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🪔 व्रत-त्योहार

💍 विवाह पंचमी (राम-सीता विवाह) 2026

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी — श्रीराम और माता सीता के विवाह का दिन; जनकपुर-अयोध्या का उत्सव, घर में राम-सीता विवाह की झाँकी और सुखी दांपत्य का व्रत।

विवाह पंचमी (राम-सीता विवाह) 2026 की तिथि
सोमवार, 14 दिसंबर 2026
मार्गशीर्ष · शुक्ल पक्ष · पंचमी (विक्रम संवत 2083)
🌅 सूर्योदय7:05 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त11:51 AM – 12:39 PM
📿 तिथि-कालपंचमी 13 दिसंबर, 4:48 PM → 14 दिसंबर, 7:16 PM
🐄 गोधूलि बेला5:05 PM – 5:46 PM
🪔 प्रदोष काल5:26 PM – 7:50 PM
⛔ राहुकाल (टालें)08:22 AM – 09:40 AM
अगले वर्ष — 2027: शुक्रवार, 3 दिसंबर 2027
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

विवाह पंचमी मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है — देवउठनी के लगभग तीन सप्ताह बाद। त्रेता युग में इसी दिन मिथिला में राजा जनक के दरबार में श्रीराम ने शिव-धनुष तोड़ा और सीता जी से विवाह हुआ। अयोध्या, जनकपुर (नेपाल) और मिथिला में इस दिन राम-बारात और विवाह-लीला का बड़ा उत्सव होता है।

घर में स्त्रियाँ इस दिन राम-सीता की मूर्ति/चित्र का विवाह-संस्कार करती हैं — सजाना, वरमाला, मंगल-गीत — और सुखी वैवाहिक जीवन व अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं। नीचे इस साल की तिथि, मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, भोग और इलाक़ों की रीत दी गई है।

महत्व — यह व्रत क्यों

राम-सीता का विवाह आदर्श दांपत्य का प्रतीक है — इस दिन का व्रत विवाह-बाधा दूर करने और पति-पत्नी में प्रेम बनाए रखने के लिए किया जाता है। कुँवारी कन्याएँ राम-जैसा वर पाने की कामना से रखती हैं।

रामचरितमानस के बालकांड का धनुष-यज्ञ और विवाह-प्रसंग इस दिन पढ़ा जाता है — «मंगल भवन अमंगल हारी» और «सिया-राम मय सब जग जानी» के साथ; मानस का पाठ पूरा करना विशेष फलदायी माना गया।

मिथिला में यह दिन ससुराल-मायके की मिठास का पर्व है — सीता मिथिला की बेटी हैं, इसलिए यहाँ राम «जमाई» हैं और बारात की सारी छेड़-छाड़ लोकगीतों में है।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — सुबह व्रत-संकल्प, दिन में मानस-पाठ, शाम को राम-सीता विवाह की झाँकी।

  1. सुबह स्नान, संकल्प — «मैं सुखी दांपत्य/उत्तम वर हेतु विवाह पंचमी का व्रत करती हूँ।» दिन में फलाहार या एक समय भोजन।
  2. पूजा-स्थान पर चौकी पर पीला/लाल कपड़ा; राम-सीता (या राम-दरबार) की मूर्ति/चित्र स्थापित करें; गणेश-पूजन से आरंभ।
  3. राम जी को पीले वस्त्र व मुकुट, सीता जी को लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर — दोनों का श्रृंगार दूल्हा-दुल्हन जैसा; तिलक, फूल-माला।
  4. बालकांड का धनुष-यज्ञ व विवाह-प्रसंग (रामचरितमानस) पढ़ें या सुनें; «सीता-राम» का जप 108 बार।
  5. शाम को शुभ मुहूर्त (अभिजित/गोधूलि — ऊपर) में विवाह-लीला: मंगल-गीत, दोनों को वरमाला पहनाएँ, गठबंधन (राम के पीले वस्त्र और सीता की चुनरी का छोर बाँधें), दीप-आरती «श्री रामचंद्र कृपालु भजमन»।
  6. भोग — खीर, पंचामृत, फल, पीले लड्डू; प्रसाद बाँटें। जिन घरों में कन्या का विवाह तय हो, वे गठबंधन की गाँठ आशीर्वाद के रूप में रखते हैं।
  7. व्रत शाम की पूजा के बाद खोलें; रात में सुंदरकांड/रामायण-भजन।

