ओमान में लोहड़ी 2027: गुरुवार, 14 जनवरी — शहर-वार पूजा-समय

ओमान में लोहड़ी 2027: गुरुवार, 14 जनवरी 2027 (मस्कट)
भारत के दिन ही। 2027 में लोहड़ी भारत और मस्कट में गुरुवार, 14 जनवरी 2027 को है।

लोहड़ी 2027 — मस्कट

शहरतारीखपूजा-समयतिथि (स्थानीय)
मस्कट
Gulf Standard Time (GST)
गुरुवार, 14 जनवरी 2027—13 जनवरी, 11:32 AM → 14 जनवरी, 12:29 PM GST

समय स्थानीय। तिथि = उस शहर में पर्व-तिथि का आरंभ → अंत।

महत्व

लोहड़ी नई फ़सल (गन्ना, सरसों, मूँगफली) और रबी की बुआई के लिए धरती-सूर्य-अग्नि का धन्यवाद है; तिल-गुड़ (तिलोड़ी → लोहड़ी) आग में अर्पित कर कहा जाता है — «आदर आए, दलिद्दर जाए»।

अग्नि को साक्षी मानकर परिक्रमा और अर्पण — घर में नए सदस्य (बहू या शिशु) का समुदाय में स्वागत इसी रीति से होता है; इसीलिए «पहली लोहड़ी» बड़ी मानी जाती है।

दुल्ला भट्टी की कथा — एक पंजाबी नायक जिसने ग़रीब लड़कियों (सुंदरी-मुंदरी) को बचाकर उनका विवाह कराया — लोहड़ी के गीतों («सुंदर मुंदरिये… हो!») में हर साल दोहराई जाती है; यह बेटियों के सम्मान का पर्व भी है।

पूजा-विधि (संक्षेप)

  1. दिन में बच्चे मोहल्ले में घर-घर लोहड़ी माँगते हैं — गीत गाकर रेवड़ी, मूँगफली, गुड़, पैसे इकट्ठे करते हैं (विदेश में अपार्टमेंट/समुदाय के भीतर)।
  2. सूर्यास्त के बाद खुली जगह में लकड़ी-उपलों का अलाव जलाएँ (विदेश में अनुमति/फ़ायर-पिट नियम देखकर)।
  3. सब मिलकर अग्नि की परिक्रमा करें; रेवड़ी, मूँगफली, फूला (पॉपकॉर्न), तिल और गुड़ आग में अर्पित करते हुए «आदर आए, दलिद्दर जाए» कहें।
  4. नवविवाहित जोड़ा / नवजात के माता-पिता परिक्रमा में आगे रहें; बड़ों से आशीर्वाद, घर में शगुन (रेवड़ी-मूँगफली की थाली) बाँटें।
  5. ढोल पर भाँगड़ा-गिद्धा, सुंदर-मुंदरिये के गीत; फिर सबके साथ सरसों का साग, मक्की की रोटी और खीर/खिचड़ी।
  6. अगली सुबह मकर संक्रांति — तिल-गुड़, खिचड़ी और स्नान-दान से पर्व पूरा।

प्रश्नोत्तर

क्या लोहड़ी 2027 ओमान और भारत में एक ही दिन है?

हाँ — गुरुवार, 14 जनवरी 2027।

ये समय किस समय-क्षेत्र में हैं?

हर पंक्ति उस शहर के स्थानीय समय में (मस्कट के लिए Gulf Standard Time (GST))।

लोहड़ी और मकर संक्रांति में क्या संबंध है?

लोहड़ी पौष का अंतिम दिन है और अगली सुबह सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है — मकर संक्रांति/माघी। एक रात का अग्नि-उत्सव, अगला दिन स्नान-दान और तिल-गुड़ का।

पहली लोहड़ी क्या होती है?

विवाह के बाद पहली या शिशु-जन्म के बाद पहली लोहड़ी — उस घर में समुदाय बड़ा उत्सव करता है, जोड़ा/शिशु परिक्रमा में आगे रहता है और शगुन बँटता है। आज बेटी की पहली लोहड़ी भी उतनी ही धूम से मनाई जाती है।

क्या लोहड़ी सिर्फ़ पंजाबियों का पर्व है?

मूलतः पंजाब-हरियाणा का, पर अब पूरे उत्तर भारत और प्रवासी समुदायों में सब मनाते हैं; उसी दिन तमिलनाडु में भोगी, असम में माघ बिहू की पूर्व-संध्या होती है।

विदेश में अलाव कैसे करें?

पिछवाड़े के फ़ायर-पिट या सामुदायिक हॉल/गुरुद्वारे के आयोजन में; कई शहरों में खुली आग की अनुमति चाहिए — स्थानीय नियम देखें। आग न हो तो मोमबत्ती/दीप के साथ प्रतीकात्मक अर्पण भी किया जाता है।

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