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🪔 व्रत-त्योहार

🚩 हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

चैत्र पूर्णिमा — बजरंगबली का जन्मदिन (सूर्योदय के समय); सिंदूर-चोला, चमेली का तेल, बूंदी-लड्डू, सुंदरकांड-हनुमान चालीसा; घर के बच्चों-पुरुषों की रक्षा का दिन।

हनुमान जयंती (चैत्र पूर्णिमा) 2027 की तिथि
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
चैत्र · शुक्ल पक्ष · पूर्णिमा (विक्रम संवत 2084)
🕉 ब्रह्म मुहूर्त04:15 AM – 05:03 AM
🌅 सूर्योदय5:51 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त11:56 AM – 12:44 PM
📿 तिथि-कालपूर्णिमा 20 अप्रैल, 4:51 AM → 21 अप्रैल, 3:57 AM
🌙 चंद्रोदय6:27 PM
⛔ राहुकाल (टालें)03:35 PM – 05:12 PM
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है — राम नवमी के छह दिन बाद। मान्यता है कि इसी दिन सूर्योदय के समय, मंगलवार, चित्रा नक्षत्र में अंजनी और केसरी के घर पवन-पुत्र हनुमान का जन्म हुआ। (दक्षिण-कर्नाटक में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष/वैशाख में अलग तिथि पर।)

घर की स्त्रियाँ इस दिन परिवार — विशेषकर बच्चों व पुरुषों — की रक्षा, भय-रोग-नज़र से बचाव और मंगल-दोष शांति के लिए व्रत रखती हैं, हनुमान जी को सिंदूर-चोला और बूंदी-लड्डू चढ़ाती हैं, सुंदरकांड/चालीसा का पाठ करती हैं। नीचे इस साल की तिथि, सूर्योदय (जन्म) मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।

महत्व — यह व्रत क्यों

हनुमान संकटमोचन हैं — «भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै»; उनकी पूजा भय, रोग, शनि-मंगल की पीड़ा और बुरी नज़र से रक्षा के लिए; जो स्त्रियाँ बच्चों/पति की सुरक्षा चाहती हैं, वे इस दिन का व्रत रखती हैं (स्त्रियाँ हनुमान की पूजा करती हैं, बस चोला-सिंदूर स्पर्श कई परंपराओं में पुरुष चढ़ाते हैं)।

जन्म-समय सूर्योदय — इसलिए पूजा ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय (ऊपर समय) में; पूर्णिमा होने से चंद्र-अर्घ्य और सत्यनारायण-कथा भी। मंगलवार या शनिवार पड़े तो और विशेष।

सिंदूर की कथा — सीता जी को सिंदूर लगाते देख हनुमान ने राम की दीर्घायु के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया; तभी से सिंदूर-चोला; चमेली का तेल हनुमान को प्रिय; बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा भोग।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — सूर्योदय पर जन्म-पूजा, दिन में सुंदरकांड-चालीसा, शाम को आरती-प्रसाद; मंदिर में चोला-ध्वजा।

  1. ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान, लाल/केसरिया वस्त्र; संकल्प — «मैं हनुमान जयंती का व्रत परिवार की रक्षा व संकट-निवारण हेतु करती हूँ।» दिन में फलाहार/एक समय भोजन (कई घर सिर्फ़ पूजा, व्रत नहीं)।
  2. सूर्योदय (ऊपर समय — जन्म-काल) पर पूजा: हनुमान जी की मूर्ति/चित्र (राम-दरबार के साथ) पर लाल कपड़ा; जल से स्नान, फिर सिंदूर-चमेली का तेल (चोला — पुरुष चढ़ाएँ जहाँ रीत), लाल फूल-माला (गेंदा-गुड़हल), पान-बीड़ा, लौंग-इलायची, बूंदी-लड्डू/बेसन-लड्डू, गुड़-चना; धूप-दीप (चमेली/घी)।
  3. हनुमान चालीसा 1/7/11 बार, बजरंग बाण, सुंदरकांड (पूरा या सामूहिक); «ॐ हं हनुमते नमः» का 108 जप; राम-नाम — हनुमान को राम-नाम सबसे प्रिय।
  4. जन्म-कथा (नीचे) सुनें; बच्चों को हनुमान जी की बाल-लीला (सूर्य को फल समझकर निगलना) सुनाएँ; पुरुषों-बच्चों के माथे पर हनुमान जी का सिंदूर-टीका — रक्षा।
  5. मंदिर: हनुमान-मंदिर में ध्वजा (लाल/केसरिया झंडा) चढ़ाना, चोला, तेल-सिंदूर; बूंदी-प्रसाद व चना-गुड़ बाँटना; भंडारा।
  6. दान: लाल वस्त्र, गुड़-चना, बूंदी, तेल — ज़रूरतमंद/गौशाला; कुत्ते-बंदरों को रोटी-केला।
  7. शाम: आरती «आरती कीजै हनुमान लला की», दीप; पूर्णिमा — चंद्रोदय पर अर्घ्य, सत्यनारायण-कथा (हो सके तो); व्रत खोलें।
  8. रात्रि/अगले दिन: सुंदरकांड-पाठ की परंपरा (मंगलवार/शनिवार जारी रखें); हनुमान जी का प्रसाद अगले दिन तक बाँटें।

