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ज्योतिष समुद्र — 1001 सूत्र — Horoscope Analysis · Tips & Tricks — नया संस्करण, भाग-1 व भाग-2

ज्योतिष समुद्र — 1001 सूत्र

Horoscope Analysis · Tips & Tricks — नया संस्करण, भाग-1 व भाग-2

कुण्डली पढ़ना सीखने वाले विद्यार्थी और अभ्यास करने वाले ज्योतिषी, दोनों के लिए एक ही जगह पूरा फलित-ज्योतिष — नवग्रह और भावों की नींव से लेकर दशा, अष्टकवर्ग, गोचर, वर्ग कुण्डलियों, मुहूर्त और उपायों तक। हर नियम सूत्र-रूप में, उदाहरण के साथ।

202अध्याय~1481पृष्ठ2भागहिन्दीभाषा
₹910₹1149

✍️ लेखक: ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी — 15+ वर्ष का वैदिक ज्योतिष अनुभव, Nakshtra Tak के संस्थापक। लेखक-परिचय →

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पुस्तक में क्या है — 9 खंड

ज्योतिष सीखने के लिए यह पुस्तक क्यों

शुरुआत से सीखने वालों के लिए — अगर आप ढूँढ रहे हैं कि ज्योतिष सीखने की कौन-सी पुस्तक से शुरू करें, तो इसके पहले 30 अध्याय कुंडली-परिचय, नवग्रह, बारह राशियाँ, बारह भाव और 27 नक्षत्रों से नींव रखते हैं; उसके बाद क्रम से फलित ज्योतिष आता है। यानी घर बैठे, अपनी गति से, step by step सीखना।

कुंडली देखना सीखें — हर भाव में हर ग्रह का फल (अध्याय 52–60), बारहों भावेशों का फल (61–73), बारह लग्नों का विश्लेषण (75–86) और 194वें अध्याय में पूरी कुंडलियों का क्रमवार विश्लेषण — ताकि सिद्धांत से आगे बढ़कर जन्मपत्रिका पढ़ना आए।

पाराशरी पद्धति का आधार — विंशोत्तरी दशा व अन्तर्दशा (अध्याय 97–111), D2 से D45 तक वर्ग कुंडलियाँ (141–177), अष्टकवर्ग (120–125) जैसे बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की परंपरा के विषय विस्तार से; साथ में योगिनी दशा, लाल किताब के उपाय, अंक-ज्योतिष और प्रश्न कुंडली भी।

दशा, गोचर और कुंडली मिलान — घटनाओं का समय जानने के लिए दशा-गोचर के सूत्र, और विवाह के लिए कुंडली मिलान, मांगलिक विचार व नवांश से विवाह-विश्लेषण (अध्याय 49–50, 158–165)।

सरल हिन्दी — हर नियम सूत्र-रूप में, उदाहरण सहित, ताकि सरल भाषा में वैदिक ज्योतिष शास्त्र समझ में आए।

यह पुस्तक किसके लिए

  • ज्योतिष सीख रहे विद्यार्थी — क्रमवार, आधार से उन्नत स्तर तक
  • अभ्यास करने वाले ज्योतिषी — फलादेश के समय तुरंत देखने लायक सूत्र-संग्रह
  • कोर्स के साथ पढ़ने वाले — Nakshtra Tak Learning के पाठ्यक्रम का संदर्भ-ग्रंथ

ज्योतिष कोर्स (Nakshtra Tak Learning) →

पूरी विषय-सूची (202 अध्याय)

