🕉 सोमवार व्रत (सावन सोमवार व सोलह सोमवार) 2026
अगला सोमवार व्रत — शिव का वार; सावन (श्रावण) के सोमवार सबसे बड़े, सोलह सोमवार व्रत मनचाहे वर/सुहाग के लिए; शिवलिंग-अभिषेक, शाम कथा-आरती, एक समय भोजन; ऊपर आने वाले सोमवार व सावन-सोमवार की तिथियाँ।
- सोमवार व्रत (भाद्रपद) — सोमवार, 21 सितंबर 2026
- सोमवार व्रत (आश्विन) — सोमवार, 28 सितंबर 2026
- सोमवार व्रत (आश्विन) — सोमवार, 5 अक्टूबर 2026
- सोमवार व्रत (आश्विन) — सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
- सोमवार व्रत (आश्विन) — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
- सोमवार व्रत (आश्विन) — सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
- सोमवार व्रत (कार्तिक) — सोमवार, 2 नवंबर 2026
- सोमवार व्रत (कार्तिक) — सोमवार, 9 नवंबर 2026
- सोमवार व्रत (कार्तिक) — सोमवार, 16 नवंबर 2026
- सोमवार व्रत (कार्तिक) — सोमवार, 23 नवंबर 2026
- सोमवार व्रत (मार्गशीर्ष) — सोमवार, 30 नवंबर 2026
- सोमवार व्रत (मार्गशीर्ष) — सोमवार, 7 दिसंबर 2026
सोमवार भगवान शिव (और चंद्रमा — «सोम») का वार है। सोमवार व्रत तीन रूपों में रखा जाता है — (1) **सावन (श्रावण) सोमवार**: श्रावण मास के चार-पाँच सोमवार, जब शिव पृथ्वी पर वास करते हैं — कावड़, जलाभिषेक, लाखों की भीड़; (2) **सोलह सोमवार व्रत**: किसी भी शुक्ल-पक्ष के सोमवार से लगातार 16 सोमवार — कन्याओं को मनचाहा वर, सुहागिनों को अखंड सौभाग्य (पार्वती ने शिव को इसी से पाया); (3) **साधारण सोमवार व्रत** — जीवन-भर या संकल्प से हर सोमवार।
विधि सरल है — सुबह स्नान-शिवलिंग पर जल-बेलपत्र, दिन में फलाहार/एक समय (कई घर बिना नमक), शाम/प्रदोष में शिव-पार्वती पूजा, सोमवार-कथा, आरती; सावन में हर सोमवार शिवालय-जलाभिषेक व शिवामूठ (महाराष्ट्र)। ऊपर अगले सोमवार की तिथि व आने वाले सोमवार (सावन के सोमवार अलग लिखे) — नीचे तीनों व्रतों की विधि, सामग्री, कथा, भोजन व इलाक़ों की रीत।
महत्व — यह व्रत क्यों
सावन में शिव: समुद्र-मंथन का विष श्रावण में पिया, देवताओं ने जल चढ़ाकर ज्वाला शांत की — इसलिए सावन में जलाभिषेक व कावड़; पार्वती ने श्रावण में तप कर शिव को पाया; सावन का हर सोमवार शिव-पार्वती-मिलन का — सुहागिनें हरी चूड़ी-मेहँदी, कन्याएँ वर-हेतु; सावन-सोमवार की संख्या 4 या 5 (पूर्णिमांत श्रावण में — उत्तर भारत; अमांत श्रावण में महाराष्ट्र-गुजरात 15 दिन बाद शुरू)।
सोलह सोमवार: शिव-पार्वती की चौसर-कथा (नीचे) — पार्वती की सखी/अमरावती का पुजारी; 16 सोमवार पूरे होने पर 17वें सोमवार को उद्यापन — 16 दंपति/ब्राह्मण-भोजन, चूरमा (गेहूँ-घी-गुड़ का — सोलह सोमवार का विशिष्ट प्रसाद), शिव-हवन; विवाह-बाधा, कुंडली में मंगल/शनि-विलंब, सुहाग-रक्षा हेतु प्रसिद्ध।
