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🪔 व्रत-त्योहार

🏹 राम नवमी 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

चैत्र शुक्ल नवमी — श्रीराम का जन्मोत्सव दोपहर 12 बजे (अभिजित); चैत्र नवरात्रि का समापन, रामचरितमानस-पाठ, पंजीरी-पंचामृत, अयोध्या की शोभा-यात्रा।

राम नवमी 2027 की तिथि
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
चैत्र · शुक्ल पक्ष · नवमी (विक्रम संवत 2084)
⭐ अभिजित मुहूर्त11:57 AM – 12:45 PM
🌅 सूर्योदय5:56 AM
📿 तिथि-कालनवमी 14 अप्रैल, 3:24 PM → 15 अप्रैल, 1:21 PM
🕉 ब्रह्म मुहूर्त04:20 AM – 05:08 AM
🌇 सूर्यास्त6:47 PM
⛔ राहुकाल (टालें)01:57 PM – 03:34 PM
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को — चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन — मनाई जाती है। इसी दिन अयोध्या में राजा दशरथ के घर, माता कौशल्या के गर्भ से, पुनर्वसु नक्षत्र में, दोपहर (अभिजित मुहूर्त) में भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्म हुआ — इसलिए जन्म-आरती ठीक 12 बजे।

घर की स्त्रियाँ इस दिन व्रत रखती हैं (नवरात्रि की नवमी भी है — कन्या-पूजन, हवन), राम-दरबार को पालना झुलाती हैं, धनिया-पंजीरी व पंचामृत का भोग लगाती हैं और रामचरितमानस के बालकांड का जन्म-प्रसंग पढ़ती-सुनती हैं। नीचे इस साल की तिथि, अभिजित (जन्म) मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।

महत्व — यह व्रत क्यों

राम मर्यादा-पुरुषोत्तम हैं — पुत्र, भाई, पति, राजा: हर रिश्ते का आदर्श; राम नवमी का व्रत परिवार-सुख, संतान के संस्कार और कठिनाई में धैर्य के लिए रखा जाता है। मानस में — «राम जनम के हेतु अनेका, परम बिचित्र एक तें एका»।

जन्म-काल: मध्याह्न — अभिजित मुहूर्त (दोपहर लगभग 11:40-12:30, ऊपर सटीक); इसी में जन्म-आरती, शंख-घंटा, «जय श्रीराम» — मंदिरों में पालने में बाल-राम। नवमी दो दिन मध्याह्न को छुए तो पहला दिन।

यह चैत्र नवरात्रि की नवमी (माँ सिद्धिदात्री) भी है — कन्या-पूजन, हवन, पारण उसी दिन; दक्षिण में «श्रीराम नवमी» पर सीता-राम कल्याणम् (विवाह) की परंपरा।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — सुबह व्रत-संकल्प व नवमी-पूजा, दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव, शाम को आरती-प्रसाद।

  1. सुबह स्नान, पीले/केसरिया वस्त्र; संकल्प — «मैं राम नवमी का व्रत परिवार-कल्याण हेतु करती हूँ।» दिन में फलाहार (नवरात्रि-व्रत वाले उसी नियम से)।
  2. पूजा-स्थान पर चौकी पर लाल/पीला कपड़ा; राम-दरबार (राम-सीता-लक्ष्मण-हनुमान) की मूर्ति/चित्र; छोटा पालना — बाल-राम (या राम-चित्र) के लिए; कलश-गणेश-पूजन।
  3. सुबह की पूजा: रोली-चंदन-अक्षत, पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप; रामरक्षा-स्तोत्र/राम-चालीसा; नवरात्रि-व्रती — माँ सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या-पूजन (जिनकी रीत नवमी की) और हवन।
  4. दोपहर अभिजित (ऊपर समय) — जन्मोत्सव: बालकांड का जन्म-प्रसंग («भए प्रगट कृपाला…») पढ़ें/सुनें; ठीक 12 बजे शंख-घंटा, बाल-राम को पालने में झुलाएँ, «जय श्रीराम» — जन्म-आरती «श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन»; पंजीरी-पंचामृत-केसरिया भात का भोग; सोहर/बधाई-गीत।
  5. प्रसाद: धनिया-पंजीरी व पंचामृत सबको; पूड़ी-हलवा; बच्चों को विशेष (राम-लला का जन्म)।
  6. दिन में सुंदरकांड/मानस का सामूहिक पाठ, राम-नाम जप (108/1008), रामायण-कथा; शाम को मंदिर की शोभा-यात्रा/झाँकी में भाग।
  7. शाम की आरती, दीप; नवरात्रि-व्रती इसी शाम या दशमी को पारण; दशमी को कलश-जवारे विसर्जन।
  8. दान: पीला वस्त्र, अन्न, बच्चों की पुस्तकें; गौशाला को चारा — राम के नाम से।

