Nakshtra Takकुंडलीराशिफलपंचांगमिलानज्ञानग्रह-फलज्योतिषीStore
मूल ज्योतिष

कुंडली का छठा भाव (रोग/रिपु भाव): रोग, ऋण, शत्रु और सेवा

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति
⚡ सार 30 सेकंड में
  • कुंडली का छठा भाव रोग, ऋण, शत्रु, प्रतिस्पर्धा, नौकरी और सेवा का मुख्य घर होता है।
  • उपचय भाव होने के कारण छठे घर में पाप ग्रह संघर्ष कराकर अंततः विजय दिलाते हैं।
  • षष्ठेश के छठे, आठवें या बारहवें भाव में जाने से विपरीत-राजयोग का निर्माण होता है।

छठा भाव रोग-रिपु भाव है — रोग, ऋण, शत्रु, मुक़दमे और प्रतिस्पर्धा का घर। त्रिक (दुःस्थान) होते हुए भी यह उपचय भाव है — यहाँ के ग्रह लड़ना सिखाते हैं और समय के साथ जिताते हैं।

आधुनिक अर्थ में यह नौकरी-सेवा, दिनचर्या, स्वास्थ्य-प्रबंधन और workplace का भाव है — छठा बली हो तो जातक प्रतिस्पर्धा में खिलता है।

छठा भाव क्या-क्या देखता है

रिपु भाव के मुख्य विषय:

  • रोग और रोग-प्रतिरोधक क्षमता
  • ऋण — लेना, चुकाना, फँसना
  • शत्रु, प्रतिद्वंद्वी, मुक़दमे
  • नौकरी-सेवा और अधीनस्थ कर्मचारी
  • मामा-पक्ष (ननिहाल)
  • पालतू पशु; आँत-पाचन (शरीर-अंग)
  • प्रतियोगी परीक्षाएँ — छठे का बल यहाँ निर्णायक
📐 उदाहरण-कुंडली
जन्म-कुंडली (D1)
121234567891011सूचंमंगुशबुशु℞राकेल

यहाँ छठे भाव में सिंह राशि है — इसका स्वामी सूर्य तीसरे भाव में बैठा है, और इस भाव का कारक मंगल स्वयं इसी भाव में है।

उदाहरण हेतु चुना जन्म-समय: 11 जून 1980, 01:30, दिल्ली
यह किसी व्यक्ति की कुंडली नहीं — विधि दिखाने के लिए engine से बनाया चार्ट है। ये विवरण निःशुल्क कुंडली में डालकर आप स्वयं जाँच सकते हैं। अपनी कुंडली में देखें →

छठे भाव में नौ ग्रहों का फल

उपचय होने से पाप-ग्रह यहाँ प्रायः विजय दिलाते हैं:

  • सूर्य: शत्रु-हंता, प्रशासनिक विजय; पित्त-रोग सावधानी
  • चंद्र: मन में चिंता-प्रवृत्ति; जल/कफ-विकार — मन का उपचार ज़रूरी
  • मंगल: शत्रुओं पर निर्णायक विजय, ऋण जल्दी चुकता — police/सेना हेतु उत्तम
  • बुध: तर्क से मुक़दमे जीतता; स्नायु-त्वचा सावधानी
  • गुरु: शत्रु भी सम्मान करें; पर 'कारको भाव' नियम से यकृत-वज़न सावधानी
  • शुक्र: सेवा-क्षेत्र में कला; मधुमेह-मूत्र विकार से बचाव करें
  • शनि: रोग-ऋण-शत्रु तीनों को धीरे-धीरे पीसकर हराता — दीर्घ सेवा-करियर
  • राहु: विषम शत्रुओं से भी जीत; रहस्यमय रोग — निदान में धैर्य
  • केतु: गुप्त शत्रुओं का नाश; सूक्ष्म रोगों में वैकल्पिक चिकित्सा लाभ
🔮 अपनी कुंडली में देखें

यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में कैसी है — ग्रह, दशा व योग सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।

निःशुल्क कुंडली बनाएँ →

षष्ठेश की स्थिति का फल

छठे का स्वामी जहाँ बैठता है, वहाँ संघर्ष-प्रतिस्पर्धा ले जाता है — षष्ठेश लग्न में स्वास्थ्य-चुनौती, सातवें में दांपत्य-टकराव, दसवें में प्रतिस्पर्धी करियर (जो जीत भी दिलाता है)।

विपरीत-राजयोग भी यहीं से बनता है: षष्ठेश छठे, आठवें या बारहवें में ही चला जाए तो दुःस्थानों का आपसी नाश होकर अचानक उत्थान देता है — कठिन दिखती कुंडलियों में यह छिपा वरदान होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतियोगी परीक्षा कब निकलेगी? — छठे भाव व षष्ठेश का बल + पंचम (बुद्धि) + दशा-गोचर की खिड़की मिलाकर; छठे-दसवें के बली सम्बन्ध वाले जातक प्रतिस्पर्धा में आगे रहते हैं।

ऋण कब उतरेगा? — मंगल व षष्ठेश की शुभ दशा-अवधियों में; परंपरा में मंगलवार का ऋण-मोचन मंगल-स्तोत्र प्रसिद्ध उपाय है।

क्या छठा भाव ख़ाली होना अच्छा है? — प्रायः हाँ-जैसा ही — पर असली निर्णय षष्ठेश की स्थिति से होता है; ख़ाली भाव का फल उसका स्वामी देता है।

❓ सामान्य प्रश्न

प्रतियोगी परीक्षा में सफलता कब मिलती है?
छठे भाव और षष्ठेश के बल, पंचम भाव तथा दशा-गोचर की स्थिति को मिलाकर इसका निर्णय होता है।

ऋण से मुक्ति मिलने का समय कैसे पता चलता है?
मंगल और षष्ठेश की शुभ दशा-अवधियों में ऋण चुकता होता है।

क्या छठे भाव का खाली होना अच्छा माना जाता है?
प्रायः यह अच्छा होता है, हालांकि असली निर्णय उसके स्वामी यानी षष्ठेश की स्थिति से होता है।

← ज्योतिष ज्ञान (सभी लेख) · निःशुल्क कुंडली · ज्योतिषी से पूछें