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🪔 व्रत-त्योहार

🪢 रक्षाबंधन (राखी) 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

श्रावण पूर्णिमा — बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है; भद्रा-काल में राखी नहीं (ऊपर भद्रा-समय), अपराह्न/प्रदोष शुभ; श्रावणी-उपाकर्म, नारियल पूर्णिमा, कजरी पूर्णिमा।

रक्षाबंधन (राखी) 2027 की तिथि
मंगलवार, 17 अगस्त 2027
श्रावण · शुक्ल पक्ष · पूर्णिमा (विक्रम संवत 2084)
⚠️ भद्रा-काल (टालें)इस दिन भद्रा नहीं — पूरा दिन शुभ
⭐ अभिजित मुहूर्त12:01 PM – 12:49 PM
🌤 अपराह्न काल1:43 PM – 4:21 PM
🪔 प्रदोष काल6:59 PM – 9:23 PM
📿 तिथि-कालपूर्णिमा 16 अगस्त, 10:29 AM → 17 अगस्त, 12:58 PM
⛔ राहुकाल (टालें)03:42 PM – 05:20 PM
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है — सावन के सोमवारों का समापन-दिन। बहन भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक, आरती, दाहिनी कलाई पर राखी (रक्षा-सूत्र) और मिठाई खिलाती है; भाई रक्षा का वचन व उपहार देता है। यह भाई-बहन के स्नेह का सबसे बड़ा दिन है — ससुराल से बहनें मायके आती हैं, राखी डाक से भी जाती है।

सबसे ज़रूरी नियम: **भद्रा-काल में राखी नहीं बाँधी जाती** (लंका-दहन/शूर्पणखा-कथा) — ऊपर इस साल का भद्रा-समय व शुभ-खिड़की; अपराह्न (दोपहर बाद) उत्तम, फिर प्रदोष। इसी दिन ब्राह्मणों का श्रावणी-उपाकर्म (जनेऊ-बदलना), महाराष्ट्र-गोवा में नारियल पूर्णिमा, मध्य-भारत में कजरी पूर्णिमा, दक्षिण में अवनि अवित्तम। नीचे इस साल की तिथि-भद्रा, विधि, थाली की सामग्री, कथा, पकवान और इलाक़ों की रीत।

महत्व — यह व्रत क्यों

रक्षा-सूत्र: «येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल» — जिस सूत्र से लक्ष्मी ने राजा बलि को बाँधा, वही रक्षा-बंधन; बहन के साथ पुरोहित यजमान को, माँ पुत्र को, पत्नी पति को भी बाँध सकती है — मूल में यह «रक्षा» का सूत्र है, भाई-बहन का रूप लोक में सबसे प्रिय हुआ।

भद्रा (विष्टि-करण) श्रावण पूर्णिमा को प्रायः दिन के पहले भाग में होती है; भद्रा में राखी और होलिका-दहन दोनों वर्जित — शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी थी, कुल का नाश हुआ (लोक-कथा)। भद्रा-मुख/पुच्छ का भेद पंडित बताते हैं; सरल नियम — भद्रा समाप्त होने के बाद, पूर्णिमा रहते।

यही दिन श्रावणी-उपाकर्म (यजुर्वेदियों का नया यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन का आरंभ), हयग्रीव-जयंती, संस्कृत-दिवस (भारत), गायत्री-जयंती (कुछ परंपरा); अमरनाथ-यात्रा का समापन (छड़ी-मुबारक); उत्तराखंड में «जन्योपुन्यू», ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा (बलराम-जन्म), बंगाल-गुजरात में झूलन-पूर्णिमा (राधा-कृष्ण के झूले का समापन)।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

