Nakshtra Takकुंडलीराशिफलपंचांगमिलानज्ञानग्रह-फलज्योतिषीStore
🪔 व्रत-त्योहार

🌕 पूर्णिमा व्रत (सत्यनारायण कथा) 2026

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

अगली पूर्णिमा कब है — हर महीने की पूर्णिमा को व्रत, सत्यनारायण-कथा, चंद्र-अर्घ्य, दान-स्नान; कार्तिक-माघ-वैशाख-गुरु पूर्णिमा जैसी बड़ी पूर्णिमाएँ अलग पन्नों पर; ऊपर आने वाली 12 पूर्णिमा-तिथियाँ नाम-सहित।

अगली पूर्णिमा व्रत (सत्यनारायण कथा)
शनिवार, 26 सितंबर 2026
भाद्रपद पूर्णिमा
भाद्रपद · शुक्ल पक्ष · पूर्णिमा (विक्रम संवत 2083)
🌙 चंद्रोदय5:54 PM
📿 तिथि-कालपूर्णिमा 25 सितंबर, 11:07 PM → 26 सितंबर, 10:19 PM
⭐ अभिजित मुहूर्त11:48 AM – 12:36 PM
🪔 प्रदोष काल6:13 PM – 8:37 PM
⛔ राहुकाल (टालें)09:11 AM – 10:41 AM
आने वाली तिथियाँ
  • भाद्रपद पूर्णिमा — शनिवार, 26 सितंबर 2026
  • आश्विन पूर्णिमा — सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
  • कार्तिक पूर्णिमा — मंगलवार, 24 नवंबर 2026
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा — बुधवार, 23 दिसंबर 2026
  • पौष पूर्णिमा — शुक्रवार, 22 जनवरी 2027
  • माघ पूर्णिमा — शनिवार, 20 फ़रवरी 2027
  • फाल्गुन पूर्णिमा — सोमवार, 22 मार्च 2027
  • चैत्र पूर्णिमा — मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
  • वैशाख पूर्णिमा — गुरुवार, 20 मई 2027
  • ज्येष्ठ पूर्णिमा — शुक्रवार, 18 जून 2027
  • आषाढ़ पूर्णिमा — रविवार, 18 जुलाई 2027
  • श्रावण पूर्णिमा — मंगलवार, 17 अगस्त 2027
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

पूर्णिमा हर चंद्र-मास की पंद्रहवीं तिथि है जब चंद्रमा पूर्ण होता है — साल में 12 (अधिक मास में 13)। यह विष्णु-लक्ष्मी और चंद्रमा का दिन है — घरों में सत्यनारायण-कथा, पूर्णिमा-व्रत (दिन-भर फलाहार, शाम चंद्र-दर्शन के बाद पारण), नदी-स्नान, दान; कई परिवार हर पूर्णिमा को खीर बनाकर चंद्रमा को अर्पित करते हैं।

हर पूर्णिमा का अपना नाम-पर्व है — कार्तिक (देव दीपावली), माघ (माघी स्नान), फाल्गुन (होली), चैत्र (हनुमान जयंती), वैशाख (बुद्ध पूर्णिमा), ज्येष्ठ (वट सावित्री/स्नान-पूर्णिमा), आषाढ़ (गुरु पूर्णिमा), श्रावण (रक्षाबंधन), भाद्रपद (पितृ-पक्ष आरंभ), आश्विन (शरद पूर्णिमा), मार्गशीर्ष (दत्तात्रेय), पौष (शाकंभरी) — बड़े पर्वों के अपने पन्ने हैं, यह पन्ना मासिक पूर्णिमा-व्रत व सत्यनारायण-कथा का। ऊपर अगली पूर्णिमा की तिथि, चंद्रोदय व 12 तिथियाँ; नीचे विधि, कथा-विधान, प्रसाद, इलाक़ों की रीत।

महत्व — यह व्रत क्यों

पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्ण-बली — मन (चंद्र) पर प्रभाव तीव्र, इसलिए व्रत-संयम व चंद्र-अर्घ्य; विष्णु-पूजा व सत्यनारायण-कथा (स्कंद-पुराण, रेवा-खंड) का सबसे शुभ दिन — कथा किसी भी दिन हो सकती है पर पूर्णिमा व संक्रांति श्रेष्ठ; पूर्णिमा-स्नान (गंगा-यमुना-नर्मदा) व दान का फल गुना।

