केतु महादशा में चंद्र अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय
केतु महादशा में चंद्र अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप
विंशोत्तरी क्रम में केतु की महादशा 7 वर्ष चलती है — यह काल मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर चंद्र की अंतर्दशा 7 माह की होती है (सूत्र: 7×10÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय चंद्र (मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता) तय करता है।
महादशा-स्वामी केतु के अध्याय में चंद्र अपने कारकत्व — मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता — के विषय सामने लाता है। सम-सम्बन्ध से फल मिश्रित रहता है — निर्णायक भूमिका कुंडली में दोनों की स्थिति की है।
फल कैसे पढ़ें — असली नियम
फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: चंद्र जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; केतु की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।
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इस अवधि के सामान्य उपाय
चंद्र (अंतर्दशा-स्वामी): चंद्र को बल देने हेतु सोमवार व्रत, 'ॐ चंद्राय नमः' या शिव-पूजन (चंद्र शिव के मस्तक पर), माता की सेवा तथा जल व दूध का दान श्रेष्ठ है। रत्न मोती (Pearl) चाँदी में, कनिष्ठा में, सोमवार धारण किया जाता है। सफ़ेद वस्तुएँ (चावल, दूध, चाँदी) का दान और मन को शांत रखने वाले ध्यान-अभ्यास विशेष लाभकारी हैं।
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