अध्याय 1–14 · ज्योतिष की नींव — कुण्डली, नवग्रह और भावों के विषय
  1. 1कुण्डली परिचयपृष्ठ 2
  2. 2ज्योतिष की मूलभूत बातेंपृष्ठ 5
  3. 3सूर्य ग्रह का परिचयपृष्ठ 13
  4. 4चन्द्र का परिचयपृष्ठ 21
  5. 5मंगल ग्रह का परिचयपृष्ठ 26
  6. 6बुध ग्रह का परिचयपृष्ठ 31
  7. 7बृहस्पति ग्रह का परिचयपृष्ठ 35
  8. 8शुक्र ग्रह परिचयपृष्ठ 40
  9. 9शनि ग्रह का परिचयपृष्ठ 44
  10. 10राहू ग्रह का परिचयपृष्ठ 49
  11. 11केतु ग्रह का परिचयपृष्ठ 55
  12. 12नौ ग्रहों से विचारणीय विषयपृष्ठ 59
  13. 13नौ ग्रहों से विचारणीय व्यवसायपृष्ठ 62
  14. 14सभी भावों से विचारणीय विषयपृष्ठ 68
अध्याय 15–28 · राशियाँ, रोग-विचार और 27 नक्षत्र
  1. 15राशियों का विवरणपृष्ठ 93
  2. 16ग्रहों से रोग विचारपृष्ठ 113
  3. 17भाव से विचारणीय रोगपृष्ठ 116
  4. 18राशियों से विचारणीय रोगपृष्ठ 117
  5. 19रोग विचार में नक्षत्रों की भूमिकापृष्ठ 118
  6. 20नक्षत्र व्याख्यापृष्ठ 121
  7. 21नक्षत्र और कूर्मचक्रपृष्ठ 128
  8. 22नक्षत्र और विचारणीय वस्तुपृष्ठ 130
  9. 23नक्षत्रों की संज्ञापृष्ठ 133
  10. 24नवतारा व जन्म नक्षत्रपृष्ठ 134
  11. 25नक्षत्र की प्रकृतिपृष्ठ 136
  12. 26विभिन्न नक्षत्रों में जन्म का फलादेशपृष्ठ 138
  13. 27नक्षत्र और उनसे बनने वाली राशि व नामाक्षरपृष्ठ 152
  14. 28नक्षत्र के अनुसार वृक्ष व समिधापृष्ठ 154
अध्याय 29–51 · फलित के सिद्धांत — अवस्था, दृष्टि, शुभ-पाप, गंडमूल, मांगलिक, मिलान, कालसर्प
  1. 29फलित ज्योतिष की प्राथमिक बातेंपृष्ठ 157
  2. 30काल पुरुष कुण्डलीपृष्ठ 160
  3. 31ग्रहों की अवस्थाएंपृष्ठ 163
  4. 32ग्रहों की दृष्टिपृष्ठ 165
  5. 33सूर्य ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 167
  6. 34चन्द्र दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 171
  7. 35मंगल ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 175
  8. 36बुध ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 179
  9. 37बृहस्पति ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 183
  10. 38शुक्र ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 187
  11. 39शनि ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 190
  12. 40राहू ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 194
  13. 41केतु ग्रह दृष्टि विश्लेषणपृष्ठ 196
  14. 42प्रत्येक ग्रह की दूसरे पर दृष्टि का विश्लेषणपृष्ठ 198
  15. 43ग्रहों का भ्रमण कालपृष्ठ 210
  16. 44ग्रहों का शुभत्व व पापत्वपृष्ठ 212
  17. 45भाव व भावेश विषयक महत्वपूर्ण नियमपृष्ठ 214
  18. 46गंडमूल नक्षत्रपृष्ठ 217
  19. 47नक्षत्रों के मंत्रपृष्ठ 221
  20. 48बालारिष्टपृष्ठ 226
  21. 49मांगलिक विचारपृष्ठ 228
  22. 50कुण्डली मिलान की बातेंपृष्ठ 230
  23. 51कालसर्प दोष प्रकार, प्रभाव व उपायपृष्ठ 234
अध्याय 52–74 · हर भाव में नवग्रह व बारहों भावेशों का फल
  1. 52सभी भावों में सूर्य का फलादेशपृष्ठ 239
  2. 53सभी भावों में चंद्रमा का फलादेशपृष्ठ 252
  3. 54सभी भावों में मंगल का फलादेशपृष्ठ 266
  4. 55सभी भावों में बुध का फलादेशपृष्ठ 281
  5. 56सभी भावों में बृहस्पति का फलादेशपृष्ठ 294
  6. 57सभी भावों में शुक्र का फलादेशपृष्ठ 308