व्रत-नियम: पूर्णिमा उदया-तिथि या चंद्रोदय-व्यापिनी — उपवास उदया-तिथि वाले दिन, सत्यनारायण-कथा व चंद्र-अर्घ्य उस शाम जब पूर्णिमा चंद्रोदय के समय हो (प्रायः वही दिन; कभी एक दिन पहले — ऊपर सूची उदया-नियम से, तिथि-खिड़की देखकर कथा की शाम चुनें); पारण चंद्र-दर्शन के बाद या अगली सुबह।

कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर/चंद्र-दोष (मन-अशांति, माता-सुख में कमी) — पूर्णिमा-व्रत, सफ़ेद वस्तु-दान (दूध-चावल-चाँदी-मिश्री), «ॐ सों सोमाय नमः», शिव-अभिषेक उपाय; स्त्रियाँ संतान-सौभाग्य व गृह-शांति हेतु; 12 पूर्णिमा (वर्ष) का संकल्प, उद्यापन कार्तिक/माघ पूर्णिमा पर।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह मासिक पूर्णिमा की घरेलू विधि है — उपवास, सत्यनारायण-कथा (पाँच अध्याय), चंद्र-अर्घ्य, पारण; बड़ी पूर्णिमाओं की अपनी रीत उनके पन्नों पर।

  1. सुबह: ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान (नदी/घर पर गंगाजल), सफ़ेद/पीले वस्त्र; संकल्प — «पूर्णिमा व्रत व सत्यनारायण-पूजा, (कामना) हेतु, चंद्र-दर्शन के बाद पारण»; सूर्य-अर्घ्य; विष्णु-लक्ष्मी की पूजा, तुलसी-जल।
  2. दिन-भर: फलाहार (फल-दूध-साबूदाना) या निर्जला (सामर्थ्य); दान — अन्न, सफ़ेद वस्तु (चावल-दूध-चीनी-वस्त्र), जल; «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय»/विष्णु-सहस्रनाम; दिन में सोना नहीं।
  3. शाम (प्रदोष — ऊपर समय) सत्यनारायण-कथा: चौकी पर पीला कपड़ा, केले के खंभे/पत्ते, कलश (जल-आम-पत्ते-नारियल), सत्यनारायण (विष्णु) चित्र/शालिग्राम; गणेश-नवग्रह-पूजन, पंचामृत, तुलसी-दल, पीले फूल; पंजीरी (सूजी-घी-शक्कर-केला-तुलसी — सवा पाव/सवा किलो), पंचमेवा, फल; पंडित या स्वयं कथा के 5 अध्याय; हर अध्याय पर «सत्यनारायण भगवान की जय»; आरती «जय लक्ष्मीरमणा»; परिवार-पड़ोस को प्रसाद।
  4. चंद्रोदय (ऊपर समय) पर अर्घ्य: चाँद को जल-दूध-अक्षत-फूल, «ॐ सों सोमाय नमः»/«दधिशंखतुषाराभं…», खीर का भोग चाँदनी में (शरद पूर्णिमा पर रात-भर); चंद्र-दर्शन।
  5. पारण: चंद्र-अर्घ्य व कथा के बाद प्रसाद (पंजीरी-पंचामृत), फिर सात्विक भोजन — खीर-पूड़ी-सब्ज़ी; कठोर व्रती अगली सुबह (प्रतिपदा) पारण।
  6. पूर्णिमा-स्नान व दान: सुबह/दिन में तीर्थ-स्नान (हो सके तो), गाय-ब्राह्मण-ग़रीब को दान; पीपल/तुलसी को जल-दीप; पितरों का स्मरण (पूर्णिमा-श्राद्ध — भाद्रपद)।
  7. स्त्री-रीत: सुहागिनें चंद्रमा से पति-संतान की दीर्घायु, कन्याएँ वर हेतु; मासिक-धर्म में कथा नहीं (बाद में या अगली पूर्णिमा); गर्भवती फलाहार व चंद्र-दर्शन शुभ।
  8. उद्यापन: 12 पूर्णिमा पूरी होने पर — सत्यनारायण-कथा + हवन, 12 ब्राह्मण/दंपति-भोजन, सफ़ेद वस्तु-दान; कार्तिक या माघ पूर्णिमा पर।

