हर कुंडली, पंचांग और राशिफल के पीछे क्या गणित है — पूरी पारदर्शिता से
Nakshtra Tak की हर गणना का आधार है Swiss Ephemeris — खगोल-गणना का वही अंतरराष्ट्रीय मानक जिस पर दुनिया के प्रतिष्ठित ज्योतिष-software चलते हैं। यह NASA-JPL की खगोलीय सारणियों से व्युत्पन्न है, इसलिए सूर्य से शनि तक हर ग्रह की स्थिति विकला (arc-second) स्तर तक शुद्ध मिलती है। हाथ की सारणियों या मोटे अनुमान वाली गणना से आने वाला 1-2 अंश का अंतर यहाँ संभव ही नहीं — और यही अंतर कई बार लग्न या नवमांश बदल देता है।
निरयण (sidereal) राशिचक्र के लिए हम लाहिरी अयनांश प्रयोग करते हैं — भारत सरकार की पंचांग-समिति द्वारा स्वीकृत और वैदिक ज्योतिष में सर्वाधिक प्रचलित मानक। राहु-केतु की गणना सत्य पात (true node) से होती है, जो छाया-ग्रहों की वास्तविक खगोलीय स्थिति देता है।
वैदिक दिन स्थानीय सूर्योदय से आरम्भ होता है — इसीलिए हमारा पंचांग हर शहर के अपने सूर्योदय-सूर्यास्त से बनता है। तिथि, नक्षत्र, योग व करण उनके समाप्ति-समय सहित दिखते हैं; राहुकाल, यमगण्ड, गुलिक, चौघड़िया व होरा उसी शहर के दिनमान को बाँटकर निकलते हैं (रात्रि-चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक)। दिल्ली का राहुकाल चेन्नई पर लगा देना जैसी चूक यहाँ नहीं होती।
| अंग | हमारी विधि |
|---|---|
| वर्ग-कुंडलियाँ | पूर्ण षोडशवर्ग — D1 से D60 तक सभी 16 वर्ग, उच्च/नीच/वर्गोत्तम चिह्नों सहित |
| भाव | चलित (भाव-मध्य) कुंडली अलग से — ग्रह किस भाव में «वास्तव में» है, यह स्पष्ट दिखे |
| दशा | विंशोत्तरी 5 स्तर तक (महादशा → अंतर → प्रत्यंतर → सूक्ष्म → प्राण) + योगिनी दशा |
| बल | षड्बल, भाव-बल, अष्टकवर्ग व सर्वाष्टकवर्ग (प्रस्तार सहित) |
| अन्य पद्धतियाँ | KP (249 उप-स्वामी), जैमिनी (आरूढ़-पद), लाल किताब, अंक-ज्योतिष, पाश्चात्य |
कुंडली-मिलान में अष्टकूट के साथ वश्य व गण की गणना पंचवर्ग समूह-मैट्रिक्स से होती है — केवल राशि-अंक जोड़ने वाली सतही विधि से नहीं। मांगलिक-विचार परिहारों (cancellation) सहित और नवमांश-मिलान अलग से देखा जाता है। मुहूर्त-चयन में पंचांग-शुद्धि (तिथि-वार-नक्षत्र-योग-करण), भद्रा, पंचक व वर्ज्य जैसी बाधाएँ जाँचकर ही समय सुझाया जाता है।
हर नई गणना को जोड़ने से पहले हम उसके परिणाम प्रतिष्ठित ज्योतिष-software व प्रकाशित पंचांगों से मिलाते हैं — ग्रह-स्पष्ट, दशा-संधियाँ, सूर्योदय-समय और मिलान-अंक तक। यह मिलान-जाँच समय-समय पर दोहराई भी जाती है, ताकि accuracy कभी न फिसले। हमारी फलादेश-प्रणाली ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी (15+ वर्ष अनुभव; BPHS, फलदीपिका, ज्योतिष रत्नाकर व जातक पारिजात के अध्येता) के मार्गदर्शन में शास्त्रीय सूत्रों पर रची गई है।
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