
राशि ग्रह का बाहरी आवरण है, नक्षत्र उसके भीतर काम करने वाली प्रेरणा। यह पुस्तक बताती है कि एक ही राशि में बैठा ग्रह अलग-अलग नक्षत्रों में अलग फल क्यों देता है — अश्विनी से रेवती तक सभी 27 नक्षत्रों में नवग्रहों का फल, नक्षत्र-स्वामी से दशाफल, और मुहूर्त व प्रश्न कुंडली में नक्षत्र का प्रयोग।
✍️ लेखक: ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी — 15+ वर्ष का वैदिक ज्योतिष अनुभव, Nakshtra Tak के संस्थापक। लेखक-परिचय →
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नक्षत्र की नींव — नक्षत्र का वास्तविक अर्थ, चरण और नवांश, नक्षत्रों की कार्य-प्रणाली, विचारणीय विषय, शुभ-अशुभ प्रकृति, कारक-मारक-बाधक ग्रहों का नक्षत्र-सिद्धांत और गंडमूल (अध्याय 1–6)।
हर नक्षत्र में हर ग्रह — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु का सभी 27 नक्षत्रों में अलग-अलग फलादेश, साथ में ग्रह के नक्षत्र-स्वामी से फल और उसकी दशा में नक्षत्र का फल (अध्याय 7–15)।
दशाफल और सूत्र — नक्षत्र-स्वामी का भाव-समूह फलादेश, भावगत बल से दशाफल, 27 नक्षत्रों के स्वामी व अधिदेवता, उग्र-तीक्ष्ण नक्षत्रों में पीड़ित ग्रह और नक्षत्र से फलादेश के 30 स्वर्णिम सूत्र (अध्याय 16–20)।
मुहूर्त, प्रश्न और व्यवसाय — मुहूर्त में नक्षत्र का प्रयोग, प्रश्न कुंडली में नक्षत्र (विवाह, नौकरी, खोई वस्तु, रोग, मुक़दमा, विदेश-यात्रा और संतान के प्रश्न) और नक्षत्रों से कार्य एवं व्यवसाय का निर्धारण (अध्याय 21–23)।
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23 अध्याय और 289 पृष्ठ: नक्षत्रों का परिचय व कार्य-प्रणाली, शुभ-अशुभ प्रकृति, गंडमूल, सभी 27 नक्षत्रों में नवग्रहों का फलादेश, नक्षत्र-स्वामी से दशाफल, अधिदेवता, 30 स्वर्णिम सूत्र, मुहूर्त व प्रश्न कुंडली में नक्षत्र और नक्षत्र से व्यवसाय।
राशिचक्र के 360 अंश 12 राशियों में बँटे हैं और 27 नक्षत्रों में भी — हर नक्षत्र 13 अंश 20 कला का है। राशि ग्रह के व्यवहार का बाहरी ढाँचा देती है, नक्षत्र यह बताता है कि ग्रह किस उद्देश्य और प्रेरणा से काम करेगा। इसीलिए एक ही राशि में जन्मे दो लोगों के फल अलग हो सकते हैं।
पहले चन्द्रमा का नक्षत्र (जन्म-नक्षत्र) और उसका स्वामी देखा जाता है — विंशोत्तरी दशा इसी से शुरू होती है। फिर हर ग्रह किस नक्षत्र व चरण में है और उस नक्षत्र का स्वामी कहाँ बैठा है, यह क्रम पुस्तक में अध्याय-दर-अध्याय है। अपना जन्म-नक्षत्र Nakshtra Tak की निःशुल्क कुंडली में देख सकते हैं।
हाँ — अध्याय 6 पूरा गंडमूल नक्षत्र सिद्धांत पर है।
पुस्तक हिन्दी में है।
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