पूजा-सामग्री की सूची

सत्यनारायण-कथा की सामग्री + चंद्र-अर्घ्य — हर पूर्णिमा की सूची।

  • सत्यनारायण/विष्णु-लक्ष्मी चित्र या शालिग्राम, चौकी, पीला कपड़ा, केले के पत्ते/खंभे, कलश, आम के पत्ते, नारियल
  • पंचामृत (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर), गंगाजल, तुलसी-दल, पीला चंदन, रोली, अक्षत, मौली, जनेऊ, पीले फूल-माला
  • पंजीरी: सूजी, घी, शक्कर, केला, तुलसी, पंचमेवा (सवा पाव/सवा किलो — «सवा» का नियम); फल, पान-सुपारी, दक्षिणा
  • दीपक (घी), धूप, कपूर, आरती-थाली, शंख, घंटी; सत्यनारायण-कथा पुस्तक (5 अध्याय)
  • नवग्रह/गणेश-पूजन: सुपारी-अक्षत (नवग्रह), हल्दी-गाँठ; हवन (उद्यापन)
  • चंद्र-अर्घ्य: तांबे/चाँदी का लोटा, जल-दूध-अक्षत-फूल; खीर (चाँदनी में)
  • दान: चावल-दूध-चीनी-सफ़ेद वस्त्र-चाँदी (चंद्र), अन्न-जल
  • व्रत-फलाहार: फल, दूध, साबूदाना, मखाना, सेंधा नमक

🛍 पूजा-सामग्री व यंत्र देखें 🙏 पूजा बुक करें

📅 अपने शहर का पंचांग

सूर्योदय, चंद्रोदय, राहुकाल व चौघड़िया — आपके शहर के सटीक समय से, निःशुल्क।

पंचांग देखें →

व्रत-कथा

सत्यनारायण-कथा (स्कंद-पुराण, रेवा-खंड) के पाँच अध्याय पूर्णिमा को पढ़े जाते हैं — नारद को विष्णु ने कलियुग के दुःखी मनुष्यों के लिए यह सरल व्रत बताया: (1) काशी का दरिद्र ब्राह्मण — वृद्ध-रूप विष्णु से व्रत जानकर धनी हुआ; (2) लकड़हारा — ब्राह्मण के घर कथा-प्रसाद पाकर व्रत किया, सुखी; (3) राजा उल्कामुख व साधु-वैश्य — साधु ने संतान-हेतु व्रत की मन्नत मानी, कन्या कलावती हुई, पर व्रत भूला; (4) साधु-दामाद पर चोरी का झूठा आरोप, कारागार; कलावती ने कथा सुनी, पत्नी लीलावती ने व्रत किया — छूटे; लौटते नाव पर साधु ने प्रसाद-धन को «लता-पत्ता» कहा, नाव डूबी, फिर व्रत से बची; (5) कलावती प्रसाद छोड़कर पति से मिलने दौड़ी — नाव डूबी, प्रसाद लेकर लौटी तो उबरी; राजा तुंगध्वज ने ग्वालों का प्रसाद ठुकराया — पुत्र-धन खोया, प्रसाद लेकर पाया।

सीख: सत्यनारायण = सत्य ही नारायण — व्रत की मन्नत भूलना, प्रसाद का अपमान/त्याग, झूठ — इनसे विपत्ति; श्रद्धा से कथा-प्रसाद-सत्य से सुख; इसलिए प्रसाद (पंजीरी-केला-पंचामृत) सबको बाँटना व स्वयं ग्रहण करना अनिवार्य, कथा बीच में छोड़कर उठना नहीं।

