्थापना मध्याह्न में (ऊपर अभिजित/तिथि), मिट्टी की मूर्ति, पूर्व/उत्तर-पूर्व मुख
- 21 दूर्वा, 21 मोदक, लाल फूल; रोज़ सुबह-शाम आरती; मूर्ति अकेली न रहे
- चतुर्थी की रात चंद्रमा न देखें; देख लें तो स्यमंतक-मंत्र
- ऋषि पंचमी को स्त्रियाँ सप्तऋषि-पूजा, बिना-हल का भोजन, दान
- विसर्जन घर के टब/कृत्रिम कुंड में — जल पौधों में; प्लास्टर-मूर्ति नहीं
❌ क्या न करें
- प्लास्टर-ऑफ़-पेरिस/रासायनिक रंग की मूर्ति — नदी-तालाब प्रदूषित; थर्मोकोल सजावट नहीं
- गणपति को तुलसी नहीं (एक विशेष कथा — शाप); केतकी नहीं; टूटी दूर्वा नहीं
- गणपति-काल में तामसिक भोजन, कलह, घर ख़ाली छोड़ना
- विसर्जन-जुलूस में नशा, तेज़ आवाज़ रात 10 के बाद, बच्चों को गहरे पानी में — नहीं
- ऋषि पंचमी को हल-जोता अन्न (गेहूँ-चावल-दाल) — व्रतियों को नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गणेश चतुर्थी 2027 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है — पंचांग-गणना से; स्थापना का मध्याह्न-मुहूर्त (अभिजित/तिथि-खिड़की), ऋषि पंचमी और डेढ़/5/7/10 दिन के विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) की तिथियाँ भी तालिका में।
स्थापना का सही समय?
मध्याह्न-काल — दिन के तीन भागों में बीच वाला (लगभग सुबह 10:30-दोपहर 1:30), उसमें अभिजित (~11:40-12:30) श्रेष्ठ; चतुर्थी तिथि मध्याह्न में जिस दिन हो, वही दिन; राहुकाल टालें — ऊपर समय।
इस रात चाँद क्यों नहीं देखते?
गणेश जी के शाप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्र-दर्शन से मिथ्या-कलंक (झूठा आरोप) लगता है — कृष्ण पर स्यमंतक-मणि का लगा था; भूल से देख लें तो «सिंहः प्रसेनमवधीत्…» मंत्र/स्यमंतक-कथा पढ़ लें। बाक़ी चतुर्थियों (संकष्टी) पर चंद्र-अर्घ्य होता है।
गणपति कितने दिन रखें?
डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिन (अनंत चतुर्दशी) — कुल-परंपरा/सुविधा से; एक बार जो दिन तय हों वही हर साल रखना अच्छा; डेढ़ दिन घर के लिए सबसे सरल। ऊपर सब विसर्जन-तिथियाँ।
ऋषि पंचमी का व्रत कौन और क्यों?
स्त्रियाँ — रजस्वला-अवस्था में अनजाने हुए दोषों की शुद्धि व सप्तऋषियों की कृतज्ञता के लिए; बिना हल-जुते अन्न (साँवा/मोरधन) का एक समय भोजन, सप्तऋषि-अरुंधती पूजा, दान; नेपाल-महाराष्ट्र-राजस्थान-यूपी में प्रचलित; पुरुष भी रख सकते हैं।
घर पर विसर्जन कैसे करें?
मिट्टी की मूर्ति बड़े टब/बाल्टी/ड्रम में — उत्तर-पूजा के बाद धीरे-धीरे जल में; घुलने पर वह मिट्टी-जल गमलों/बगीचे में; प्लास्टर की हो तो नगर-निगम के कृत्रिम कुंड में। नदी में सिर्फ़ मिट्टी की, बिना सजावट-प्लास्टिक।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व मंडल की रीत सर्वोपरि है। मूर्ति मिट्टी की, विसर्जन पर्यावरण का ध्यान रखकर।
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