चंद्र (सोम) का वार — मन-शांति, माता-सुख, चंद्र-दोष-शांति (शिव के मस्तक पर चंद्र); सोमवार को शिव-पूजा + सफ़ेद वस्तु-दान; सोमवती अमावस्या, सोम प्रदोष व सावन-सोमवार तीनों मिलें तो दुर्लभ महायोग।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह सोमवार व्रत की घरेलू विधि है — सुबह अभिषेक, दिन का व्रत, शाम पूजा-कथा; सावन-सोमवार व सोलह सोमवार के अतिरिक्त नियम अंत में।
- सुबह: स्नान, सफ़ेद/हरे (सावन) वस्त्र; संकल्प — «(सावन/सोलह/साधारण) सोमवार व्रत, (कामना) हेतु, एक समय/फलाहार, शाम पूजा के बाद भोजन»; शिवलिंग पर जल-दूध-बेलपत्र (घर या शिवालय), «ॐ नमः शिवाय» 108।
- दिन में: फलाहार (फल-दूध-साबूदाना-मखाना) या एक समय भोजन (बिना नमक — सोलह सोमवार में कई रीत); दिन में सोना नहीं, शिव-नाम जप, शिव-पुराण/रुद्राष्टक पाठ।
- शाम (प्रदोष — ऊपर समय) पूजा: शिवलिंग/शिव-पार्वती चित्र — पंचामृत-गंगाजल-अभिषेक, बेलपत्र (3-पत्ती, उल्टा), धतूरा-आक-शमी-भाँग-दूब, सफ़ेद फूल, चंदन-भस्म-अक्षत-जनेऊ; पार्वती को सुहाग-सामग्री, लाल फूल; गणेश-कार्तिकेय-नंदी स्मरण; धूप-दीप; नैवेद्य — चूरमा (सोलह सोमवार), खीर-हलवा-फल।
- सोमवार-कथा (नीचे — साहूकार-पुत्र/सोलह सोमवार की चौसर-कथा/सावन की कथा) सुनना; शिव-चालीसा, शिव-आरती «ॐ जय शिव ओंकारा», कपूर-आरती; प्रसाद बाँटना।
- भोजन: पूजा के बाद एक समय सात्विक (चूरमा/खीर/फल), रात में नहीं (कठोर) या फलाहार; अगली सुबह सामान्य।
- सावन-सोमवार अतिरिक्त: शिवालय जलाभिषेक (गंगाजल — कावड़ की परंपरा), रुद्राभिषेक (हो सके तो, सावन में विशेष), शिवामूठ — महाराष्ट्र में हर सावन-सोमवार एक मुट्ठी अनाज (चावल, तिल, मूँग, जौ, सतुआ — क्रम से) शिव को अर्पित, हरी चूड़ी-मेहँदी, झूला; सावन के अंतिम सोमवार पर उद्यापन-सा दान।
- सोलह सोमवार अतिरिक्त: किसी शुक्ल-पक्ष के सोमवार (श्रावण-कार्तिक-मार्गशीर्ष श्रेष्ठ) से आरंभ, लगातार 16 सोमवार बिना छोड़े (मासिक-धर्म में पूजा नहीं, पर सोमवार गिनती में — घर-रीत), हर सोमवार चूरमा (गेहूँ-आटा/सूजी-घी-गुड़/शक्कर) का भोग व वही प्रसाद ग्रहण; 17वें सोमवार उद्यापन — 16 दंपति/ब्राह्मण-भोजन, चूरमा, हवन, दान।
- स्त्री-रीत: कन्याएँ सावन-सोमवार/सोलह सोमवार मनचाहे वर हेतु (पार्वती-पूजा विशेष), सुहागिनें पति-दीर्घायु; गर्भवती फलाहार; बुज़ुर्ग एक समय सात्विक; व्रत छूटे तो अगले सोमवार से गिनती (सोलह सोमवार में पुनः आरंभ — कठोर रीत)।
पूजा-सामग्री की सूची