चंद्रमा की कथा: दक्ष-शाप से क्षय होते चंद्रमा ने प्रभास में शिव की आराधना की, शिव ने उन्हें मस्तक पर धारण कर पूर्णिमा को पूर्ण किया — तभी से पूर्णिमा को चंद्र-शिव-पूजा; चंद्रमा मन-माता-जल-औषधि के स्वामी — पूर्णिमा-व्रत से मन-शांति व माता-सुख (लोक-ज्योतिष)।

पंजीरी, पंचामृत, केला, खीर — सत्यनारायण का प्रसाद व चाँद की खीर

सत्यनारायण का प्रसाद «सवा» के नियम से — सवा पाव/सवा किलो सूजी की पंजीरी, पंचामृत, केला-तुलसी; चंद्रमा को खीर (चावल-दूध — सफ़ेद, चंद्र-प्रिय); व्रत-दिन फलाहार; पारण में खीर-पूड़ी-सब्ज़ी; बंगाल में सत्यनारायण का «सिन्नी/शिरनी» (आटा-दूध-केला-गुड़), महाराष्ट्र में सत्यनारायण का «शीरा» (सूजी-हलवा)।

  • पंजीरी: सवा पाव/किलो सूजी घी में भूनकर पिसी शक्कर, केला (कटा), तुलसी-दल, पंचमेवा — कथा के बाद पंचामृत के साथ सबको
  • पंचामृत (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर + तुलसी-गंगाजल) — चरणामृत रूप में
  • खीर (चावल-दूध-केसर-मेवे) — चंद्र-अर्घ्य के साथ भोग, चाँदनी में रखें (शरद पूर्णिमा पर रात-भर)
  • फल (केला अनिवार्य, सेब-अनार-अंगूर), मिश्री, नारियल, पान-सुपारी
  • पारण: खीर-पूड़ी-आलू-सब्ज़ी, दाल-चावल (चावल पूर्णिमा को वर्जित नहीं — एकादशी की तरह नहीं)
  • क्षेत्रीय: बंगाल — सिन्नी/शिरनी (आटा-दूध-केला-गुड़ का कच्चा मिश्रण), पायेस; महाराष्ट्र — सत्यनारायण का सूजी-शीरा (सवा माप), पुरण-पोली; गुजरात — शीरो-लापसी; दक्षिण — सत्यनारायण पूजा में सपाद-भक्ष्य (सवा माप गेहूँ-गुड़-केला-घी), पायसम

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

उत्तर की सत्यनारायण-कथा, बंगाल की सिन्नी, महाराष्ट्र का शीरा, दक्षिण का सपाद-भक्ष्य, तीर्थों का पूर्णिमा-स्नान — हर पूनम की रीत।

