🌸 चैत्र नवरात्रि (गुड़ी पड़वा / नव-संवत्सर) 2027
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से राम नवमी तक — हिन्दू नव-वर्ष, घटस्थापना, नौ देवियाँ, कन्या-पूजन; उसी दिन गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटीचंड और नवरेह।
- घटस्थापना / गुड़ी पड़वा / उगादी / नव-संवत्सर — प्रतिपदा (माँ शैलपुत्री) — बुधवार, 7 अप्रैल 2027
- द्वितीया — माँ ब्रह्मचारिणी — गुरुवार, 8 अप्रैल 2027
- तृतीया — माँ चंद्रघंटा (गणगौर) — शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027
- चतुर्थी — माँ कूष्मांडा — शनिवार, 10 अप्रैल 2027
- पंचमी — माँ स्कंदमाता — रविवार, 11 अप्रैल 2027
- षष्ठी — माँ कात्यायनी — सोमवार, 12 अप्रैल 2027
- सप्तमी — माँ कालरात्रि — मंगलवार, 13 अप्रैल 2027
- अष्टमी — माँ महागौरी (कन्या-पूजन) — बुधवार, 14 अप्रैल 2027
- नवमी — माँ सिद्धिदात्री / राम नवमी (हवन, पारण) — गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
चैत्र नवरात्रि (वासंती नवरात्रि) चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन का देवी-पर्व है — होली के पंद्रह दिन बाद। पहले दिन हिन्दू नव-संवत्सर (विक्रम संवत) शुरू होता है — महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र-कर्नाटक में उगादी, सिंधियों का चेटीचंड, कश्मीर का नवरेह; अंतिम दिन राम नवमी।
विधि शारदीय नवरात्रि जैसी — घटस्थापना, जवारे, अखंड ज्योति, नौ देवियों की पूजा, अष्टमी-नवमी को कन्या-पूजन व हवन; साथ में नए साल का पंचांग-श्रवण, नीम-गुड़ का प्रसाद, गुड़ी/तोरण। नीचे इस साल की नौ दिन की तालिका, घटस्थापना-मुहूर्त, विधि, सामग्री, कथा, फलाहार और इलाक़ों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
इसी प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि रचना आरंभ की (ब्रह्म-पुराण) — इसीलिए हिन्दू नव-वर्ष; राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत यहीं से चलाया; इसी नवरात्रि की नवमी को श्रीराम का जन्म।
वासंती नवरात्रि ऋतु-संधि (शीत→ग्रीष्म) पर आती है — नौ दिन का संयम, नीम-गुड़-मिश्री (उगादी पच्चड़ी/गुड़ी पड़वा का नीम) शरीर को नई ऋतु के लिए तैयार करता है; यह भी कारण है कि व्रत में फलाहार-सात्विक।
नौ देवियाँ वही — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री; तृतीया को राजस्थान-मालवा में गणगौर, अष्टमी को दुर्गाष्टमी/अशोकाष्टमी, नवमी को राम नवमी (राम-जन्मोत्सव दोपहर 12 बजे)।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
नौ दिन की घरेलू विधि — घटस्थापना (नव-वर्ष सहित), रोज़ पूजा, अष्टमी/नवमी कन्या-पूजन-हवन-राम जन्म; गुड़ी/उगादी की रीत नीचे।
- प्रतिपदा को सूर्योदय के बाद (या अभिजित — ऊपर समय) घटस्थापना: मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ, जल-कलश (सुपारी-सिक्का-अक्षत-दूर्वा), आम के पत्ते, चुनरी-लिपटा नारियल; दुर्गा-चित्र, लाल कपड़ा; अखंड ज्योति (या सुबह-शाम दीप); संकल्प।
- नव-वर्ष की रीत (उसी सुबह): घर के द्वार पर आम-अशोक के पत्तों का तोरण, रंगोली, ध्वज/गुड़ी (महाराष्ट्र); नीम की कोंपल-गुड़-मिश्री-काली मिर्च का प्रसाद (कड़वा-मीठा-तीखा — नया साल हर रस का); पंचांग/वर्षफल का श्रवण (परिवार बैठकर); बड़ों को प्रणाम।
- रोज़ सुबह-शाम: दीप-धूप, उस दिन की देवी का भोग, दुर्गा-सप्तशती/चालीसा, आरती; जवारों में जल; व्रत — फलाहार/सात्विक (नौ दिन या पहला-आख़िरी या अष्टमी)।