शिव-अभिषेक + पार्वती-सुहाग + चूरमा + सावन की शिवामूठ — सोमवार व्रत की सूची।
- शिवलिंग (पारद/नर्मदेश्वर/मिट्टी — सावन में पार्थिव शिवलिंग) या शिव-पार्वती चित्र, चौकी, सफ़ेद कपड़ा
- अभिषेक: जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गन्ने का रस; रुद्राभिषेक (सावन) — पंडित-सामग्री
- बेलपत्र (3-पत्ती), धतूरा, आक, शमी, भाँग, दूब, सफ़ेद फूल (चमेली-कनेर-धतूरा), लाल फूल (पार्वती)
- चंदन, भस्म, अक्षत, जनेऊ, मौली, रोली-हल्दी-कुमकुम, इत्र, पान-सुपारी-लौंग
- पार्वती: सुहाग-सामग्री (हरी चूड़ी-मेहँदी-बिंदी-सिंदूर-चुनरी — सावन)
- दीपक (घी), धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी-शंख (शंख से जल शिव पर नहीं)
- नैवेद्य: चूरमा (गेहूँ-आटा/सूजी + घी + गुड़/शक्कर — सोलह सोमवार), खीर, हलवा, फल (केला-सेब), पंचमेवा, ठंडाई (सावन)
- शिवामूठ (महाराष्ट्र — सावन-सोमवार): चावल, तिल, मूँग, जौ, सतुआ — एक-एक मुट्ठी क्रम से
- कथा-पुस्तक (सोमवार-कथा/सोलह सोमवार/शिव-चालीसा), रुद्राक्ष-माला; कावड़ (सावन — गंगाजल लाने हेतु)
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सोलह सोमवार की कथा: अमरावती (या मंदिर) में शिव-पार्वती चौसर खेलने बैठे; पार्वती ने पुजारी से पूछा «कौन जीतेगा?» — पुजारी ने बिना सोचे «शिव» कहा; पार्वती जीतीं, क्रोध में पुजारी को कोढ़ी होने का शाप; अप्सराओं ने पुजारी को सोलह सोमवार का व्रत बताया — 16 सोमवार गेहूँ-घी-गुड़ का चूरमा बनाकर शिव-पूजा, 17वें सोमवार उद्यापन; पुजारी ठीक हुआ; पार्वती ने वही व्रत कर रूठे कार्तिकेय को लौटाया, कार्तिकेय ने बिछड़े मित्र को, मित्र ने राजकुमारी से विवाह (हाथिनी की माला) — फिर राजा ने बेटी-दामाद को इस व्रत से पाया। सीख — सोलह सोमवार से रोग-मुक्ति, मित्र-मिलन, विवाह, संतान।
साहूकार-पुत्र की सोमवार-कथा: एक निःसंतान साहूकार हर सोमवार व्रत करता; शिव ने पार्वती के आग्रह पर पुत्र दिया पर आयु 12 वर्ष; पुत्र को मामा के साथ काशी भेजा; रास्ते में राजकुमारी से विवाह; काशी में यज्ञ करते 12वें वर्ष प्राण गए — मामा रोया; उधर से जाते शिव-पार्वती ने पार्वती के आग्रह पर उसे जीवित किया — «सोमवार-व्रती का पुत्र है»; लौटकर राजा ने बेटी-दामाद को अपनाया, साहूकार को पुत्र मिला। सीख — सोमवार व्रत संतान व दीर्घायु देता है।
सावन की कथा: समुद्र-मंथन का हलाहल शिव ने श्रावण में पिया, विष की ज्वाला में देवताओं-ऋषियों ने गंगाजल चढ़ाया — इसलिए सावन में जल-अभिषेक व कावड़ (रावण को पहला कावड़िया मानते हैं — बैजनाथ); पार्वती ने श्रावण में सोमवार-व्रत कर शिव को वर में पाया — इसलिए कन्याएँ सावन-सोमवार रखतीं; मरकंडेय ऋषि की दीर्घायु सोमवार-शिव-पूजा से।
