
कुण्डली पढ़ना सीखने वाले विद्यार्थी और अभ्यास करने वाले ज्योतिषी, दोनों के लिए एक ही जगह पूरा फलित-ज्योतिष — नवग्रह और भावों की नींव से लेकर दशा, अष्टकवर्ग, गोचर, वर्ग कुण्डलियों, मुहूर्त और उपायों तक। हर नियम सूत्र-रूप में, उदाहरण के साथ।
✍️ लेखक: ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी — 15+ वर्ष का वैदिक ज्योतिष अनुभव, Nakshtra Tak के संस्थापक। लेखक-परिचय →
शुरुआत से सीखने वालों के लिए — अगर आप ढूँढ रहे हैं कि ज्योतिष सीखने की कौन-सी पुस्तक से शुरू करें, तो इसके पहले 30 अध्याय कुंडली-परिचय, नवग्रह, बारह राशियाँ, बारह भाव और 27 नक्षत्रों से नींव रखते हैं; उसके बाद क्रम से फलित ज्योतिष आता है। यानी घर बैठे, अपनी गति से, step by step सीखना।
कुंडली देखना सीखें — हर भाव में हर ग्रह का फल (अध्याय 52–60), बारहों भावेशों का फल (61–73), बारह लग्नों का विश्लेषण (75–86) और 194वें अध्याय में पूरी कुंडलियों का क्रमवार विश्लेषण — ताकि सिद्धांत से आगे बढ़कर जन्मपत्रिका पढ़ना आए।
पाराशरी पद्धति का आधार — विंशोत्तरी दशा व अन्तर्दशा (अध्याय 97–111), D2 से D45 तक वर्ग कुंडलियाँ (141–177), अष्टकवर्ग (120–125) जैसे बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की परंपरा के विषय विस्तार से; साथ में योगिनी दशा, लाल किताब के उपाय, अंक-ज्योतिष और प्रश्न कुंडली भी।
दशा, गोचर और कुंडली मिलान — घटनाओं का समय जानने के लिए दशा-गोचर के सूत्र, और विवाह के लिए कुंडली मिलान, मांगलिक विचार व नवांश से विवाह-विश्लेषण (अध्याय 49–50, 158–165)।
सरल हिन्दी — हर नियम सूत्र-रूप में, उदाहरण सहित, ताकि सरल भाषा में वैदिक ज्योतिष शास्त्र समझ में आए।
शुरुआत ऐसी पुस्तक से करें जो आधार से क्रमवार चले। «ज्योतिष समुद्र» के पहले 30 अध्याय कुंडली, ग्रह, राशि, भाव और नक्षत्र समझाते हैं, फिर फलित, दशा, गोचर और वर्ग कुंडलियाँ आती हैं — इसलिए नए पाठक भी इससे शुरू कर सकते हैं।
पुस्तक का मुख्य आधार पाराशरी पद्धति है — विंशोत्तरी दशा, षोडश वर्ग कुंडलियाँ, अष्टकवर्ग और भाव-भावेश के नियम। साथ में योगिनी दशा, लाल किताब के उपाय, अंक-ज्योतिष, प्रश्न कुंडली और मेदनी ज्योतिष पर भी अध्याय हैं।
किसी क्रमवार पुस्तक को अध्याय-दर-अध्याय पढ़ें और साथ-साथ अपनी व परिवार की कुंडली पर अभ्यास करें। निःशुल्क कुंडली Nakshtra Tak पर बन जाती है; मार्गदर्शन के साथ सीखना हो तो Nakshtra Tak Learning का online ज्योतिष कोर्स भी है।
हाँ — कुंडली मिलान व मांगलिक विचार (अध्याय 49–50), विवाह से जुड़ा नवांश-विश्लेषण (158–165), विंशोत्तरी व योगिनी दशा (97–119) और दशा-गोचर से घटना का समय।
पिछले संस्करण में 116 अध्याय थे; नया संस्करण दो भागों में 202 अध्याय और लगभग 1481 पृष्ठ का है — योगिनी दशा, अष्टकवर्ग, सभी वर्ग कुण्डलियाँ (D2 से D45), विवाह-संतान-करियर विश्लेषण, मेदनी ज्योतिष और चर/विशेष लग्नों जैसे नए खंड जुड़े हैं।
हाँ। पहले 30 अध्याय कुण्डली, ग्रह, राशि, भाव और नक्षत्र की नींव रखते हैं; उसके बाद क्रम से फलित, दशा, गोचर और वर्ग कुण्डलियाँ आती हैं।
पुस्तक हिन्दी में है।
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हाँ। पुस्तक का सही नाम «ज्योतिष समुद्र» है; कई लोग इसे «ज्योतिष समुंद्र» या «Jyotish Samundra» भी लिखते हैं — यह वही पुस्तक है, और यह इसका नया संस्करण है।