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🪔 व्रत-त्योहार

🐍 नाग पंचमी 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

श्रावण शुक्ल पंचमी — नाग-देवता को दूध-लावा, दीवार पर गोबर/गेरू से नाग-चित्र, आज तवा-चूल्हे पर लोहा नहीं, भूमि-खुदाई नहीं; भाई-कुल की रक्षा व सर्प-भय से मुक्ति का व्रत।

नाग पंचमी 2027 की तिथि
शुक्रवार, 6 अगस्त 2027
श्रावण · शुक्ल पक्ष · पंचमी (विक्रम संवत 2084)
🌅 सूर्योदय5:45 AM
⭐ अभिजित मुहूर्त12:03 PM – 12:51 PM
📿 तिथि-कालपंचमी 6 अगस्त, 2:27 AM → 7 अगस्त, 12:23 AM
🪔 प्रदोष काल7:09 PM – 9:33 PM
⛔ राहुकाल (टालें)10:46 AM – 12:27 PM
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है — हरियाली तीज के दो दिन बाद, सावन की बरसात में जब साँप बिलों से निकलते हैं। इस दिन नाग-देवताओं (शेष, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख, कुलिक — अष्टनाग) की पूजा होती है — घर के द्वार/दीवार पर गोबर-गेरू या हल्दी से नाग बनाकर दूध, लावा (खील), दूब, फूल चढ़ाते हैं।

स्त्रियाँ भाई व कुल की रक्षा, सर्प-भय से मुक्ति और काल-सर्प-दोष की शांति के लिए व्रत रखती हैं; आज तवा-लोहे की कड़ाही पर रोटी नहीं सेंकते, ज़मीन नहीं खोदते, सुई-कैंची नहीं चलाते (नाग को चोट न लगे — लोक-नियम)। महाराष्ट्र में बत्तीस शिराळा का उत्सव, बंगाल-बिहार में मनसा-पूजा, गुजरात में श्रावण कृष्ण पंचमी (अलग दिन — नीचे)। नीचे इस साल की तिथि, विधि, सामग्री, कथा, पकवान और इलाक़ों की रीत।

महत्व — यह व्रत क्यों

नाग भारतीय संस्कृति में जल-भूमि-कृषि के रक्षक, शिव के गले का हार, विष्णु की शय्या, गणेश का जनेऊ — भय के साथ पूज्य; सावन में साँप ज़मीन से निकलते हैं, इसलिए दूध-पूजा से «बैर न करें» का भाव — व्यवहार में साँप को मारना नहीं, सम्मान से दूर रहना; दूध पिलाना पशु-हित में नहीं — प्रतीक-रूप में मिट्टी/चित्र के नाग को अर्पित करें।

स्कंद/गरुड़-पुराण: पंचमी को नाग-पूजन से सात पीढ़ियों तक सर्प-भय नहीं; जन्म-कुंडली के काल-सर्प-दोष व राहु-केतु की शांति का दिन — शिव-मंदिर में चाँदी/तांबे का नाग-जोड़ा अर्पण, रुद्राभिषेक; नाग-देवता के मंत्र «ॐ नमः शिवाय» व «सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे…»।

गुजरात-राजस्थान के कुछ भागों में नाग पंचमी श्रावण कृष्ण पंचमी (पूर्णिमांत गणना — अमांत श्रावण से पहले) को होती है, बाक़ी भारत में शुक्ल पंचमी; कर्नाटक-महाराष्ट्र-दक्षिण भी शुक्ल पंचमी; बंगाल में मनसा-देवी (नाग-माता) की पूजा पूरे श्रावण, खासकर संक्रांति पर।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — दीवार पर नाग-चित्र, दूध-लावा, नाग-देवता की कथा, लोहा-वर्जन।

