🌕 शरद पूर्णिमा (कोजागरी) 2026
आश्विन पूर्णिमा — चाँदनी में रखी खीर, लक्ष्मी-पूजन और रात-जागरण; सोलह कलाओं वाला चंद्रमा अमृत बरसाता है।
शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा है — दशहरे के लगभग पाँच दिन बाद और करवा चौथ से चार दिन पहले। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है; इसीलिए खीर बनाकर रात-भर चाँदनी में रखी जाती है और सुबह प्रसाद-रूप में खाई जाती है।
इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं — «को जागर्ति?» यानी «कौन जाग रहा है?» — इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर घूमकर देखती हैं कि कौन जागकर उनका स्मरण कर रहा है, और उसे धन-समृद्धि देती हैं। बंगाल-ओडिशा-असम-मिथिला में यही दिन लक्ष्मी पूजा का मुख्य दिन है, गुजरात में शरद-पूनम का रास और ब्रज में रास-पूर्णिमा।
महत्व — यह व्रत क्यों
आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋतु पित्त-प्रधान है और इस रात की चाँदनी शीतल-औषधीय मानी गई — दूध-चावल की खीर चाँदनी में रखने से उसके गुण बढ़ते हैं। इसी से अस्थमा-रोगियों को इस रात खीर खिलाने की लोक-परंपरा है।
यह लक्ष्मी-प्राप्ति का व्रत है — पूर्णिमा को स्त्रियाँ व्रत रखती हैं, शाम को चंद्रोदय पर चंद्र-अर्घ्य, रात में लक्ष्मी-पूजन और जागरण; अगले दिन सुबह खीर का प्रसाद बाँटकर व्रत खोलती हैं।
ब्रज में यह श्रीकृष्ण के महारास की रात है — इसी पूर्णिमा को कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था; इसलिए रास-पूर्णिमा भी।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — दिन का व्रत, चंद्रोदय पर अर्घ्य, रात लक्ष्मी-पूजन और चाँदनी में खीर।
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें — «मैं शरद पूर्णिमा का व्रत लक्ष्मी-प्राप्ति व परिवार की समृद्धि के लिए करती हूँ।» दिन में फलाहार।
- शाम को घर के मंदिर या पूजा-स्थान की सफ़ाई; लक्ष्मी जी व श्रीकृष्ण/राधा-कृष्ण की मूर्ति/चित्र स्थापित करें, लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
- दूध-चावल-शक्कर की खीर बनाएँ (केसर-इलायची-मेवा से) — पीतल या चाँदी के बर्तन में, ढक्कन नहीं, महीन कपड़ा/जाली से ढककर।
- चंद्रोदय (ऊपर समय) पर छत/आँगन में चंद्रमा को जल-दूध का अर्घ्य दें, दीप दिखाएँ; «ॐ सोम सोमाय नमः» या चंद्र-मंत्र का जप।
- खीर का पात्र खुली छत या आँगन में चाँदनी में रखें — जहाँ सीधी चाँदनी पड़े; ऊपर जाली ताकि कीड़े-पक्षी न बैठें। कम-से-कम रात 12 बजे तक, परंपरा में पूरी रात।
- रात में लक्ष्मी-पूजन: दीप, फूल, कमल (मिले तो), खील-बताशे, सफ़ेद मिठाई, इत्र; श्रीसूक्त, लक्ष्मी-चालीसा या «ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः» का जप। घर के द्वार-खिड़कियाँ खुली रखें, दीये जलाएँ।
- जागरण: रात में भजन-कीर्तन, कथा, या कम-से-कम आधी रात तक जागकर लक्ष्मी-स्मरण — «को जागर्ति» की परंपरा।
- सुबह (या आधी रात के बाद) चाँदनी में रखी खीर पहले लक्ष्मी जी व चंद्रमा को भोग लगाएँ, फिर परिवार में प्रसाद बाँटें और व्रत खोलें। रोगी, बच्चे, बुज़ुर्ग सबको दें।
पूजा-सामग्री की सूची
खीर के लिए साफ़ धातु का बर्तन और जाली सबसे ज़रूरी हैं।
- खीर: दूध (गाय का हो तो उत्तम), चावल, शक्कर/मिश्री, केसर, इलायची, बादाम-काजू-किशमिश, मखाने
- पीतल/चाँदी/स्टील का खुला बर्तन + महीन कपड़ा या जाली (ढकने को)
- लक्ष्मी जी व राधा-कृष्ण का चित्र/मूर्ति, लाल-पीला कपड़ा
- दीपक (घी), धूप, कपूर, अगरबत्ती
- फूल — कमल/गुलाब, फूल-माला
- खील-बताशे, सफ़ेद मिठाई (बर्फ़ी/पेड़ा), फल
- रोली, अक्षत, हल्दी, मौली, चंदन, इत्र
- चंद्र-अर्घ्य हेतु ताँबे/चाँदी का लोटा, दूध-जल
- श्रीसूक्त/लक्ष्मी-चालीसा की पुस्तक, आसन
- पान, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल
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पंचांग देखें →व्रत-कथा
एक साहूकार की दो बेटियाँ थीं। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, पर बड़ी बेटी पूरी विधि से और छोटी अधूरे मन से — भोजन करके। विवाह के बाद छोटी बेटी की संतानें जन्म लेते ही मर जाती थीं। पंडितों ने बताया कि अधूरे व्रत का यह फल है।
