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🪔 व्रत-त्योहार

🌸 चैत्र नवरात्रि (गुड़ी पड़वा / नव-संवत्सर) 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से राम नवमी तक — हिन्दू नव-वर्ष, घटस्थापना, नौ देवियाँ, कन्या-पूजन; उसी दिन गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटीचंड और नवरेह।

चैत्र नवरात्रि (गुड़ी पड़वा / नव-संवत्सर) 2027 की तिथि
बुधवार, 7 अप्रैल 2027
चैत्र · शुक्ल पक्ष · प्रतिपदा (विक्रम संवत 2084)
🌅 सूर्योदय6:05 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त
📿 तिथि-कालप्रतिपदा 7 अप्रैल, 5:34 AM → 8 अप्रैल, 4:29 AM
🕉 ब्रह्म मुहूर्त04:29 AM – 05:17 AM
⛔ राहुकाल (टालें)12:23 PM – 01:58 PM
  • घटस्थापना / गुड़ी पड़वा / उगादी / नव-संवत्सर — प्रतिपदा (माँ शैलपुत्री) — बुधवार, 7 अप्रैल 2027
  • द्वितीया — माँ ब्रह्मचारिणी — गुरुवार, 8 अप्रैल 2027
  • तृतीया — माँ चंद्रघंटा (गणगौर) — शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027
  • चतुर्थी — माँ कूष्मांडा — शनिवार, 10 अप्रैल 2027
  • पंचमी — माँ स्कंदमाता — रविवार, 11 अप्रैल 2027
  • षष्ठी — माँ कात्यायनी — सोमवार, 12 अप्रैल 2027
  • सप्तमी — माँ कालरात्रि — मंगलवार, 13 अप्रैल 2027
  • अष्टमी — माँ महागौरी (कन्या-पूजन) — बुधवार, 14 अप्रैल 2027
  • नवमी — माँ सिद्धिदात्री / राम नवमी (हवन, पारण) — गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

चैत्र नवरात्रि (वासंती नवरात्रि) चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन का देवी-पर्व है — होली के पंद्रह दिन बाद। पहले दिन हिन्दू नव-संवत्सर (विक्रम संवत) शुरू होता है — महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र-कर्नाटक में उगादी, सिंधियों का चेटीचंड, कश्मीर का नवरेह; अंतिम दिन राम नवमी।

विधि शारदीय नवरात्रि जैसी — घटस्थापना, जवारे, अखंड ज्योति, नौ देवियों की पूजा, अष्टमी-नवमी को कन्या-पूजन व हवन; साथ में नए साल का पंचांग-श्रवण, नीम-गुड़ का प्रसाद, गुड़ी/तोरण। नीचे इस साल की नौ दिन की तालिका, घटस्थापना-मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, फलाहार और इलाक़ों की रीत दी गई है।

महत्व — यह व्रत क्यों

इसी प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि रचना आरंभ की (ब्रह्म-पुराण) — इसीलिए हिन्दू नव-वर्ष; राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत यहीं से चलाया; इसी नवरात्रि की नवमी को श्रीराम का जन्म।

वासंती नवरात्रि ऋतु-संधि (शीत→ग्रीष्म) पर आती है — नौ दिन का संयम, नीम-गुड़-मिश्री (उगादी पच्चड़ी/गुड़ी पड़वा का नीम) शरीर को नई ऋतु के लिए तैयार करता है; यह भी कारण है कि व्रत में फलाहार-सात्विक।

नौ देवियाँ वही — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री; तृतीया को राजस्थान-मालवा में गणगौर, अष्टमी को दुर्गाष्टमी/अशोकाष्टमी, नवमी को राम नवमी (राम-जन्मोत्सव दोपहर 12 बजे)।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

नौ दिन की घरेलू विधि — घटस्थापना (नव-वर्ष सहित), रोज़ पूजा, अष्टमी/नवमी कन्या-पूजन-हवन-राम जन्म; गुड़ी/उगादी की रीत नीचे।

