🤝 भाई दूज (यम द्वितीया) 2026
कार्तिक शुक्ल द्वितीया — बहन भाई को तिलक कर लंबी उम्र माँगती है; यमुना-यम की कथा, अपराह्न का तिलक-मुहूर्त और दीपोत्सव का समापन।
भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को — दीपावली के दो दिन बाद — मनाई जाती है। यह पाँच दिन के दीपोत्सव का आख़िरी दिन है। इस दिन बहन भाई के माथे पर तिलक करती है, आरती उतारती है, उसकी लंबी आयु की कामना करती है और भाई उपहार देकर बहन की रक्षा का वचन दोहराता है।
इसे यम द्वितीया भी कहते हैं — कथा है कि इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे और वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर तिलक कराए और भोजन करे, उसे अकाल-मृत्यु का भय न रहे। नीचे इस साल की तिथि, तिलक का शुभ समय, विधि, थाली की सामग्री, कथा, भोजन और अलग-अलग प्रदेशों की रीत दी गई है।
महत्व — यह व्रत क्यों
रक्षाबंधन में बहन भाई से रक्षा माँगती है; भाई दूज में बहन भाई की रक्षा (आयु) के लिए प्रार्थना करती है — यह बहन के आशीर्वाद का पर्व है। इसीलिए तिलक बहन के हाथ से और भोजन बहन के घर या हाथ का।
तिलक का शुभ समय अपराह्न (दोपहर बाद) है — द्वितीया तिथि दोपहर में हो तो श्रेष्ठ; अभिजित मुहूर्त (ऊपर) भी उत्तम। यदि द्वितीया दो दिन अपराह्न को छुए तो दूसरा दिन लिया जाता है।
जिनके भाई नहीं हैं, वे चंद्रमा को (या मामा/चचेरे भाई को) तिलक करती हैं; जिनकी बहन नहीं, वे बुआ/बहन-समान स्त्री से तिलक कराते हैं — रिश्ता भाव का है, ख़ून का नहीं।
पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)
यह घरेलू विधि है — सुबह तैयारी, अपराह्न में तिलक-आरती, फिर भोजन और उपहार।
- सुबह बहन स्नान करके पूजा-थाली सजाए — रोली, अक्षत, कुमकुम, दीपक, फूल, मिठाई, नारियल/सुपारी, मौली, पान, कलावा; कई जगह थाली में सिंदूर, दूब-घास और सूखा नारियल भी।
- जिस स्थान पर भाई बैठेगा वहाँ चौकी/पटरा, उस पर आटे/चावल के आटे से चौक (अष्टदल) बनाएँ; भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे, सिर पर रुमाल/टोपी।
- अपराह्न-मुहूर्त (ऊपर समय) में बहन भाई के माथे पर रोली-अक्षत का तिलक करे, कलावा बाँधे, आरती उतारे, हाथ में नारियल/सुपारी दे और मिठाई खिलाए; मन में प्रार्थना — «यमराज! मेरे भाई की रक्षा करना, इसकी आयु लंबी हो।»
- भाई बहन के पैर छुए (छोटी हो तो बहन भाई के), उपहार/शगुन दे और वचन दोहराए — «तुम्हारी रक्षा मेरा धर्म है।» भाई-बहन एक-दूसरे को मिठाई खिलाएँ।
- बहन भाई को अपने हाथ का भोजन कराए — कथा में यमुना ने यम को भोजन कराया था; भाई बहन के घर जाए तो और शुभ। भाई की पसंद का खाना, विशेषकर चावल-कढ़ी/खीर।
- पूर्वांचल-बिहार में बहनें सुबह «गोधन कूटना» करती हैं — गोबर से यम/रेंगनी के काँटे की आकृति बनाकर मूसल से कूटती हैं, भाई की उम्र के लिए यमराज को श्राप-भाव से कहती हैं — फिर जीभ पर काँटा चुभाकर पछतावा; यह लोक-रीत है।