उत्तर प्रदेश-बिहार-मध्य प्रदेश-राजस्थान: «पूर्णिमा/पूनम/पूनो» — घरों में सत्यनारायण-कथा (पंडित/स्वयं), पंजीरी-पंचामृत-केला, पड़ोस बुलाना; स्त्रियाँ पूर्णिमा-व्रत व चंद्र-अर्घ्य; कार्तिक-माघ-वैशाख पूर्णिमा पर गंगा-स्नान (प्रयाग-काशी-हरिद्वार-गढ़मुक्तेश्वर), राजस्थान में पुष्कर-पूनम; मप्र में नर्मदा-पूर्णिमा स्नान (ओंकारेश्वर-होशंगाबाद), बिहार में «पूर्णिमा-कथा» व गंगा-स्नान (सुल्तानगंज)।
बंगाल-ओडिशा-असम: बंगाल में «पूर्णिमा» — सत्यनारायण (सत्यपीर) पूजा, सिन्नी-प्रसाद, कोजागरी लक्ष्मी-पूजा (आश्विन), रास-पूर्णिमा (कार्तिक), दोल-पूर्णिमा (फाल्गुन), बुद्ध-पूर्णिमा; ओडिशा में हर पूर्णिमा को «सत्यनारायण/पूर्णिमा-ओसा», गम्हा-कुमार-रास-पूर्णिमा; असम में सत्यनारायण-पूजा व «पूर्णिमा» भाओना।
महाराष्ट्र-गुजरात-गोवा: महाराष्ट्र में «पौर्णिमा» — सत्यनारायण-पूजा (शीरा-प्रसाद, सवा माप), कोजागरी (दूध-चाँदनी), नारळी-त्रिपुरी-वट-पौर्णिमा; गुजरात में «पूनम» — डाकोर/अंबाजी की पूनम-यात्रा (हर पूनम पैदल), सत्यनारायण, शरद-पूनम गरबा; गोवा में «पूर्णिमा» सत्यनारायण-पूजा व मंदिरों की पालखी।
तमिलनाडु-कर्नाटक-आंध्र-केरल: «पौर्णमि» — तिरुवण्णामलै में हर पूर्णिमा गिरिवलम् (14 किमी अरुणाचल-परिक्रमा, लाखों), कार्तिगै-दीपम; सत्यनारायण-व्रतम् (आंध्र-कर्नाटक — सपाद-भक्ष्य प्रसाद, गृह-प्रवेश/विवाह के बाद अनिवार्य), «पौर्णमि-पूजै» अम्मन-मंदिरों में (मारियम्मन); केरल में «पौर्णमि» व्रत व शिव-वैष्णव मंदिर; कर्नाटक में «हुण्णिमे» — सत्यनारायण, गुरु-पूर्णिमा, बनशंकरी-हुण्णिमे।
पंजाब-हरियाणा-दिल्ली-हिमाचल-उत्तराखंड: «पूरनमाशी/पूर्णमासी» — पंजाब में सत्यनारायण-कथा व गुरुद्वारों में पूर्णमासी (सिख-परंपरा में भी पूरनमाशी-दीवान), हरिद्वार-ऋषिकेश में गंगा-स्नान; हिमाचल-उत्तराखंड में पूर्णिमा-मेले (देव-यात्राएँ), कुमाऊँ में «पूर्णमासी» व्रत स्त्रियाँ; दिल्ली में मंदिरों की सत्यनारायण-कथा, इस्कॉन की पूर्णिमा-कीर्तन।
नेपाल-सिक्किम-बौद्ध: नेपाल में «पूर्णिमा/पूर्णे» — जनै-पूर्णिमा (श्रावण), कोजाग्रत (आश्विन), बुद्ध-जयंती (वैशाख), सत्यनारायण-पूजा घर-घर; सिक्किम-लद्दाख-बौद्ध परंपरा में पूर्णिमा «उपोसथ» (उपवास-दिन) — बुद्ध की कई घटनाएँ पूर्णिमा को; तिथि-सूची ऊपर हर परंपरा के लिए उपयोगी।
🙏 आपके घर की रीत इससे अलग है? यहाँ लिखिए

दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • उदया-तिथि (ऊपर सूची) पर व्रत; कथा उस शाम जब पूर्णिमा चंद्रोदय पर हो — तिथि-खिड़की देखें
  • सत्यनारायण-कथा के पाँचों अध्याय पूरे, प्रसाद (पंजीरी-पंचामृत-केला) सबको व स्वयं ग्रहण
  • चंद्रोदय पर अर्घ्य (ऊपर समय), खीर चाँदनी में; सफ़ेद वस्तु-दान (चंद्र)
  • तीर्थ/घर पर स्नान, दान, पितृ-स्मरण; तुलसी-पीपल को जल
  • 12 पूर्णिमा का संकल्प → उद्यापन; रोगी/गर्भवती फलाहार

❌ क्या न करें

  • कथा बीच में छोड़कर उठना, प्रसाद ठुकराना/फेंकना (कथा की सीख); मन्नत मानकर भूलना
  • पूर्णिमा को माँस-मद्य-तामसिक, कलह, झूठ; बाल-नाख़ून (कुछ रीत)
  • चंद्र-दर्शन के बिना पारण (व्रत-रूप में); बादल हों तो समय के बाद दिशा में अर्घ्य
  • पूर्णिमा को तुलसी तोड़ना (कुछ परंपराएँ — पहले तोड़ें); एकादशी की तरह चावल-वर्जन नहीं है, भ्रम न रखें
  • पूर्णिमा की रात देर तक तेज़ रोशनी-शोर — चाँदनी-शांति का दिन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगली पूर्णिमा कब है? 2026 की पूर्णिमा-तिथियाँ?

