🌑 अमावस्या (पितृ-तर्पण, स्नान-दान) 2026
अगली अमावस्या कब है — हर महीने की अमावस्या को पितरों का तर्पण, तीर्थ-स्नान, दान, पीपल-पूजा; सोमवती अमावस्या (सोमवार) व शनि अमावस्या (शनिवार) विशेष; मौनी/सर्व पितृ/दीवाली/हरियाली अमावस्या के अपने पन्ने; ऊपर आने वाली 12 तिथियाँ।
- आश्विन अमावस्या (शनिश्चरी) — शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
- कार्तिक अमावस्या (सोमवती) — सोमवार, 9 नवंबर 2026
- मार्गशीर्ष अमावस्या — मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
- पौष अमावस्या — गुरुवार, 7 जनवरी 2027
- माघ अमावस्या (शनिश्चरी) — शनिवार, 6 फ़रवरी 2027
- फाल्गुन अमावस्या (सोमवती) — सोमवार, 8 मार्च 2027
- चैत्र अमावस्या — मंगलवार, 6 अप्रैल 2027
- वैशाख अमावस्या — गुरुवार, 6 मई 2027
- ज्येष्ठ अमावस्या — शुक्रवार, 4 जून 2027
- आषाढ़ अमावस्या — रविवार, 4 जुलाई 2027
- श्रावण अमावस्या (सोमवती) — सोमवार, 2 अगस्त 2027
- भाद्रपद अमावस्या — मंगलवार, 31 अगस्त 2027
अमावस्या हर चंद्र-मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है जब चंद्रमा दिखता नहीं — साल में 12 (अधिक मास में 13)। यह पितरों का दिन है — तर्पण (जल-तिल), पिंडदान, ब्राह्मण-भोजन, गाय-कौए-कुत्ते को ग्रास; तीर्थ-स्नान व दान का दिन, और पीपल-तुलसी-शनि-काली की पूजा का। कहते हैं अमावस्या को पितर द्वार पर आते हैं — इसलिए घर की स्त्रियाँ इस दिन खीर-पूड़ी बनाकर पितरों को अर्पित करती हैं, कई घरों में इस दिन नमक-रहित/सात्विक भोजन।
जिस वार को पड़े उसका अलग महत्त्व — सोमवार को **सोमवती अमावस्या** (सुहागिनों का पीपल-परिक्रमा व्रत — साल में 1-3), शनिवार को **शनिश्चरी अमावस्या** (शनि-शांति — शनि-मंदिर, तेल-दान), मंगलवार को भौमवती। माघ की मौनी, आश्विन की सर्व पितृ (महालय), कार्तिक की दीपावली, श्रावण की हरियाली, ज्येष्ठ की वट सावित्री, भाद्रपद की कुशग्रहणी (पिठोरी) अमावस्याएँ बड़े पर्व हैं — अपने पन्नों पर। ऊपर अगली अमावस्या की तिथि, तिथि-खिड़की, श्राद्ध-मुहूर्त (कुतुप/अपराह्न) व आने वाली 12 तिथियाँ वार-नाम सहित; नीचे विधि, सामग्री, कथा, भोजन, इलाक़ों की रीत।
महत्व — यह व्रत क्यों
पितृ-दिन: गरुड़-पुराण/मनुस्मृति — अमावस्या को पितर वायु-रूप में वंशजों के द्वार पर आकर तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं; अमावस्या का तर्पण/श्राद्ध पितृ-दोष (कुंडली में सूर्य-राहु/शनि) की शांति का मासिक उपाय; दर्श-श्राद्ध (अमावस्या का श्राद्ध) पितृ-पक्ष के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण।