चूरमा, खीर, फल-दूध, शिवामूठ, ठंडाई — सोमवार व सावन की रसोई
सोमवार व्रत में एक समय सात्विक/फलाहार; सोलह सोमवार का विशिष्ट प्रसाद चूरमा (गेहूँ के आटे/सूजी को घी में भूनकर गुड़-शक्कर); सावन में खीर-मालपुआ-घेवर-ठंडाई, शिव को भाँग-दूध-धतूरा (कुछ रीत), महाराष्ट्र की शिवामूठ; बिना नमक का भोजन (सोलह सोमवार — कई घर)।
- चूरमा: गेहूँ का आटा/सूजी (सवा पाव) घी में सुनहरा भूनें, गुड़/पिसी शक्कर-इलायची-मेवे — शिव को भोग, फिर वही प्रसाद व्रती ग्रहण करे (सोलह सोमवार का नियम)
- खीर (चावल/मखाना), हलवा, मालपुआ, घेवर-फीनी (सावन — राजस्थान-हरियाणा), ठंडाई/भाँग-दूध (शिव को), पंचामृत
- फलाहार: फल (केला-सेब-आम-जामुन — सावन), दूध, दही, साबूदाना-खिचड़ी, कुट्टू, मखाना; एक समय भोजन बिना नमक (कठोर) या सेंधा नमक
- शिवामूठ (महाराष्ट्र — पहले सावन-सोमवार चावल, दूसरे तिल, तीसरे मूँग, चौथे जौ, पाँचवें सतुआ) + उपवास-भोजन साबूदाणा-वरी
- क्षेत्रीय: बिहार-झारखंड (कावड़-देवघर) — कावड़ियों का सात्विक-लंगर, ठेकुआ; तमिल (सोमवार/चंद्रवार) — पायसम-वड़ा नंदी को; गुजरात (श्रावण-सोमवार) — फराळ, सोमनाथ-दर्शन; बंगाल (सोमवार-शिवपूजा) — दूध-बताशा-चिड़ा
- उद्यापन (17वाँ सोमवार): 16 दंपति/ब्राह्मण को चूरमा-पूड़ी-सब्ज़ी-खीर, दान
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
उत्तर की कावड़ व सावन-सोमवार, महाराष्ट्र की शिवामूठ, गुजरात का सोमनाथ, बिहार का देवघर, दक्षिण का सोमवार-नंदी — शिव के वार की रीतें।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- सुबह शिवलिंग पर जल-बेलपत्र, शाम प्रदोष में पूजा-कथा-आरती; «ॐ नमः शिवाय»
- सोलह सोमवार: चूरमा का भोग व वही प्रसाद, 16 लगातार, 17वें उद्यापन; सावन: शिवामूठ/जलाभिषेक
- एक समय सात्विक/फलाहार; बिना नमक (सोलह सोमवार — रीत); दिन में न सोएँ
- पार्वती-पूजा (सुहाग-सामग्री) कन्याएँ-सुहागिनें; सफ़ेद वस्तु-दान (चंद्र)
- कावड़/मंदिर-यात्रा में नियम — शुद्धता, नंगे पाँव (रीत), सुरक्षा
❌ क्या न करें
- शिवलिंग पर तुलसी, केतकी, हल्दी, सिंदूर, शंख-जल, नारियल-पानी (कुछ रीत); कटी बेलपत्री
- सोलह सोमवार बीच में छोड़ना (छूटे तो पुनः आरंभ — कठोर रीत); प्रसाद (चूरमा) बिना ग्रहण किए उठना
- सावन में माँस-मद्य-प्याज़-लहसुन, बैंगन-पत्तेदार साग (चातुर्मास-नियम), बाल-दाढ़ी (कुछ)
- व्रत-दिन क्रोध-कलह-झूठ; काले वस्त्र (शिव-पूजा में)
- कावड़ में नशा-शोर-असुरक्षा; जबरन निर्जला
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सावन के सोमवार 2026 में कब-कब हैं?