  1. सुबह स्नान; रसोई/द्वार की दीवार पर गोबर-गेरू या हल्दी-चंदन से नाग (अष्टनाग/पाँच फन) का चित्र; या मिट्टी/चाँदी का नाग; कई घर शिव-मंदिर के नाग-प्रतिमा पर।
  2. व्रत-संकल्प (स्त्रियाँ) — «भाई-कुल की रक्षा, सर्प-भय-मुक्ति हेतु»; उपवास एक समय (फलाहार/बिना नमक), शाम को भोजन (तवा-रोटी नहीं — भाप/उबला — नीचे)।
  3. पूजा: नाग-चित्र को दूध, लावा (धान की खील), दूब, कच्चा दूध-जल, हल्दी-कुमकुम, फूल (कनेर-चमेली), भीगे चने/मूँग, गेहूँ-जौ; दीप-धूप; नाग-स्तुति «सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले» व «ॐ नमः शिवाय» 108; कथा (नीचे)।
  4. शिव-पूजा: शिवलिंग पर जल-दूध-बेलपत्र; काल-सर्प-दोष वाले चाँदी/तांबे का नाग-जोड़ा शिवलिंग पर अर्पित करें, «ॐ नागेन्द्रहाराय नमः»; रुद्राभिषेक (हो सके तो)।
  5. भाई की रक्षा: बहन भाई की पीठ/कान पर दूध-हल्दी की टीका (कुछ इलाक़े), भाई को लावा-मिठाई; कुल-देवता को नाग-पूजा का प्रसाद।
  6. लोक-नियम: आज ज़मीन नहीं खोदना, हल नहीं चलाना, तवे-लोहे की कड़ाही पर नहीं पकाना, सुई-कैंची-चाकू नहीं (हो सके तो), साँप को मारना-सताना नहीं; साँप दिखे तो सपेरे/वन-विभाग को — दूध नहीं पिलाना (जीव-हित)।
  7. शाम: भोजन — दाल-बाटी/खीर-पूड़ी (कढ़ाई-तेल की पूड़ी चलती, तवा नहीं — घर-रीत), भीगे चने-गुड़; नाग-देवता के आगे दीप; कहीं रात-जागरण, कहीं झूला-गीत (सावन)।
  8. अगले दिन: दीवार का नाग-चित्र मिटाना नहीं — भाद्रपद तक रहने दें (कई घर) या श्रावण पूर्णिमा पर धोकर जल में।

पूजा-सामग्री की सूची

गोबर-गेरू/हल्दी का नाग, दूध-लावा-दूब, चाँदी का नाग-जोड़ा — नाग पंचमी की सूची।

  • नाग-चित्र के लिए गोबर, गेरू, हल्दी, चंदन; या मिट्टी/चाँदी/तांबे का नाग (काल-सर्प के लिए जोड़ा)
  • कच्चा दूध, जल, लावा (खील), दूब, भीगे चने-मूँग, गेहूँ-जौ, गुड़
  • हल्दी, कुमकुम, रोली, अक्षत, मौली, फूल (कनेर-चमेली-कमल), बेलपत्र
  • दीपक, घी, धूप, कपूर, नैवेद्य (खीर-पूड़ी-मालपुआ-लड्डू)
  • शिवलिंग-अभिषेक: जल-दूध-बेलपत्र-भस्म; रुद्राभिषेक-सामग्री (हो सके तो)
  • नाग-स्तोत्र/कथा-पुस्तक; मनसा-पूजा (बंगाल): घट, सिंदूर, मनसा-चाली
  • भोजन: दाल-बाटी/खीर/उबले-भाप के व्यंजन (तवा नहीं)

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व्रत-कथा

किसान-कथा: एक किसान ने हल चलाते नागिन के बच्चे मार दिए; नागिन ने बदले में किसान के परिवार को डँस लिया, केवल बेटी बची जो रोज़ नाग-पूजा करती थी। बेटी ने पंचमी को दूध-लावा से नागिन को प्रसन्न किया, नागिन ने परिवार को जीवित किया और वचन दिया — «जो पंचमी को मेरी पूजा करेगा, उसके कुल को सर्प-भय नहीं»। इसलिए हल-खुदाई वर्जित, दूध-लावा प्रिय।

कालिया-मर्दन: श्रावण में कृष्ण ने यमुना में विषैले कालिया नाग को नाथा और उसके फनों पर नृत्य किया; कालिया को क्षमा कर रमणक द्वीप भेजा — भागवत में यह श्रावण पंचमी से जुड़ा; नागों का उद्धार व भय का अंत। आस्तीक-कथा: जनमेजय के सर्प-यज्ञ में नागवंश जलने लगा, ऋषि आस्तीक ने पंचमी को यज्ञ रुकवाया — नागों ने कहा «जो आस्तीक का नाम व नाग-पंचमी की कथा सुनेगा, हम उसे नहीं डँसेंगे»।

समुद्र-मंथन में वासुकि नेती बने, शेष पर विष्णु शयन, तक्षक से परीक्षित, कद्रू-विनता व गरुड़ का वैर — पुराणों में नाग-कथाएँ अनगिनत; नाग पंचमी उन सबको प्रसन्न करने का दिन, «सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे…»।

लावा-दूध, भीगे चने, दाल-बाटी, खीर — बिना तवे का भोजन

नाग पंचमी को तवा-लोहे की कड़ाही पर पकाना वर्जित — इसलिए उबले-भाप के या कढ़ाई-तेल के व्यंजन: दाल-बाटी-चूरमा (राजस्थान-मप्र), खीर-पूड़ी, भीगे चने-मूँग, लावा-गुड़; महाराष्ट्र में पुरण-पोली/दिंडे, कर्नाटक में तंबिट्टु, बंगाल में मनसा-भोग (खिचड़ी)।

