💍 विवाह पंचमी (राम-सीता विवाह) 2026
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी — श्रीराम और माता सीता के विवाह का दिन; जनकपुर-अयोध्या का उत्सव, घर में राम-सीता विवाह की झाँकी और सुखी दांपत्य का व्रत।
विवाह पंचमी मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है — देवउठनी के लगभग तीन सप्ताह बाद। त्रेता युग में इसी दिन मिथिला में राजा जनक के दरबार में श्रीराम ने शिव-धनुष तोड़ा और सीता जी से विवाह हुआ। अयोध्या, जनकपुर (नेपाल) और मिथिला में इस दिन राम-बारात और विवाह-लीला का बड़ा उत्सव होता है।
घर में स्त्रियाँ इस दिन राम-सीता की मूर्ति/चित्र का विवाह-संस्कार करती हैं — सजाना, वरमाला, मंगल-गीत — और सुखी वैवाहिक जीवन व अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं। नीचे इस साल की तिथि, मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
राम-सीता का विवाह आदर्श दांपत्य का प्रतीक है — इस दिन का व्रत विवाह-बाधा दूर करने और पति-पत्नी में प्रेम बनाए रखने के लिए किया जाता है। कुँवारी कन्याएँ राम-जैसा वर पाने की कामना से रखती हैं।
रामचरितमानस के बालकांड का धनुष-यज्ञ और विवाह-प्रसंग इस दिन पढ़ा जाता है — «मंगल भवन अमंगल हारी» और «सिया-राम मय सब जग जानी» के साथ; मानस का पाठ पूरा करना विशेष फलदायी माना गया।
मिथिला में यह दिन ससुराल-मायके की मिठास का पर्व है — सीता मिथिला की बेटी हैं, इसलिए यहाँ राम «जमाई» हैं और बारात की सारी छेड़-छाड़ लोकगीतों में है।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — सुबह व्रत-संकल्प, दिन में मानस-पाठ, शाम को राम-सीता विवाह की झाँकी।
- सुबह स्नान, संकल्प — «मैं सुखी दांपत्य/उत्तम वर हेतु विवाह पंचमी का व्रत करती हूँ।» दिन में फलाहार या एक समय भोजन।
- पूजा-स्थान पर चौकी पर पीला/लाल कपड़ा; राम-सीता (या राम-दरबार) की मूर्ति/चित्र स्थापित करें; गणेश-पूजन से आरंभ।
- राम जी को पीले वस्त्र व मुकुट, सीता जी को लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर — दोनों का श्रृंगार दूल्हा-दुल्हन जैसा; तिलक, फूल-माला।
- बालकांड का धनुष-यज्ञ व विवाह-प्रसंग (रामचरितमानस) पढ़ें या सुनें; «सीता-राम» का जप 108 बार।
- शाम को शुभ मुहूर्त (अभिजित/गोधूलि — ऊपर) में विवाह-लीला: मंगल-गीत, दोनों को वरमाला पहनाएँ, गठबंधन (राम के पीले वस्त्र और सीता की चुनरी का छोर बाँधें), दीप-आरती «श्री रामचंद्र कृपालु भजमन»।
- भोग — खीर, पंचामृत, फल, पीले लड्डू; प्रसाद बाँटें। जिन घरों में कन्या का विवाह तय हो, वे गठबंधन की गाँठ आशीर्वाद के रूप में रखते हैं।
- व्रत शाम की पूजा के बाद खोलें; रात में सुंदरकांड/रामायण-भजन।
पूजा-सामग्री की सूची
राम-दरबार की मूर्ति/चित्र घर में पहले से हो तो बाक़ी सामग्री छोटी है।
- राम-सीता (राम-दरबार) की मूर्ति या चित्र, चौकी, पीला-लाल कपड़ा
- राम जी के पीले वस्त्र/मुकुट, सीता जी की लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर, छोटा श्रृंगार
- वरमाला 2, गठबंधन को पीला धागा/मौली
- रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, फूल (गेंदा-गुलाब), तुलसी-दल
- दीपक, घी, धूप, कपूर, आरती-थाली
- खीर, पंचामृत, फल, बेसन/बूंदी के लड्डू, पान-सुपारी
- रामचरितमानस (बालकांड), सुंदरकांड-पुस्तक
- दान: पीला वस्त्र/अन्न ब्राह्मण-कन्या को
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पंचांग देखें →व्रत-कथा
मिथिला के राजा जनक ने हल चलाते समय धरती से मिली कन्या को पुत्री की तरह पाला — वे सीता (जानकी) हुईं। जनक ने प्रण किया कि जो शिव का पिनाक धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ा दे, उसी से सीता का विवाह होगा। देश-देश के राजा आए, कोई धनुष हिला भी न सका; रावण-बाणासुर तक हारकर लौटे।