  1. प्रतिपदा को सूर्योदय के बाद (या अभिजित — ऊपर समय) घटस्थापना: मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ, जल-कलश (सुपारी-सिक्का-अक्षत-दूर्वा), आम के पत्ते, चुनरी-लिपटा नारियल; दुर्गा-चित्र, लाल कपड़ा; अखंड ज्योति (या सुबह-शाम दीप); संकल्प।
  2. नव-वर्ष की रीत (उसी सुबह): घर के द्वार पर आम-अशोक के पत्तों का तोरण, रंगोली, ध्वज/गुड़ी (महाराष्ट्र); नीम की कोंपल-गुड़-मिश्री-काली मिर्च का प्रसाद (कड़वा-मीठा-तीखा — नया साल हर रस का); पंचांग/वर्षफल का श्रवण (परिवार बैठकर); बड़ों को प्रणाम।
  3. रोज़ सुबह-शाम: दीप-धूप, उस दिन की देवी का भोग, दुर्गा-सप्तशती/चालीसा, आरती; जवारों में जल; व्रत — फलाहार/सात्विक (नौ दिन या पहला-आख़िरी या अष्टमी)।
  4. तृतीया: गणगौर (राजस्थान-मालवा — पन्ना अलग); चतुर्थी-पंचमी: विनायक चतुर्थी, लक्ष्मी पंचमी (कुछ परंपराएँ); षष्ठी: स्कंद षष्ठी — कात्यायनी।
  5. अष्टमी (दुर्गाष्टमी/अशोकाष्टमी): कन्या-पूजन — 9 कन्याएँ + 1 बालक, पैर धोकर, हलवा-पूड़ी-चना, दक्षिणा-उपहार; अशोक के 8 पत्ते जल के साथ (अशोकाष्टमी — शोक-नाश); कई घर अष्टमी को व्रत खोलते हैं।
  6. नवमी (राम नवमी): हवन — «ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा» + राम-नाम; दोपहर 12 बजे राम-जन्म — राम-दरबार को पालना, पंजीरी-पंचामृत, «श्रीराम जय राम जय जय राम»; कन्या-पूजन (जिनकी रीत नवमी की); जवारे काटकर परिवार में, कलश-जल छिड़कना; पारण।
  7. दशमी को कलश-जवारे-प्रतिमा का विसर्जन (जल/पौधा) — नवरात्रि समापन।
  8. उगादी/गुड़ी पड़वा वाले घर: तेल-स्नान (अभ्यंग), नए वस्त्र, गुड़ी (बाँस पर रेशमी कपड़ा-नीम-फूल-गुड़-ताँबे का लोटा) द्वार पर, श्रीखंड-पूरनपोली/उगादी पच्चड़ी-बोब्बट्लु, पंचांग-श्रवण।

पूजा-सामग्री की सूची

शारदीय नवरात्रि की सामग्री + नव-वर्ष का नीम-गुड़ और तोरण/गुड़ी।

  • कलश, मिट्टी का पात्र + मिट्टी + जौ, आम के पत्ते, नारियल, चुनरी, मौली, सुपारी, सिक्का, दूर्वा
  • माँ दुर्गा का चित्र/मूर्ति, लाल कपड़ा, चौकी, अखंड ज्योति का दीपक-घी
  • रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, फूल (लाल गुड़हल-गेंदा), माला
  • नव-वर्ष: नीम की कोंपल, गुड़, मिश्री, काली मिर्च, अजवाइन (प्रसाद); आम-अशोक के पत्ते (तोरण); रंगोली; ध्वज/गुड़ी का सामान (बाँस, रेशमी कपड़ा, ताँबे का लोटा, फूल-माला)
  • नया पंचांग/वर्षफल
  • भोग: नौ दिन के भोग (घी, शक्कर, दूध, मालपुआ, केला, शहद, गुड़, नारियल, चना-हलवा), राम नवमी की पंजीरी-पंचामृत
  • कन्या-पूजन: हलवा-पूड़ी-चना, दक्षिणा, उपहार; अशोक के 8 पत्ते
  • हवन: कुंड, आम की लकड़ी, हवन-सामग्री, घी, नारियल; राम-दरबार का पालना
  • दुर्गा-सप्तशती/चालीसा, रामचरितमानस (बालकांड — राम-जन्म)

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व्रत-कथा

ब्रह्म-पुराण: इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना आरंभ की और सूर्योदय के साथ काल-गणना (संवत्सर) शुरू हुई — इसीलिए यह दिन हिन्दू नव-वर्ष है; बाद में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय की स्मृति में इसी दिन से विक्रम संवत चलाया (57 ई.पू.)।

गुड़ी पड़वा की कथा — इसी दिन श्रीराम रावण-विजय के बाद (एक मत) अयोध्या लौटे और नगर में विजय-पताका (गुड़ी) फहराई; महाराष्ट्र में शालिवाहन (सातवाहन) राजा की शकों पर विजय और शालिवाहन शक की शुरुआत भी इसी दिन — विजय की गुड़ी। सिंधी परंपरा में चेटीचंड — झूलेलाल का प्रकट-दिन।