पूजा-सामग्री की सूची

राम-दरबार की मूर्ति/चित्र घर में पहले से हो तो बाक़ी सामग्री छोटी है।

  • राम-सीता (राम-दरबार) की मूर्ति या चित्र, चौकी, पीला-लाल कपड़ा
  • राम जी के पीले वस्त्र/मुकुट, सीता जी की लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर, छोटा श्रृंगार
  • वरमाला 2, गठबंधन को पीला धागा/मौली
  • रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, फूल (गेंदा-गुलाब), तुलसी-दल
  • दीपक, घी, धूप, कपूर, आरती-थाली
  • खीर, पंचामृत, फल, बेसन/बूंदी के लड्डू, पान-सुपारी
  • रामचरितमानस (बालकांड), सुंदरकांड-पुस्तक
  • दान: पीला वस्त्र/अन्न ब्राह्मण-कन्या को

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व्रत-कथा

मिथिला के राजा जनक ने हल चलाते समय धरती से मिली कन्या को पुत्री की तरह पाला — वे सीता (जानकी) हुईं। जनक ने प्रण किया कि जो शिव का पिनाक धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ा दे, उसी से सीता का विवाह होगा। देश-देश के राजा आए, कोई धनुष हिला भी न सका; रावण-बाणासुर तक हारकर लौटे।

गुरु विश्वामित्र के साथ आए राम ने धनुष उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया — «भरे भुवन घोर कठोर रव»। सीता ने राम को वरमाला पहनाई। दशरथ बारात लेकर अयोध्या से आए; मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी, शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति — चारों भाइयों का विवाह जनकपुर में हुआ।

यही प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास ने बालकांड में गाया — और मानस का यह भाग पढ़ने-सुनने से विवाह-बाधा दूर होने की मान्यता है। इसी दिन (एक मत से) तुलसीदास ने रामचरितमानस पूरी की थी, इसलिए मानस-जयंती भी।

विवाह पंचमी का भोग

राम जी को पीला और सात्विक प्रिय — खीर, पंचामृत, बेसन-बूंदी के लड्डू, केसरिया भात। मिथिला में इस दिन «भोज» — दही-चूड़ा, खीर, तिलकुट का प्रसाद।

  • भोग: खीर, पंचामृत, केसर-भात, बूंदी/बेसन के लड्डू, फल, पान
  • व्रत: दिन में फल-दूध; शाम की पूजा के बाद पूड़ी-सब्ज़ी-खीर
  • मिथिला: दही-चूड़ा-गुड़, तिलकुट, खीर — «जमाई-भोज» की तरह
  • अयोध्या-जनकपुर: राम-बारात के दिन पूड़ी-कद्दू-खीर का भंडारा
  • विवाह तय हो तो वर-वधू पक्ष एक-दूसरे को पीली मिठाई भेजते हैं (लोक-रीत)

