🪔 व्रत-त्योहार

🔥 लोहड़ी 2027

✍️ ज्योतिषाचार्य आदित्य धर द्विवेदी · 🔎 अंतिम समीक्षा: · 🧮 गणना-पद्धति

मकर संक्रांति की पूर्व-संध्या — पंजाब का अग्नि-पर्व: अलाव, रेवड़ी-मूँगफली-गजक, दुल्ला भट्टी के गीत और नई फ़सल का धन्यवाद।

लोहड़ी 2027 की तिथि
बुधवार, 13 जनवरी 2027
पौष · शुक्ल पक्ष · मकर संक्रांति से एक दिन पहले (पौष मास का अंतिम दिन) (विक्रम संवत 2084)
🌇 सूर्यास्त5:44 PM
🌅 सूर्योदय7:15 AM
समय दिल्ली (IST) के, Swiss Ephemeris-गणना, उदया-तिथि नियम। चंद्रोदय/सूर्योदय हर शहर में अलग होता है —

लोहड़ी पौष मास के अंतिम दिन, मकर संक्रांति से एक रात पहले मनाई जाती है — साल की सबसे लंबी रातों का अंत और सूर्य के उत्तरायण की अगवानी। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली में यह सर्दी का सबसे गर्मजोश पर्व है।

विदेश में बसे पंजाबी परिवार — कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया — इसे सामुदायिक अलाव, ढोल-भाँगड़ा और लोहड़ी-मेलों के साथ मनाते हैं; नवविवाहित जोड़े और नवजात (पहली लोहड़ी) के घर विशेष उत्सव। ऊपर दी तारीख़ आपके शहर के लिए मकर संक्रांति से एक दिन पहले की है।

महत्व — यह व्रत क्यों

लोहड़ी नई फ़सल (गन्ना, सरसों, मूँगफली) और रबी की बुआई के लिए धरती-सूर्य-अग्नि का धन्यवाद है; तिल-गुड़ (तिलोड़ी → लोहड़ी) आग में अर्पित कर कहा जाता है — «आदर आए, दलिद्दर जाए»।

अग्नि को साक्षी मानकर परिक्रमा और अर्पण — घर में नए सदस्य (बहू या शिशु) का समुदाय में स्वागत इसी रीति से होता है; इसीलिए «पहली लोहड़ी» बड़ी मानी जाती है।

दुल्ला भट्टी की कथा — एक पंजाबी नायक जिसने ग़रीब लड़कियों (सुंदरी-मुंदरी) को बचाकर उनका विवाह कराया — लोहड़ी के गीतों («सुंदर मुंदरिये… हो!») में हर साल दोहराई जाती है; यह बेटियों के सम्मान का पर्व भी है।

पूजा-विधि (चरण-दर-चरण)

लोहड़ी पूजा से ज़्यादा सामूहिक रीति है — शाम को, सूर्यास्त के बाद।

  1. दिन में बच्चे मोहल्ले में घर-घर लोहड़ी माँगते हैं — गीत गाकर रेवड़ी, मूँगफली, गुड़, पैसे इकट्ठे करते हैं (विदेश में अपार्टमेंट/समुदाय के भीतर)।
  2. सूर्यास्त के बाद खुली जगह में लकड़ी-उपलों का अलाव जलाएँ (विदेश में अनुमति/फ़ायर-पिट नियम देखकर)।
  3. सब मिलकर अग्नि की परिक्रमा करें; रेवड़ी, मूँगफली, फूला (पॉपकॉर्न), तिल और गुड़ आग में अर्पित करते हुए «आदर आए, दलिद्दर जाए» कहें।
  4. नवविवाहित जोड़ा / नवजात के माता-पिता परिक्रमा में आगे रहें; बड़ों से आशीर्वाद, घर में शगुन (रेवड़ी-मूँगफली की थाली) बाँटें।
  5. ढोल पर भाँगड़ा-गिद्धा, सुंदर-मुंदरिये के गीत; फिर सबके साथ सरसों का साग, मक्की की रोटी और खीर/खिचड़ी।
  6. अगली सुबह मकर संक्रांति — तिल-गुड़, खिचड़ी और स्नान-दान से पर्व पूरा।

📿 लोहड़ी कैसे करें — विस्तृत विधि, सामग्री checklist व नियम →

पूजा-सामग्री की सूची

अलाव और शगुन की सामग्री —

  • सूखी लकड़ी, उपले (या विदेश में फ़ायर-पिट/लकड़ी के लट्ठे)
  • रेवड़ी, गजक, मूँगफली, फूला (पॉपकॉर्न), तिल, गुड़
  • शगुन-थाली — रेवड़ी-मूँगफली बाँटने को
  • गन्ने के टुकड़े/गन्ने का रस (परंपरागत)
  • ढोल (या संगीत), नए कपड़े — ख़ासकर पहली लोहड़ी पर
  • रात के भोजन को सरसों, मक्की का आटा, दूध-चावल (खीर)

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📅 अपने शहर का पंचांग

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व्रत-कथा

मुग़ल बादशाह अकबर के समय पंजाब में दुल्ला भट्टी नाम का एक विद्रोही नायक था — अमीरों से छीनकर ग़रीबों में बाँटने वाला। उस समय ग़रीब घरों की लड़कियों को ज़बरन उठाकर बेचा जाता था; दुल्ला ने सुंदरी और मुंदरी नाम की दो बहनों को छुड़ाया, जंगल में आग जलाकर स्वयं उनका कन्यादान किया और शगुन में गुड़-शक्कर दी।