यह घरेलू विधि है — राखी की थाली, भद्रा-मुक्त समय, बाँधने का क्रम, भाई का वचन।

  1. सुबह स्नान, नए/साफ़ वस्त्र; घर के मंदिर में पहली राखी भगवान (कृष्ण/गणेश/हनुमान) को, तुलसी-कलश को; कई घर पितरों को भी स्मरण।
  2. राखी की थाली: रोली, अक्षत, कुमकुम, दीपक, राखियाँ, मिठाई, नारियल/श्रीफल, कुछ पैसे, रक्षा-सूत्र, चंदन; थाली पर लाल कपड़ा।
  3. समय: ऊपर भद्रा-समाप्ति के बाद, अपराह्न (दोपहर बाद) या प्रदोष; भद्रा हो तो टालना — पूरे दिन भद्रा हो (दुर्लभ) तो भद्रा-पुच्छ या प्रदोष में पंडित की सलाह से।
  4. भाई पूर्व/उत्तर मुख बैठे, सिर पर रूमाल/टोपी; बहन तिलक (रोली-अक्षत), आरती, दाहिनी कलाई पर राखी बाँधते हुए रक्षा-मंत्र («येन बद्धो बली राजा…»), मिठाई खिलाना, नारियल देना; भाई बहन के पैर/सिर पर हाथ (छोटी हो तो) व उपहार/शगुन, रक्षा-वचन।
  5. बहन दूर हो तो डाक/कूरियर से राखी — भाई स्वयं या भाभी/माँ बाँधे, वीडियो-कॉल पर आरती; राखी भगवान को दिखाकर।
  6. राखी कब उतारें: कम-से-कम जन्माष्टमी तक या पितृ-पक्ष से पहले; उतारकर बहते जल/पेड़ की जड़ में या तिजोरी में — कूड़े में नहीं (कई घर)।
  7. श्रावणी-उपाकर्म (ब्राह्मण-परिवार): सुबह नदी/घर पर स्नान, दश-विध स्नान, ऋषि-तर्पण, नया जनेऊ; पुराना जल में; अगले दिन गायत्री-जप।
  8. शाम: परिवार का भोजन — खीर/सेवइयाँ-घेवर; बहन-भाई का उपहार-आदान; भाई ससुराल में बहन से मिलने जाए तो «सलोनो» (कुछ इलाक़े)।

पूजा-सामग्री की सूची

राखी, रोली-अक्षत, दीपक, मिठाई, नारियल — थाली की पूरी सूची।

  • राखियाँ (भाई, भाभी को लुंबा, भगवान के लिए), रक्षा-सूत्र (मौली)
  • रोली, अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, हल्दी
  • दीपक (घी), आरती-थाली (पीतल), लाल/पीला कपड़ा थाली पर
  • मिठाई (बर्फ़ी-लड्डू-घेवर), मिश्री, सूखे मेवे
  • नारियल/श्रीफल, कुछ सिक्के/नोट (शगुन), पान-सुपारी
  • उपहार/शगुन-लिफ़ाफ़ा (भाई से), बहन के लिए कपड़े/चूड़ियाँ
  • श्रावणी-उपाकर्म: नया यज्ञोपवीत, तिल-जौ-कुशा, गंगाजल, पंचगव्य
  • नारियल पूर्णिमा (महाराष्ट्र): सजाया नारियल, फूल; कजरी पूर्णिमा: जौ-कलश

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व्रत-कथा

इंद्राणी-इंद्र: देवासुर-संग्राम में देवराज इंद्र हारने लगे; गुरु बृहस्पति की सलाह पर इंद्राणी (शची) ने श्रावण पूर्णिमा को रक्षा-सूत्र सिद्ध करके इंद्र की कलाई पर बाँधा — इंद्र विजयी हुए। यह रक्षा-सूत्र की पहली कथा — रक्षा का बंधन।

लक्ष्मी-बलि: राजा बलि को वामन ने पाताल दिया, विष्णु उनके द्वारपाल बने। लक्ष्मी ब्राह्मणी बनकर बलि के पास गईं, श्रावण पूर्णिमा को राखी बाँधकर बहन बनीं और उपहार में «मेरे पति को लौटा दो» माँगा — बलि ने विष्णु को मुक्त किया। रक्षा-मंत्र «येन बद्धो बली राजा…» इसी का है।

द्रौपदी-कृष्ण: शिशुपाल-वध में सुदर्शन से कृष्ण की उँगली कटी; द्रौपदी ने साड़ी का पल्लू फाड़कर बाँधा — कृष्ण ने वचन दिया «हर धागे का ऋण चुकाऊँगा» — चीर-हरण में साड़ी अनंत हुई। लोक-इतिहास में रानी कर्णावती (चित्तौड़) ने हुमायूँ को राखी भेजी थी; यम-यमुना (भाई-दूज से जुड़ी) की कथा भी कही जाती है।