- तृतीया: गणगौर (राजस्थान-मालवा — पन्ना अलग); चतुर्थी-पंचमी: विनायक चतुर्थी, लक्ष्मी पंचमी (कुछ परंपराएँ); षष्ठी: स्कंद षष्ठी — कात्यायनी।
- अष्टमी (दुर्गाष्टमी/अशोकाष्टमी): कन्या-पूजन — 9 कन्याएँ + 1 बालक, पैर धोकर, हलवा-पूड़ी-चना, दक्षिणा-उपहार; अशोक के 8 पत्ते जल के साथ (अशोकाष्टमी — शोक-नाश); कई घर अष्टमी को व्रत खोलते हैं।
- नवमी (राम नवमी): हवन — «ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा» + राम-नाम; दोपहर 12 बजे राम-जन्म — राम-दरबार को पालना, पंजीरी-पंचामृत, «श्रीराम जय राम जय जय राम»; कन्या-पूजन (जिनकी रीत नवमी की); जवारे काटकर परिवार में, कलश-जल छिड़कना; पारण।
- दशमी को कलश-जवारे-प्रतिमा का विसर्जन (जल/पौधा) — नवरात्रि समापन।
- उगादी/गुड़ी पड़वा वाले घर: तेल-स्नान (अभ्यंग), नए वस्त्र, गुड़ी (बाँस पर रेशमी कपड़ा-नीम-फूल-गुड़-ताँबे का लोटा) द्वार पर, श्रीखंड-पूरनपोली/उगादी पच्चड़ी-बोब्बट्लु, पंचांग-श्रवण।
पूजा-सामग्री की सूची
शारदीय नवरात्रि की सामग्री + नव-वर्ष का नीम-गुड़ और तोरण/गुड़ी।
- कलश, मिट्टी का पात्र + मिट्टी + जौ, आम के पत्ते, नारियल, चुनरी, मौली, सुपारी, सिक्का, दूर्वा
- माँ दुर्गा का चित्र/मूर्ति, लाल कपड़ा, चौकी, अखंड ज्योति का दीपक-घी
- रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, फूल (लाल गुड़हल-गेंदा), माला
- नव-वर्ष: नीम की कोंपल, गुड़, मिश्री, काली मिर्च, अजवाइन (प्रसाद); आम-अशोक के पत्ते (तोरण); रंगोली; ध्वज/गुड़ी का सामान (बाँस, रेशमी कपड़ा, ताँबे का लोटा, फूल-माला)
- नया पंचांग/वर्षफल
- भोग: नौ दिन के भोग (घी, शक्कर, दूध, मालपुआ, केला, शहद, गुड़, नारियल, चना-हलवा), राम नवमी की पंजीरी-पंचामृत
- कन्या-पूजन: हलवा-पूड़ी-चना, दक्षिणा, उपहार; अशोक के 8 पत्ते
- हवन: कुंड, आम की लकड़ी, हवन-सामग्री, घी, नारियल; राम-दरबार का पालना
- दुर्गा-सप्तशती/चालीसा, रामचरितमानस (बालकांड — राम-जन्म)
🛍 पूजा-सामग्री व यंत्र देखें 🙏 पूजा बुक करें
सूर्योदय, चंद्रोदय, राहुकाल व चौघड़िया — आपके शहर के सटीक समय से, निःशुल्क।
पंचांग देखें →व्रत-कथा
ब्रह्म-पुराण: इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना आरंभ की और सूर्योदय के साथ काल-गणना (संवत्सर) शुरू हुई — इसीलिए यह दिन हिन्दू नव-वर्ष है; बाद में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों पर विजय की स्मृति में इसी दिन से विक्रम संवत चलाया (57 ई.पू.)।
गुड़ी पड़वा की कथा — इसी दिन श्रीराम रावण-विजय के बाद (एक मत) अयोध्या लौटे और नगर में विजय-पताका (गुड़ी) फहराई; महाराष्ट्र में शालिवाहन (सातवाहन) राजा की शकों पर विजय और शालिवाहन शक की शुरुआत भी इसी दिन — विजय की गुड़ी। सिंधी परंपरा में चेटीचंड — झूलेलाल का प्रकट-दिन।
नवरात्रि की देवी-कथा वही (महिषासुर-वध, दुर्गा-सप्तशती); और नवमी की — अयोध्या में दशरथ के पुत्र-कामेष्टि यज्ञ से कौशल्या के गर्भ से चैत्र शुक्ल नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र, दोपहर (अभिजित) में श्रीराम का जन्म — «भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी»।
नौ दिन का फलाहार, नीम-गुड़ का प्रसाद, राम नवमी की पंजीरी
व्रत-भोजन शारदीय नवरात्रि जैसा (कुट्टू-सिंघाड़ा-साबूदाना-फल-सेंधा नमक); पहले दिन नीम-गुड़-मिश्री का प्रसाद; नवमी को राम-जन्म की धनिया-पंजीरी व पंचामृत; महाराष्ट्र-दक्षिण में गुड़ी पड़वा-उगादी की रसोई।