गुरु विश्वामित्र के साथ आए राम ने धनुष उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया — «भरे भुवन घोर कठोर रव»। सीता ने राम को वरमाला पहनाई। दशरथ बारात लेकर अयोध्या से आए; मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी, शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति — चारों भाइयों का विवाह जनकपुर में हुआ।
यही प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास ने बालकांड में गाया — और मानस का यह भाग पढ़ने-सुनने से विवाह-बाधा दूर होने की मान्यता है। इसी दिन (एक मत से) तुलसीदास ने रामचरितमानस पूरी की थी, इसलिए मानस-जयंती भी।
विवाह पंचमी का भोग
राम जी को पीला और सात्विक प्रिय — खीर, पंचामृत, बेसन-बूंदी के लड्डू, केसरिया भात। मिथिला में इस दिन «भोज» — दही-चूड़ा, खीर, तिलकुट का प्रसाद।
- भोग: खीर, पंचामृत, केसर-भात, बूंदी/बेसन के लड्डू, फल, पान
- व्रत: दिन में फल-दूध; शाम की पूजा के बाद पूड़ी-सब्ज़ी-खीर
- मिथिला: दही-चूड़ा-गुड़, तिलकुट, खीर — «जमाई-भोज» की तरह
- अयोध्या-जनकपुर: राम-बारात के दिन पूड़ी-कद्दू-खीर का भंडारा
- विवाह तय हो तो वर-वधू पक्ष एक-दूसरे को पीली मिठाई भेजते हैं (लोक-रीत)
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
मिथिला-अयोध्या का यह पर्व उत्तर भारत में घर-घर छोटे रूप में मनता है।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- राम-सीता का श्रृंगार दूल्हा-दुल्हन जैसा, गठबंधन ज़रूर
- बालकांड का विवाह-प्रसंग पढ़ें — विवाह-बाधा वालों के लिए विशेष
- शुभ मुहूर्त (अभिजित/गोधूलि) में विवाह-लीला
- कुँवारी कन्याएँ व्रत रखें तो सीता जी को चूड़ी-सिंदूर चढ़ाएँ
- पीली वस्तु का दान
❌ क्या न करें
- इस दिन नया विवाह करना कई परंपराओं में वर्जित माना जाता है (राम-सीता के वियोग की स्मृति) — मुहूर्त-पन्ने से जाँचें
- पूजा में काले वस्त्र नहीं
- मानस-पाठ अधूरा न छोड़ें — प्रसंग पूरा पढ़ें
- व्रत में तामसिक भोजन नहीं
- गठबंधन की गाँठ फेंकें नहीं — मंदिर/तुलसी में रखें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विवाह पंचमी 2026 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी है — पंचांग-गणना से; अभिजित व गोधूलि मुहूर्त (दिल्ली) भी वहीं।
क्या विवाह पंचमी को शादी करना शुभ है?
यह राम-सीता के विवाह का दिन है, पर लोक-परंपरा में इस दिन विवाह से बचा जाता है — क्योंकि राम-सीता को वियोग सहना पड़ा; मिथिला-अवध में यह मान्यता प्रबल है। मुहूर्त-पन्ने पर शुभ तिथियाँ देखें।
यह व्रत कौन रखे?
सुखी दांपत्य की कामना से विवाहित स्त्रियाँ, और अच्छे वर की कामना से कुँवारी कन्याएँ; विवाह में बाधा हो तो इस दिन बालकांड के विवाह-प्रसंग का पाठ विशेष माना गया।
मानस-जयंती क्या है?
एक मत से तुलसीदास जी ने रामचरितमानस इसी विवाह पंचमी को पूरी की थी, इसलिए इस दिन मानस-पाठ और तुलसी-स्मरण।
विवाह पंचमी पर मिथिला और अयोध्या में क्या होता है?
जनकपुर (नेपाल) में राम-जानकी विवाह की बारात अयोध्या से पहुँचती है — मंडप, सिंदूरदान, कोहबर, मैथिल विवाह-गीत, हज़ारों श्रद्धालु; अयोध्या में कनक-भवन व राम-मंदिर में विवाह-झाँकी, रामलीला का विवाह-प्रसंग; मिथिला के घरों में सीता को बेटी मानकर «बेटी की विदाई» के गीत गाए जाते हैं।
विवाह में देरी हो तो इस दिन कौन-सा उपाय करें?
सुबह राम-सीता की पूजा कर «ॐ जानकीवल्लभाय नमः» 108 जप, रामचरितमानस का बालकांड विवाह-प्रसंग (धनुष-यज्ञ से विदाई तक) पाठ, सुहागिन/कन्या को पीले वस्त्र-फल-सुहाग-सामग्री दान, केले के पेड़ को जल; विश्वास है कि सीता-राम के विवाह-दिन की प्रार्थना से विवाह-बाधा दूर होती है — कुंडली में मांगलिक/शुक्र-गुरु दोष हो तो पंडित से अलग उपाय।
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✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है।
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