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🪔 व्रत-त्योहार

🕯️ कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

कार्तिक मास की पूर्णिमा — गंगा-स्नान, नदी में दीपदान, त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीपावली और गुरु नानक जयंती एक ही दिन।

कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026 की तिथि
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
कार्तिक · शुक्ल पक्ष · पूर्णिमा (विक्रम संवत 2083)
🌅 सूर्योदय6:51 AM
🌙 चंद्रोदय4:57 PM
🪔 प्रदोष काल5:25 PM – 7:49 PM
📿 तिथि-कालपूर्णिमा 23 नवंबर, 11:42 PM → 24 नवंबर, 8:23 PM
🕉 ब्रह्म मुहूर्त05:15 AM – 06:03 AM
⛔ राहुकाल (टालें)02:46 PM – 04:05 PM
अगले वर्ष — 2027: रविवार, 14 नवंबर 2027
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

कार्तिक पूर्णिमा साल की सबसे पवित्र पूर्णिमाओं में है — दीपावली के ठीक पंद्रह दिन बाद। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहते हैं; देवताओं ने इसी की खुशी में काशी में दीप जलाए — यही देव दीपावली है। कार्तिक-भर का स्नान-दीपदान-व्रत इसी दिन पूरा होता है।

स्त्रियाँ सुबह नदी/तालाब में स्नान, शाम को नदी या घर के जल-पात्र में आटे के दीये (दीपदान) और तुलसी-पूजा करती हैं; कई घर इसी दिन तुलसी विवाह भी करते हैं। सिखों के लिए यह गुरु नानक देव जी का प्रकाश-पर्व है। नीचे इस साल की तिथि, स्नान-दीपदान का समय, विधि, सामग्री, कथा और इलाक़ों की रीत दी गई है।

महत्व — यह व्रत क्यों

पद्म-पुराण में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान और दीपदान का फल अश्वमेध यज्ञ के बराबर बताया गया है। कार्तिक-स्नान (पूरे महीने ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान) का समापन इसी दिन होता है — जो पूरे महीने न कर सकें, वे इस एक दिन ज़रूर करें।

इस दिन नदी में 365 (या जितने संभव) दीये छोड़ने की परंपरा है — साल के हर दिन के लिए एक; काशी के घाटों की देव दीपावली विश्व-प्रसिद्ध है। यह विष्णु के मत्स्य-अवतार का दिन भी माना गया है।

पूर्णिमा का व्रत और शाम को चंद्रोदय पर अर्घ्य — कार्तिक पूर्णिमा को कृत्तिका नक्षत्र हो तो उसे «महाकार्तिकी» कहते हैं, और भी शुभ।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — भोर में स्नान, दिन में व्रत/दान, शाम को दीपदान और तुलसी-चंद्र पूजा।

  1. ब्रह्म-मुहूर्त (ऊपर समय) में नदी/तालाब/घर में गंगाजल मिलाकर स्नान; स्नान करते हुए «ॐ नमो नारायणाय» का जप; सूर्य को अर्घ्य।
  2. संकल्प — «मैं कार्तिक पूर्णिमा का व्रत, स्नान व दीपदान परिवार के कल्याण हेतु करती हूँ।» दिन में फलाहार या एक समय भोजन।
  3. सुबह घर में विष्णु-लक्ष्मी व शिव की पूजा — पीले फूल, तुलसी, बेलपत्र, पंचामृत; सत्यनारायण-कथा इस दिन विशेष फलदायी मानी जाती है (कई घर पंडित बुलाकर करवाते हैं)।
  4. दान: अन्न, वस्त्र, कंबल (सर्दी शुरू), घी, गुड़, तिल — ज़रूरतमंद/ब्राह्मण को; गौशाला में गाय को चारा।
  5. शाम को सूर्यास्त के बाद (प्रदोष में) तुलसी-चौरे पर 11/21 दीये, तुलसी की परिक्रमा; घर के हर कोने, द्वार और छत पर दीये — यही «देव दीपावली»।
  6. दीपदान: आटे के दीये बनाकर (या मिट्टी के) घी/तेल भरकर नदी-तालाब में बहाएँ; नदी न हो तो घर के बड़े पात्र में जल भरकर उसमें दीये तैराएँ — 5, 11, 21 या 365 की संख्या में।
  7. चंद्रोदय (ऊपर समय) पर चंद्रमा को दूध-जल का अर्घ्य; पूर्णिमा का व्रत उसके बाद खोलें।
  8. रात में शिव-स्मरण — त्रिपुरारी की जय; काशी-प्रयाग-हरिद्वार जा सकें तो घाट पर आरती में सम्मिलित हों, न हो तो घर पर आरती «ॐ जय जगदीश हरे»।