चंद्र-हीन दिन — मन (चंद्र) निर्बल, इसलिए शुभ-कार्य (विवाह-यात्रा-नया आरंभ) टालते हैं, पर जप-तप-दान-ध्यान (मौनी) व तांत्रिक/काली-साधना का श्रेष्ठ काल; सोमवती (चंद्र-वार + अमावस्या) पर पीपल-परिक्रमा से सुहाग-संतान; शनिश्चरी पर शनि-शांति (साढ़ेसाती-ढैया), शनि-मंदिर (शिंगणापुर-कोकिलावन-तिरुनल्लार) की भीड़।
तीर्थ-स्नान: अमावस्या का गंगा-नर्मदा-गोदावरी-संगम स्नान (माघ-कार्तिक-वैशाख विशेष), फिर दान — अन्न, वस्त्र, तिल, जल, गाय; पीपल (विष्णु-वास) व तुलसी को जल-दीप; कुछ इलाक़ों में अमावस्या को खेत-हल नहीं (कृषि-विश्राम, बैलों को छुट्टी — बैल-पोला भाद्रपद अमावस्या)।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह मासिक अमावस्या की घरेलू विधि है — सुबह स्नान-तर्पण, दान, पीपल-पूजा, शाम दीप; सोमवती व शनिश्चरी की विशेष रीत साथ में।
- सुबह: ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय पर स्नान (नदी/तीर्थ या घर पर गंगाजल-तिल मिला जल); सूर्य-अर्घ्य; संकल्प — «अमावस्या स्नान-दान-तर्पण, पितृ-तृप्ति हेतु»; कई घर मौन (मौनी की तरह) कुछ घंटे।
- तर्पण (घर के पुरुष/न हों तो स्त्री): तांबे के लोटे में जल-काले तिल-कुशा, दक्षिण मुख, अँगूठे की ओर से जल पितरों को — «(गोत्र) (नाम) तृप्यताम्» 3 बार, पिता-पितामह-प्रपितामह व माता-पक्ष; जनेऊ दाहिने कंधे (अपसव्य); पितृ-सूक्त/गीता-7; तर्पण न आता हो तो सिर्फ़ जल-तिल दक्षिण दिशा में «सर्वे पितरः तृप्यन्ताम्»।
- दर्श-श्राद्ध (हो सके तो): अपराह्न/कुतुप (ऊपर समय) में पिंड/खीर-पूड़ी का अर्पण, पंचबलि (गाय-कुत्ता-कौआ-चींटी-देव), ब्राह्मण/बेटी-दामाद को भोजन-दक्षिणा; न हो सके तो गाय-कौए को खीर-रोटी व ग़रीब को भोजन।
- दान: अन्न (चावल-गेहूँ), तिल, वस्त्र, जल-पात्र, छाता-जूते (ऋतु), गाय-चारा; शनिश्चरी पर काले तिल-उड़द-सरसों-तेल-लोहा-काला वस्त्र; सोमवती पर सुहाग-सामग्री व सफ़ेद वस्तु; भौमवती पर गुड़-मसूर।
- पीपल-तुलसी: पीपल को जल-दूध-तिल, दीप, 108/7 परिक्रमा (सोमवती पर सुहागिनें 108 बार सूत लपेटते हुए — फल-मिठाई-सिक्के चढ़ाकर, कथा); तुलसी को जल-दीप (अमावस्या को तुलसी तोड़ना वर्जित); शनि-मंदिर (शनिश्चरी) — तेल-दीप, «ॐ शं शनैश्चराय नमः», हनुमान-चालीसा।
- शाम: घर में दक्षिण दिशा में तिल-तेल का दीप (पितरों के लिए), मुख्य द्वार पर दीप, काली/दुर्गा-पूजा (कुछ परंपराएँ — दीवाली/कौशिकी अमावस्या); शिव-अभिषेक (चंद्र-दोष); सात्विक भोजन, कई घर नमक-रहित।
- व्रत: दिन-भर फलाहार/एक समय भोजन (सोमवती-शनिश्चरी पर विशेष); निर्जला नहीं; बुज़ुर्ग-रोगी सामान्य सात्विक।