घेवर, सेवइयाँ, खीर, नारियल-भात — राखी की रसोई

रक्षाबंधन व्रत का दिन नहीं, उत्सव-भोजन का है — राजस्थान-हरियाणा में घेवर-फीनी, उत्तर में खीर-पूड़ी-हलवा-सेवइयाँ, महाराष्ट्र में नारळी-भात, बंगाल में झूलन-मिठाई; भाई की पसंद का पकवान बहन बनाए, यही रीत।

  • घेवर (राजस्थान-हरियाणा-ब्रज — सावन की मिठाई, मलाई/रबड़ी घेवर), फीनी
  • खीर (चावल/सेवइयों की), मीठी सेवइयाँ, हलवा-पूड़ी-कचौड़ी, दही-भल्ले
  • नारळी-भात (नारियल-गुड़-केसर वाला मीठा चावल — महाराष्ट्र-गोवा, नारियल पूर्णिमा), मोदक
  • लड्डू-बर्फ़ी-काजू-कतली, गुझिया (कुछ इलाक़े), नारियल-लड्डू
  • दक्षिण (अवनि अवित्तम): पायसम, वड़ा, पोली; बंगाल (झूलन): संदेश-रसगुल्ला; बिहार: खीर-पूड़ी

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

उत्तर की राखी, महाराष्ट्र का नारळी पूर्णिमा, दक्षिण का अवनि अवित्तम, ओडिशा का गम्हा — एक पूर्णिमा, कई रूप।

उत्तर प्रदेश-बिहार-राजस्थान-मध्य प्रदेश: राखी-तिलक-मिठाई की मुख्य रीत; बहनें मायके आतीं, «सलोनो» — भाई का बहन के ससुराल जाना; राजस्थान में भाभी को «लुंबा» (चूड़ी पर लटकने वाली राखी), घेवर; मप्र में कजरी पूर्णिमा (जौ-कलश का विसर्जन, महिलाओं का जौ-जवारे); बिहार में «राखी» + श्रावणी-उपाकर्म; अमरनाथ-यात्रा का समापन।
पंजाब-हरियाणा-दिल्ली-उत्तराखंड-हिमाचल: राखी («रक्खड़ी») — भाई-बहन, राखी बाँधने का शगुन-रुपया; हरियाणा में «सलूनो»; उत्तराखंड में «जन्योपुन्यू» — जनेऊ बदलना, चंपावत का बग्वाल (देवीधुरा में पत्थर-युद्ध) इसी दिन; हिमाचल में «रक्षा-पुन्या», जनेऊ; दिल्ली में राखी-बाज़ार व परिवार-मिलन।
महाराष्ट्र-गोवा-कोंकण (नारळी पूर्णिमा): «नारळी पौर्णिमा» — कोली (मछुआरे) समुद्र-देव वरुण को सजाया नारियल अर्पित करते हैं, मानसून के बाद नौकाएँ फिर समुद्र में; नारळी-भात; राखी भी («राखी पौर्णिमा»); गोवा में समुद्र-तट पर नारियल-पूजा; कोंकण में «श्रावणी»।
गुजरात-सौराष्ट्र: «बळेव/रक्षाबंधन» — राखी; ब्राह्मण «श्रावणी/बळेव» पर जनेऊ बदलते; झूलन-पूर्णिमा — द्वारका-डाकोर में कृष्ण-झूला समापन; कच्छ में पवित्रा-एकादशी से पूर्णिमा तक पवित्रा-रोपण; समुद्र-तट पर नारियल-अर्पण (सौराष्ट्र)।
तमिलनाडु-केरल-कर्नाटक-आंध्र: «अवनि अवित्तम/उपाकर्म» — ब्राह्मण नया पूणूल (जनेऊ), ऋषि-तर्पण, अगले दिन गायत्री-जप (केरल-तमिल); कर्नाटक-आंध्र में «जंध्याल पूर्णिमा/नूल हुण्णिमे» — जनेऊ; राखी अब शहरों में; केरल में यजुर-उपाकर्म; हयग्रीव-जयंती (शिक्षा-देव) की पूजा।
ओडिशा-बंगाल-असम-झारखंड: ओडिशा में «गम्हा पूर्णिमा» — बलराम-जन्म, गौ-पूजा (गाय-बैल को सजाना), राखी («रक्ष्या बंधन»); बंगाल में «झूलन पूर्णिमा» — राधा-कृष्ण के झूलन का समापन, राखी («राखी बंधन» — 1905 में रवीन्द्रनाथ ने बंग-भंग के विरुद्ध हिंदू-मुसलमान को राखी बँधवाई); असम में «राखी» व ब्राह्मण-उपाकर्म; झारखंड में राखी + करमा से पहले।
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दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • भद्रा-काल टालकर ही राखी — ऊपर इस साल का भद्रा-समय; अपराह्न/प्रदोष उत्तम
  • पहली राखी भगवान को, फिर भाई को दाहिनी कलाई पर; रक्षा-मंत्र बोलें
  • बहन को उपहार/शगुन, रक्षा-वचन; भाभी को लुंबा (राजस्थान-रीत)
  • राखी सम्मान से उतारें — जल/पेड़ की जड़/तिजोरी; जन्माष्टमी तक पहनें
  • ब्राह्मण-परिवार में जनेऊ-उपाकर्म, ऋषि-तर्पण; अगले दिन गायत्री-जप

