| शहर | तारीख | पूजा-समय | तिथि (स्थानीय) |
|---|---|---|---|
| ऑकलैंड NZST/NZDT | शनिवार, 25 जुलाई 2026 | — पारण 7:25 AM–9:26 AM NZST | 24 जुलाई, 3:43 PM → 25 जुलाई, 6:05 PM NZST |
| वेलिंग्टन NZST/NZDT | शनिवार, 25 जुलाई 2026 | — पारण 7:35 AM–9:32 AM NZST | 24 जुलाई, 3:43 PM → 25 जुलाई, 6:05 PM NZST |
समय स्थानीय (DST-सहित)। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।
स्थानीय सूर्योदय पर एकादशी (उदया) — स्मार्त नियम; दशमी अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) को छुए तो वैष्णव अगले दिन। पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद, हरि-वासर के बाद व द्वादशी-अंत से पहले।
पद्म-पुराण: आषाढ़ शुक्ल एकादशी को विष्णु ने बलि के द्वार पर (या क्षीरसागर में) शयन किया, कार्तिक में जागे — बीच के चार मास शिव सृष्टि-संचालन करते हैं (सावन शिव का); भागवत-लोक में «देव सोए, मंगल रुके» — इसलिए विवाह-मुंडन-गृह-प्रवेश आदि देवउठनी के बाद; पर व्रत-जप-दान-कथा-तीर्थ का फल इन चार महीनों में कई गुना।
एकादशी-व्रत: दशमी की रात से द्वादशी के पारण तक — चावल-अनाज वर्जित, फलाहार/निर्जला; देवशयनी से चातुर्मास-नियम — एक वस्तु का त्याग (श्रावण में साग, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में दाल), भूमि-शयन, ब्रह्मचर्य, रोज़ कथा — पूरे चार मास; देवउठनी पर समापन।
महाराष्ट्र में आषाढ़ी एकादशी = पंढरपुर की वारी — आळंदी (ज्ञानेश्वर) व देहू (तुकाराम) से पालखी पैदल 21 दिन, लाखों वारकरी «विठ्ठल-विठ्ठल» — भारत की सबसे बड़ी पैदल-यात्राओं में; गुजरात में «देवपोढ़ी अग्यारस», ओडिशा में रथयात्रा के बाद «हरिशयन», बंगाल में «शयन एकादशी» — जगन्नाथ का शयन।
हाँ — शनिवार, 25 जुलाई 2026।
हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में, DST-सहित (ऑकलैंड के लिए NZST/NZDT)।
विवाह, सगाई (कुछ), मुंडन, यज्ञोपवीत, गृह-प्रवेश, नया व्यापार-आरंभ (कुछ) — देवउठनी एकादशी तक; पर नामकरण-अन्नप्राशन-वाहन-खरीद कुछ पंडित करने देते हैं; व्रत-जप-दान-तीर्थ-कथा-सत्संग के लिए चातुर्मास सबसे शुभ।
जो निभ सके — श्रावण में पत्तेदार साग, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में दाल का त्याग (परंपरा); या प्याज़-लहसुन-त्याग, रोज़ गीता का एक अध्याय, तुलसी-दीप, एक घंटा मौन, रोज़ कुछ दान, भूमि-शयन — एक भी सच्चे मन से पूरा करें; देवउठनी पर समापन-दान।
पद्म-पुराण में एकादशी को अन्न (विशेषतः चावल) में पाप का वास; लोक-मान्यता — महर्षि मेधा का अंश चावल में (एकादशी के दिन); आयुर्वेद — पखवाड़े में एक दिन लघु-आहार से पाचन-विश्राम; द्वादशी को चावल से पारण शुभ।
महाराष्ट्र के वारकरी आळंदी (संत ज्ञानेश्वर) व देहू (संत तुकाराम) से पालखी लेकर 21 दिन पैदल (250 किमी) पंढरपुर पहुँचते हैं — आषाढ़ी एकादशी को विठ्ठल-दर्शन, चंद्रभागा-स्नान; लाखों लोग, दिंडियाँ, अभंग-कीर्तन — 700 साल पुरानी परंपरा; कार्तिकी एकादशी पर दूसरी वारी।