कुवैत में अक्षय तृतीया 2026: रविवार, 19 अप्रैल — शहर-वार पूजा-समय
कुवैत में अक्षय तृतीया 2026: रविवार, 19 अप्रैल 2026 (कुवैत सिटी)
पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:18 AM – 10:30 AM AST
भारत के दिन ही। 2026 में अक्षय तृतीया भारत और कुवैत सिटी में रविवार, 19 अप्रैल 2026 को है।
अक्षय तृतीया 2026 — कुवैत सिटी
| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|
कुवैत सिटी Arabia Standard Time (AST) | रविवार, 19 अप्रैल 2026 | 5:18 AM – 10:30 AM AST | 19 अप्रैल, 8:20 AM → 20 अप्रैल, 4:58 AM AST |
समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
अक्षय तृतीया की तारीख कैसे तय होती है
वैशाख शुक्ल तृतीया सूर्योदय पर; वह सूर्योदय के बाद 3 मुहूर्त से कम रहे तो पिछला दिन (जब मध्याह्न में तृतीया हो)।
महत्व
पुराणों में इस दिन की घटनाएँ: त्रेता-युग का आरंभ, विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म (परशुराम जयंती — प्रदोष में), गंगा का धरती पर अवतरण (गंगा-सप्तमी से जुड़ा), महाभारत-लेखन का आरंभ (व्यास-गणेश), द्रौपदी को अक्षय-पात्र, सुदामा का कृष्ण से मिलना, कुबेर को धन-अधिकार — इसलिए धन-दान-अन्न सब अक्षय।
अबूझ मुहूर्त — विवाह, सगाई, गृह-प्रवेश, भूमि-वाहन-सोना ख़रीद, व्यापार-आरंभ बिना मुहूर्त-विचार शुभ; पर रोहिणी नक्षत्र व बुध/शुक्रवार पड़े तो और भी। पूरा दिन शुभ, अभिजित श्रेष्ठ; ख़रीद दिन में, विवाह लग्न से।
बद्रीनाथ धाम के कपाट इसी के आस-पास खुलते हैं और वृंदावन में बाँके-बिहारी के चरण-दर्शन साल में सिर्फ़ इसी दिन; जगन्नाथ-रथयात्रा के रथों का निर्माण पुरी में इसी दिन शुरू; बंगाल में «हालखाता»।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- ब्रह्म-मुहूर्त/सूर्योदय (ऊपर समय) में स्नान (नदी/गंगाजल), पीले वस्त्र; संकल्प — «मैं अक्षय तृतीया का व्रत-दान परिवार की अक्षय समृद्धि हेतु करती हूँ।» व्रत — फलाहार/एक समय (कई घर सिर्फ़ पूजा-दान)।
- विष्णु-लक्ष्मी पूजा: पीला कपड़ा, लक्ष्मी-नारायण का चित्र, कलश; पंचामृत, तुलसी, पीले फूल, चंदन; जौ/गेहूँ के सत्तू, खीरा, चने की दाल, मिश्री का भोग; «ॐ नमो भगवते वासुदेवाय» / विष्णु-सहस्रनाम; लक्ष्मी-मंत्र «ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः»; कुबेर-स्मरण।
- दान (सूर्योदय से दोपहर, अभिजित तक श्रेष्ठ): जल-भरा मिट्टी का घड़ा (सुराही), पंखा, छाता, चप्पल, सत्तू, खरबूज़ा-ककड़ी, चावल-दाल-गुड़, गौ-दान/गाय को चारा — गर्मी में ठंडक की चीज़ें; ब्राह्मण/ज़रूरतमंद/प्याऊ; जितना संभव, «अक्षय» भाव से।
- ख़रीद (दिन में, अभिजित उत्तम): सोना-चाँदी (सिक्का/गहना — लक्ष्मी का प्रतीक; एक ग्राम भी), नया बर्तन, भूमि-वाहन का सौदा, बही-खाता; ख़रीदी वस्तु पहले पूजा-स्थान पर रखकर रोली-अक्षत।
- स्त्रियाँ (राजस्थान-मालवा «आखा तीज»): कन्याएँ गौरी-व्रत, आटे के लड्डू-सत्तू, घड़ा-पूजा, मिट्टी की चिड़िया-चुग्गा; सुहागिनें सत्तू-घड़े का बाया।
- शाम (प्रदोष): परशुराम जयंती — विष्णु-अवतार परशुराम का स्मरण, दीप; तुलसी-चौरे पर दीप; अगले दिन गंगा-सप्तमी/वैशाख-स्नान जारी।
- नया कार्य: विवाह/सगाई/गृह-प्रवेश/दुकान — पूरे दिन; पितरों को तर्पण-जल (वैशाख में पितृ-तृप्ति) — इस दिन पितरों के नाम का दान अक्षय।
- व्रत खोलना: पूजा-दान के बाद; रात में लक्ष्मी-भजन।
प्रश्नोत्तर
क्या अक्षय तृतीया 2026 कुवैत और भारत में एक ही दिन है?
हाँ — रविवार, 19 अप्रैल 2026।
कुवैत सिटी में अक्षय तृतीया 2026 का पूजा-समय?
पूर्वाह्न पूजा-समय: 5:18 AM से 10:30 AM (AST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (कुवैत सिटी के लिए Arabia Standard Time (AST))।
अक्षय तृतीया पर क्या दान करें?
गर्मी की चीज़ें — जल-भरा घड़ा/सुराही, पंखा, छाता, चप्पल, सत्तू, खरबूज़ा-ककड़ी, अन्न-गुड़, वस्त्र; प्याऊ लगाना; गौ-दान/गौशाला; पितरों के नाम से — जो दिया वह अक्षय।
परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया एक ही दिन?
हाँ — परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के प्रदोष में; इसलिए जयंती उसी दिन (तृतीया प्रदोष में जिस दिन हो — कभी अगला दिन); शाम को स्मरण।
आखा तीज क्या है?
राजस्थान-मालवा में अक्षय तृतीया का लोक-नाम — सामूहिक विवाह, कन्याओं का गौरी-व्रत, सत्तू-घड़ा, मिट्टी की चिड़िया; «आखा» = अक्षय।
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