पूजा-सामग्री की सूची

दीपदान के आटे के दीये घर पर एक दिन पहले बना लें — 21 या 51 तो आसानी से बन जाते हैं।

  • गंगाजल, ताँबे का लोटा (स्नान-अर्घ्य को)
  • आटे/मिट्टी के दीये (21/51/365), घी-सरसों तेल, रुई की बत्ती, दीये बहाने को पत्तल/दोना
  • तुलसी का पौधा, तुलसी-पूजा को लाल चुनरी, रोली, अक्षत, फूल
  • विष्णु-लक्ष्मी व शिव का चित्र, बेलपत्र, पीले फूल, पंचामृत
  • सत्यनारायण-कथा की सामग्री (हो तो): केला-पत्ते, पंचामृत, पंजीरी (आटे/सूजी की), केला, सुपारी
  • दान की चीज़ें — अन्न, कंबल, वस्त्र, तिल, गुड़, घी
  • धूप, कपूर, अगरबत्ती, आरती-थाली, शंख-घंटी
  • चंद्र-अर्घ्य को दूध-जल, खीर (भोग)

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व्रत-कथा

तारकासुर के तीन पुत्रों — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली — ने तपस्या से ब्रह्मा से तीन उड़ने वाले नगर (त्रिपुर) पाए, जो सिर्फ़ तभी नष्ट हो सकते थे जब तीनों एक सीध में आएँ और एक ही बाण से बिंधें। उनके अत्याचार से त्रस्त देवता शिव की शरण गए।

शिव ने पृथ्वी को रथ, सूर्य-चंद्र को पहिए, मेरु को धनुष, वासुकि को प्रत्यंचा और विष्णु को बाण बनाया; कार्तिक पूर्णिमा को जब तीनों नगर एक सीध में आए, एक बाण से त्रिपुर भस्म हुआ। देवताओं ने काशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया — यही «त्रिपुरारी पूर्णिमा» और «देव दीपावली» है।

दूसरी कथा मत्स्य-अवतार की — इसी पूर्णिमा को विष्णु ने मछली का रूप धरकर प्रलय से मनु और वेदों की रक्षा की। और तीसरी — इसी दिन 1469 में गुरु नानक देव जी का प्रकाश हुआ (सिख-परंपरा के अनुसार), इसलिए गुरुद्वारों में प्रकाश-पर्व।

व्रत का भोजन, सत्यनारायण का प्रसाद और खीर

पूर्णिमा का व्रत दिन-भर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन; शाम को चंद्र-अर्घ्य के बाद खीर। सत्यनारायण-कथा हो तो पंजीरी-पंचामृत-केला का प्रसाद।

  • दिन: फल, दूध, साबूदाना या सिंघाड़े का हलवा; सेंधा नमक
  • सत्यनारायण प्रसाद: सूजी/आटे की पंजीरी (घी-शक्कर-मखाना), पंचामृत, केला, तुलसी-दल
  • शाम: चावल-दूध की खीर (चंद्रमा को भोग), पूड़ी-सब्ज़ी, हलवा
  • बंगाल-ओडिशा: «रास पूर्णिमा» पर खिचुड़ी-लाबड़ा, पायेश; ओडिशा में कार्तिक-हब्ब का अंतिम भोजन
  • दान का अन्न-गुड़-तिल भोजन से पहले अलग रख दें

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

एक पूर्णिमा, अनेक नाम — देव दीपावली, त्रिपुरारी, रास पूर्णिमा, बोइता बंदाण, प्रकाश-पर्व।