- स्त्रियाँ: सोमवती अमावस्या — पीपल-परिक्रमा व्रत (नीचे कथा), पति-संतान की दीर्घायु; मासिक-धर्म में तर्पण-पूजा नहीं (स्मरण-दान); नवविवाहिता पहली सोमवती मायके/ससुराल की रीत से।
पूजा-सामग्री की सूची
तर्पण की सामग्री + दान + पीपल-पूजा + वार-विशेष — अमावस्या की सूची।
- तर्पण: तांबे का लोटा/थाली, जल, गंगाजल, काले तिल, कुशा (आसन-पवित्री), जौ, दक्षिण दिशा का आसन, जनेऊ
- श्राद्ध (हो सके तो): खीर-पूड़ी/पिंड-सामग्री (चावल-जौ-तिल-घी-शहद), 5 पत्ते (पंचबलि), फूल (सफ़ेद), धूप-दीप (तिल-तेल), पान-सुपारी, दक्षिणा
- दान: अन्न, तिल, वस्त्र, जल-पात्र, छाता/कंबल, गाय-चारा; शनिश्चरी: काला तिल-उड़द-सरसों-तेल-लोहा-काला कपड़ा; सोमवती: सुहाग-सामग्री, सफ़ेद वस्तु; भौमवती: गुड़-मसूर
- पीपल-पूजा: जल-दूध-तिल, कच्चा सूत (108 परिक्रमा — सोमवती), फल-मिठाई-सिक्के, दीप, रोली-अक्षत
- तुलसी-दीप, शिव-अभिषेक (जल-दूध-बेलपत्र), शनि-दीप (तेल), हनुमान-चालीसा
- शाम: तिल-तेल का दीप (दक्षिण), द्वार-दीप; काली/दुर्गा-पूजा (कुछ परंपराएँ)
- भोजन: खीर-पूड़ी (पितरों को), सात्विक (नमक-रहित — कुछ घर), फलाहार
- पुस्तक: पितृ-सूक्त/गीता-7/सोमवती-कथा/शनि-स्तोत्र
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सोमवती अमावस्या (पीपल-परिक्रमा) की कथा: एक साहूकार की सात बहुओं में सबसे छोटी बहू को धोबिन ने आशीर्वाद दिया «सदा सुहागिन रहो»; बहू ने पूछा — धोबिन बोली «सोमवती अमावस्या को पीपल की 108 परिक्रमा सूत लपेटकर कर, फिर भोजन कर — इसी से मेरा सुहाग अखंड»; बहू ने वही किया, उसका पति सर्प-दंश/मृत्यु से बच गया (कहीं: बेटी की कुंडली में वैधव्य-योग सोमवती-व्रत से कटा — सोना धोबिन की कथा)। सीख — सोमवती पर पीपल-परिक्रमा से सुहाग-संतान-रक्षा।
अमावस्या-पितृ: कर्ण को 16 दिन पितृ-तर्पण के मिले (पितृ-पक्ष), और महाभारत में भीष्म ने बताया कि अमावस्या पितरों की तिथि है — «इस दिन पितर वंशजों के द्वार आते हैं, जल-तिल से तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं, खाली लौटें तो शाप»; इसलिए हर अमावस्या (दर्श) का तर्पण। गंगा-अवतरण, समुद्र-मंथन (मौनी) व राम-अयोध्या-आगमन (कार्तिक) भी अमावस्या को — इसलिए अमावस्या शुभ-अशुभ दोनों नहीं, पितृ-देव-दिन है।
शनिश्चरी अमावस्या: शनि का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या को (शनि-जयंती) — पिता सूर्य से वैर, पर शिव-भक्ति व न्याय के देव; शनिवार + अमावस्या पर शनि-मंदिर (शिंगणापुर-तिरुनल्लार-कोकिलावन) में तेल-अभिषेक, पीपल-दीप, हनुमान-पूजा से साढ़ेसाती-ढैया की पीड़ा कम — लोक-मान्यता; शनि कर्म-फल-दाता, दान-सेवा से प्रसन्न।
