🚩 हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) 2027
चैत्र पूर्णिमा — बजरंगबली का जन्मदिन (सूर्योदय के समय); सिंदूर-चोला, चमेली का तेल, बूंदी-लड्डू, सुंदरकांड-हनुमान चालीसा; घर के बच्चों-पुरुषों की रक्षा का दिन।
हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है — राम नवमी के छह दिन बाद। मान्यता है कि इसी दिन सूर्योदय के समय, मंगलवार, चित्रा नक्षत्र में अंजनी और केसरी के घर पवन-पुत्र हनुमान का जन्म हुआ। (दक्षिण-कर्नाटक में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष/वैशाख में अलग तिथि पर।)
घर की स्त्रियाँ इस दिन परिवार — विशेषकर बच्चों व पुरुषों — की रक्षा, भय-रोग-नज़र से बचाव और मंगल-दोष शांति के लिए व्रत रखती हैं, हनुमान जी को सिंदूर-चोला और बूंदी-लड्डू चढ़ाती हैं, सुंदरकांड/चालीसा का पाठ करती हैं। नीचे इस साल की तिथि, सूर्योदय (जन्म) मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
हनुमान संकटमोचन हैं — «भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै»; उनकी पूजा भय, रोग, शनि-मंगल की पीड़ा और बुरी नज़र से रक्षा के लिए; जो स्त्रियाँ बच्चों/पति की सुरक्षा चाहती हैं, वे इस दिन का व्रत रखती हैं (स्त्रियाँ हनुमान की पूजा करती हैं, बस चोला-सिंदूर स्पर्श कई परंपराओं में पुरुष चढ़ाते हैं)।
जन्म-समय सूर्योदय — इसलिए पूजा ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय (ऊपर समय) में; पूर्णिमा होने से चंद्र-अर्घ्य और सत्यनारायण-कथा भी। मंगलवार या शनिवार पड़े तो और विशेष।
सिंदूर की कथा — सीता जी को सिंदूर लगाते देख हनुमान ने राम की दीर्घायु के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया; तभी से सिंदूर-चोला; चमेली का तेल हनुमान को प्रिय; बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा भोग।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — सूर्योदय पर जन्म-पूजा, दिन में सुंदरकांड-चालीसा, शाम को आरती-प्रसाद; मंदिर में चोला-ध्वजा।
- ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान, लाल/केसरिया वस्त्र; संकल्प — «मैं हनुमान जयंती का व्रत परिवार की रक्षा व संकट-निवारण हेतु करती हूँ।» दिन में फलाहार/एक समय भोजन (कई घर सिर्फ़ पूजा, व्रत नहीं)।
- सूर्योदय (ऊपर समय — जन्म-काल) पर पूजा: हनुमान जी की मूर्ति/चित्र (राम-दरबार के साथ) पर लाल कपड़ा; जल से स्नान, फिर सिंदूर-चमेली का तेल (चोला — पुरुष चढ़ाएँ जहाँ रीत), लाल फूल-माला (गेंदा-गुड़हल), पान-बीड़ा, लौंग-इलायची, बूंदी-लड्डू/बेसन-लड्डू, गुड़-चना; धूप-दीप (चमेली/घी)।
- हनुमान चालीसा 1/7/11 बार, बजरंग बाण, सुंदरकांड (पूरा या सामूहिक); «ॐ हं हनुमते नमः» का 108 जप; राम-नाम — हनुमान को राम-नाम सबसे प्रिय।
- जन्म-कथा (नीचे) सुनें; बच्चों को हनुमान जी की बाल-लीला (सूर्य को फल समझकर निगलना) सुनाएँ; पुरुषों-बच्चों के माथे पर हनुमान जी का सिंदूर-टीका — रक्षा।