पूजा-सामग्री की सूची

सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा — हनुमान जी की पूजा की पहचान।

  • हनुमान जी की मूर्ति/चित्र (राम-दरबार सहित), लाल कपड़ा, चौकी
  • सिंदूर, चमेली का तेल (चोला), केसरिया/लाल वस्त्र-लंगोट, जनेऊ
  • लाल फूल (गेंदा-गुड़हल-गुलाब), फूल-माला, तुलसी-दल
  • पान-बीड़ा, लौंग, इलायची, सुपारी, गुड़-चना (भुना), बूंदी/बेसन के लड्डू, केला-फल
  • दीपक (घी/चमेली तेल), धूप, कपूर, आरती-थाली, घंटी
  • लाल/केसरिया ध्वजा (मंदिर को), रोली, अक्षत, मौली
  • हनुमान चालीसा/सुंदरकांड/बजरंग बाण पुस्तक, माला
  • दान: लाल वस्त्र, गुड़-चना, तेल; सत्यनारायण-कथा हो तो पंजीरी-केला

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व्रत-कथा

पवन-देव के वरदान और अंजनी माता के तप से, चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय के समय, कपि-राज केसरी के घर हनुमान का जन्म हुआ — शिव के ग्यारहवें रुद्र-अंश, वायु-पुत्र। जन्म लेते ही भूख लगी; उगते सूर्य को लाल फल समझकर आकाश में उड़े और निगलने लगे; इंद्र ने वज्र मारा — हनु (ठोड़ी) टूटी, इसीलिए «हनुमान»; पवन-देव रुष्ट हुए, वायु रुक गई; देवताओं ने अनेक वरदान दिए — अजर-अमर, अजेय, इच्छानुसार रूप। ऋषियों के शाप से उन्हें अपनी शक्ति का स्मरण तब तक न रहा जब तक कोई याद न दिलाए — जांबवंत ने समुद्र-तट पर दिलाया।

सुंदरकांड — सीता की खोज में समुद्र लाँघना, लंका-दहन, अशोक-वाटिका में सीता को राम की मुद्रिका; युद्ध में लक्ष्मण के लिए संजीवनी-पर्वत उठाना — «राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम»; राम की भक्ति में सीना चीरकर राम-सीता दिखाना। हनुमान चिरंजीवी हैं — जहाँ राम-कथा, वहाँ हनुमान उपस्थित।

सिंदूर-कथा — एक दिन हनुमान ने सीता को माँग में सिंदूर भरते देखा; पूछा «क्यों?» — «स्वामी की दीर्घायु के लिए»। हनुमान ने सोचा — चुटकी-भर से इतना, तो पूरे शरीर पर लगाने से प्रभु अजर-अमर होंगे — और सिंदूर से रँग गए। राम मुस्काए और वर दिया — जो हनुमान को सिंदूर-तेल चढ़ाएगा, उस पर राम-हनुमान दोनों की कृपा। तभी से सिंदूर-चोला।

बूंदी-लड्डू, गुड़-चना, पान-बीड़ा — बजरंगबली का भोग

हनुमान जी को बूंदी/बेसन के लड्डू, भुना चना-गुड़, केला, पान-बीड़ा (लौंग-इलायची-सुपारी), मालपुआ और इमरती प्रिय; व्रत में फलाहार, पूर्णिमा को खीर।

  • बूंदी के लड्डू (या घर की बेसन-बूंदी घी में तलकर चाशनी में) — मुख्य भोग; बेसन-लड्डू, इमरती, मालपुआ
  • गुड़-भुना चना, केला-सेब, पान-बीड़ा
  • व्रत-भोजन: फल-दूध, साबूदाना, सिंघाड़े का हलवा; पूर्णिमा को चंद्र-अर्घ्य के बाद खीर-पूड़ी
  • मंदिर-भंडारा: हलवा-पूड़ी-चना, बूंदी-प्रसाद
  • दक्षिण (हनुमान जयंती/जन्मोत्सव): वड़ा-माला (वड़ों की माला), पानकम, बटर-मिश्री; महाराष्ट्र: सुंठवड़ा, तेल-सिंदूर के बाद नारियल

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

उत्तर में चैत्र पूर्णिमा, दक्षिण-कर्नाटक में अलग तिथि, महाराष्ट्र में सूर्योदय का जन्मोत्सव — हनुमान हर जगह के।