📖 लोहड़ी की पूरी व्रत-कथा पढ़ें →

रेवड़ी-मूँगफली, सरसों का साग और खीर

अग्नि को तिल, गुड़, रेवड़ी, मूँगफली और फूला अर्पित होते हैं; रात के भोजन में सरसों का साग-मक्की की रोटी, गुड़ की खीर या मूँग-चावल की खिचड़ी; गन्ने के रस की खीर कई घरों की परंपरा।

  • रेवड़ी, गजक, तिल-गुड़ के लड्डू
  • मूँगफली और फूला (पॉपकॉर्न)
  • सरसों का साग, मक्की की रोटी, सफ़ेद मक्खन
  • गन्ने के रस की खीर / गुड़ वाली खिचड़ी

अलग-अलग इलाक़ों की रीत

पंजाब से विदेश तक —

पंजाब · हरियाणा · हिमाचल: गाँव में साझा अलाव, पहली लोहड़ी के घरों में ढोल-भाँगड़ा और शगुन; शहरों में सोसाइटी के बीच लोहड़ी; हिमाचल में «माघी» की पूर्व-संध्या।
दिल्ली · जम्मू · उत्तर प्रदेश (पश्चिम): मोहल्ले का अलाव, बच्चों की लोहड़ी-माँग, गजक-रेवड़ी की दुकानें; सिंधी समुदाय इसे «लाल लोई» कहता है।
कनाडा · ब्रिटेन · अमेरिका · ऑस्ट्रेलिया: गुरुद्वारों, सामुदायिक हॉल और घरों के पिछवाड़े में फ़ायर-पिट के साथ लोहड़ी-मेले, ढोल-भाँगड़ा, पंजाबी गायकों के कार्यक्रम; ठंड में बाहर अलाव के लिए स्थानीय अग्नि-नियम ज़रूर देखें।
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दादी-नानी से सुनी रीत, कथा, गीत या पकवान — 2-4 पंक्तियाँ; हम पढ़कर आपके इलाक़े के नाम से इसी पन्ने पर जोड़ेंगे (फ़ोन दिखेगा नहीं — सिर्फ़ पूछने के लिए)।

हर भेजी रीत पहले पढ़ी जाती है — अश्लील/विज्ञापन/ग़लत बात नहीं जुड़ती।

क्या करें, क्या न करें

✅ क्या करें

  • अलाव खुली, सुरक्षित जगह पर; पास में पानी/रेत रखें
  • रेवड़ी-मूँगफली सबको बाँटें — पड़ोसी, सहकर्मी, कामगार
  • पहली लोहड़ी — बेटी और बेटे की समान धूमधाम से
  • बड़ों का आशीर्वाद, बच्चों को दुल्ला भट्टी की कथा सुनाएँ
  • विदेश में फ़ायर-पिट/बारबेक्यू की अनुमति और धुएँ के नियम मानें

❌ क्या न करें

  • आग में प्लास्टिक, रंगीन काग़ज़ या पटाखे नहीं
  • बच्चों को अलाव के पास अकेला न छोड़ें; ढीले दुपट्टे/ऊनी कपड़ों से सावधान
  • सूखे पत्तों/घास के पास अलाव नहीं (विदेश में जुर्माना भी)
  • दिखावे की होड़ नहीं — पर्व का भाव साझा खुशी है
  • शराब के साथ आग का खेल नहीं — हर साल दुर्घटनाएँ इसी से होती हैं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में लोहड़ी कब है?

ऊपर दी तारीख़ आपके शहर के लिए मकर संक्रांति से एक दिन पहले की है — लोहड़ी हमेशा संक्रांति की पूर्व-संध्या (प्रायः 13 जनवरी) को मनाई जाती है; अलाव सूर्यास्त के बाद।

लोहड़ी और मकर संक्रांति में क्या संबंध है?

लोहड़ी पौष का अंतिम दिन है और अगली सुबह सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है — मकर संक्रांति/माघी। एक रात का अग्नि-उत्सव, अगला दिन स्नान-दान और तिल-गुड़ का।

पहली लोहड़ी क्या होती है?

विवाह के बाद पहली या शिशु-जन्म के बाद पहली लोहड़ी — उस घर में समुदाय बड़ा उत्सव करता है, जोड़ा/शिशु परिक्रमा में आगे रहता है और शगुन बँटता है। आज बेटी की पहली लोहड़ी भी उतनी ही धूम से मनाई जाती है।

क्या लोहड़ी सिर्फ़ पंजाबियों का पर्व है?

मूलतः पंजाब-हरियाणा का, पर अब पूरे उत्तर भारत और प्रवासी समुदायों में सब मनाते हैं; उसी दिन तमिलनाडु में भोगी, असम में माघ बिहू की पूर्व-संध्या होती है।

विदेश में अलाव कैसे करें?

पिछवाड़े के फ़ायर-पिट या सामुदायिक हॉल/गुरुद्वारे के आयोजन में; कई शहरों में खुली आग की अनुमति चाहिए — स्थानीय नियम देखें। आग न हो तो मोमबत्ती/दीप के साथ प्रतीकात्मक अर्पण भी किया जाता है।

🔔 याद दिलाएँ — हर व्रत से एक दिन पहले

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संदेश Nakshtra Tak की ओर से आएगा; नंबर किसी और को नहीं दिया जाता।

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⚠️ यह विवरण परंपरागत रीति व लोक-मान्यता के अनुसार है; आपके परिवार की प्रथा सर्वोपरि। अलाव में अग्नि-सुरक्षा और स्थानीय नियमों का पालन करें।

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