- मंदिर: हनुमान-मंदिर में ध्वजा (लाल/केसरिया झंडा) चढ़ाना, चोला, तेल-सिंदूर; बूंदी-प्रसाद व चना-गुड़ बाँटना; भंडारा।
- दान: लाल वस्त्र, गुड़-चना, बूंदी, तेल — ज़रूरतमंद/गौशाला; कुत्ते-बंदरों को रोटी-केला।
- शाम: आरती «आरती कीजै हनुमान लला की», दीप; पूर्णिमा — चंद्रोदय पर अर्घ्य, सत्यनारायण-कथा (हो सके तो); व्रत खोलें।
- रात्रि/अगले दिन: सुंदरकांड-पाठ की परंपरा (मंगलवार/शनिवार जारी रखें); हनुमान जी का प्रसाद अगले दिन तक बाँटें।
पूजा-सामग्री की सूची
सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा — हनुमान जी की पूजा की पहचान।
- हनुमान जी की मूर्ति/चित्र (राम-दरबार सहित), लाल कपड़ा, चौकी
- सिंदूर, चमेली का तेल (चोला), केसरिया/लाल वस्त्र-लंगोट, जनेऊ
- लाल फूल (गेंदा-गुड़हल-गुलाब), फूल-माला, तुलसी-दल
- पान-बीड़ा, लौंग, इलायची, सुपारी, गुड़-चना (भुना), बूंदी/बेसन के लड्डू, केला-फल
- दीपक (घी/चमेली तेल), धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी
- लाल/केसरिया ध्वजा (मंदिर को), रोली, अक्षत, मौली
- हनुमान चालीसा/सुंदरकांड/बजरंग बाण पुस्तक, माला
- दान: लाल वस्त्र, गुड़-चना, तेल; सत्यनारायण-कथा हो तो पंजीरी-केला
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पंचांग देखें →व्रत-कथा
पवन-देव के वरदान और अंजनी माता के तप से, चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय के समय, कपि-राज केसरी के घर हनुमान का जन्म हुआ — शिव के ग्यारहवें रुद्र-अंश, वायु-पुत्र। जन्म लेते ही भूख लगी; उगते सूर्य को लाल फल समझकर आकाश में उड़े और निगलने लगे; इंद्र ने वज्र मारा — हनु (ठोड़ी) टूटी, इसीलिए «हनुमान»; पवन-देव रुष्ट हुए, वायु रुक गई; देवताओं ने अनेक वरदान दिए — अजर-अमर, अजेय, इच्छानुसार रूप। ऋषियों के शाप से उन्हें अपनी शक्ति का स्मरण तब तक न रहा जब तक कोई याद न दिलाए — जांबवंत ने समुद्र-तट पर दिलाया।
सुंदरकांड — सीता की खोज में समुद्र लाँघना, लंका-दहन, अशोक-वाटिका में सीता को राम की मुद्रिका; युद्ध में लक्ष्मण के लिए संजीवनी-पर्वत उठाना — «राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम»; राम की भक्ति में सीना चीरकर राम-सीता दिखाना। हनुमान चिरंजीवी हैं — जहाँ राम-कथा, वहाँ हनुमान उपस्थित।
सिंदूर-कथा — एक दिन हनुमान ने सीता को माँग में सिंदूर भरते देखा; पूछा «क्यों?» — «स्वामी की दीर्घायु के लिए»। हनुमान ने सोचा — चुटकी-भर से इतना, तो पूरे शरीर पर लगाने से प्रभु अजर-अमर होंगे — और सिंदूर से रँग गए। राम मुस्काए और वर दिया — जो हनुमान को सिंदूर-तेल चढ़ाएगा, उस पर राम-हनुमान दोनों की कृपा। तभी से सिंदूर-चोला।
बूंदी-लड्डू, गुड़-चना, पान-बीड़ा — बजरंगबली का भोग
हनुमान जी को बूंदी/बेसन के लड्डू, भुना चना-गुड़, केला, पान-बीड़ा (लौंग-इलायची-सुपारी), मालपुआ और इमरती प्रिय; व्रत में फलाहार, पूर्णिमा को खीर।
- बूंदी के लड्डू (या घर की बेसन-बूंदी घी में तलकर चाशनी में) — मुख्य भोग; बेसन-लड्डू, इमरती, मालपुआ
- गुड़-भुना चना, केला-सेब, पान-बीड़ा
