🧵 अनंत चतुर्दशी 2026
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — अनंत (विष्णु) की पूजा, 14 गाँठों का अनंत-सूत्र (पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ), 14 वर्ष का व्रत; गणेश-विसर्जन का दिन; युधिष्ठिर-कौंडिन्य की कथा; जैन क्षमावाणी।
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को होती है — गणेश चतुर्थी के दस दिन बाद, पितृ-पक्ष से एक दिन पहले। इस दिन भगवान विष्णु के «अनंत» (शेष-शायी, अनंत-स्वरूप) की पूजा होती है और 14 गाँठों वाला रेशमी/सूती अनंत-सूत्र (डोरा) हल्दी-रंगा हाथ पर बाँधा जाता है — पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ; यह व्रत लगातार 14 वर्ष रखने का विधान (फिर उद्यापन)।
उसी दिन महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण में गणपति-विसर्जन (दस-दिवसीय गणेशोत्सव का समापन — «गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या»), जैन-समाज में पर्युषण-समापन के बाद क्षमावाणी (मिच्छामि दुक्कडम्), बिहार-नेपाल में «अनंत-पूजा» की खीर-पूड़ी। स्त्रियाँ परिवार के लिए अनंत-सूत्र बाँधती हैं, पंचामृत-कथा, 14 प्रकार के पकवान (कई घर)। नीचे इस साल की तिथि, विधि, सामग्री, कथा, प्रसाद और इलाक़ों की रीत।
महत्व — यह व्रत क्यों
अनंत = विष्णु का वह रूप जिसका आदि-अंत नहीं (शेषनाग भी «अनंत»); 14 गाँठें = 14 लोक (सात ऊपर, सात नीचे) — अनंत-सूत्र पहनने वाले पर विष्णु की सब लोकों में रक्षा; अग्नि-पुराण/भविष्य-पुराण में युधिष्ठिर को कृष्ण ने खोया राज्य पाने के लिए यह व्रत बताया — कठिनाई-ऋण-रोग से मुक्ति, खोया वैभव लौटना।
व्रत का नियम: 14 वर्ष लगातार, हर वर्ष नया सूत्र, पुराना जल में; बीच में छूटे तो दोबारा; 14वें वर्ष उद्यापन — 14 ब्राह्मण-भोजन, 14 वस्तुओं का दान; स्त्रियाँ पति-संतान की रक्षा व अखंड सौभाग्य के लिए, पुरुष खोए धन-पद-स्वास्थ्य के लिए; कथा में कौंडिन्य ऋषि ने पत्नी शीला का सूत्र फेंका, सब नष्ट — फिर अनंत की खोज (नीचे)।
गणेश-विसर्जन: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पधारे गणपति का दसवें दिन (चतुर्दशी) विसर्जन — मुंबई-पुणे की विशाल शोभायात्राएँ (लालबागचा राजा), ढोल-ताशा-गुलाल; अनंत चतुर्दशी की पूजा सुबह, विसर्जन दोपहर-शाम; दोनों एक साथ होने से यह दिन उत्तर व पश्चिम भारत को जोड़ता है; अगले दिन से पितृ-पक्ष — इसलिए आज ही सब मांगलिक समापन।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — अनंत-सूत्र की पूजा व बंधन, कथा, 14 पकवान; साथ में गणपति-विसर्जन जहाँ रीत हो।
- सुबह स्नान, पीले/सफ़ेद वस्त्र; संकल्प — «अनंत-व्रत (कितना-वाँ वर्ष) परिवार-रक्षा/खोया वैभव हेतु»; पूजा-स्थान पर कलश, उस पर कुशा से बना शेषनाग (7 फन) या विष्णु-चित्र, अनंत-सूत्र (14 गाँठ, हल्दी-रंगा) सामने।
- अनंत-सूत्र: कच्चे सूत/रेशम के 14 तार (या मौली), हल्दी-जल में रंगकर 14 गाँठें — हर गाँठ पर «ॐ अनंताय नमः»; परिवार के हर सदस्य के लिए अलग; पूजा में विष्णु के आगे रखें।