  7. 58सभी भावों में शनि का फलादेशपृष्ठ 321
  8. 59सभी भावों में राहू का फलादेशपृष्ठ 336
  9. 60सभी भावों में केतु का फलादेशपृष्ठ 350
  10. 61लग्नेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 361
  11. 62द्वितीयेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 366
  12. 63तृतीयेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 370
  13. 64चतुर्थेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 373
  14. 65पंचमेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 377
  15. 66षष्ठेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 381
  16. 67सप्तमेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 384
  17. 68अष्टमेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 387
  18. 69नवमेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 390
  19. 70दशमेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 393
  20. 71एकादशेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 397
  21. 72द्वादशेश का सभी भावों में फलपृष्ठ 399
  22. 73सभी भावेश का अन्य भावेश से युति फलपृष्ठ 401
  23. 74मारक, कारक, बाधक विचारपृष्ठ 422
अध्याय 75–95 · बारह लग्न, राजयोग, युतियाँ, दोष, योग और वक्री ग्रह
  1. 75मेष लग्न विश्लेषणपृष्ठ 434
  2. 76वृषभ लग्न विश्लेषणपृष्ठ 445
  3. 77मिथुन लग्न विश्लेषणपृष्ठ 450
  4. 78कर्क लग्न विश्लेषणपृष्ठ 455
  5. 79सिंह लग्न विश्लेषणपृष्ठ 460
  6. 80कन्या लग्न विश्लेषणपृष्ठ 465
  7. 81तुला लग्न विश्लेषणपृष्ठ 470
  8. 82वृश्चिक लग्न विश्लेषणपृष्ठ 475
  9. 83धनु लग्न विश्लेषणपृष्ठ 480
  10. 84मकर लग्न विश्लेषणपृष्ठ 485
  11. 85कुंभ लग्न विश्लेषणपृष्ठ 491
  12. 86मीन लग्न विश्लेषणपृष्ठ 497
  13. 87द्वादश लग्नों में राजयोग का निर्णयपृष्ठ 502
  14. 88ग्रहों के मृत्यु भाग व चंद्रमा के शुभांशपृष्ठ 507
  15. 89गुलिक स्पष्ट व निर्माण विधिपृष्ठ 508
  16. 90मृत्युजन्य बातेंपृष्ठ 510
  17. 91ग्रह युति फलादेश व दीप्तांश का महत्वपृष्ठ 516
  18. 92तीन ग्रहों की युतियों का विशिष्ट फलादेशपृष्ठ 553
  19. 93कुण्डली में निर्मित दोषपृष्ठ 570
  20. 94जन्म कुण्डली में बनने वाले योग व राजयोगपृष्ठ 584
  21. 95वक्री ग्रह फलादेशपृष्ठ 595
अध्याय 96–125 · साढ़ेसाती, विंशोत्तरी व योगिनी दशा, अष्टकवर्ग
  1. 96शनि की साढ़ेसातीपृष्ठ 602
  2. 97दशाओं का परिचयपृष्ठ 608
  3. 98विंशोत्तरी दशा विश्लेषण सूत्रपृष्ठ 610
  4. 99तारा मिलान से दशा फलपृष्ठ 614
  5. 100सभी ग्रहों की महादशा फलपृष्ठ 617
  6. 101केतु की महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 620
  7. 102शुक्र की महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 624
  8. 103सूर्य की महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 627
  9. 104चंद्रमा महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 631
  10. 105मंगल महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 635
  11. 106राहू महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 639
  12. 107बृहस्पति महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 643