- शाम को यमराज व चित्रगुप्त के लिए दीपक जलाएँ (दक्षिण दिशा, घर के बाहर); यमुना-किनारे के लोग यमुना-स्नान व दीपदान करते हैं।
- दीपोत्सव का समापन — दीवाली के बचे दीये जलाएँ, बहन विदा हो तो शगुन के साथ।
पूजा-सामग्री की सूची
तिलक की थाली में ये सब हों — भाई कई हों तो हर एक के लिए नारियल/सुपारी अलग।
- पूजा-थाली, रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी, चंदन
- कलावा/मौली, दीपक (घी), कपूर, धूप
- नारियल (सूखा गोला) या सुपारी — हर भाई के लिए एक
- मिठाई (लड्डू/बर्फ़ी/पेड़ा), मिश्री, पान, इलायची
- फूल, फूल-माला, दूब-घास
- आटे/चावल के आटे का चौक बनाने को, चौकी/पटरा, आसन
- भाई के लिए रुमाल/टोपी (सिर ढकने को)
- उपहार/शगुन का लिफ़ाफ़ा (भाई की ओर से), बहन की ओर से मिठाई-रुमाल
- गोधन-कूट (पूर्वांचल): गोबर, मूसल, रेंगनी का काँटा, चना
- यम-चित्रगुप्त दीपक: मिट्टी का दीया, सरसों तेल
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पंचांग देखें →व्रत-कथा
सूर्य-पुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना जुड़वाँ थे। यमुना बार-बार भाई को अपने घर भोजन पर बुलाती थीं, पर मृत्यु के देवता यम को समय न मिलता था। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अचानक बहन के घर पहुँचे। यमुना आनंद से भर गईं — भाई को स्नान कराया, तिलक-आरती की, अपने हाथ से भोजन कराया।
प्रसन्न यमराज ने वर माँगने को कहा। यमुना ने माँगा — «आप हर साल इसी दिन मेरे घर आएँ, और जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर उसके हाथ से तिलक-भोजन ले, उसे आपका (अकाल-मृत्यु का) भय न रहे; जो बहन इस दिन भाई को तिलक करे, उसका सुहाग-सौभाग्य बढ़े।» यमराज ने «तथास्तु» कहा — तभी से यह यम द्वितीया / भाई दूज है।
दूसरी कथा श्रीकृष्ण की है — नरकासुर-वध के बाद कृष्ण इसी द्वितीया को बहन सुभद्रा के घर पहुँचे; सुभद्रा ने दीप-तिलक-भोजन से स्वागत किया। इसी से महाराष्ट्र-गुजरात में इसे भाऊबीज/भाई-बीज कहते हैं।
भाई दूज का भोजन — बहन के हाथ का
इस दिन का भोजन बहन के हाथ का हो — यही कथा का सार है। भाई की पसंद का खाना बनाएँ; परंपरा में चावल की कोई चीज़ (खीर/कढ़ी-चावल) और मीठा ज़रूर।
- उत्तर प्रदेश-बिहार: कढ़ी-चावल, पूड़ी-सब्ज़ी, खीर, दही-बड़ा; पूर्वांचल में «भाई-टीका» पर बजरी/मखाना-मिठाई
- पंजाब-हरियाणा: मिठाई-मठरी, हलवा, मेवे; भाई के लिए विशेष «टिक्का» की थाली और सूखा नारियल
- महाराष्ट्र (भाऊबीज): बासुंदी-पूड़ी, श्रीखंड, करंजी; बहन भाई को «औक्षण» के बाद खाना खिलाती है
- बंगाल (भाई फोंटा): मिठाई-लुची-पायेश और भाई की पसंद का मछली-मांसाहार भी (परिवार की रीत से)
- गुजरात-राजस्थान: लापसी, खीर, मोहनथाल, फरसाण; भाई बहन को साड़ी/चूड़ी उपहार
अलग-अलग इलाक़ों की रीत
भाई दूज, भाऊबीज, भाई फोंटा, यम द्वितीया, भाई-टीका — नाम अलग, भाव एक।
दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।
✅ मिल गई — पढ़कर 1-2 दिन में इसी पन्ने पर जोड़ेंगे। धन्यवाद!कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ भेज रहे…क्या करें, क्या न करें
✅ क्या करें
- तिलक अपराह्न में (या अभिजित में) — ऊपर समय; द्वितीया दो दिन हो तो दूसरा दिन
- भाई पूर्व/उत्तर मुख बैठे, सिर ढका; बहन तिलक के बाद आरती और मिठाई
- भोजन बहन के हाथ का — संभव हो तो भाई बहन के घर जाए
- भाई न हो तो चंद्रमा/मामा/चचेरे भाई को तिलक; बहन न हो तो बुआ/बहन-समान को
- शाम को यम-चित्रगुप्त का दीपक दक्षिण दिशा में
❌ क्या न करें
- तिलक राहुकाल में न करें (ऊपर समय देखें)
- भाई-बहन के बीच इस दिन कलह/कड़वे बोल — पर्व का मूल ही प्रेम है
- भाई का खाली हाथ लौटना — शगुन प्रतीकात्मक हो, बड़ा नहीं; बहन को कर्ज़ लेकर उपहार नहीं
- तिलक करके भोजन के बिना भाई को विदा करना
- दीपोत्सव के आख़िरी दिन घर में अँधेरा — दीये जलाएँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भाई दूज 2026 में कब है?
ऊपर दी गई तिथि इस साल की कार्तिक शुक्ल द्वितीया है — पंचांग-गणना से; तिलक का अपराह्न/अभिजित समय (दिल्ली) भी वहीं है। द्वितीया दो दिन अपराह्न को छुए तो दूसरा दिन भाई दूज।
भाई दूज पर तिलक का शुभ समय क्या है?
अपराह्न काल (दोपहर बाद, लगभग 1:30-3:30) श्रेष्ठ — इसी में यमुना ने यम को भोजन कराया था; अभिजित मुहूर्त (ऊपर) भी उत्तम। राहुकाल टालें।
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) में बहन राखी बाँधकर भाई से रक्षा का वचन लेती है; भाई दूज में बहन तिलक कर भाई की आयु के लिए यमराज से प्रार्थना करती है — यहाँ बहन आशीर्वाद देती है।
जिसका भाई न हो, वह क्या करे?
चंद्रमा को तिलक/अर्घ्य दे (महाराष्ट्र में यही रीत), या मामा/चचेरे-ममेरे भाई या भाई-समान को तिलक करे। जिसकी बहन न हो, वह बुआ-मौसी की बेटी या बहन-समान स्त्री से तिलक कराए।
बंगाल में «भाई फोंटा» का मंत्र क्या है?
«भाइयेर कपाले दिलाम फोंटा, जमेर दुयारे पड़लो काँटा» — भाई के माथे पर तिलक लगा, यम के द्वार पर काँटा पड़ गया; तीन बार बोलकर बहन धान-दूब से आशीर्वाद देती है।
अपना WhatsApp नंबर लिखिए — हर बड़े व्रत-त्योहार से एक दिन पहले तिथि, मुहूर्त और सामग्री-सूची का संदेश मिलेगा। मुफ़्त, कभी भी बंद कर सकती हैं।
✅ दर्ज हो गया — अगले व्रत से एक दिन पहले संदेश आएगा।कुछ गड़बड़ हुई — फिर कोशिश करें।⏳ दर्ज हो रहा…📲 सहेलियों-परिवार को WhatsApp पर भेजें
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⚠️ यह विवरण पारंपरिक विधि व लोक-मान्यता पर आधारित है; अपने कुल-परिवार की रीत सर्वोपरि है। अपराह्न-काल का समय शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलता है।
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