नवरात्रि की देवी-कथा वही (महिषासुर-वध, दुर्गा-सप्तशती); और नवमी की — अयोध्या में दशरथ के पुत्र-कामेष्टि यज्ञ से कौशल्या के गर्भ से चैत्र शुक्ल नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र, दोपहर (अभिजित) में श्रीराम का जन्म — «भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी»।

नौ दिन का फलाहार, नीम-गुड़ का प्रसाद, राम नवमी की पंजीरी

व्रत-भोजन शारदीय नवरात्रि जैसा (कुट्टू-सिंघाड़ा-साबूदाना-फल-सेंधा नमक); पहले दिन नीम-गुड़-मिश्री का प्रसाद; नवमी को राम-जन्म की धनिया-पंजीरी व पंचामृत; महाराष्ट्र-दक्षिण में गुड़ी पड़वा-उगादी की रसोई।

  • नव-वर्ष प्रसाद: नीम की कोंपल + गुड़ + मिश्री + काली मिर्च + अजवाइन (उत्तर); उगादी पच्चड़ी — नीम-फूल, गुड़, इमली, कच्चा आम, नमक, मिर्च (छह रस); गुड़ी पड़वा — नीम-गुड़ की गोली, श्रीखंड-पूरी, पूरनपोली
  • नौ दिन के भोग: 1 घी · 2 शक्कर · 3 दूध/खीर · 4 मालपुआ · 5 केला · 6 शहद · 7 गुड़ · 8 नारियल · 9 हलवा-पूड़ी-चना
  • फलाहार: साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू/सिंघाड़े की पूड़ी, आलू, दही, फल, मखाना-खीर, समा के चावल
  • राम नवमी: धनिया-पंजीरी (सूखा धनिया-पाउडर, घी, शक्कर, मखाना-मेवे), पंचामृत, केसर-भात, बूंदी; तमिलनाडु में नीर-मोर (छाछ) व पानकम (गुड़-पानी) — गर्मी में राम को शीतल भोग
  • कन्या-प्रसाद: सूजी हलवा, काले चने, पूड़ी

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

एक प्रतिपदा — उत्तर में नवरात्रि-संवत्सर, महाराष्ट्र में गुड़ी, दक्षिण में उगादी, सिंध में चेटीचंड, कश्मीर में नवरेह।

उत्तर प्रदेश-बिहार-हरियाणा-दिल्ली: घटस्थापना-जवारे, नौ दिन व्रत, अष्टमी को कंजक/कन्या-पूजन, नवमी को राम-जन्मोत्सव (अयोध्या में सरयू-स्नान, राम-मंदिर में दोपहर 12 बजे जन्म-आरती); नव-संवत्सर पर नीम-गुड़, नया पंचांग, «हिन्दू नव-वर्ष» की शोभा-यात्राएँ।
महाराष्ट्र-गोवा (गुड़ी पड़वा): घर के द्वार/खिड़की पर गुड़ी — बाँस पर उलटा ताँबे-चाँदी का लोटा, रेशमी (केसरी) कपड़ा, नीम-आम की टहनी, फूल-माला, शक्कर की माला (गाठी); सुबह अभ्यंग-स्नान, नीम-गुड़ का प्रसाद, पंचांग-श्रवण, श्रीखंड-पूरी/पूरनपोली; मुंबई-पुणे में शोभा-यात्रा (नौवारी, ढोल-ताशा); गुड़ी शाम को उतारते हैं।
आंध्र-तेलंगाना-कर्नाटक (उगादी): «उगादी/युगादि» — तेल-स्नान, नए वस्त्र, द्वार पर आम-पत्तों का तोरण, उगादी पच्चड़ी (छह रस — जीवन के छह भाव), बोब्बट्लु/ओबट्टु-पूरनपोली, मंदिर में «पंचांग-श्रवणम्» (वर्षफल पढ़ना), कवि-सम्मेलन; कर्नाटक में बेवु-बेल्ला (नीम-गुड़) और होळिगे।
राजस्थान-गुजरात-मध्य प्रदेश: राजस्थान में «थापना» (घटस्थापना) और तृतीया को गणगौर की विदाई, चैत्र नवरात्रि पर देवी-मंदिरों (करणी माता, जीण माता) के मेले; गुजरात में «चैत्री नवरात्रि» शांत रूप में (शारदीय गरबा-प्रधान), माताजी की माँडवी; मप्र में नव-वर्ष शोभा-यात्रा, चैत्र-नवमी को राम-मंदिर।
सिंधी-कश्मीरी-पंजाबी: चेटीचंड — झूलेलाल (उदेरोलाल) का जन्मदिन, बहिराणा साहिब की ज्योत, पल्लव-गीत, नदी-पूजा (जल का देवता); कश्मीरी पंडितों का नवरेह — थाल में चावल-अखरोट-दही-कलम-सिक्का-नया पंचांग (सुबह पहली नज़र), नौ दिन नवरात्रि; पंजाब में चैत्र-नवरात्रि के व्रत, वैशाखी अलग।
बंगाल-ओडिशा-असम-मणिपुर: «बासंती पूजा/बासंती नवरात्रि» — दुर्गा-पूजा का मूल वासंती रूप (राम की «अकाल बोधन» शारदीय है), अन्नपूर्णा पूजा (अष्टमी), अशोकाष्टमी (भुवनेश्वर लिंगराज रथ-यात्रा); बंगाल का नव-वर्ष «पोइला बोइशाख» वैशाख-संक्रांति को अलग; मणिपुर में «साजिबु चेइराओबा» नव-वर्ष।
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दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • घटस्थापना प्रतिपदा को सूर्योदय के बाद/अभिजित में — ऊपर तालिका व समय
  • नव-वर्ष की सुबह नीम-गुड़, तोरण, पंचांग-श्रवण, बड़ों को प्रणाम
  • नौ दिन सात्विकता; कन्या-पूजन अष्टमी/नवमी को ज़रूर
  • राम नवमी दोपहर 12 बजे जन्म-आरती, पंजीरी-पंचामृत
  • दशमी को विसर्जन सम्मान से; जवारे बाँटें