पूजा-सामग्री की सूची

राम-दरबार और छोटा पालना — जन्मोत्सव की पहचान; पंजीरी सूखे धनिये की।

  • राम-दरबार की मूर्ति/चित्र, बाल-राम (या चित्र), छोटा पालना/झूला, लाल-पीला कपड़ा, चौकी
  • कलश, नारियल, आम के पत्ते, मौली, रोली, चंदन, अक्षत, हल्दी
  • पीले फूल (गेंदा-गुलाब), तुलसी-दल, फूल-माला, मुकुट-वस्त्र (बाल-राम को)
  • दीपक, घी, धूप, कपूर, शंख, घंटी, आरती-थाली
  • भोग: धनिया-पंजीरी (सूखा धनिया पाउडर, घी, शक्कर, मखाना-मेवे), पंचामृत, केसरिया भात, बूंदी-लड्डू, फल, पान
  • रामचरितमानस (बालकांड), रामरक्षा-स्तोत्र/राम-चालीसा, सुंदरकांड
  • नवरात्रि-नवमी: कन्या-पूजन व हवन का सामान
  • दान: पीला वस्त्र, अन्न, पुस्तकें, दक्षिणा

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व्रत-कथा

अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियाँ — कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा — पर संतान नहीं थी। गुरु वशिष्ठ की सलाह पर ऋष्यशृंग ऋषि से पुत्र-कामेष्टि यज्ञ कराया; अग्नि-देव ने खीर का पात्र दिया — दशरथ ने तीनों रानियों में बाँटा। समय आने पर चैत्र शुक्ल नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न, मध्याह्न में कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत, सुमित्रा से लक्ष्मण-शत्रुघ्न का जन्म हुआ।

तुलसीदास के मानस में — «नौमी तिथि मधु मास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता; मध्यदिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा» — यही अभिजित का मध्याह्न जन्म-मुहूर्त है। रावण-वध और धर्म की स्थापना के लिए विष्णु का यह अवतार; दस अवतारों में सातवाँ।

«राम नाम» की कथा — शिव कहते हैं «राम राम राम इति रमे रामे मनोरमे, सहस्रनाम तत्तुल्यं राम-नाम वरानने» — एक राम-नाम विष्णु-सहस्रनाम के बराबर; इसीलिए राम नवमी को राम-नाम जप और मानस-पाठ की परंपरा। दक्षिण में भद्राचलम की कथा — भक्त रामदास और सीता-राम कल्याणम्।

धनिया-पंजीरी, पंचामृत, केसरिया भात — राम-जन्म का भोग

उत्तर भारत में राम नवमी का भोग धनिया-पंजीरी (जन्म के बाद जच्चा को दिया जाने वाला पौष्टिक चूर्ण — बाल-राम की माँ के लिए) और पंचामृत; दक्षिण में पानकम-नीर मोर-कोसंबरी (गर्मी का शीतल भोग)।

  • धनिया-पंजीरी: 1 कप सूखा धनिया पाउडर घी में हल्का भूनें, मखाने-बादाम-काजू के टुकड़े, पिसी शक्कर/बूरा, इलायची — ठंडा करके; पंचामृत के साथ प्रसाद
  • पंचामृत: दूध-दही-घी-शहद-शक्कर + तुलसी; केसरिया भात, बूंदी के लड्डू, मालपुआ
  • व्रत-भोजन: फलाहार (नवरात्रि-नियम), साबूदाना, फल; पारण को पूड़ी-हलवा-चना
  • दक्षिण (श्रीराम नवमी): पानकम (गुड़-पानी-इलायची-सोंठ), नीर मोर (छाछ-अदरक-धनिया), कोसंबरी (मूँग-खीरे का सलाद), वड़ा-पर्प्पु — मंदिरों में भी यही
  • महाराष्ट्र: सुंठवड़ा (सोंठ-गुड़) व पंचामृत; बंगाल-ओडिशा: पायेश-लुची

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

अयोध्या का जन्मोत्सव, दक्षिण का कल्याणम्, महाराष्ट्र का पालना — राम हर इलाक़े के अपने।

