| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | 6:04 AM – 11:56 AM EDT | 28 जुलाई, 8:49 AM → 29 जुलाई, 10:36 AM EDT |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | 6:05 AM – 11:57 AM EDT | 28 जुलाई, 8:49 AM → 29 जुलाई, 10:36 AM EDT |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | 5:41 AM – 11:47 AM PDT | 28 जुलाई, 5:49 AM → 29 जुलाई, 7:36 AM PDT |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | 5:58 AM – 12:10 PM MDT | 28 जुलाई, 6:49 AM → 29 जुलाई, 8:36 AM MDT |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | 5:45 AM – 12:05 PM MDT | 28 जुलाई, 6:49 AM → 29 जुलाई, 8:36 AM MDT |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 29 जुलाई 2026 | 5:35 AM – 11:31 AM EDT | 28 जुलाई, 8:49 AM → 29 जुलाई, 10:36 AM EDT |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर तिथि (उदया तिथि)।
«गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः» — गुरु अज्ञान-अंधकार हटाने वाला (गु = अंधकार, रु = हटाना); आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु-पूजन का फल गुरु-कृपा से ज्ञान, विद्या, आध्यात्मिक-प्रगति; व्यास-पूजन के साथ शुकदेव, शंकराचार्य, अपने गुरु-परंपरा (गुरु-मंडल) का पूजन।
शिव प्रथम गुरु (आदियोगी) — इसी पूर्णिमा को सप्तर्षियों को योग-विद्या दी (योग-परंपरा); गुरु-मंत्र की दीक्षा लेने, नया अध्ययन/साधना आरंभ करने, विद्यार्थियों के लिए गुरु-वंदन और शिक्षकों के सम्मान का दिन; बच्चे शिक्षकों को फूल-कार्ड, विद्यालयों में गुरु-वंदना।
पूर्णिमा-व्रत (दिन-भर फलाहार, शाम चंद्र-दर्शन के बाद पारण), सत्यनारायण-कथा; इसी पूर्णिमा से संतों का चातुर्मास (कार्तिक पूर्णिमा तक — प्रवचन-सत्संग एक स्थान पर); कोकिला-व्रत (आषाढ़ पूर्णिमा — सती की कथा; कुछ इलाक़े); बंगाल-ओडिशा में «गुरु पूर्णिमा/ऋषि-पूजा»; नेपाल में «गुरु पूर्णिमा/शिक्षक-दिवस» की छुट्टी।
हाँ — बुधवार, 29 जुलाई 2026।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:04 AM से 11:56 AM (EDT)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
व्यासजी (सब गुरुओं के गुरु), शिव-दत्तात्रेय (आदि-गुरु), अपने इष्ट, माता-पिता (प्रथम गुरु), विद्या-गुरु/शिक्षक; या जिसकी शिक्षा से जीवन बदला — पुस्तक-लेखक तक; गुरु-तत्त्व को प्रणाम — «गुरुर्ब्रह्मा…» श्लोक पर्याप्त।
सामर्थ्य से — फल-वस्त्र-पुष्प-दक्षिणा; पर असली दक्षिणा गुरु के बताए मार्ग पर चलना, एक नियम/त्याग का संकल्प, गुरु-कार्य में सेवा; गुरु न हों तो पुस्तक-दान, किसी ग़रीब छात्र की फ़ीस/कॉपी-कलम — विद्या-दान गुरु-दक्षिणा ही है।
हाँ — गुरु-पूर्णिमा दीक्षा (गुरु-मंत्र), नया अध्ययन, साधना-आरंभ, संगीत/कला का पहला पाठ, रुद्राक्ष-धारण के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन; आश्रमों में सामूहिक दीक्षा होती है; अभिजित मुहूर्त (ऊपर) उत्तम।
देवशयनी एकादशी/गुरु पूर्णिमा से देवउठनी/कार्तिक पूर्णिमा तक के चार मास — विष्णु का शयन, विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं; साधु-संत एक स्थान पर रहकर प्रवचन; गृहस्थ कोई एक नियम (सात्विक भोजन, गीता-पाठ, ब्रह्मचर्य, दान) रखते हैं; जैन-बौद्ध में भी (वर्षावास)।