काशी-उत्तर प्रदेश-बिहार: देव दीपावली — गंगा के घाटों पर लाखों दीये, घाट-आरती; घरों में तुलसी-चौरे और नदी-तालाब में दीपदान; कार्तिक-स्नान का समापन, कई स्त्रियाँ पूरे महीने भोर-स्नान करके इस दिन पारण करती हैं। पुष्कर (राजस्थान) का कार्तिक मेला भी इसी दिन।
पंजाब-हरियाणा-दिल्ली: गुरु नानक जयंती (प्रकाश-पर्व) — प्रभात-फेरी, अखंड पाठ, नगर-कीर्तन, लंगर; हिंदू घरों में गंगा-स्नान (हरिद्वार) और दीपदान।
बंगाल-असम-ओडिशा: रास पूर्णिमा — कृष्ण-रासलीला, राधा-कृष्ण की झाँकियाँ, मणिपुर-असम में रास-नृत्य; ओडिशा में «बोइता बंदाण» — भोर में केले के तने/काग़ज़ की नावें दीप के साथ बहाना (प्राचीन समुद्री-व्यापार की स्मृति) और कार्तिक-ब्रत का समापन।
महाराष्ट्र-गुजरात: त्रिपुरारी पूर्णिमा — शिव-मंदिरों में «त्रिपुर-वात» (दीप-स्तंभ) जलाना, तुलसी विवाह का अंतिम दिन; गुजरात में «देव दिवाळी» — दीये, मंदिरों में अन्नकूट, कई जगह नए साल की तरह मिठाई।
दक्षिण भारत: कार्तिगै दीपम (तमिलनाडु — कृत्तिका नक्षत्र पर, प्रायः इसी के आस-पास) — घर के बाहर मिट्टी के अगल-दीप की कतारें, तिरुवण्णामलै का महादीपम; कर्नाटक-आंध्र में कार्तिक सोमवार व्रत का समापन, कार्तिक दीपोत्सव।
🙏 आपके घर की रीत इससे अलग है? यहाँ लिखिए

दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • स्नान ब्रह्म-मुहूर्त में, गंगाजल मिलाकर; सूर्य को अर्घ्य
  • शाम को दीपदान — नदी न हो तो घर के जल-पात्र में
  • सर्दी की शुरुआत — कंबल/वस्त्र-दान इस दिन विशेष
  • तुलसी-पूजा और परिक्रमा; तुलसी विवाह बाक़ी हो तो आज अंतिम दिन
  • चंद्रोदय पर अर्घ्य, फिर व्रत खोलें

❌ क्या न करें

  • दीये प्लास्टिक/थर्मोकोल की नाव में नहीं — पत्तल/दोना/आटे के दीये (नदी साफ़ रहे)
  • पूर्णिमा को बाल-नाख़ून, मांस-मदिरा, कलह — वर्जित
  • घाट पर गहरे पानी में दीपदान नहीं; बच्चों को अकेला नहीं
  • तुलसी-दल शाम को न तोड़ें
  • व्रत में तामसिक भोजन नहीं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कार्तिक पूर्णिमा 2026 में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की कार्तिक पूर्णिमा है — पंचांग-गणना से; चंद्रोदय, ब्रह्म-मुहूर्त (स्नान) और प्रदोष (दीपदान) के दिल्ली-समय भी वहीं हैं।

देव दीपावली और दीपावली में क्या अंतर है?

दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनुष्यों की लक्ष्मी-पूजा है; देव दीपावली पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं का दीपोत्सव — त्रिपुरासुर-वध की खुशी में, काशी के घाटों पर सबसे भव्य।

दीपदान कैसे करें अगर नदी पास न हो?

घर के आँगन/छत पर बड़े पात्र (परात/टब) में जल भरकर उसमें आटे या मिट्टी के दीये तैराएँ, तुलसी-चौरे पर दीये जलाएँ — फल वही माना गया है। प्लास्टिक की नाव न बनाएँ।

क्या इस दिन सत्यनारायण कथा करवानी चाहिए?

कार्तिक पूर्णिमा सत्यनारायण-कथा के लिए साल की सबसे शुभ पूर्णिमा मानी जाती है; घर पर पंडित से या पुस्तक से स्वयं भी की जा सकती है — पंजीरी-पंचामृत-केले का प्रसाद।

कार्तिक-स्नान क्या है?

कार्तिक-भर (शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा) रोज़ भोर में स्नान, तुलसी-पूजा और दीपदान का नियम; इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा को होता है। पूरा महीना न हो सके तो एकादशी से पूर्णिमा के पाँच दिन (भीष्म पंचक) भी पर्याप्त हैं।

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। घाट पर सुरक्षा और नदी की स्वच्छता का ध्यान रखें।

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