  13. 108शनि महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 646
  14. 109बुध महादशा में सभी अन्तर्दशायेंपृष्ठ 649
  15. 110जन्म नक्षत्र और दशापृष्ठ 652
  16. 111विंशोत्तरी दशा कैसे निकालेंपृष्ठ 653
  17. 112योगिनी दशा विश्लेषणपृष्ठ 657
  18. 113योगिनी दशा का फलादेश कैसे करेंपृष्ठ 665
  19. 114योगिनी दशा के गहरे फलित सिद्धांतपृष्ठ 668
  20. 115योगिनी महादशा में अन्तर्दशा फलितपृष्ठ 669
  21. 116योगिनी दशा के 25 अतिविशिष्ट सूत्रपृष्ठ 679
  22. 117योगिनी दशा का 12 भावों पर फलादेशपृष्ठ 683
  23. 118योगिनी दशा का नक्षत्र से संबंधपृष्ठ 799
  24. 119दशा लग्न सिद्धांतपृष्ठ 702
  25. 120अष्टकवर्ग फलित सागरपृष्ठ 709
  26. 121सर्वाष्टक वर्ग फलितपृष्ठ 727
  27. 122सर्वाष्टक से भविष्य पढ़नापृष्ठ 731
  28. 123अष्टकवर्ग से घटना का समय ज्ञानपृष्ठ 737
  29. 124अष्टकवर्ग से वर्ष फल का ज्ञानपृष्ठ 743
  30. 125अष्टकवर्ग से राजयोग और दारिद्र योग की पहचानपृष्ठ 749
अध्याय 126–140 · गोचर, चलित, गुलिक, ग्रह-बल और जन्म-समय शुद्धि
  1. 126गोचर से फलादेशपृष्ठ 752
  2. 127सूर्य गोचर फलादेशपृष्ठ 755
  3. 128चंद्रमा गोचर फलादेशपृष्ठ 767
  4. 129मंगल गोचर फलादेशपृष्ठ 777
  5. 130बुध गोचर फलादेशपृष्ठ 785
  6. 131बृहस्पति गोचर फलादेशपृष्ठ 793
  7. 132शुक्र गोचर फलादेशपृष्ठ 801
  8. 133शनि गोचर फलादेशपृष्ठ 812
  9. 134राहू गोचर फलादेशपृष्ठ 819
  10. 135केतु गोचर फलादेशपृष्ठ 826
  11. 136गोचर के कुछ महत्त्वपूर्ण सूत्रपृष्ठ 833
  12. 137चलित कुण्डली प्रकाशपृष्ठ 838
  13. 138गुलिक फलादेशपृष्ठ 842
  14. 139ग्रहों के बली-निर्बली का निर्णयपृष्ठ 849
  15. 140जन्म समय शुद्धीकरणपृष्ठ 852
अध्याय 141–178 · वर्ग कुण्डलियाँ — संतान, विवाह, करियर, वाहन व विशेष सूत्र
  1. 141वर्ग कुण्डलियों का फलादेशपृष्ठ 864
  2. 142वर्ग कुंडलियों के भाव का विवरणपृष्ठ 873
  3. 143होरा कुण्डली फलितपृष्ठ 887
  4. 144द्रेष्काण कुण्डली फलितपृष्ठ 892
  5. 145चतुर्थांश कुण्डली फलित (भवन निर्माण)पृष्ठ 914
  6. 146स्थान परिवर्तन व विदेश योगपृष्ठ 933
  7. 147पंचमांश कुण्डली फलादेशपृष्ठ 937
  8. 148षष्ठांश कुण्डली फलितपृष्ठ 939
  9. 149सप्तमांश कुण्डली और संतान फलितपृष्ठ 943
  10. 150संतान बाधा निर्धारण व निवारणपृष्ठ 948
  11. 151संतान संख्या, लिंग निर्धारण व समय ज्ञानपृष्ठ 952
  12. 152108 नवमांशों का विवरणपृष्ठ 954
  13. 153विभिन्न नवमांश में जन्म का फलपृष्ठ 958
  14. 154नवमांश निर्माण विधि व फलित सूत्रपृष्ठ 975
  15. 155नवमांश कुण्डली और वर्गोत्तम ग्रह फलितपृष्ठ 981
  16. 156राशि तुल्य नवमांश फलितपृष्ठ 983
  17. 157देव, नर व राक्षस नवमांश फलितपृष्ठ 984
  18. 158नवमांश कुण्डली और विवाह सन्दर्भपृष्ठ 988
  19. 159वैवाहिक सुख को बिगाड़ने वाले योगपृष्ठ 990
  20. 160विवाह प्रतिबंधक योगपृष्ठ 991
  21. 161विवाह का समय ज्ञानपृष्ठ 993
  22. 162नवमांश कुण्डली के सभी भावों का विश्लेषणपृष्ठ 996
  23. 163जन्म कुण्डली में प्रेम/प्रेम विवाह के योगपृष्ठ 1015
  24. 164विवाह की दिशा, दूरी व माध्यमपृष्ठ 1019
  25. 165दूसरा विवाहपृष्ठ 1027
  26. 166दशांश कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1029