छोटी बहन ने पूर्णिमा का व्रत विधि से किया, पर उस बार भी उसका पुत्र जन्म के बाद निष्प्राण हो गया। उसने बालक को पटरे पर लिटाकर कपड़ा ढक दिया और बड़ी बहन को बुलाकर उसी पटरे पर बैठने को कहा। बड़ी बहन के बैठते ही उसके पुण्य-व्रत के स्पर्श से बालक रो पड़ा।
बड़ी बहन बोली — «तू मुझ पर हत्या का दोष लगाना चाहती थी?» छोटी ने कहा — «नहीं दीदी, यह तो पहले से मरा था, तुम्हारे व्रत के पुण्य से जीवित हुआ है।» तभी से नगर में शरद पूर्णिमा का व्रत विधि-पूर्वक करने की परंपरा चली — यह कथा सिखाती है कि व्रत मन से और पूरी विधि से हो।
दूसरी कथा कोजागरी की है — इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर उतरकर पूछती हैं «को जागर्ति?» — जो जागकर उनका स्मरण करता है, उसके घर वे स्थिर रहती हैं। इसीलिए बंगाल में कोजागरी लक्ष्मी पूजा और मिथिला में कोजागरा (नवविवाहित वर के घर) की रीत है।
चाँदनी की खीर — बनाने की विधि और व्रत का भोजन
खीर ही इस पर्व का प्रसाद है। दूध को गाढ़ा करके चावल, शक्कर, केसर-इलायची और मेवे मिलाएँ; ठंडी करके खुले बर्तन में जाली से ढककर चाँदनी में रखें। प्लास्टिक/एल्यूमीनियम में न रखें — पीतल, चाँदी या स्टील उत्तम।
- व्रत का दिन: फल, दूध, साबूदाना-खिचड़ी या सिंघाड़े का हलवा; सेंधा नमक
- खीर (4 लोगों के लिए): 1 लीटर दूध, 50 ग्राम चावल (भीगे), 80-100 ग्राम शक्कर, 5-6 केसर के धागे, 4 इलायची, 2 चम्मच कटे मेवे — धीमी आँच पर 40 मिनट
- बंगाल-ओडिशा: कोजागरी को चिड़े (चिवड़ा), नारियल, खोई-बताशे, दूध-मखाना का प्रसाद
- ब्रज: रास-पूर्णिमा पर माखन-मिश्री और खीर का भोग ठाकुर जी को
- अगली सुबह खीर का प्रसाद सबको दें — विशेषकर बच्चों और अस्थमा/श्वास-रोगियों को (लोक-मान्यता)
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
एक ही पूर्णिमा — कहीं खीर और चाँदनी, कहीं लक्ष्मी पूजा, कहीं रास।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- खीर सीधी चाँदनी में रखें — जहाँ बादल/छज्जा न ढके; ऊपर जाली ज़रूर
- चंद्रोदय पर अर्घ्य दें, रात लक्ष्मी-पूजन और कुछ देर जागरण
- घर के दरवाज़े-खिड़कियों पर दीये — «लक्ष्मी आगमन» का संकेत
- सुबह खीर का प्रसाद सबमें बाँटें, विशेषकर बच्चों और रोगियों में
- श्रीसूक्त या लक्ष्मी-चालीसा का पाठ करें
❌ क्या न करें
- खीर प्लास्टिक/एल्यूमीनियम के बर्तन में न रखें; बिना जाली के न रखें (कीड़े-पक्षी)
- रात में कलह, जुआ (कई जगह रिवाज है, पर लक्ष्मी-पूजा वाली रात मन-मुटाव नहीं)
- पूर्णिमा को बाल-नाख़ून काटना, मांस-मदिरा — परंपरा में वर्जित
- खीर बहुत गर्म रखने पर चाँदनी में न रखें — पहले ठंडी करें
- मधुमेह-रोगी शक्कर की खीर का प्रसाद थोड़ा-सा ही लें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शरद पूर्णिमा 2026 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की आश्विन पूर्णिमा है — पंचांग-गणना से; चंद्रोदय का दिल्ली-समय और पूर्णिमा तिथि की अवधि भी ऊपर है। पूर्णिमा तिथि यदि अगले दिन तक चले तो चाँदनी-खीर उसी रात रखें जिस रात पूर्णिमा तिथि चंद्रोदय के समय हो।
खीर चाँदनी में कितनी देर रखें?
चंद्रोदय के बाद से कम-से-कम आधी रात (12 बजे) तक; परंपरा में पूरी रात और सुबह प्रसाद। जाली से ढककर रखें।
क्या खीर सचमुच औषधि बन जाती है?
यह लोक और आयुर्वेदिक मान्यता है — शरद की शीतल चाँदनी और दूध-चावल का संयोग पित्त-शामक माना गया। इसे श्रद्धा और परंपरा के रूप में लें; किसी रोग का इलाज चिकित्सक से ही कराएँ।
शरद पूर्णिमा और कोजागरी में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि हैं — आश्विन पूर्णिमा। उत्तर भारत में खीर-चंद्रमा पर ज़ोर है, बंगाल-ओडिशा-मिथिला-महाराष्ट्र में «कोजागरी» नाम से लक्ष्मी-पूजन व जागरण पर।
शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे खोलें?
अगली सुबह चाँदनी में रखी खीर लक्ष्मी-चंद्रमा को भोग लगाकर, उसी के प्रसाद से व्रत खोलें; रात में जागरण किया हो तो आधी रात के बाद भी प्रसाद ले सकते हैं।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। स्वास्थ्य-दावों को श्रद्धा के रूप में लें, चिकित्सा का विकल्प नहीं।
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