🌳 ग्रह-फल

केतु महादशा में बुध अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय

केतु महादशा में बुध अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप

विंशोत्तरी क्रम में केतु की महादशा 7 वर्ष चलती है — यह काल मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर बुध की अंतर्दशा 11 माह 27 दिन की होती है (सूत्र: 7×17÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय बुध (बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा) तय करता है।

संक्षेप-सूत्र: केतु-काल में बुध की राहत — विश्लेषण लौटता है; लेखन-अध्ययन फलदायी।

दशा-संधि की अंतिम अंतर्दशा

बुध की यह अंतर्दशा केतु-महादशा की अंतिम अंतर्दशा है — इसके बाद महादशा ही बदल जाती है। परंपरा दशा-संधि को संवेदनशील काल मानती है: पुराना अध्याय समेटने और नए की तैयारी का समय — बड़े जोखिम टालें, लंबित काम निपटाएँ।

फल कैसे पढ़ें — असली नियम

फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: बुध जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; केतु की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।

सूक्ष्म समय के लिए प्रत्यंतर-दशा और गोचर (विशेषतः गुरु-शनि) साथ देखे जाते हैं — हमारी निःशुल्क कुंडली में पाँच स्तर की दशा-तालिका व घटना-समय विश्लेषण दोनों हैं।

इस अवधि के सामान्य उपाय

बुध (अंतर्दशा-स्वामी): बुध को बल देने हेतु बुधवार व्रत, 'ॐ बुधाय नमः' जप, विष्णु/गणेश-पूजन तथा विद्या-दान (पुस्तक/शिक्षा) श्रेष्ठ है। रत्न पन्ना (Emerald) सोने/चाँदी में, कनिष्ठा में, बुधवार धारण किया जाता है। हरी वस्तुएँ (मूँग, हरा वस्त्र) का दान, कन्याओं/विद्यार्थियों की सहायता तथा नियमित अध्ययन विशेष लाभकारी है।

🔮 अपनी कुंडली में देखें

यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।

निःशुल्क कुंडली बनाएँ →

विंशोत्तरी दशा-प्रणाली समझें · केतु ग्रह का विस्तृत लेख · बुध ग्रह का विस्तृत लेख · अपनी दशा-तालिका देखें (निःशुल्क)

🌐 Read this page in English