खीर-पूड़ी (पितरों को), सात्विक भोजन, तिल-गुड़ — अमावस्या की रसोई
अमावस्या को पितरों के लिए खीर-पूड़ी (या उनकी प्रिय वस्तु) — पहले गाय-कौए-कुत्ते को ग्रास, फिर ब्राह्मण/ग़रीब, फिर घर; भोजन सात्विक — प्याज़-लहसुन-माँस-मद्य नहीं, कई घर नमक-रहित/एक समय; तिल-गुड़ (शनिश्चरी), सफ़ेद खीर (सोमवती); दक्षिण में अमावसै-तर्पण के बाद सादा भोजन।
- खीर (चावल-दूध) + पूड़ी — पितरों का भोग; कद्दू/लौकी की सब्ज़ी, उड़द-दाल के बड़े, कढ़ी (श्राद्ध-रीत)
- पंचबलि-ग्रास: गाय-कुत्ता-कौआ (खीर-रोटी), चींटी (आटा-चीनी), देव (घी); ब्राह्मण/बेटी-दामाद को भोजन
- सोमवती: सफ़ेद वस्तु — खीर, दूध-भात, मिश्री; पीपल को फल-मिठाई; व्रत-पारण पीपल-परिक्रमा के बाद
- शनिश्चरी: तिल-गुड़ के लड्डू, उड़द-खिचड़ी (दान व भोजन), सरसों-तेल; भौमवती: गुड़-चना
- व्रत-फलाहार: फल, दूध, साबूदाना; नमक-रहित भोजन (कुछ घर) — लौकी-दही-खीर
- क्षेत्रीय: महाराष्ट्र (पोळा — भाद्रपद अमावस्या) पुरण-पोली, बैलों को; तमिल (अमावसै) — तर्पण के बाद वड़ा-पायसम; बंगाल (कौशिकी/दीपान्विता) — काली-भोग खिचुड़ी; गुजरात (दिवाळी अमास) — मिठाई; पंजाब (मस्या) — लंगर-कढ़ी-चावल
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
पंजाब की मस्या, तमिल की अमावसै-तर्पण, महाराष्ट्र का पोळा, बंगाल की कौशिकी, उत्तर की सोमवती-पीपल — चाँद-रहित दिन की रीतें।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- हर अमावस्या पितरों का तर्पण (जल-तिल, दक्षिण मुख) — न आए तो सिर्फ़ जल-तिल व गाय-कौए को ग्रास
- स्नान-दान (अन्न-तिल-वस्त्र-जल), पीपल-तुलसी को जल-दीप, शाम दक्षिण में तिल-तेल दीप
- सोमवती: पीपल-परिक्रमा (108 सूत), सुहाग-कथा; शनिश्चरी: शनि-दीप-तेल-दान, हनुमान-चालीसा
- सात्विक/नमक-रहित भोजन, खीर-पूड़ी पितरों को; शुभ-आरंभ (विवाह-यात्रा) टालें
- पितृ-दोष हो तो अमावस्या-तर्पण मासिक उपाय; गीता-7/पितृ-सूक्त
❌ क्या न करें
- अमावस्या को तुलसी तोड़ना, बाल-नाख़ून, तेल-मालिश (कुछ रीत), शाम के बाद श्मशान/सुनसान (लोक-मान्यता)
- माँस-मद्य-तामसिक, कलह, झूठ; पितरों की निंदा; भिक्षुक-अतिथि को खाली लौटाना
- नया कार्य-आरंभ, विवाह-सगाई, यात्रा (लोक-रीत — शास्त्र में केवल शुभ-संस्कार वर्जित)
- तर्पण उत्तर मुख/बाएँ हाथ से; रात में श्राद्ध (सूर्यास्त के बाद नहीं)
- अंधविश्वास — अमावस्या «अशुभ» नहीं, पितृ-देव-दिन है; बच्चों को डराना नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगली अमावस्या कब है? 2026 की अमावस्या-तिथियाँ?
