| शहर | तारीख | प्रदोष काल पूजा | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| टोरंटो Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 10 नवंबर 2027 | 4:57 PM – 7:47 PM EST | 9 नवंबर, 10:42 PM → 10 नवंबर, 11:38 PM EST |
| ब्रैम्पटन Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 10 नवंबर 2027 | 4:59 PM – 7:49 PM EST | 9 नवंबर, 10:42 PM → 10 नवंबर, 11:38 PM EST |
| वैंकूवर Pacific Time (PST/PDT) | बुधवार, 10 नवंबर 2027 | 5:37 PM – 8:33 PM MST | 9 नवंबर, 8:42 PM → 10 नवंबर, 9:38 PM MST |
| कैलगरी Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 10 नवंबर 2027 | 4:56 PM – 7:54 PM MST | 9 नवंबर, 8:42 PM → 10 नवंबर, 9:38 PM MST |
| एडमंटन Mountain Time (MST/MDT) | बुधवार, 10 नवंबर 2027 | 4:45 PM – 7:46 PM MST | 9 नवंबर, 8:42 PM → 10 नवंबर, 9:38 PM MST |
| मॉन्ट्रियल Eastern Time (EST/EDT) | बुधवार, 10 नवंबर 2027 | 4:30 PM – 7:22 PM EST | 9 नवंबर, 10:42 PM → 10 नवंबर, 11:38 PM EST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त के बाद प्रदोष-काल में तिथि हो।
वृंदा-तुलसी: असुर जालंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा — विष्णु ने जालंधर-वध हेतु उसका पातिव्रत्य भंग किया; वृंदा ने शाप दिया कि विष्णु पत्थर (शालिग्राम) हों, और स्वयं अग्नि में समाई — उसकी राख से तुलसी उगी; विष्णु ने वरदान दिया कि तुलसी सदा उनके साथ पूजी जाएगी और कार्तिक शुक्ल द्वादशी को शालिग्राम-रूप में वे तुलसी से विवाह करेंगे — बिना तुलसी विष्णु का भोग अधूरा।
कन्यादान का पुण्य: मान्यता है कि जिनके घर कन्या नहीं, वे तुलसी का कन्यादान कर कन्यादान का फल पाते हैं; जिनके विवाह में बाधा हो वे तुलसी-विवाह में सम्मिलित होकर वैवाहिक सुख की प्रार्थना करते हैं; दांपत्य-कलह की शांति।
विवाह-मुहूर्तों का द्वार: देवशयनी से देवउठनी तक चातुर्मास में विवाह नहीं होते; तुलसी-विवाह के साथ ही मांगलिक कार्य, विवाह, गृह-प्रवेश आरंभ — इसीलिए तुलसी-विवाह को «पहला विवाह» कहा जाता है; उसी सप्ताह से लग्न-तिथियाँ शुरू।
नहीं। भारत: गुरुवार, 11 नवंबर 2027; टोरंटो (कनाडा): बुधवार, 10 नवंबर 2027। तिथि स्थानीय निर्णायक क्षण पर देखी जाती है, जो यहाँ दूसरे दिन पड़ता है।
प्रदोष काल पूजा: 4:57 PM से 7:47 PM (EST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (टोरंटो के लिए Eastern Time (EST/EDT))।
विष्णु/कृष्ण/लक्ष्मी-नारायण की छोटी मूर्ति या चित्र को वर बनाएँ — पीले वस्त्र, मुकुट; भाव मुख्य है; कई घर ठाकुरजी (बालकृष्ण) से विवाह कराते हैं।
घर में स्त्रियाँ ही श्रृंगार-गीत-कन्यादान करती हैं, संकल्प-मंत्र घर का पुरुष/ब्राह्मण (हो तो); पंडित अनिवार्य नहीं — मंगलाष्टक व आरती से घर में पूरा हो जाता है।
मान्यता — जिनके घर कन्या नहीं, या जो तुलसी-कन्यादान कराते हैं, उन्हें कन्यादान-पुण्य; विवाह-बाधा वालों को दांपत्य-सुख की प्रार्थना का फल।
गन्ना प्रसाद-रूप में खाएँ-बाँटें, तुलसी की चुनरी बनी रहे, कार्तिक पूर्णिमा तक रोज़ तुलसी-दीप, भीष्म-पंचक (द्वादशी-पूर्णिमा) में सात्विक; उसी सप्ताह से घर के विवाह-मुहूर्त देखें।