उत्तर प्रदेश-बिहार-मध्य प्रदेश: चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय-पूजा, हनुमानगढ़ी (अयोध्या), संकटमोचन (काशी), महावीर मंदिर (पटना) में विशाल भीड़, चोला-ध्वजा, सुंदरकांड-मंडलियाँ; घरों में लाल चोला, बूंदी; कई घर 41 दिन का सुंदरकांड-संकल्प यहीं से।
राजस्थान-गुजरात-दिल्ली-हरियाणा: सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी (राजस्थान) के मेले; गुजरात में सारंगपुर-कष्टभंजन; दिल्ली-हरियाणा में शोभा-यात्राएँ, भंडारे, «बजरंग दल» की झाँकियाँ; घरों में हनुमान चालीसा 11 बार।
महाराष्ट्र-गोवा: «हनुमान जयंती» चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय पर जन्मोत्सव — मंदिरों में «जन्म-कीर्तन» भोर 5-6 बजे, सुंठवड़ा-प्रसाद, तेल-शेंदूर; रामदास-स्वामी के मारुति-मंदिर (11 मारुति); गाँवों में कुश्ती-आखाड़े।
कर्नाटक-आंध्र-तेलंगाना: कर्नाटक में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को (हनुमद्-व्रत), आंध्र-तेलंगाना में वैशाख कृष्ण दशमी (हनुमान जन्मोत्सव, 41 दिन की «हनुमान दीक्षा» — माला पहनकर) — अलग तिथियाँ; अंजनाद्री (तिरुमला) जन्मस्थान-मान्यता।
तमिलनाडु-केरल: तमिलनाडु में «हनुमथ जयंती» मार्गशीर्ष अमावस्या/मूल नक्षत्र को — नामक्कल-सुचींद्रम में वड़ा-माला, बटर-अभिषेक; केरल में मार्गशीर्ष में; चैत्र पूर्णिमा को उत्तर-भारतीय मंदिरों में।
ओडिशा-बंगाल-असम: ओडिशा में चैत्र पूर्णिमा (पण संक्रांति के आस-पास) को «हनुमान जयंती» — जय-हनुमान भजन, मंदिरों में झंडा; बंगाल में महावीर/बजरंगबली मंदिर (उत्तर-भारतीय समुदाय), वैशाख पूर्णिमा पर भी।
🙏 आपके घर की रीत इससे अलग है? यहाँ लिखिए

दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • पूजा सूर्योदय पर (जन्म-काल) — ऊपर समय; लाल/केसरिया वस्त्र
  • सिंदूर-चमेली का चोला, बूंदी-लड्डू, पान-बीड़ा; ध्वजा मंदिर में
  • सुंदरकांड/चालीसा का पाठ — परिवार के साथ; राम-नाम ज़रूर
  • बच्चों-पुरुषों को सिंदूर-टीका — रक्षा; गुड़-चना बाँटें
  • पूर्णिमा — चंद्र-अर्घ्य, सत्यनारायण-कथा

❌ क्या न करें

  • हनुमान-पूजा में मांस-मदिरा, तामसिक — कठोर वर्जना; ब्रह्मचर्य का दिन
  • स्त्रियाँ मूर्ति को चोला-सिंदूर स्पर्श कई परंपराओं में नहीं करतीं — फूल-भोग-पाठ करें (अपनी रीत)
  • हनुमान जी को केवल तुलसी नहीं — राम के नाम से चढ़ाएँ; चरणामृत ठीक
  • काले-सफ़ेद वस्त्र पूजा में नहीं
  • चोला उतारे सिंदूर को कूड़े में नहीं — जल/पौधे में

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान जयंती 2027 में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की चैत्र पूर्णिमा है (उत्तर-भारतीय परंपरा) — पंचांग-गणना से; सूर्योदय (जन्म-काल) व चंद्रोदय का दिल्ली-समय भी वहीं। दक्षिण-कर्नाटक-आंध्र में तिथि अलग (मार्गशीर्ष/वैशाख)।

क्या स्त्रियाँ हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?

हाँ — फूल, भोग, दीप, चालीसा-सुंदरकांड, व्रत सब कर सकती हैं; लोक-परंपरा में कई जगह मूर्ति को सिंदूर-चोला चढ़ाना और चरण-स्पर्श पुरुष करते हैं (हनुमान बाल-ब्रह्मचारी) — यह घर-मंदिर की रीत पर निर्भर है; शास्त्र में स्त्री-पूजा वर्जित नहीं।

हनुमान जी को सिंदूर क्यों?

सीता जी की माँग के सिंदूर से राम की दीर्घायु की बात सुनकर हनुमान ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — राम प्रसन्न हुए और वर दिया कि सिंदूर-तेल चढ़ाने वाले पर कृपा होगी; इसीलिए सिंदूर-चमेली का चोला।

हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव?

कई विद्वान «जयंती» की जगह «जन्मोत्सव» कहते हैं — क्योंकि हनुमान चिरंजीवी हैं (जयंती दिवंगत के लिए); दोनों नाम प्रचलित, पर्व वही।

मंगल-दोष/शनि-पीड़ा में हनुमान-पूजा?

हनुमान मंगल व शनि दोनों को शांत करने वाले माने गए — मांगलिक/साढ़ेसाती में मंगलवार-शनिवार हनुमान चालीसा, सिंदूर-तेल, गुड़-चना का दान; जयंती से संकल्प लेना उत्तम। कुंडली-पन्ने पर अपना दोष देखें।

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व मंदिर की रीत सर्वोपरि है। दक्षिण भारत में तिथि भिन्न है।

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