  • लावा (खील) + दूध + गुड़ — नाग-प्रसाद; भीगे चने-मूँग, अंकुरित अनाज, गेहूँ-जौ
  • दाल-बाटी-चूरमा (बाटी तंदूर/कंडे पर — तवा नहीं), खीर-पूड़ी, मालपुआ (कढ़ाई)
  • महाराष्ट्र: दिंडे/उकडीचे मोदक (भाप), पुरण-पोली (कई घर तवा नहीं — पहले दिन बनी), वरण-भात; कर्नाटक: तंबिट्टु (गुड़-भुने चने का लड्डू), कडुबु (भाप)
  • बंगाल (मनसा-पूजा): खिचड़ी-लाबड़ा, दूध-भात; बिहार-झारखंड: खीर-पूड़ी, लाई; गुजरात: कुलेर (बाजरे-गुड़ के लड्डू — श्रावण कृष्ण पंचमी)
  • व्रत-फलाहार: फल-दूध-मखाना; बिना नमक/सेंधा नमक (स्त्री-व्रत)

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

शिराळा का जीवित नाग-उत्सव, बंगाल की मनसा, गुजरात की कुलेर, कर्नाटक का भाई-पीठ पर दूध — नाग पंचमी की रीतें।

उत्तर प्रदेश-बिहार-झारखंड-मध्य प्रदेश: दीवार पर गोबर-गेरू का नाग, दूध-लावा-दूब, स्त्रियों का व्रत; बिहार-झारखंड में «नाग पंचमी/मनसा-पूजा» — मिथिला में «नाग-पंचमी» पर अरिपन, विषहरी (मनसा) की पूजा; उप्र में दंगल-कुश्ती (अखाड़ों की नाग पंचमी), पतंग (कुछ शहर), झूले; मप्र में उज्जैन-महाकाल का नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ़ इसी दिन खुलता है।
राजस्थान-हरियाणा-पंजाब-दिल्ली: राजस्थान में «नाग पंचमी» — नाग-चित्र, दाल-बाटी, कहीं श्रावण कृष्ण पंचमी (मारवाड़-गुजरात-प्रभाव); हरियाणा-पंजाब में «गुग्गा नवमी» से जुड़ा — गुग्गा पीर (नाग-देवता) की पूजा नाग पंचमी से भाद्रपद कृष्ण नवमी तक, गुग्गा-माड़ी में सेवइयाँ; जयपुर में नाग-मेले, दंगल।
महाराष्ट्र-गोवा (बत्तीस शिराळा): «नागपंचमी» — घर में हल्दी-चंदन से पाट पर नाग, दूध-लाह्या (लावा)-दूर्वा, स्त्रियाँ मेंहदी-हरी चूड़ियाँ, झूला-गीत («नागोबाला दूध»); बत्तीस शिराळा (सांगली) का जीवित-नाग उत्सव प्रसिद्ध (अब प्रतीक-रूप); तवा नहीं — दिंडे/उकडीचे पदार्थ, पुरण-पोली पहले दिन; गोवा-कोंकण में «नागपंचम»।
गुजरात-सौराष्ट्र-कच्छ: नाग पंचमी श्रावण **कृष्ण** पंचमी को (रांधण छठ-शीतला सातम से पहले, अमांत श्रावण) — नाग-देवता को कुलेर (बाजरे-घी-गुड़) व दूध, नाग-मंदिर; भाई-कुल-रक्षा; कच्छ में भुजिया डूंगर के नाग-मंदिर का मेला; कहीं शुक्ल पंचमी भी।
कर्नाटक-आंध्र-तेलंगाना-तमिलनाडु-केरल: कर्नाटक में «नागर पंचमी» — बहन भाई की पीठ/नाभि पर दूध-हल्दी की धार डालकर आशीर्वाद (नागर-पूजा), नाग-कट्टे (बाँबी/वल्मीक) पर दूध, तंबिट्टु; आंध्र-तेलंगाना में «नागुल चविथी» (कार्तिक शुक्ल चतुर्थी — दीपावली के बाद) मुख्य, श्रावण में भी; तमिलनाडु में «नाग पंचमी/आडि» व नागराज; केरल में सर्प-कावु (घर के सर्प-वन) में पूजा, आयिल्यम (आश्लेषा) नक्षत्र पर सर्प-पूजा, मन्नारशाला।
बंगाल-ओडिशा-असम: बंगाल में «मनसा पूजा» — नाग-माता मनसा देवी की पूजा श्रावण-भर, विशेषतः नाग पंचमी व श्रावण-संक्रांति; मनसा-मंगल का गान, घट-स्थापना, कुछ जगह जीवित साँप; ओडिशा में «नाग पंचमी» व «रज» के बाद; असम में मनसा (मारे) पूजा, ओझा-गान।
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दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • नाग-चित्र/मिट्टी-चाँदी के नाग को दूध-लावा — जीवित साँप को दूध नहीं (जीव-हित)
  • काल-सर्प-दोष वाले शिव-मंदिर में नाग-जोड़ा अर्पित करें, रुद्राभिषेक
  • स्त्री-व्रत — एक समय भोजन, तवा-लोहे पर नहीं; भाई-कुल-रक्षा की कामना
  • कथा सुनें (किसान/आस्तीक), «सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे…»; शिव-पूजा साथ
  • साँप दिखे तो वन-विभाग/सपेरे को — मारना नहीं; पेड़-बाँबी की रक्षा

