हर तिथि के साथ वह सटीक समय है जब शुभ नक्षत्र, तिथि और पंचांग के बाक़ी अंग साथ हों — पोर्ट लुई के स्थानीय समय (MUT, DST सहित) में, पोर्ट लुई के अपने सूर्योदय से, प्रकाशित पंचांगों से मिलाए शास्त्रीय नियमों पर। गुरु-शुक्र अस्त, अधिक मास आदि वर्जित काल पहले ही हटा दिए गए हैं।
जनवरी 0फ़रवरी 5मार्च 5अप्रैल 4मई 3जून 3जुलाई 3अगस्त 0सितंबर 0अक्टूबर 0नवंबर 0दिसंबर 0
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 11 फ़रवरी बुधवार | 09:22 AM – 06:00 AM, 12 फ़र | ज्येष्ठा | दशमी | वृश्चिक |
| 12 फ़रवरी गुरुवार | 06:00 AM – 12:12 PM | ज्येष्ठा | दशमी, एकादशी | वृश्चिक |
| 18 फ़रवरी बुधवार | 03:28 PM – 07:46 PM | शतभिषा | द्वितीया | कुंभ |
| 26 फ़रवरी गुरुवार | 06:06 AM – 10:41 AM | मृगशिरा | दशमी | मिथुन |
| 27 फ़रवरी शुक्रवार | 09:18 AM – 09:03 PM | पुनर्वसु | एकादशी | मिथुन |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 5 मार्च गुरुवार | 06:47 AM – 06:09 AM, 6 मार्च | हस्त | द्वितीया, तृतीया | कन्या |
| 6 मार्च शुक्रवार | 06:09 AM – 04:23 PM | हस्त, चित्रा | तृतीया | कन्या |
| 16 मार्च सोमवार | 08:11 AM – 06:13 AM, 17 मार्च | धनिष्ठा, शतभिषा | त्रयोदशी | मकर → कुंभ (04:44 PM) |
| 25 मार्च बुधवार | 06:15 AM – 12:20 PM | मृगशिरा | सप्तमी | मिथुन |
| 27 मार्च शुक्रवार | 08:37 AM – 06:16 AM, 28 मार्च | पुनर्वसु, पुष्य | दशमी | कर्क |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 3 अप्रैल शुक्रवार | 07:12 AM – 06:18 AM, 4 अप्रैल | चित्रा, स्वाती | द्वितीया | तुला |
| 13 अप्रैल सोमवार | 06:20 AM – 11:39 PM | धनिष्ठा, शतभिषा | एकादशी | कुंभ |
| 23 अप्रैल गुरुवार | 06:23 AM – 07:19 PM | पुनर्वसु | सप्तमी | मिथुन → कर्क (01:43 PM) |
| 29 अप्रैल बुधवार | 06:25 AM – 06:22 PM | हस्त | त्रयोदशी | कन्या |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 4 मई सोमवार | 08:27 AM – 03:54 AM, 5 मई | ज्येष्ठा | तृतीया | वृश्चिक |
| 11 मई सोमवार | 01:55 PM – 11:58 PM | शतभिषा | दशमी | कुंभ |
| 15 मई शुक्रवार | 06:31 AM – 07:01 AM | अश्विनी | त्रयोदशी | मेष |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 17 जून बुधवार | 06:44 AM – 08:09 PM | पुनर्वसु, पुष्य | तृतीया | कर्क |
| 24 जून बुधवार | 06:45 AM – 06:45 AM, 25 जून | चित्रा, स्वाती | दशमी, एकादशी | तुला |
| 25 जून गुरुवार | 06:45 AM – 02:59 PM | स्वाती | एकादशी | तुला |
| तारीख़ | शुभ समय | नक्षत्र | तिथि | चंद्र राशि |
|---|---|---|---|---|
| 2 जुलाई गुरुवार | 07:57 AM – 06:46 AM, 3 जुल | श्रवण | द्वितीया, तृतीया | मकर |
| 3 जुलाई शुक्रवार | 06:46 AM – 09:50 AM | श्रवण | तृतीया | मकर |
| 9 जुलाई गुरुवार | 09:08 AM – 01:26 PM | अश्विनी | दशमी | मेष |
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
इस माह कोई शुभ दिन नहीं।
मुंडन (चूड़ाकरण) में जन्म के बाल उतारकर शिशु को गर्भ-संस्कारों से मुक्त किया जाता है — कोमल शिशु का कर्म है, इसलिए दिन की शुद्धि के साथ मौसम और शिशु का स्वास्थ्य भी देखा जाता है।
परम्परा में विषम वर्ष — पहले, तीसरे, पाँचवें या सातवें वर्ष में मुंडन श्रेष्ठ। उत्तरायण-काल व माघ से ज्येष्ठ तक के मास अनुकूल; चातुर्मास प्रायः टाला जाता है।
मुंडन-नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा व रेवती। वारों में सोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार शुभ; मंगल-शनि टालें।
जन्म-मास में और माता को पाँचवाँ मास (गर्भ) चल रहा हो तो कई परम्पराएँ मुंडन टालती हैं; भद्रा, अमावस्या, रिक्ता तिथियाँ व राहुकाल सदा वर्जित। तीर्थ (जैसे त्रिवेणी, विंध्यवासिनी) में कुल-परम्परा से हो तो वहीं की विधि मान्य।
मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय की तिथि-नक्षत्र और उस दिन के चौघड़िया पर टिका है, जो पोर्ट लुई के अपने दिन के भाग हैं। पोर्ट लुई का सूर्योदय भारत से घंटों बाद होता है, बीच में तिथि बदल सकती है — इसीलिए तारीख़ भारतीय पंचांग से एक दिन अलग हो सकती है।
पोर्ट लुई का स्थानीय समय (MUT)।
नहीं — ये पोर्ट लुई के पंचांग-शुद्ध दिन हैं। अंतिम तिथि संबंधित व्यक्तियों की कुंडली (चंद्रबल, ताराबल, चालू दशा) मिलाकर ही पक्की करें — मुहूर्त-उपकरण में जन्म-विवरण दें या ज्योतिषी से पूछें।
विषम वर्ष लगते ही (जैसे तीसरा वर्ष शुरू होने पर) शुभ नक्षत्र-दिन में करें — ठीक जन्म-तिथि का आग्रह नहीं, शुद्ध मुहूर्त का है।
कई कुलों में हाँ (चूड़ाकरण सबका संस्कार है), कई में नहीं — यह कुल-परम्परा का विषय है, शास्त्र दोनों को मान देता है।
परम्परा में बाल जल-प्रवाह या तीर्थ में अर्पित किए जाते हैं — अपने पुरोहित की बताई विधि मानें।