- पूजा: कलश-शेषनाग/विष्णु को पंचामृत, चंदन-अक्षत, तुलसी, पीले फूल, धूप-दीप; अनंत-सूत्र को हल्दी-कुमकुम-अक्षत-फूल; नैवेद्य — खीर-पूड़ी/14 प्रकार के पकवान (हो सके तो), केला, पान; मंत्र — «अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव, अनन्तरूपे विनियोजयस्व ह्यनन्तसूत्राय नमो नमस्ते»; विष्णु-सहस्रनाम/अनंत-कथा (नीचे)।
- सूत्र-बंधन: कथा के बाद पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ पर — पति पत्नी को, माँ बच्चों को बाँधे; पुराने वर्ष का सूत्र उतारकर जल/पीपल में; सूत्र साल-भर या कम-से-कम 14 दिन पहनें (घर-रीत)।
- 14 वस्तुएँ: कई घर 14 फल, 14 पूड़ी-पकवान, 14 पान-सुपारी अनंत को अर्पित करते हैं — फिर ब्राह्मण/बहन-बुआ को; 14वें वर्ष उद्यापन में 14 ब्राह्मण-भोजन।
- व्रत-भोजन: एक समय, बिना नमक (कठोर रूप) या फलाहार; शाम आरती के बाद खीर-पूड़ी; रात जागरण (हो सके तो)।
- गणपति-विसर्जन (जहाँ स्थापना हुई): सुबह अनंत-पूजा, फिर गणपति की उत्तर-पूजा (आरती, मोदक, नारियल, दक्षिणा, «पुनरागमनाय च»), दही-भात का बंडल यात्रा के लिए, शोभायात्रा, जल-विसर्जन (कृत्रिम तालाब/घर की बाल्टी — पर्यावरण), मिट्टी पेड़ में।
- अगले दिन से पितृ-पक्ष: आज सब मांगलिक सामान समेटें, कल से श्राद्ध-तर्पण; अनंत-सूत्र पहने रहना ठीक।
पूजा-सामग्री की सूची
अनंत-सूत्र, कुशा-शेषनाग, कलश, पंचामृत, 14 पकवान — अनंत चतुर्दशी की सूची।
- अनंत-सूत्र: कच्चा सूत/रेशमी डोरा (14 तार), हल्दी (रंगने को) — या तैयार अनंत-डोरा (बाज़ार में)
- कलश, कुशा (शेषनाग बनाने को) या विष्णु/अनंत-शेषशायी चित्र, आम के पत्ते, नारियल, पीला कपड़ा
- पंचामृत (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर), गंगाजल, तुलसी-दल, चंदन, अक्षत, कुमकुम, हल्दी, मौली
- पीले फूल (गेंदा-कमल), माला, धूप, दीपक, घी, कपूर, आरती-थाली, पान-सुपारी 14
- नैवेद्य: खीर, पूड़ी, 14 प्रकार के पकवान/फल (हो सके तो), केला, मिठाई, पंजीरी
- अनंत-कथा/विष्णु-सहस्रनाम पुस्तक, दक्षिणा, ब्राह्मण/बहन-बुआ को बायना
- गणपति-विसर्जन (जहाँ रीत): मोदक, नारियल, दही-भात, गुलाल, ढोल, कृत्रिम तालाब/बाल्टी
- उद्यापन (14वें वर्ष): 14 ब्राह्मण-भोजन-सामग्री, 14 वस्तुओं का दान (वस्त्र-अन्न-बर्तन)
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सुमंतु ऋषि की पुत्री शीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से हुआ; विदा के रास्ते नदी-किनारे स्त्रियाँ अनंत-पूजा कर रही थीं — शीला ने भी 14 गाँठों का सूत्र बाँधा, व्रत किया, कौंडिन्य का घर धन-धान्य से भरा। एक दिन कौंडिन्य ने शीला के हाथ पर सूत्र देखा — «यह जादू-टोना है?» — क्रोध में सूत्र तोड़कर आग में फेंका; तुरंत सब वैभव नष्ट, दरिद्रता।