- नव-वर्ष प्रसाद: नीम की कोंपल + गुड़ + मिश्री + काली मिर्च + अजवाइन (उत्तर); उगादी पच्चड़ी — नीम-फूल, गुड़, इमली, कच्चा आम, नमक, मिर्च (छह रस); गुड़ी पड़वा — नीम-गुड़ की गोली, श्रीखंड-पूरी, पूरनपोली
- नौ दिन के भोग: 1 घी · 2 शक्कर · 3 दूध/खीर · 4 मालपुआ · 5 केला · 6 शहद · 7 गुड़ · 8 नारियल · 9 हलवा-पूड़ी-चना
- फलाहार: साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू/सिंघाड़े की पूड़ी, आलू, दही, फल, मखाना-खीर, समा के चावल
- राम नवमी: धनिया-पंजीरी (सूखा धनिया-पाउडर, घी, शक्कर, मखाना-मेवे), पंचामृत, केसर-भात, बूंदी; तमिलनाडु में नीर-मोर (छाछ) व पानकम (गुड़-पानी) — गर्मी में राम को शीतल भोग
- कन्या-प्रसाद: सूजी हलवा, काले चने, पूड़ी
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
एक प्रतिपदा — उत्तर में नवरात्रि-संवत्सर, महाराष्ट्र में गुड़ी, दक्षिण में उगादी, सिंध में चेटीचंड, कश्मीर में नवरेह।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- घटस्थापना प्रतिपदा को सूर्योदय के बाद/अभिजित में — ऊपर तालिका व समय
- नव-वर्ष की सुबह नीम-गुड़, तोरण, पंचांग-श्रवण, बड़ों को प्रणाम
- नौ दिन सात्विकता; कन्या-पूजन अष्टमी/नवमी को ज़रूर
- राम नवमी दोपहर 12 बजे जन्म-आरती, पंजीरी-पंचामृत
- दशमी को विसर्जन सम्मान से; जवारे बाँटें
❌ क्या न करें
- अखंड ज्योति अकेली न छोड़ें; कलश न हिलाएँ
- व्रत में अनाज-नमक-प्याज़-लहसुन नहीं; बाल-नाख़ून नहीं
- बिना कन्या-पूजन नवरात्रि अधूरी — 2 कन्याएँ भी पर्याप्त
- नीम का प्रसाद बच्चों को ज़बरदस्ती नहीं — थोड़ा-सा प्रतीक
- गर्भवती/रोगी निर्जला व हवन-धुआँ नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चैत्र नवरात्रि 2027 कब से कब तक है?
ऊपर दिन-दर-दिन तालिका है — प्रतिपदा (घटस्थापना, नव-वर्ष) से राम नवमी तक; बीच के दिन प्रतिपदा से गिने गए हैं, तिथि-क्षय/वृद्धि पर एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं; नवमी पंचांग से पक्की।
हिन्दू नव-वर्ष (विक्रम संवत) कौन-सा शुरू होगा?
इस प्रतिपदा से नया विक्रम संवत (ऊपर तिथि-पट्टी में संवत-संख्या) — ईसवी वर्ष + 57; उसके साथ नया संवत्सर-नाम (60 नामों का चक्र); शक संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (या 22 मार्च) से, ईसवी − 78।
गुड़ी पड़वा, उगादी और चैत्र नवरात्रि एक ही दिन क्यों?
सब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (चंद्र-वर्ष का पहला दिन) पर हैं — महाराष्ट्र में गुड़ी, दक्षिण में उगादी, उत्तर में नवरात्रि-घटस्थापना; कभी-कभी अमावस्या की अवधि से एक दिन का अंतर आ जाता है।
शारदीय और चैत्र नवरात्रि में क्या अंतर?
देवी-पूजा एक-सी; चैत्र (वासंती) पर नव-वर्ष और राम नवमी जुड़ते हैं, शारदीय पर दशहरा-दुर्गा-पूजा; शारदीय अधिक धूमधाम से, चैत्र अधिक घरेलू-व्रत-प्रधान। दो और गुप्त नवरात्रि (माघ, आषाढ़) साधकों की।
नीम-गुड़ क्यों खाते हैं?
नई ऋतु के लिए शरीर की तैयारी (नीम रक्त-शोधक, गुड़ शक्ति) और जीवन के कड़वे-मीठे को समान भाव से स्वीकारने का प्रतीक — उगादी पच्चड़ी में छह रस इसी का विस्तार।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
यह भी पढ़ें: राम नवमी (नवमी — जन्मोत्सव) · गणगौर (तृतीया) · शारदीय नवरात्रि · होली (पखवाड़ा-भर पहले)
⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। बीच के दिनों की तिथि स्थानीय पंचांग से मिला लें।
🌐 Read this page in English · ← सभी व्रत-त्योहार · पूरा पर्व-कैलेंडर