ऊपर अगली अमावस्या की तिथि, तिथि-खिड़की व श्राद्ध-मुहूर्त (कुतुप/अपराह्न — दिल्ली) और आने वाली 12 अमावस्याएँ माह-नाम व वार-विशेष (सोमवती/शनिश्चरी) सहित हैं — उदया-तिथि नियम से; तर्पण उस दिन जब अमावस्या दिन में (अपराह्न) हो — तिथि-खिड़की देखें।
सोमवती अमावस्या क्या है और स्त्रियाँ क्या करती हैं?
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या — साल में 1-3; सुहागिनें व्रत रखकर पीपल की 108 परिक्रमा कच्चा सूत लपेटते हुए करती हैं, फल-मिठाई-सिक्के चढ़ाकर, सोना-धोबिन/साहूकार-बहू की कथा सुनकर, फिर भोजन — पति-संतान की दीर्घायु व अखंड सुहाग; तीर्थ-स्नान (हरिद्वार-प्रयाग) का विशेष फल; ऊपर सूची में «(सोमवती)» लिखा है।
शनिश्चरी (शनि) अमावस्या पर क्या करें?
शनिवार की अमावस्या — शनि-शांति का श्रेष्ठ दिन: शनि-मंदिर/पीपल पर सरसों-तेल का दीप, काले तिल-उड़द-तेल-लोहा-काला वस्त्र दान (ग़रीब/सफ़ाई-कर्मी को), «ॐ शं शनैश्चराय नमः» 108, हनुमान-चालीसा, शनि-स्तोत्र (दशरथ-कृत), पितृ-तर्पण साथ; साढ़ेसाती-ढैया वाले विशेष; कुंडली-जाँच (साढ़ेसाती-रिपोर्ट) से पहले पुष्टि।
तर्पण कैसे करें, पंडित न हो तो?
स्नान कर दक्षिण मुख बैठें, तांबे के लोटे में जल-काले तिल-(कुशा); अँगूठे की ओर से जल छोड़ते हुए «(गोत्र) (पिता/दादा का नाम) तृप्यताम्» 3-3 बार, फिर «सर्वे पितरः तृप्यन्ताम्»; अंत में गाय-कौए को खीर-रोटी, ग़रीब को अन्न — यही सरल दर्श-तर्पण; स्त्री भी कर सकती है (पुत्र न हो तो); पूर्ण विधि के लिए पितृ-पक्ष पन्ना।
अमावस्या को क्या नहीं करना चाहिए और क्यों?
शास्त्र में केवल शुभ-संस्कार (विवाह-मुंडन-गृह-प्रवेश) वर्जित — चंद्र-हीन तिथि, मन निर्बल; लोक-रीत में नया कार्य-यात्रा-ख़रीद टालना, तुलसी न तोड़ना, माँस-मद्य नहीं, शाम के बाद सुनसान से बचना; पर जप-दान-तर्पण-ध्यान के लिए यह श्रेष्ठ दिन — अमावस्या «अशुभ» नहीं।
कौन-सी अमावस्याएँ बड़ी हैं?
माघ — मौनी (मौन-स्नान), आश्विन — सर्व पितृ (महालय), कार्तिक — दीपावली (लक्ष्मी-पूजा), श्रावण — हरियाली (पौधे-झूले), ज्येष्ठ — वट सावित्री/शनि-जयंती, भाद्रपद — कुशग्रहणी/पिठोरी/पोळा, चैत्र — भूतड़ी, फाल्गुन — फाल्गुनी; सोमवती-शनिश्चरी वार से; सबके पन्ने hub पर।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
यह भी पढ़ें: पितृ-पक्ष व सर्व पितृ अमावस्या · मौनी अमावस्या (माघ) · दीपावली (कार्तिक अमावस्या) · पूर्णिमा व्रत
⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार, गोत्र-परंपरा व पंडित की रीत सर्वोपरि है। तिथियाँ दिल्ली के सूर्योदय-तिथि से — अपने शहर का पंचांग मिला लें; पितृ-दोष/शनि-उपाय ज्योतिष-मान्यता हैं।
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