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

मिथिला-अयोध्या का यह पर्व उत्तर भारत में घर-घर छोटे रूप में मनता है।

मिथिला (बिहार-नेपाल): जनकपुर में राम-बारात, धनुष-यज्ञ की लीला, «सीता-राम विवाह» का सप्ताह-भर मेला; घरों में स्त्रियाँ राम को जमाई मानकर गारी-गीत गाती हैं, «कोहबर» सजता है; मैथिली विवाह-गीत।
अयोध्या-उत्तर प्रदेश: अयोध्या से जनकपुर तक राम-बारात यात्रा (कई साल), मंदिरों में विवाह-उत्सव, कनक-भवन में झाँकी; घरों में राम-दरबार का विवाह-श्रृंगार, बालकांड-पाठ।
राजस्थान-मध्य प्रदेश: राम-मंदिरों में «राम-विवाह» की झाँकी, मानस-पाठ; ओरछा (मप्र) के राम-राजा मंदिर का विवाह-उत्सव प्रसिद्ध।
बंगाल-ओडिशा: अपेक्षाकृत छोटा पर्व; ओडिशा में «सीता-विवाह» के गीत और मार्गशीर्ष के गुरुवार-लक्ष्मी व्रत (मणबसा गुरुबार) इसी माह में।
दक्षिण भारत: «सीता कल्याणम्» — मंदिरों में राम-सीता विवाह-उत्सव (कुछ जगह चैत्र/वैशाख में); भद्राचलम (तेलंगाना) का कल्याणम् प्रसिद्ध।
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दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • राम-सीता का श्रृंगार दूल्हा-दुल्हन जैसा, गठबंधन ज़रूर
  • बालकांड का विवाह-प्रसंग पढ़ें — विवाह-बाधा वालों के लिए विशेष
  • शुभ मुहूर्त (अभिजित/गोधूलि) में विवाह-लीला
  • कुँवारी कन्याएँ व्रत रखें तो सीता जी को चूड़ी-सिंदूर चढ़ाएँ
  • पीली वस्तु का दान

❌ क्या न करें

  • इस दिन नया विवाह करना कई परंपराओं में वर्जित माना जाता है (राम-सीता के वियोग की स्मृति) — मुहूर्त-पन्ने से जाँचें
  • पूजा में काले वस्त्र नहीं
  • मानस-पाठ अधूरा न छोड़ें — प्रसंग पूरा पढ़ें
  • व्रत में तामसिक भोजन नहीं
  • गठबंधन की गाँठ फेंकें नहीं — मंदिर/तुलसी में रखें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विवाह पंचमी 2026 में कब है?

ऊपर दी गई तिथि इस साल की मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी है — पंचांग-गणना से; अभिजित व गोधूलि मुहूर्त (दिल्ली) भी वहीं।

क्या विवाह पंचमी को शादी करना शुभ है?

यह राम-सीता के विवाह का दिन है, पर लोक-परंपरा में इस दिन विवाह से बचा जाता है — क्योंकि राम-सीता को वियोग सहना पड़ा; मिथिला-अवध में यह मान्यता प्रबल है। मुहूर्त-पन्ने पर शुभ तिथियाँ देखें।

यह व्रत कौन रखे?

सुखी दांपत्य की कामना से विवाहित स्त्रियाँ, और अच्छे वर की कामना से कुँवारी कन्याएँ; विवाह में बाधा हो तो इस दिन बालकांड के विवाह-प्रसंग का पाठ विशेष माना गया।

मानस-जयंती क्या है?

एक मत से तुलसीदास जी ने रामचरितमानस इसी विवाह पंचमी को पूरी की थी, इसलिए इस दिन मानस-पाठ और तुलसी-स्मरण।

विवाह पंचमी पर मिथिला और अयोध्या में क्या होता है?

जनकपुर (नेपाल) में राम-जानकी विवाह की बारात अयोध्या से पहुँचती है — मंडप, सिंदूरदान, कोहबर, मैथिल विवाह-गीत, हज़ारों श्रद्धालु; अयोध्या में कनक-भवन व राम-मंदिर में विवाह-झाँकी, रामलीला का विवाह-प्रसंग; मिथिला के घरों में सीता को बेटी मानकर «बेटी की विदाई» के गीत गाए जाते हैं।

विवाह में देरी हो तो इस दिन कौन-सा उपाय करें?

सुबह राम-सीता की पूजा कर «ॐ जानकीवल्लभाय नमः» 108 जप, रामचरितमानस का बालकांड विवाह-प्रसंग (धनुष-यज्ञ से विदाई तक) पाठ, सुहागिन/कन्या को पीले वस्त्र-फल-सुहाग-सामग्री दान, केले के पेड़ को जल; विश्वास है कि सीता-राम के विवाह-दिन की प्रार्थना से विवाह-बाधा दूर होती है — कुंडली में मांगलिक/शुक्र-गुरु दोष हो तो पंडित से अलग उपाय।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है।

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