  27. 167दशांश कुण्डली के सभी भावों का विश्लेषणपृष्ठ 1036
  28. 168भृगु बिंदु से फलादेशपृष्ठ 1049
  29. 169व्यवसाय निर्धारण विधिपृष्ठ 1055
  30. 170सरकारी/प्राइवेट नौकरी व कामकाज का विश्लेषणपृष्ठ 1062
  31. 171द्वादशांश कुण्डली फलितपृष्ठ 1066
  32. 172षोडशांश कुण्डली (वाहन सुख) विश्लेषणपृष्ठ 1068
  33. 173विंशांश कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1070
  34. 174चतुर्विंशांश कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1072
  35. 175खवेदांश कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1075
  36. 176अक्षवेदांश कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1077
  37. 177त्रिशांश कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1078
  38. 178जन्म कुण्डली के अतिविशेष सूत्रपृष्ठ 1081
अध्याय 179–202 · रत्न, पंचांग-मुहूर्त, अंक-ज्योतिष, प्रश्न, उपाय, मेदनी और विशेष लग्न
  1. 179रत्न शास्त्रपृष्ठ 1110
  2. 180ग्रहों के रत्न सलाह के लिए टिप्सपृष्ठ 1117
  3. 181पंचांग विवरणपृष्ठ 1119
  4. 182मुहूर्त विवरणपृष्ठ 1131
  5. 183गृह निर्माण मुहूर्तपृष्ठ 1138
  6. 184दुकान या व्यापार शुरू करने का मुहूर्तपृष्ठ 1140
  7. 185गृह प्रवेश मुहूर्तपृष्ठ 1141
  8. 186मुंडन संस्कार मुहूर्तपृष्ठ 1143
  9. 187बच्चे की डिलीवरी का मुहूर्तपृष्ठ 1145
  10. 188शिव पूजा में शिव वास की तिथियाँपृष्ठ 1146
  11. 189अंक ज्योतिष फलितपृष्ठ 1148
  12. 190अंक और वैदिक ज्योतिष से सही नाम चयनपृष्ठ 1168
  13. 191मोबाइल नंबर और ज्योतिषपृष्ठ 1175
  14. 192जुड़वा बच्चे की कुण्डली कैसे देखेंपृष्ठ 1178
  15. 193प्रश्न कुण्डली फलादेशपृष्ठ 1180
  16. 194कुण्डली विश्लेषणपृष्ठ 1188
  17. 195ज्योतिष प्रश्नोत्तरीपृष्ठ 1242
  18. 196वृहद् उपाय व्याख्यापृष्ठ 1295
  19. 197ग्रहों की वस्तुओं के दान से उपायपृष्ठ 1327
  20. 198रुद्राक्ष से उपायपृष्ठ 1361
  21. 199लाल किताब के उपायपृष्ठ 1371
  22. 200पुरोहित प्रशिक्षणपृष्ठ 1375
  23. 201मेदनी ज्योतिष से देश-दुनिया की भविष्यवाणीपृष्ठ 1389
  24. 202ज्योतिष के कुछ रोचक फलादेश विषयपृष्ठ 1405
  25. अध्याय 202 के 22 उप-विषय
    1. (i)कारकांश कुण्डलीपृष्ठ 1405
    2. (ii)स्वांश कुण्डलीपृष्ठ 1409
    3. (iii)घटी लग्नपृष्ठ 1412
    4. (iv)उपपद लग्नपृष्ठ 1415
    5. (v)आरूढ़ लग्नपृष्ठ 1420
    6. (vi)इंदु लग्नपृष्ठ 1429
    7. (vii)योगी–अवयोगी बिंदुपृष्ठ 1431
    8. (viii)दग्ध राशिपृष्ठ 1436
    9. (ix)सुदर्शन चक्र कुण्डलीपृष्ठ 1439
    10. (x)सर्वतोभद्र चक्रपृष्ठ 1443
    11. (xi)षड्बलपृष्ठ 1449
    12. (xii)आत्मकारक फलादेशपृष्ठ 1453
    13. (xiii)अमात्यकारक फलादेशपृष्ठ 1456
    14. (xiv)भ्रातृकारक फलादेशपृष्ठ 1460
    15. (xv)मातृकारक फलादेशपृष्ठ 1463
    16. (xvi)पुत्रकारक फलादेशपृष्ठ 1466
    17. (xvii)ज्ञातिकारक फलादेशपृष्ठ 1469
    18. (xviii)दाराकारक फलादेशपृष्ठ 1473
    19. (xix)त्रिपाद लग्न फलादेशपृष्ठ 1477
    20. (xx)श्रीलग्न फलादेशपृष्ठ 1478
    21. (xxi)सूर्य की स्थिति से जन्म माह व समय का ज्ञानपृष्ठ 1480
    22. (xxii)बीज भाव फलादेशपृष्ठ 1481