अयोध्या-उत्तर प्रदेश-बिहार: अयोध्या में सरयू-स्नान, राम-मंदिर में 12 बजे जन्म-आरती (सूर्य-तिलक), लाखों श्रद्धालु; कनक-भवन-हनुमानगढ़ी; घरों में पालना, पंजीरी, मानस-पाठ; बिहार-सीतामढ़ी में जानकी-मंदिर; रामलीला-झाँकियाँ, शोभा-यात्राएँ।
मध्य प्रदेश-राजस्थान-छत्तीसगढ़: ओरछा के राम-राजा मंदिर (राम यहाँ राजा हैं — सशस्त्र सलामी), चित्रकूट की परिक्रमा; राजस्थान में राम-मंदिरों में जन्मोत्सव, बालाजी; छत्तीसगढ़ में «रामनवमी» पर रामायण-मंडलियों का सामूहिक पाठ, नवरात्रि-ज्योत-कलश का समापन।
महाराष्ट्र-गुजरात: महाराष्ट्र में दोपहर 12 बजे पालना, सुंठवड़ा-प्रसाद, नासिक-पंचवटी के कालाराम मंदिर का उत्सव, रामदास-संप्रदाय के मठों में «रामनवमी उत्सव» (नौ दिन के कीर्तन); गुजरात में राम-मंदिरों की शोभा-यात्रा, जूनागढ़।
तमिलनाडु-आंध्र-तेलंगाना-कर्नाटक: «श्रीराम नवमी» — भद्राचलम (तेलंगाना) में सीता-राम कल्याणम् (विवाह-उत्सव, राज्य-सरकार का मुत्यम-तलंबरालु), वोंटिमिट्टा (आंध्र); तमिलनाडु में रामायण-कथा-कालक्षेपम्, पानकम-नीर मोर; कर्नाटक (बेंगलुरु) में रामनवमी के संगीत-उत्सव (शास्त्रीय संगीत की महीने-भर की परंपरा)।
बंगाल-ओडिशा-असम: «रामनवमी» वासंती-पूजा की नवमी के साथ — कुछ घर राम-पूजा, बाक़ी दुर्गा-नवमी; ओडिशा में पुरी-जगन्नाथ में राम-नवमी-भोग, «राम-लीला» के मंच (झाँकी); हाल के वर्षों में शोभा-यात्राएँ बढ़ीं।
पंजाब-हरियाणा-दिल्ली: मंदिरों में सुबह से रामायण-पाठ, 12 बजे जन्मोत्सव, लंगर-भंडारा (हलवा-पूड़ी-चना — नवमी-कंजक के साथ), शहर में शोभा-यात्रा; दिल्ली में «रामनवमी मेला» व रामलीला-मैदान।
🙏 आपके घर की रीत इससे अलग है? यहाँ लिखिए

दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • जन्म-आरती ठीक दोपहर 12 बजे (अभिजित — ऊपर समय), पालना ज़रूर
  • बालकांड का जन्म-प्रसंग पढ़ें; राम-नाम जप
  • धनिया-पंजीरी व पंचामृत का प्रसाद सबको, विशेषकर बच्चों को
  • नवरात्रि-व्रती: कन्या-पूजन, हवन, पारण उसी दिन/दशमी को
  • पीला वस्त्र-अन्न-पुस्तक दान

❌ क्या न करें

  • शोभा-यात्रा में उत्तेजना, अस्त्र-प्रदर्शन, ऊँची आवाज़ — राम की मर्यादा के विरुद्ध
  • व्रत में अनाज (नवरात्रि-नियम), मांस-मदिरा
  • जन्म-आरती के बिना दोपहर का भोजन नहीं (व्रती)
  • मानस-पाठ अधूरा न छोड़ें
  • भीड़ में बच्चों-बुज़ुर्गों को अकेला नहीं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राम नवमी 2027 में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की चैत्र शुक्ल नवमी है — पंचांग-गणना से; जन्म का अभिजित मुहूर्त (दोपहर ~12 बजे, दिल्ली) भी वहीं। नवमी दो दिन मध्याह्न को छुए तो पहला दिन।

जन्म-आरती किस समय?

मध्याह्न अभिजित मुहूर्त — ऊपर दिया समय (लगभग 11:40-12:30); परंपरा में ठीक 12 बजे शंख-घंटा और पालना। अयोध्या-मंदिरों में इसी क्षण जन्म-आरती/सूर्य-तिलक।

राम नवमी और चैत्र नवरात्रि की नवमी एक ही दिन?

हाँ — चैत्र नवरात्रि की नवमी ही राम नवमी है (माँ सिद्धिदात्री + राम-जन्म); नवरात्रि-व्रती इस दिन कन्या-पूजन, हवन और पारण करते हैं, राम-जन्मोत्सव दोपहर में।

पंजीरी ही क्यों?

धनिया-पंजीरी जच्चा (प्रसूता) को दिया जाने वाला पौष्टिक चूर्ण है — बाल-राम के जन्म पर माँ कौशल्या के लिए; इसलिए जन्मोत्सव का प्रसाद; कृष्ण-जन्माष्टमी पर भी यही।

क्या राम नवमी को विवाह (सीता-राम कल्याणम्) करते हैं?

दक्षिण भारत (भद्राचलम, वोंटिमिट्टा) में राम नवमी को सीता-राम का कल्याणम् (विवाह-उत्सव) मनाया जाता है — उत्तर में विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष) पर; दोनों परंपराएँ मान्य।

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। अभिजित का समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलता है।

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