| शहर | तारीख | पूर्वाह्न पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| एम्स्टर्डम CET/CEST | सोमवार, 17 अगस्त 2026 | 6:27 AM – 12:17 PM CEST | 16 अगस्त, 1:23 PM → 17 अगस्त, 1:31 PM CEST |
| द हेग CET/CEST | सोमवार, 17 अगस्त 2026 | 6:30 AM – 12:19 PM CEST | 16 अगस्त, 1:23 PM → 17 अगस्त, 1:31 PM CEST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
श्रावण शुक्ल पंचमी सूर्योदय पर; वह सूर्योदय के बाद 3 मुहूर्त से कम रहे तो पिछला दिन (जब मध्याह्न में पंचमी हो)।
नाग भारतीय संस्कृति में जल-भूमि-कृषि के रक्षक, शिव के गले का हार, विष्णु की शय्या, गणेश का जनेऊ — भय के साथ पूज्य; सावन में साँप ज़मीन से निकलते हैं, इसलिए दूध-पूजा से «बैर न करें» का भाव — व्यवहार में साँप को मारना नहीं, सम्मान से दूर रहना; दूध पिलाना पशु-हित में नहीं — प्रतीक-रूप में मिट्टी/चित्र के नाग को अर्पित करें।
स्कंद/गरुड़-पुराण: पंचमी को नाग-पूजन से सात पीढ़ियों तक सर्प-भय नहीं; जन्म-कुंडली के काल-सर्प-दोष व राहु-केतु की शांति का दिन — शिव-मंदिर में चाँदी/तांबे का नाग-जोड़ा अर्पण, रुद्राभिषेक; नाग-देवता के मंत्र «ॐ नमः शिवाय» व «सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे…»।
गुजरात-राजस्थान के कुछ भागों में नाग पंचमी कृष्ण पंचमी को होती है — गुजरात में अमांत श्रावण कृष्ण (वद) पंचमी (पूर्णिमांत गणना में भाद्रपद कृष्ण पंचमी, रक्षाबंधन के बाद), बाक़ी भारत में शुक्ल पंचमी; कर्नाटक-महाराष्ट्र-दक्षिण भी शुक्ल पंचमी; बंगाल में मनसा-देवी (नाग-माता) की पूजा पूरे श्रावण, खासकर संक्रांति पर।
हाँ — सोमवार, 17 अगस्त 2026।
पूर्वाह्न पूजा-समय: 6:27 AM से 12:17 PM (CEST)। अन्य शहर ऊपर सारणी में।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (एम्स्टर्डम के लिए CET/CEST)।
नहीं — साँप दूध नहीं पचाते, सपेरों के साँप दूध से मरते हैं, और यह वन्यजीव-अधिनियम में अवैध है। शास्त्र में «नाग-देवता» को दूध अर्पण — मिट्टी/चित्र/चाँदी के नाग या शिवलिंग के नाग पर करें; जीवित साँप को दूर से सम्मान।
लोक-मान्यता — तवा-लोहा नाग के फन का प्रतीक, आग पर लोहा = नाग को कष्ट; इसलिए भाप/उबले या कढ़ाई के व्यंजन (दाल-बाटी, पूड़ी, दिंडे, खीर); कई घर पूड़ी-पराठा भी तवे के बिना, कुछ सिर्फ़ रोटी टालते हैं — अपने घर की रीत।
नाग पंचमी काल-सर्प/राहु-केतु-शांति का श्रेष्ठ दिन — शिव-मंदिर में चाँदी/तांबे का नाग-जोड़ा शिवलिंग पर अर्पण, रुद्राभिषेक, «ॐ नमः शिवाय»/महामृत्युंजय जप, नाग-स्तोत्र; त्र्यंबकेश्वर-उज्जैन में विशेष पूजा; कुंडली में दोष है या नहीं — पहले जाँच लें (दोष-रिपोर्ट/पंडित)।
कर्नाटक की «नागर पंचमी» में बहन भाई की पीठ/नाभि पर दूध-हल्दी की धार डालती है — नाग-देवता से भाई की रक्षा और उसकी संतान की कामना; भाई बहन को उपहार देता है — भाई-बहन का पर्व, रक्षाबंधन से पहले।