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🔷 KP ज्योतिष — कृष्णमूर्ति पद्धति

KP पद्धति क्या है?

कृष्णमूर्ति पद्धति (Krishnamurti Paddhati) प्रो. के.एस. कृष्णमूर्ति की दी हुई वह आधुनिक विधि है जो पारम्परिक फलित की बहु-अर्थी उलझनों को काटकर एक-उत्तर शैली पर पहुँचती है। इसका मूल सूत्र: फल राशि से नहीं, नक्षत्र-स्वामी से कहा जाता है और उसकी अंतिम पुष्टि उप-स्वामी (sub-lord) करता है। पूरा राशिचक्र 249 उप-खंडों में बँटता है — इसीलिए KP को 249-पद्धति भी कहते हैं।

दूसरा बड़ा भेद भाव-गणना का है: KP समान-भाव नहीं, Placidus पद्धति के cusps (भाव-आरंभ बिंदु) लेती है और अपना अलग KP-अयनांश प्रयोग करती है। किसी भाव का cusp जिस उप-स्वामी में पड़े, वही उस भाव के «हाँ/नहीं» का निर्णायक माना जाता है — विवाह होगा या नहीं, नौकरी मिलेगी या नहीं, जैसे प्रश्नों में यही KP की धार है।

कारक-निर्धारण (Significators) व Ruling Planets

किसी घटना के लिए कौन-कौन से ग्रह «कारक» हैं, KP इसे चार श्रेणियों (A-B-C-D) में क्रमबद्ध करती है — भाव में बैठे ग्रह के नक्षत्र-वासी सबसे बलवान, फिर भाव-स्थित ग्रह, फिर भावेश के नक्षत्र-वासी, फिर भावेश। घटना-समय साधने में इन्हीं कारकों की दशा-अंतर्दशा और गोचर देखा जाता है।

Ruling Planets (क्षण के शासक ग्रह — दिन-स्वामी, चंद्र का राशि/नक्षत्र-स्वामी, लग्न का राशि/नक्षत्र-स्वामी) KP का अनोखा औज़ार हैं: प्रश्न पूछे जाने के क्षण से उत्तर की दिशा और घटना-काल के सूक्ष्म संकेत मिलते हैं। इन्हीं से 1-249 की प्रश्न-कुंडली (Horary) भी बनती है।

Nakshtra Tak में KP — क्या-क्या मिलता है

हमारी कुंडली-उपकरण में KP-खंड पूरा जीवित है: KP-अयनांश पर ग्रह-स्पष्ट (राशि/नक्षत्र/उप/उप-उप स्वामी विकला-स्तर तक), बारहों cusps की तालिका, भाव-वार significators (A-B-C-D), ruling planets, cusp-अंतर्संबंध (interlinks) और विंशोत्तरी के पाँचों स्तर (महा→अंतर→प्रत्यंतर→सूक्ष्म→प्राण)। राहु-केतु के प्रतिनिधि-नियम (node agency) भी शास्त्र-सम्मत ढंग से लगते हैं।

यही गणना हमारे desktop-सॉफ़्टवेयर और विस्तृत PDF-रिपोर्ट में भी है — तीनों जगह एक ही इंजन, इसलिए उत्तर एक। गणना-पद्धति खुली किताब है: यहाँ पढ़ें

❓ सामान्य प्रश्न

KP और पारम्परिक (पाराशरी) में मुख्य अंतर क्या है?
पाराशरी फल राशि-भाव-दृष्टि से कहती है; KP नक्षत्र-स्वामी और उप-स्वामी से — साथ में Placidus-cusps व अलग अयनांश। दोनों पूरक हैं: हम दोनों दिखाते हैं ताकि निर्णय दो कसौटियों पर परखा जा सके।

249 उप-खंड कैसे बनते हैं?
हर नक्षत्र (13°20′) को विंशोत्तरी-अनुपात में 9 उप-भागों में बाँटा जाता है — 27 × 9 = 243, और गणित की सीमाओं पर व्यवहार में 249 प्रभावी खंड गिने जाते हैं; हर खंड का अपना उप-स्वामी है।

क्या KP से घटना की तारीख़ निकलती है?
KP समय-खिड़कियाँ देती है — कारक ग्रहों की दशा-अंतर्दशा जब ruling planets से मिलती है, वही काल प्रबल माना जाता है। दिन-स्तर का दावा कोई ईमानदार पद्धति नहीं करती।

KP-कुंडली कहाँ देखें?
कुंडली-उपकरण में जन्म-विवरण भरिए — KP-खंड में cusps, उप-स्वामी, significators व ruling planets निःशुल्क मिलेंगे।

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