सूर्योदय से चलती 60 घटी की प्राचीन भारतीय समय-प्रणाली — अभी, इसी क्षण
आधुनिक घड़ी दिन को 24 घंटों में बाँटती है और आधी रात से गिनती शुरू करती है। भारतीय समय-प्रणाली इससे भिन्न — और खगोल से अधिक जुड़ी — है: वैदिक दिन सूर्योदय से आरम्भ होता है और पूरा अहोरात्र 60 घटी में बँटता है। एक घटी लगभग 24 मिनट की होती है; एक घटी में 60 पल (लगभग 24 सेकंड) और एक पल में 60 विपल (लगभग 0.4 सेकंड) होते हैं।
| वैदिक इकाई | मान | आधुनिक समय में |
|---|---|---|
| 1 अहोरात्र (दिन-रात) | 60 घटी | 24 घंटे |
| 1 घटी (नाड़ी/दण्ड) | 60 पल | ≈ 24 मिनट |
| 1 पल | 60 विपल | ≈ 24 सेकंड |
| 1 विपल | — | ≈ 0.4 सेकंड |
| 1 मुहूर्त | 2 घटी | ≈ 48 मिनट |
पंचांग की तिथि, नक्षत्र और वार — सब सूर्योदय से बदलते हैं; इसीलिए ज्योतिष की हर गणना का दिन भी वहीं से शुरू होता है। प्राचीन काल में जल-घड़ी (घटिका-यंत्र) से घटी नापी जाती थी — एक निश्चित छेद वाला कटोरा पानी में डूबने में ठीक एक घटी लेता था। मुहूर्त-गणना, जन्म-समय का इष्टकाल और कई शास्त्रीय विधियाँ आज भी घटी-पल में ही लिखी मिलती हैं — जन्म-कुंडली बनाते समय इष्ट घटी यही है।
बड़ा अंक आज के सूर्योदय से अब तक बीता समय घटी : पल : विपल में दिखाता है — यह हर पल जीवित चलती है। नीचे उसी क्षण का सामान्य समय और आज का सूर्योदय दिखता है। यह गणना दिल्ली के सूर्योदय पर है; अपने शहर के सटीक सूर्योदय के साथ यही घड़ी पंचांग-पन्ने पर मिलेगी, जहाँ 60-घटी और 30-घटी दोनों रूप हैं।
अपनी कुंडली की इष्ट-घटी जाननी हो तो निःशुल्क कुंडली बनाइए, और किसी कार्य का शुभ समय देखना हो तो मुहूर्त व चौघड़िया देखिए।