ऊपर सूची में «श्रावण (सावन) सोमवार» लिखी तिथियाँ ही सावन के सोमवार हैं (पूर्णिमांत श्रावण — उत्तर भारत; 4 या 5); महाराष्ट्र-गुजरात-दक्षिण का अमांत श्रावण 15 दिन बाद शुरू होता है — वहाँ के सोमवार सूची में अगले (भाद्रपद-कृष्ण वाले) सोमवार होते हैं; अधिक मास हो तो «अधिक श्रावण» के सोमवार अलग गिने जाते हैं।
सोलह सोमवार व्रत कब से शुरू करें और नियम क्या हैं?
किसी शुक्ल-पक्ष के सोमवार से (श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष, या सावन के पहले सोमवार से श्रेष्ठ); लगातार 16 सोमवार — सुबह अभिषेक, शाम शिव-पार्वती पूजा, कथा, चूरमा (गेहूँ-घी-गुड़) का भोग व वही प्रसाद स्वयं खाना (बाँटें भी), एक समय भोजन (कई घर बिना नमक); 17वें सोमवार उद्यापन — 16 दंपति/ब्राह्मण-भोजन, हवन, दान; मासिक-धर्म आए तो पूजा घर का कोई और करे, गिनती चलती रहे (रीत-भेद)।
क्या सोमवार व्रत में नमक खा सकते हैं?
साधारण/सावन सोमवार में सेंधा नमक का फलाहार या एक समय सात्विक भोजन चलता है; सोलह सोमवार में कई परंपराएँ बिना नमक (मीठा — चूरमा-खीर-फल) रखती हैं; रोगी-गर्भवती सेंधा नमक व फल-दूध — स्वास्थ्य पहले; व्रत का सार शिव-स्मरण व संयम।
कन्याएँ सावन-सोमवार क्यों रखती हैं?
पार्वती ने श्रावण में तप व सोमवार-व्रत कर शिव को पति-रूप में पाया — इसलिए कन्याएँ मनचाहे/शिव-जैसे वर हेतु सावन के सोमवार व सोलह सोमवार रखती हैं; हरी चूड़ी-मेहँदी, पार्वती को सुहाग-सामग्री; विवाह-विलंब (कुंडली में मंगल/शनि/सप्तम-दोष) में यह व्रत लोक-प्रसिद्ध उपाय — ज्योतिष-जाँच साथ।
शिवामूठ क्या है?
महाराष्ट्र की सावन-सोमवार रीत — नवविवाहिता (पहले पाँच साल) हर सावन-सोमवार शिवलिंग पर एक मुट्ठी अनाज अर्पित करती है — पहले सोमवार चावल, दूसरे तिल, तीसरे मूँग, चौथे जौ, पाँचवें सतुआ; «शिवा शिवा महादेवा…» कहकर; उपवास साबूदाणा-वरी; सौभाग्य-संतान की कामना।
सोमवार व्रत और सोम प्रदोष/सोमवती अमावस्या में क्या संबंध?
तीनों शिव-चंद्र से जुड़े — सोमवार व्रत (हर सोमवार/सावन/सोलह), सोम प्रदोष (सोमवार को त्रयोदशी — प्रदोष-काल पूजा), सोमवती अमावस्या (सोमवार को अमावस्या — पीपल-परिक्रमा); एक ही दिन दो मिल जाएँ (सावन-सोमवार + सोम प्रदोष) तो महायोग — वही पूजा, फल कई गुना; ऊपर सूची में सोमवार, प्रदोष-पन्ने पर प्रदोष, अमावस्या-पन्ने पर सोमवती।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। सावन के सोमवार पूर्णिमांत गणना (उत्तर भारत) से — अमांत क्षेत्रों में 15 दिन का अंतर; स्वास्थ्य-स्थिति में निर्जला न रखें।
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