पछताए कौंडिन्य «अनंत» की खोज में वन-वन भटके — आम का पेड़ (जिस पर पक्षी न बैठें), गाय-बछड़ा, बैल, दो सरोवर, गधा, हाथी — सबसे पूछा «अनंत कहाँ?»; कोई न बता सका; थककर गिरे तो एक वृद्ध ब्राह्मण (स्वयं अनंत) ने उन्हें गुफ़ा में ले जाकर विराट-रूप दिखाया — «अनंत मैं हूँ; तुमने सूत्र फेंका, इसलिए दंड; अब 14 वर्ष व्रत करो»; रास्ते के प्रश्नों का उत्तर भी — आम = विद्या-दान न करने वाला, गाय = भूमि, बैल = धर्म, सरोवर = परस्पर दान न करती बहनें, गधा = क्रोध, हाथी = अहंकार। कौंडिन्य-शीला ने 14 वर्ष व्रत किया, वैभव लौटा।
युधिष्ठिर-कथा: द्यूत में राज्य हारकर वनवास में पांडवों को कृष्ण ने यही अनंत-व्रत बताया — «भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को अनंत की पूजा, 14 गाँठ, 14 वर्ष — खोया राज्य लौटेगा»; पांडवों ने किया, महाभारत के बाद राज्य पाया। इसीलिए यह व्रत खोई वस्तु, पद, धन, स्वास्थ्य लौटाने वाला — «अनंत-सूत्र» हाथ की रक्षा।
खीर-पूड़ी, 14 पकवान, मोदक — अनंत की थाली
अनंत चतुर्दशी का भोग खीर-पूड़ी (बिना नमक की पूड़ी — कई घर), 14 प्रकार के पकवान/फल (14 लोकों के लिए); गणपति-विसर्जन वाले घरों में मोदक-लड्डू व दही-भात; बिहार-नेपाल में «अनंत-पूजा» की मीठी पूड़ी-खीर; व्रत में एक समय बिना नमक (कठोर) या फलाहार।
- खीर (चावल-दूध-केसर) + पूड़ी (बिना नमक — कुछ घर) — अनंत का मुख्य भोग; मालपुआ, हलवा
- 14 पकवान/फल: केला-सेब-अनार-नारियल-खीरा-अमरूद…, लड्डू-पेड़ा-बर्फ़ी, पंजीरी — हो सके तो 14 गिनकर
- बिहार-मिथिला-नेपाल: अनंत-पूजा की खीर, पूड़ी, ठेकुआ (कुछ घर), पान-सुपारी 14
- महाराष्ट्र-गुजरात (विसर्जन): मोदक-लड्डू (उत्तर-पूजा), दही-भात/दही-पोहा (बाप्पा के रास्ते का बंडल), पुरण-पोली, श्रीखंड
- जैन (क्षमावाणी): सादा सात्विक भोजन, पर्युषण-उपवास का पारणा (चतुर्दशी/संवत्सरी के बाद), मिठाई-बाँटना
- व्रत-भोजन: एक समय बिना नमक (कठोर) या फलाहार; गर्भवती/रोगी सामान्य सात्विक
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
उत्तर-बिहार का अनंत-डोरा, महाराष्ट्र का बाप्पा-विसर्जन, जैन की क्षमावाणी, नेपाल की अनंत-पूजा — एक चतुर्दशी, कई रूप।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- 14 गाँठ का हल्दी-रंगा अनंत-सूत्र — पूजा-कथा के बाद पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ
- व्रत 14 वर्ष निभाएँ; पुराना सूत्र जल/पीपल में; 14वें वर्ष उद्यापन
- कौंडिन्य-युधिष्ठिर कथा सुनें; 14 फल-पकवान अनंत को, फिर बहन-बुआ/ब्राह्मण को
- गणपति-विसर्जन कृत्रिम तालाब/घर पर — मिट्टी की मूर्ति, पेड़ में मिट्टी
- कल से पितृ-पक्ष — आज मांगलिक कार्य समेट लें; सूत्र पहने रहना ठीक
❌ क्या न करें
- अनंत-सूत्र को फेंकना, तोड़ना, अपवित्र जगह — कौंडिन्य-कथा का सबक; उतारें तो जल में
- व्रत बीच में छोड़ना (छूटे तो प्रायश्चित्त कर पुनः आरंभ); सूत्र ग़लत हाथ
- विसर्जन में POP-मूर्ति, नदी-झील प्रदूषण, नशा-ध्वनि; शोभायात्रा में असुरक्षा
- व्रत-दिन तामसिक भोजन, नमक (कठोर रूप), दिन में सोना; कलह
- अगले दिन (पितृ-पक्ष आरंभ) नया मांगलिक कार्य रखना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनंत चतुर्दशी 2026 में कब है और गणपति-विसर्जन?
