| तारीख | अमावस्या | तिथि | नोट |
|---|---|---|---|
| गुरुवार, 7 जनवरी 2027 | पौष अमावस्या | 6 जनवरी, 5:45 PM → 7 जनवरी, 8:28 PM | |
| शनिवार, 6 फ़रवरी 2027 | शनि माघ अमावस्या | 5 फ़रवरी, 1:36 PM → 6 फ़रवरी, 4:01 PM | दर्श अमावस्या (संध्या): 5 फ़रवरी |
| सोमवार, 8 मार्च 2027 | सोमवती फाल्गुन अमावस्या | 7 मार्च, 8:17 AM → 8 मार्च, 9:37 AM | दर्श अमावस्या (संध्या): 7 मार्च |
| मंगलवार, 6 अप्रैल 2027 | चैत्र अमावस्या | 6 अप्रैल, 1:11 AM → 7 अप्रैल, 12:57 AM | |
| गुरुवार, 6 मई 2027 | वैशाख अमावस्या | 5 मई, 1:47 PM → 6 मई, 12:02 PM | दर्श अमावस्या (संध्या): 5 मई |
| शुक्रवार, 4 जून 2027 | ज्येष्ठ अमावस्या | 3 जून, 11:36 PM → 4 जून, 8:42 PM | |
| शनिवार, 3 जुलाई 2027 | शनि आषाढ़ अमावस्या | 2 जुलाई, 10:54 AM → 4 जुलाई, 4:06 AM | |
| सोमवार, 2 अगस्त 2027 | सोमवती श्रावण अमावस्या | 1 अगस्त, 2:51 PM → 2 अगस्त, 11:13 AM | दर्श अमावस्या (संध्या): 1 अगस्त |
| मंगलवार, 31 अगस्त 2027 | भाद्रपद अमावस्या | 30 अगस्त, 10:12 PM → 31 अगस्त, 6:42 PM | |
| बुधवार, 29 सितंबर 2027 | आश्विन अमावस्या | 29 सितंबर, 6:26 AM → 30 सितंबर, 3:43 AM | |
| शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 | कार्तिक अमावस्या | 28 अक्टूबर, 4:19 PM → 29 अक्टूबर, 2:38 PM | दर्श अमावस्या (संध्या): 28 अक्टूबर |
| शनिवार, 27 नवंबर 2027 | शनि मार्गशीर्ष अमावस्या | 27 नवंबर, 3:38 AM → 28 नवंबर, 3:31 AM | |
| सोमवार, 27 दिसंबर 2027 | सोमवती पौष अमावस्या | 26 दिसंबर, 6:53 PM → 27 दिसंबर, 8:20 PM |
स्नान-दान उदया-तिथि के दिन; दर्श अमावस्या (पितृ-कार्य) जिस दिन स्थानीय सूर्यास्त पर अमावस्या।
पितृ-दिन: गरुड़-पुराण/मनुस्मृति — अमावस्या को पितर वायु-रूप में वंशजों के द्वार पर आकर तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं; अमावस्या का तर्पण/श्राद्ध पितृ-दोष (कुंडली में सूर्य-राहु/शनि) की शांति का मासिक उपाय; दर्श-श्राद्ध (अमावस्या का श्राद्ध) पितृ-पक्ष के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण।
चंद्र-हीन दिन — मन (चंद्र) निर्बल, इसलिए शुभ-कार्य (विवाह-यात्रा-नया आरंभ) टालते हैं, पर जप-तप-दान-ध्यान (मौनी) व तांत्रिक/काली-साधना का श्रेष्ठ काल; सोमवती (चंद्र-वार + अमावस्या) पर पीपल-परिक्रमा से सुहाग-संतान; शनिश्चरी पर शनि-शांति (साढ़ेसाती-ढैया), शनि-मंदिर (शिंगणापुर-कोकिलावन-तिरुनल्लार) की भीड़।
आयरलैंड (डबलिन) में 13। चंद्र-मास कैलेंडर-वर्ष से नहीं मिलते, इसलिए गिनती एक कम-ज़्यादा हो सकती है।
डबलिन के लिए 13 में से 3 तारीखें भारत से अलग हैं — तिथि स्थानीय क्षण (सूर्योदय/चंद्रोदय/प्रदोष) पर देखी जाती है।
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या — साल में 1-3; सुहागिनें व्रत रखकर पीपल की 108 परिक्रमा कच्चा सूत लपेटते हुए करती हैं, फल-मिठाई-सिक्के चढ़ाकर, सोना-धोबिन/साहूकार-बहू की कथा सुनकर, फिर भोजन — पति-संतान की दीर्घायु व अखंड सुहाग; तीर्थ-स्नान (हरिद्वार-प्रयाग) का विशेष फल; ऊपर सूची में «(सोमवती)» लिखा है।
शनिवार की अमावस्या — शनि-शांति का श्रेष्ठ दिन: शनि-मंदिर/पीपल पर सरसों-तेल का दीप, काले तिल-उड़द-तेल-लोहा-काला वस्त्र दान (ग़रीब/सफ़ाई-कर्मी को), «ॐ शं शनैश्चराय नमः» 108, हनुमान-चालीसा, शनि-स्तोत्र (दशरथ-कृत), पितृ-तर्पण साथ; साढ़ेसाती-ढैया वाले विशेष; कुंडली-जाँच (साढ़ेसाती-रिपोर्ट) से पहले पुष्टि।
स्नान कर दक्षिण मुख बैठें, तांबे के लोटे में जल-काले तिल-(कुशा); अँगूठे की ओर से जल छोड़ते हुए «(गोत्र) (पिता/दादा का नाम) तृप्यताम्» 3-3 बार, फिर «सर्वे पितरः तृप्यन्ताम्»; अंत में गाय-कौए को खीर-रोटी, ग़रीब को अन्न — यही सरल दर्श-तर्पण; स्त्री भी कर सकती है (पुत्र न हो तो); पूर्ण विधि के लिए पितृ-पक्ष पन्ना।