❌ क्या न करें

  • भद्रा में राखी नहीं; राहुकाल भी टालें (ऊपर)
  • टूटी/काली/चीनी सजावटी राखी (कुछ घर वर्जित मानते) — साफ़, सूती धागा उत्तम
  • बहन को खाली हाथ नहीं लौटाना; भाई का तिलक बाएँ हाथ से नहीं
  • राखी कूड़े में फेंकना; बहन-भाई का झगड़ा उस दिन
  • राखी-बाज़ार में प्लास्टिक-फ़ोम की भारी राखियाँ — बच्चों के लिए सुरक्षित चुनें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रक्षाबंधन 2027 में कब है और भद्रा कब तक?

ऊपर इस साल की श्रावण पूर्णिमा की तिथि, भद्रा-काल (शुरू-समाप्त) और राखी बाँधने की शुभ-खिड़की दिल्ली के अनुसार है — भद्रा के बाद अपराह्न/प्रदोष में बाँधें; अपने शहर का पंचांग पर मिला लें।

भद्रा में राखी क्यों नहीं?

भद्रा (विष्टि-करण) शनि की बहन मानी गईं — अशुभ-काल; लोक-कथा में शूर्पणखा ने भद्रा में रावण को राखी बाँधी और लंका का नाश हुआ। भद्रा में राखी व होलिका-दहन वर्जित; भद्रा-पुच्छ में आपद्-धर्म से कुछ पंडित अनुमति देते हैं।

भाई न हो तो राखी किसे?

भगवान (कृष्ण/गणेश/हनुमान) को, पिता/चचेरे-ममेरे भाई, मुँहबोले भाई, या रक्षा-सूत्र किसी भी रक्षक को — पुरोहित यजमान को, पत्नी पति को, बहन बहन को भी; मूल भाव «रक्षा का बंधन» है।

राखी कब और कैसे उतारें?

कम-से-कम जन्माष्टमी तक या पितृ-पक्ष से पहले; उतारकर बहते जल/पेड़ की जड़ में, या साल-भर तिजोरी में रखकर अगले साल नई राखी के साथ बदलें — कूड़े में नहीं।

श्रावणी-उपाकर्म क्या है?

यजुर्वेदी ब्राह्मणों का वर्ष का नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण, ऋषि-तर्पण और वेदाध्ययन का आरंभ — श्रावण पूर्णिमा को (दक्षिण में अवनि अवित्तम, ऋग्वेदी श्रवण-नक्षत्र के दिन); अगले दिन गायत्री-जप (1008)। भद्रा/ग्रहण हो तो तिथि बदलती है — पंचांग/पंडित।

नारियल पूर्णिमा क्या है?

महाराष्ट्र-गोवा-कोंकण में इसी श्रावण पूर्णिमा को मछुआरे समुद्र-देव वरुण को नारियल अर्पित करते हैं — मानसून के बाद समुद्र शांत, नौकाएँ फिर उतरतीं; नारळी-भात बनता है; राखी भी बाँधते हैं।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।

संदेश Nakshtra Tak की ओर से आएगा; नंबर किसी और को नहीं दिया जाता।

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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार व इलाक़े की रीत सर्वोपरि है। भद्रा-समय शहर-अनुसार कुछ मिनट बदलता है — पंचांग/पंडित से मिला लें।

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