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ज्योतिष सीखने के लिए शुरुआत किस पुस्तक से करें?

शुरुआत ऐसी पुस्तक से करें जो आधार से क्रमवार चले। «ज्योतिष समुद्र» के पहले 30 अध्याय कुंडली, ग्रह, राशि, भाव और नक्षत्र समझाते हैं, फिर फलित, दशा, गोचर और वर्ग कुंडलियाँ आती हैं — इसलिए नए पाठक भी इससे शुरू कर सकते हैं।

क्या यह पाराशरी ज्योतिष की पुस्तक है?

पुस्तक का मुख्य आधार पाराशरी पद्धति है — विंशोत्तरी दशा, षोडश वर्ग कुंडलियाँ, अष्टकवर्ग और भाव-भावेश के नियम। साथ में योगिनी दशा, लाल किताब के उपाय, अंक-ज्योतिष, प्रश्न कुंडली और मेदनी ज्योतिष पर भी अध्याय हैं।

घर बैठे ज्योतिष कैसे सीखें?

किसी क्रमवार पुस्तक को अध्याय-दर-अध्याय पढ़ें और साथ-साथ अपनी व परिवार की कुंडली पर अभ्यास करें। निःशुल्क कुंडली Nakshtra Tak पर बन जाती है; मार्गदर्शन के साथ सीखना हो तो Nakshtra Tak Learning का online ज्योतिष कोर्स भी है।

क्या इसमें कुंडली मिलान और दशा का विषय है?

हाँ — कुंडली मिलान व मांगलिक विचार (अध्याय 49–50), विवाह से जुड़ा नवांश-विश्लेषण (158–165), विंशोत्तरी व योगिनी दशा (97–119) और दशा-गोचर से घटना का समय।

नए संस्करण में क्या बदला है?

पिछले संस्करण में 116 अध्याय थे; नया संस्करण दो भागों में 202 अध्याय और लगभग 1481 पृष्ठ का है — योगिनी दशा, अष्टकवर्ग, सभी वर्ग कुण्डलियाँ (D2 से D45), विवाह-संतान-करियर विश्लेषण, मेदनी ज्योतिष और चर/विशेष लग्नों जैसे नए खंड जुड़े हैं।

क्या यह पुस्तक शुरुआती पाठक के लिए ठीक है?

हाँ। पहले 30 अध्याय कुण्डली, ग्रह, राशि, भाव और नक्षत्र की नींव रखते हैं; उसके बाद क्रम से फलित, दशा, गोचर और वर्ग कुण्डलियाँ आती हैं।

पुस्तक किस भाषा में है?

पुस्तक हिन्दी में है।

ऑर्डर कैसे करें?

इस पन्ने के «पुस्तक ऑर्डर करें» बटन से store-पन्ना खुलेगा — वहाँ cart में डालकर online भुगतान करें; भारत में आपके पते पर डिलीवरी।

«ज्योतिष समुंद्र» और «ज्योतिष समुद्र» — क्या एक ही पुस्तक है?

हाँ। पुस्तक का सही नाम «ज्योतिष समुद्र» है; कई लोग इसे «ज्योतिष समुंद्र» या «Jyotish Samundra» भी लिखते हैं — यह वही पुस्तक है, और यह इसका नया संस्करण है।

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