- व्रत-भोजन: फल-दूध, साबूदाना, सिंघाड़े का हलवा; पूर्णिमा को चंद्र-अर्घ्य के बाद खीर-पूड़ी
- मंदिर-भंडारा: हलवा-पूड़ी-चना, बूंदी-प्रसाद
- दक्षिण (हनुमान जयंती/जन्मोत्सव): वड़ा-माला (वड़ों की माला), पानकम, बटर-मिश्री; महाराष्ट्र: सुंठवड़ा, तेल-सिंदूर के बाद नारियल
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
उत्तर में चैत्र पूर्णिमा, दक्षिण-कर्नाटक में अलग तिथि, महाराष्ट्र में सूर्योदय का जन्मोत्सव — हनुमान हर जगह के।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- पूजा सूर्योदय पर (जन्म-काल) — ऊपर समय; लाल/केसरिया वस्त्र
- सिंदूर-चमेली का चोला, बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा; ध्वजा मंदिर में
- सुंदरकांड/चालीसा का पाठ — परिवार के साथ; राम-नाम ज़रूर
- बच्चों-पुरुषों को सिंदूर-टीका — रक्षा; गुड़-चना बाँटें
- पूर्णिमा — चंद्र-अर्घ्य, सत्यनारायण-कथा
❌ क्या न करें
- हनुमान-पूजा में मांस-मदिरा, तामसिक — कठोर वर्जना; ब्रह्मचर्य का दिन
- स्त्रियाँ मूर्ति को चोला-सिंदूर स्पर्श कई परंपराओं में नहीं करतीं — फूल-भोग-पाठ करें (अपनी रीत)
- हनुमान जी को केवल तुलसी नहीं — राम के नाम से चढ़ाएँ; चरणामृत ठीक
- काले-सफ़ेद वस्त्र पूजा में नहीं
- चोला उतारे सिंदूर को कूड़े में नहीं — जल/पौधे में
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हनुमान जयंती 2027 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की चैत्र पूर्णिमा है (उत्तर-भारतीय परंपरा) — पंचांग-गणना से; सूर्योदय (जन्म-काल) व चंद्रोदय का दिल्ली-समय भी वहीं। दक्षिण-कर्नाटक-आंध्र में तिथि अलग (मार्गशीर्ष/वैशाख)।
क्या स्त्रियाँ हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?
हाँ — फूल, भोग, दीप, चालीसा-सुंदरकांड, व्रत सब कर सकती हैं; लोक-परंपरा में कई जगह मूर्ति को सिंदूर-चोला चढ़ाना और चरण-स्पर्श पुरुष करते हैं (हनुमान बाल-ब्रह्मचारी) — यह घर-मंदिर की रीत पर निर्भर है; शास्त्र में स्त्री-पूजा वर्जित नहीं।
हनुमान जी को सिंदूर क्यों?
सीता जी की माँग के सिंदूर से राम की दीर्घायु की बात सुनकर हनुमान ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — राम प्रसन्न हुए और वर दिया कि सिंदूर-तेल चढ़ाने वाले पर कृपा होगी; इसीलिए सिंदूर-चमेली का चोला।
हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव?
कई विद्वान «जयंती» की जगह «जन्मोत्सव» कहते हैं — क्योंकि हनुमान चिरंजीवी हैं (जयंती दिवंगत के लिए); दोनों नाम प्रचलित, पर्व वही।
मंगल-दोष/शनि-पीड़ा में हनुमान-पूजा?
हनुमान मंगल व शनि दोनों को शांत करने वाले माने गए — मांगलिक/साढ़ेसाती में मंगलवार-शनिवार हनुमान चालीसा, सिंदूर-तेल, गुड़-चना का दान; जयंती से संकल्प लेना उत्तम। कुंडली-पन्ने पर अपना दोष देखें।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व मंदिर की रीत सर्वोपरि है। दक्षिण भारत में तिथि भिन्न है।
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