ऊपर इस साल की भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी की तिथि व पूजा-मुहूर्त (दिल्ली) है — अनंत-पूजा सुबह/अभिजित में, गणपति-विसर्जन उसी दिन दोपहर-शाम (मुंबई में रात-भर); चतुर्दशी दो दिन में बँटे तो अनंत-पूजा उस दिन जब चतुर्दशी सुबह/पूर्वाह्न में हो।
अनंत-सूत्र किस हाथ में, कितने दिन?
पुरुष दाहिने हाथ (बाजू/कलाई), स्त्री बाएँ हाथ; 14 गाँठें; कम-से-कम 14 दिन, शास्त्र में अगले वर्ष तक पहनें और नया बाँधते समय पुराना जल/पीपल में; टूट जाए तो जल में डालकर नया (पूजा किया हुआ) बाँधें।
14 वर्ष ही क्यों? बीच में छूट जाए तो?
14 लोक व पांडवों के 14 वर्ष (13 वनवास + 1 अज्ञातवास — लोक-मान्यता) — कृष्ण ने युधिष्ठिर को 14 वर्ष का व्रत बताया; कौंडिन्य ने भी 14 वर्ष; छूट जाए तो अगले वर्ष प्रायश्चित्त (दान/ब्राह्मण-भोजन) करके फिर से गिनती; उद्यापन 14वें वर्ष — 14 ब्राह्मण, 14 वस्तु-दान।
स्त्रियाँ यह व्रत क्यों रखती हैं?
कथा में शीला (कौंडिन्य-पत्नी) ने रखा — घर वैभव से भरा; पति-संतान की रक्षा, ऋण-रोग-कठिनाई से मुक्ति, खोया धन-पद लौटना; बिहार-कर्नाटक-महाराष्ट्र में स्त्री-पुरुष दोनों; नवविवाहिता पहला अनंत ससुराल में।
अनंत चतुर्दशी और गणेश-विसर्जन का क्या संबंध?
गणेशोत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से दस दिन — दसवाँ दिन यही चतुर्दशी; लोकमान्य तिलक (1893) ने सार्वजनिक गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर रखा; इसलिए महाराष्ट्र-गुजरात-तेलंगाना में यह विसर्जन-दिन; अनंत-पूजा (विष्णु) व विसर्जन (गणेश) अलग-अलग विधान, एक दिन।
जैन क्षमावाणी क्या है?
दिगंबर जैन का दशलक्षण-पर्व भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी (10 दिन) — अंतिम दिन «अनंत चतुर्दशी» पर उपवास-रथयात्रा, अगले दिन क्षमावाणी («मिच्छामि दुक्कडम्» — सबसे क्षमा माँगना); श्वेतांबर का पर्युषण-संवत्सरी कुछ दिन पहले; भाव — साल-भर के अपराधों की क्षमा-याचना।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। विसर्जन में स्थानीय प्रशासन के पर्यावरण-सुरक्षा नियम मानें।
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