ऊपर अगली पूर्णिमा की तिथि, तिथि-खिड़की व चंद्रोदय (दिल्ली) और आने वाली 12 पूर्णिमाएँ माह-नाम सहित हैं — उदया-तिथि नियम से; पूर्णिमा दो दिन में बँटे तो व्रत उदया-दिन, सत्यनारायण-कथा व चंद्र-अर्घ्य उस शाम जब पूर्णिमा चंद्रोदय के समय हो — तिथि-खिड़की से देखें।

सत्यनारायण-कथा पूर्णिमा को ही क्यों? किसी और दिन हो सकती है?

कथा किसी भी शुभ दिन हो सकती है (गृह-प्रवेश, विवाह, जन्मदिन, मन्नत-पूर्ति) — पर पूर्णिमा, संक्रांति, एकादशी व गुरुवार श्रेष्ठ; पूर्णिमा को विष्णु-लक्ष्मी व चंद्र दोनों बली; मासिक कथा का संकल्प हो तो हर पूर्णिमा की शाम; पंडित न हों तो घर का कोई भी पढ़ सकता है।

पंजीरी «सवा» माप में क्यों?

सत्यनारायण-कथा में «सवाया» प्रसाद (सवा पाव/सवा किलो/सवा पाँच) — पूर्णता से थोड़ा अधिक — कृतज्ञता व वृद्धि का प्रतीक; कथा में साधु-वैश्य ने मन्नत भूलकर कष्ट पाया, इसलिए मन्नत का प्रसाद सवाया; पंजीरी (सूजी-घी-शक्कर-केला-तुलसी) का माप, पंचामृत भी सवा।

पूर्णिमा-व्रत में क्या खाएँ? चावल चलता है?

हाँ — पूर्णिमा को एकादशी जैसा चावल-वर्जन नहीं; व्रत में फलाहार (फल-दूध-साबूदाना-मखाना), चंद्र-दर्शन के बाद खीर-पूड़ी-सब्ज़ी-चावल; निर्जला केवल स्वस्थ व संकल्पित; प्रसाद (पंजीरी-पंचामृत) पहले।

चंद्र-दोष के लिए पूर्णिमा पर क्या करें?

कुंडली में चंद्र कमज़ोर/पीड़ित (मन-अशांति, नींद, माता-सुख) — पूर्णिमा-व्रत, चंद्र-अर्घ्य, «ॐ सों सोमाय नमः» 108, सफ़ेद वस्तु (दूध-चावल-चीनी-चाँदी-मोती) दान, शिव-अभिषेक (चंद्र शिव के मस्तक पर), माता की सेवा; मोती पंडित की सलाह से; 12 पूर्णिमा का संकल्प।

कौन-सी पूर्णिमाएँ बड़ी हैं?

कार्तिक (देव-दीपावली, गंगा-स्नान), माघ (माघी स्नान), वैशाख (बुद्ध पूर्णिमा), आषाढ़ (गुरु पूर्णिमा), श्रावण (रक्षाबंधन), आश्विन (शरद/कोजागरी), फाल्गुन (होलिका दहन), मार्गशीर्ष (दत्तात्रेय), पौष (शाकंभरी), ज्येष्ठ (वट सावित्री/स्नान), चैत्र (हनुमान जयंती), भाद्रपद (पितृ-पक्ष आरंभ) — सबके अपने पन्ने «संबंधित» में या hub पर।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।

संदेश Nakshtra Tak की ओर से आएगा; नंबर किसी और को नहीं दिया जाता।

📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें

यह भी पढ़ें: शरद पूर्णिमा (कोजागरी) · कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) · गुरु पूर्णिमा · अमावस्या (पितृ-स्नान-दान)

⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। तिथियाँ दिल्ली के सूर्योदय-तिथि से — अपने शहर का पंचांग व चंद्रोदय मिला लें; ग्रह-उपाय ज्योतिष-मान्यता हैं।

🌐 Read this page in English · ← सभी व्रत-त्योहार · पूरा पर्व-कैलेंडर