❌ क्या न करें

  • ज़मीन खोदना, हल चलाना, बाँबी तोड़ना; सुई-कैंची-चाकू (हो सके तो)
  • तवा-लोहे की कड़ाही पर रोटी/पकाना; लोहे के बर्तन (लोक-नियम)
  • सपेरे के साँप को पैसे देकर दूध पिलवाना — साँप मरते हैं, अवैध
  • साँप को मारना, पकड़ना, डराना; व्रत में नमक (कड़ा रूप) — गर्भवती सामान्य भोजन
  • नाग-चित्र अगले दिन मिटा देना (कई घर श्रावण पूर्णिमा तक रखते)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नाग पंचमी 2027 में कब है?

ऊपर इस साल की श्रावण शुक्ल पंचमी की तिथि व पूजा-समय (दिल्ली) है — सुबह/अभिजित उत्तम। गुजरात-राजस्थान के कुछ भागों में श्रावण कृष्ण पंचमी (ऊपर से लगभग 15 दिन पहले, हरियाली तीज से पहले) — वहाँ का पंचांग देखें।

साँप को दूध पिलाना सही है?

नहीं — साँप दूध नहीं पचाते, सपेरों के साँप दूध से मरते हैं, और यह वन्यजीव-अधिनियम में अवैध है। शास्त्र में «नाग-देवता» को दूध अर्पण — मिट्टी/चित्र/चाँदी के नाग या शिवलिंग के नाग पर करें; जीवित साँप को दूर से सम्मान।

तवे पर रोटी क्यों नहीं?

लोक-मान्यता — तवा-लोहा नाग के फन का प्रतीक, आग पर लोहा = नाग को कष्ट; इसलिए भाप/उबले या कढ़ाई के व्यंजन (दाल-बाटी, पूड़ी, दिंडे, खीर); कई घर पूड़ी-पराठा भी तवे के बिना, कुछ सिर्फ़ रोटी टालते हैं — अपने घर की रीत।

काल-सर्प-दोष की शांति नाग पंचमी पर कैसे?

नाग पंचमी काल-सर्प/राहु-केतु-शांति का श्रेष्ठ दिन — शिव-मंदिर में चाँदी/तांबे का नाग-जोड़ा शिवलिंग पर अर्पण, रुद्राभिषेक, «ॐ नमः शिवाय»/महामृत्युंजय जप, नाग-स्तोत्र; त्र्यंबकेश्वर-उज्जैन में विशेष पूजा; कुंडली में दोष है या नहीं — पहले जाँच लें (दोष-रिपोर्ट/पंडित)।

भाई की पीठ पर दूध क्यों (कर्नाटक)?

कर्नाटक की «नागर पंचमी» में बहन भाई की पीठ/नाभि पर दूध-हल्दी की धार डालती है — नाग-देवता से भाई की रक्षा और उसकी संतान की कामना; भाई बहन को उपहार देता है — भाई-बहन का पर्व, रक्षाबंधन से पहले।

गुग्गा नवमी क्या है?

हरियाणा-पंजाब-राजस्थान में नाग-देवता गुग्गा पीर (गोगाजी) की पूजा — नाग पंचमी से आरंभ, भाद्रपद कृष्ण नवमी (गुग्गा नवमी) को मुख्य; गोगामेड़ी (राजस्थान) का मेला; सेवइयाँ-चूरमा, «छड़ी» की पूजा; सर्प-दंश से रक्षा की मान्यता।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

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संदेश Nakshtra Tak की ओर से आएगा; नंबर किसी और को नहीं दिया जाता।

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। जीवित साँपों को दूध पिलाना/पकड़ना जीव-हित व क़ानून दोनों में वर्जित — प्रतीक-रूप में पूजा करें।

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