❌ क्या न करें

  • अखंड ज्योति अकेली न छोड़ें; कलश न हिलाएँ
  • व्रत में अनाज-नमक-प्याज़-लहसुन नहीं; बाल-नाख़ून नहीं
  • बिना कन्या-पूजन नवरात्रि अधूरी — 2 कन्याएँ भी पर्याप्त
  • नीम का प्रसाद बच्चों को ज़बरदस्ती नहीं — थोड़ा-सा प्रतीक
  • गर्भवती/रोगी निर्जला व हवन-धुआँ नहीं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चैत्र नवरात्रि 2027 कब से कब तक है?

ऊपर दिन-दर-दिन तालिका है — प्रतिपदा (घटस्थापना, नव-वर्ष) से राम नवमी तक; बीच के दिन प्रतिपदा से गिने गए हैं, तिथि-क्षय/वृद्धि पर एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं; नवमी पंचांग से पक्की।

हिन्दू नव-वर्ष (विक्रम संवत) कौन-सा शुरू होगा?

इस प्रतिपदा से नया विक्रम संवत (ऊपर तिथि-पट्टी में संवत-संख्या) — ईसवी वर्ष + 57; उसके साथ नया संवत्सर-नाम (60 नामों का चक्र); शक संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (या 22 मार्च) से, ईसवी − 78।

गुड़ी पड़वा, उगादी और चैत्र नवरात्रि एक ही दिन क्यों?

सब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (चंद्र-वर्ष का पहला दिन) पर हैं — महाराष्ट्र में गुड़ी, दक्षिण में उगादी, उत्तर में नवरात्रि-घटस्थापना; कभी-कभी अमावस्या की अवधि से एक दिन का अंतर आ जाता है।

शारदीय और चैत्र नवरात्रि में क्या अंतर?

देवी-पूजा एक-सी; चैत्र (वासंती) पर नव-वर्ष और राम नवमी जुड़ते हैं, शारदीय पर दशहरा-दुर्गा-पूजा; शारदीय अधिक धूमधाम से, चैत्र अधिक घरेलू-व्रत-प्रधान। दो और गुप्त नवरात्रि (माघ, आषाढ़) साधकों की।

नीम-गुड़ क्यों खाते हैं?

नई ऋतु के लिए शरीर की तैयारी (नीम रक्त-शोधक, गुड़ शक्ति) और जीवन के कड़वे-मीठे को समान भाव से स्वीकारने का प्रतीक — उगादी पच्चड़ी में छह रस इसी का विस्तार।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।

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यह भी पढ़ें: राम नवमी (नवमी — जन्मोत्सव) · गणगौर (तृतीया) · शारदीय नवरात्रि · होली (पखवाड़ा-भर पहले)

⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। बीच के दिनों की तिथि स्थानीय पंचांग से मिला लें।

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